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व्यंग्य / हेल्मेट और हम / वीरेन्द्र 'सरल'

शहर के चौक-चौराहों पर यातायात पुलिस सभी दोपहिया वाहन चालकों से अपील कर रही थी कि सुरक्षित यात्रा के लिए वाहन चलाते समय अनिवार्य रूप से हेल्मेट लगायें क्योंकि अधिकांश दुर्घटनाओं में सिर पर संघातिक चोट लगने के कारण प्राणों से हाथ धोना पड़ता है। तभी उस चौक से दो नौजवान फर्राटेदार बाइक चलाते हुए निकले। उनकी गाड़ी में सामने के नम्बर प्लेट पर गाड़ी नम्बर नहीं बल्कि 'जान हथेली पर' और पीछे के नम्बर प्लेट वाले स्थान पर 'सिर पर कफन' लिखा हुआ था। ट्रैफिक पुलिस के जवान को चौक पर लगे खंभे पर चढ़कर अपनी जान बचानी पड़ी। वह चिल्लाया-''अरे भाई। जान हथेली वाले, जरा धीरे चलो। घर पर कोई तुम्हारा इंतजार कर रहा है।'' बाजूवाले सिपाही ने अपने साथी को समझाते हुए फुसफुसाया, भाई इनके मुँह मत लगो, हमारे घर में भी कोई हमारा इंतजार कर रहा है।

बड़ी मुश्किल से वे जान हथेली पर वाले नौजवान पुलिस के पकड़ में आई। उस चौक के जवान ने उन्हें समझाया कि भैया इस तरह बाइक मत चलाया करो। ये सड़क है मौत कुआं नहीं। तुम्हारी रफ्तार से अन्य यात्रियों की धड़कने बढ़ जाया करती है। अपनी नहीं तो उनकी चिन्ता करो और उनसे भी ज्यादा हमारी चिन्ता करो। जिन्दगी की ऐसी रफ्तार देखकर कहीं हममें से किसी को अटैक न आ जाये। भैया! हेल्मेट पहन कर यातायात विभाग की सहायता करो। क्यों अपनी जान के पीछे पड़े हो। उन नौजवानों में से बाइक चलाने वाले नौजवान ने कहा-'' अरे वाह! साहब, आप तो सर्वज्ञानी हैं। बाइकर्स की मन की बातें जान लेते है। बिल्कुल सही कहा आपने, हमारी जान अभी-अभी हमारे आगे ही स्कुटी पर निकली है और हम उसके ही पीछे पड़े हैं। सर! आपको पता होना चाहिए कि प्यार अंधा होता होता है। उसे अपनी जान के सिवाय और कुछ भी दिखाई नहीं देता यहाँ तक कि अपना कीमती जीवन भी। विद्वान लोग कहते हैं कि प्रेम ही जीवन है, प्रेम ही ईश्वर है, संसार में प्रेम के सिवाय और कुछ नहीं रखा है फिर आप हमारे प्रेम में बाधा क्यों डाल रहे है। उसकी बातें सुनकर ट्रैफिक पुलिस का जवान सिर पकड़कर सोचने लगा-''बाप रे! लगता है किसी महान दार्शनिक से पाला पड़ा है। इसे समझाना तो लोहे की चना चबाने के समान है। वह सिर धुनते हुए कुछ समय तक चुप रहा फिर अपनी सारी शक्ति लगाकर एक बार फिर उन्हें समझाने की कोशिश करने लगा।

भाई मैं आपकी उस जान की बात नहीं कर रहा हूँ। बल्कि आपकी प्राइवेट यानि निजी जान की बात कर रहा हूँ,समझे? एक तो आपके मुँह से शराब की दुर्गंध आ रही है मतलब आपने शराब पी रखी है, ऊपर से गुटखा चबा रहे हैं। नशे के कारण आप की रफ्तार भी बहुत अधिक है, कुछ तो सोचो यार अपने परिवार के बारे में। युवाओं में जोश अच्छी बात है पर होश के साथ होना चाहिए।'' नौजवान बोला-''देखिए साहब! हममें न जोश है और न हमें होश है, हम तो केवल सरफरोश हैं। सर झुका सकते हैं पर सर कटा सकते नहीं, जुर्माना भर सकते है पर हेल्मेट लगा सकते नहीं। नौजवान के साथी ने भी तुक में तुक मिलाते हुए कहा-और आप जबरदस्ती हमको हेल्मेट पहना सकते नहीं, समझ गये? रही बात शराब और गुटखें की। तो साहब! हम खाते-पीते परिवार के युवा है। हम दोनों के पिता केवल पिता ही नहीं है बल्कि पीता भी है। अभी तक कितना खा-पीकर पचा गये होंगे, वे स्वयं नहीं जानते। आप बार-बार हमसे केवल हेल्मेट पहनने की बात कर रहे है। आखिर ये हेल्मेट किस चिड़िया का नाम है? हम आमलेट, चाकलेट,फ्लैट और प्लेट वगैरह तक तो जानते हैं पर हेल्मेट का नाम पहली बार आपके मुँह से सुन रहे हैं।

उस युवक की बातें सुनकर सिपाही का दिमाग घूम गया। सिपाही उन्हें समझाने के अंदाज में बोला-''भाई मजाक छोड़ो। आप दिखने में पढ़े-लिखे दिख रहे हैं, हेल्मेट के बारे में आप नहीं जानते होंगे ऐसा हो ही नहीं सकता।

युवक बोला-''दिखने भर से ही कोई पढ़ा-लिखा हो जाता है क्या? पढ़े-लिखे लोगों को रोजगार दफ्तर की परिक्रमा करने से ही फुर्सत नहीं है। वे बेचारे क्या हम जैसे बाइक राइडिंग करेंगे। हम रसूखदार परिवार से ताल्लुकात रखते है। हमें पढ़ने लिखने की क्या आवश्यकता है। सदियों से बाप-दादा जो करते आ रहे हैं वही करना है, इसमें पढ़ाई-लिखाई की क्या आवश्यता है? राजा बनने के लिए शेर को पढ़ने की जरूरत नहीं होती, समझ गये? आप पढ़ाई-लिखाई को गोली मारिये। इस टॉपिक पर बात करने से बोरियत महसूस होती हैं। आप वो क्या कह रहे थे, हाँ हेल्मेंट बस उसी के बारे में ही विस्तार से समझाइये तो बड़ी कृपा होगी।

सिपाही फटी-फटी आँखों से उन युवकों को वैसे ही देखने लगा जैसे कोई ठेठ देहाती कुतुबमीनार को आश्चर्य से देखता है। सिपाही एक बार आसमान की ओर देखकर मन ही मन हनुमान चालीसा का पाठ किया और पास की दुकान से एक आई एस आई मार्का वाले हेल्मेट उठाकर लाया। फिर उसे उन युवको को दिखाते हुए लाइफबॉय है जहाँ तन्दुरूस्ती है वहाँ के अंदाज में बोला-'' इसे कहते हैं हेल्मेट। इसे पहनकर बाइक चलाने से यात्रा सुरक्षित रहती है। ये दुर्घटना में सिर की सुरक्षा करता है।''

हेल्मेट देखकर युवक ऐसे बिदकने लगे जैसे छड़ी देखकर तांगे का घोड़ा। एक युवक बोला-''अच्छा तो आप इस टोपी की बात कर रहे थे। साहब! आप लोगों की तो आदत ही है आम जनता को टोपी पहनाना मगर इस बार बहुत भारी टोपी पहना रहे हैं लोगों को, और ऊपर से स्टार प्रचारक की तरह इसका विज्ञापन भी कर रहे हैं। कितने का टारगेट मिला है आपको क्योंकि बिना टारगेट के आप कोई काम कर ही नहीं सकते। लगता है टारगेट पूरा करने के लिए सबको अपना टारगेट बना रहे हैं। ये भी कोई बात हुई?

अब सिपाही झुंझलाते हुए बोला -''हद हो गई यार! हम हेल्मेट की बात कर रहे है और आप टारगेट की बात करते हो। पता नहीं आज सुबह-सुबह किस मनहूस का मुँह देखकर ड्युटी पर आया जो आप जैसे खतरनाक बौद्धिकों से पाला पड़ा। भाई, जब इस हेल्मेट के फायदे जानोगे तब बात समझ में आयेगी कि हम आपके कितने बड़े हितैषी हैं।

युवक मुँह बिचकाते हुए आश्चर्य से बोला-''फायदा! इससे कोई फायदा नहीं है जनाब, केवल नुकसान ही नुकसान है। हम जिस पावन उद्देश्य को लेकर जिन्दगी जीं रहे है उसमें सबसे बड़ी बाधा है यह हेल्मेट, समझे आप?

अब चौकने की बारी सिपाही की थी। उन्होंने उन युवकों से कहा-'' भाई! हम तो केवल इसके फायदे के बारे में ही जानते हैं। अभी तक इसके नुकसान के बारे में कहीं सुना नहीं है। अब आप लोग ही कृपा करके इसके नुकसान के बारे में बता दीजिए तो यह जीवन सफल हो जायेगा और नौकरी सार्थक हो जायेगी।

उनमें से एक युवक ने मुस्कुराते हुए कहा-'' वैसे तो आजकल कृपा बरसाने वाले भी बिना फीस लिए कृपा नहीं बरसाते पर आप जिज्ञासु प्रवृति के है और हमसे कृपा चाहते हैं तो दिल थामकर ध्यान से सुनिए। हेल्मेट से नुकसान नम्बर एक यह यह कि हम इसे लगाकर ' हर गम को धुंए में उड़ाता चला गया गुनगुना कर सिगरेट पीते हुए बाइक नहीं चला सकते। नुकसान नम्बर दो यह है कि जर्दायुक्त गुटखा, पान, तम्बाखू खाकर सड़क पर यहाँ वहाँ, जहाँ-तहाँ मत पूछो कहाँ-कहाँ थूक नहीं सकते। नुकसान नम्बर तीन इसे लगाकर बाइक चलाते समय न तो कोई ढंग का गाना सुन सकते हैं न ही अपनों से अपनी बात कर सकते है। अब आप ये मत कहिए कि इयरफोन या ब्लूटूथ तो है। यदि हम इयरफोन का उपयोग करेंगे तो लोगों को कैसे पता चलेगा कि हम स्मार्टफोन धारी है। गाना केवल हम ही सुनेंगे तो दूसरा को डिस्टर्ब करने का आनंद कहाँ रह जायेगा? नुकसान नम्बर चार यह है कि हेल्मेट से चेहरा ऐसे छिप जाता है जैसे बदली में चाँद। जब चेहरा ही नहीं दिखेगा तो लोगों को कैसे पता चलेगा कि हम रसूखदार परिवार के युवा हैं, जिन पर कोई भी सिगनल लागू नहीं होता। हम अपनी मर्जी के मालिक स्वयं हैं। नुकसान नम्बर पाँच यह है कि--।

सिपाही उसकी बात बीच में ही काटकर बोला-''बस भैया बस! अब बाकी बाते थाने में ही होगी। अब वहीं चलने की कृपा कीजिए, ठीक है।

युवक बोला साहब हम तो आपको शेरदिल वाले समझ रहे थे पर आप तो बड़े कमजोर दिल निकले जरा सी बात पर इतना घबरा गये। कम से कम हमारे जीवन का पावन उद्देश्य तो सुन लीजिए। हमारा उद्देश्य है लोगों की सहायता करना। उन्हें सेवा का अवसर प्रदान करना। पान, गुटखा, तम्बाखू खाकर जब हम बीमार पडेंगे तथा तेज रफ्तार बाइक से गिरकर जब हम घायल होंगे तो डॉक्टरों को हमारी सेवा करने का अवसर मिलेगा। इनसे उनकी रोजी-रोटी चलेगी। हमारे द्वारा गंदगी करने से स्वच्छता अभियान वालों और सफाई कर्मियों को काम मिलेगा। गंदगी नहीं होगी तो वे सफाई कहाँ करेंगे। सिगरेट पीकर पर्यावरण को प्रदूषित करने से प्रदूषण नियंत्रण विभाग को काम मिलेगा। भाई हम तो ऐसे परोपकारी व्यक्तित्व है जो जनसंख्या नियंत्रण वालो का भी पूरा ध्यान रखते है। किसी दुर्घटना में यदि हम परलोक सिधार गये या दो-चार लोगो को परलोक सिधारने में सहयोग कर सके तो जनसंख्या नियंत्रण विभाग का भी भला होगा। और--।

सिपाही अपना माथा पीटते हुए बोला-बाप रे बाप! इतने खतरनाक स्तर के पावन विचार। आपके इन खतरनाक आदर्शों का तो टी वी और रेडियो के माध्यम से प्रसारण होना चाहिए। मेरी सहन शक्ति जवाब देने लगी है। मुझे चक्कर आने लगा है। आपके आदर्श मेरे बर्दाश्त की सीमा से बाहर है। अब तो आप थाने में हमारे बड़े साहब को भी अपने इन आदर्शों से अवगत कराये, यही ठीक होगा। अब तो आपको थाने ले जाये बिना मैं आपको छोड़ने वाला नहीं हूँ, ठीक है।

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वीरेन्द्र सरल

बोड़रा (मगरलोड़)

जिला-धमतरी(छत्तीसगढ़)

मों-07828243377

saralvirendr@rediffmail.com

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