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सवाल खड़े करने हैं : चेखव / वीणा भाटिया

15 जुलाई, अन्तोन चेखव की पुण्यतिथि पर विशेष आलेख

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विश्वविख्यात रूसी कथाकार और नाटककार अंतोन पाव्लोविच चेखव ने साहित्य में एक नए युग की ही शुरुआत की थी। उनकी कहानियों और नाटकों में रूसी मध्यवर्ग के जीवन का चित्रण हुआ है। चेखव बहुत ही संवेदनशील रचनाकार थे। उनकी कई कहानियों में काव्यात्मक आस्वाद मिलता है। चेखव पेशे से डॉक्टर थे। साहित्य रचना के साथ-साथ डॉक्टरी का पेशा उन्होंने कभी नहीं छोड़ा। एक बार उन्होंने मजाक में कहा था - मेडिसिन मेरी लॉफुल वाइफ है और लिटरेचर मिस्ट्रेस।

चेखव ने साहित्य में नये प्रयोग किए। उन्होंने मॉडर्न शॉर्ट स्टोरी के विकास में युगांतरकारी भूमिका निभाई। चेखव ने सबसे पहले 'स्ट्रीम ऑफ कॉन्सशनेस' टेक्नीक का अपनी कहानियों में प्रयोग किया, जिसे बाद में जेम्स ज्वॉइस और दूसरे मॉडर्निस्ट लेखकों अपनाया। इन्होंने परंपरागत कहानियों में आने वाले नैतिकतावादी आग्रहों को अस्वीकार कर दिया। उनका कहना था कि एक आर्टिस्ट का काम सवाल खड़े करना है, न कि उनका जवाब देना।

चेखव के नाटक 'द सैगल', 'अंकल वान्या' और 'थ्री सिस्टर्स' विश्वप्रसिद्ध हैं। चेखव अपने नाटकों के मंचन में बहुत रुचि लेते थे और उनके रिहर्सल के दौरान खुद मौजूद रहते थे। 1896 में जब 'द सैगल' का प्रदर्शन हुआ तो वह बुरी तरह असफल हो गया। अपने नाटकों की असफलता से चेखव बहुत निराश हो जाते थे, यहां तक कि वे डिप्रेशन में भी आ जाते थे। इस नाटक का पुनर्मंचन 1898 में मॉस्को आर्ट थिएटर ने किया। इसका निर्देशन कॉन्सटैंटिन स्टानिस्लावस्की ने किया था। इसे आशातीत सफलता मिली। मॉस्को आर्ट थिएटर ने ही उनके दूसरे नाटकों 'अंकल वान्या' और 'थ्री सिस्टर्स' का मंचन किया। इन नाटकों और चेखव की कहानियों का दुनिया की सभी महत्त्वपूर्ण भाषाओं में अनुवाद हुआ।

चेखव के समय में रूसी समाज भीषण उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा था। क्रांतिकारियों के प्रयासों से भूदास प्रथा का समापन हो चुका था और एक नया मध्यवर्ग अस्तित्व में आ चुका था। इसके बावजूद जारशाही मजबूत थी, पर उसके खिलाफ संवैधानिक और हिंसक संघर्ष जारी थे। इस दौर में उभरता हुआ मध्यवर्ग नवीन आशाओं और आकांक्षाओं का वाहक था, पर उसके जीवन में भी विडम्बनाएं कम नहीं थीं। इस संक्रमणशील समाज में मध्यवर्ग के जीवन की सच्चाइयों को रूपायित करने का काम चेखव ने बहुत ही संवेदनशीलता के साथ किया।

चेखव अपने छ: जीवित भाइयों में तीसरे नंबर पर थे। चेखव की मां येवेजेनिया बहुत ही भावुक औरत थीं। वह अपने बच्चों को रोज ही नई-नई कहानियां सुनाया करती थीं। संभवत: उनसे ही चेखव ने कहानी कहने की कला सीखी। चेखव ने अपनी मां के बारे में लिखा था, "मां हमारी आत्मा थी।" साल 1876 में चेखव के पिता को व्यापार में काफी घाटा हुआ और वे दिवालिया हो गए। चेखव ने कई छोटे-मोटे काम करके और ट्यूशन पढ़ा के जैसे-तैसे अपनी शिक्षा जारी रखी। उन दिनों वे अख़बारों के लिए शॉर्ट स्केचेज बनाते थे। इससे उन्हें थोड़ी-बहुत आमदनी हो जाती थी। इसी दौरान चेखव ने सर्वेन्टीस, तुर्गेनेव, गोन्चारोव और शॉपनहावर जैसे महान लेखकों की कृतियां भी पढ़ीं। उन्होंने एक कॉमेडी ड्रामा 'फादरलेस' की रचना की। 1879 में चेखव ने स्कूल की पढ़ाई पूरी की और मॉस्को चले गए। वहां उन्होंने मॉस्को स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया। उन्होंने उस समय के प्रमुख प्रकाशक निकोलाई लेइकिन के लिए भी लिखना शुरू किया।

1885 में चेखव को तपेदिक हो गया। उन दिनों यह कैंसर की तरह लाइलाज बीमारी थी। यह बात उन्होंने परिवार से छुपा ली और इलाज शुरू किया। 1886 में उन्हें सेंट पीटर्सबर्ग के मशहूर अखबार 'नोवोया रेम्या' के लिए लिखने का आमंत्रण मिला। इसके अरबपति मालिक एलेक्सी सुवोरिन ने उन्हें उस समय के हिसाब से दोगुना पारिश्रमिक दिया। वे चेखव के आजीवन अभिन्न मित्र बने रहे। उसी दौरान रूस के बड़े साहित्यकारों के बीच उनकी पहचान बनी। प्रसिद्ध लेखक दिमित्री ग्रिगोरोविच ने उनकी कहानी 'द हंट्समैन' की काफी प्रंशसा की थी। 1887 में चेखव को प्रतिष्ठित पुश्किन प्राइज मिला। चेखव के बारे में कहा जाता है कि वे अपनी स्क्रिप्ट दोबारा नहीं पढ़ते थे, पर उनके लेखन को देख कर इस पर यकीन कर पाना मुश्किल है।

चेखव के रूस के तमाम बड़े लेखकों के साथ प्रगाढ़ संबंध थे। टॉल्सटाय और गोर्की जैसे लेखक उनका काफी सम्मान करते थे। चेखव गोर्की की तरह समाजवादी तो नहीं थे, पर वे जारशाही के खिलाफ क्रांति के समर्थक थे। बीमारी के बावजूद वे लेखन और अपने नाटकों के मंचन के सिलसिले में लगातार व्यस्त रहते थे। 15 जुलाई, 1904 को महज 44 साल की उम्र में इस महान लेखक का निधन हो गया। जेम्स ज्वॉयस, वर्जिनिया वुल्फ और कैथरीन मैन्सफील्ड जैसे साहित्यकारों ने उनके लेखन के ऐतिहासिक महत्त्व को रेखांकित किया। मशहूर नाटककार जॉर्ज बर्नाड शॉ ने उन्हें युग प्रवर्तक साहित्यकार बताया। चेखव एक ऐसे मानवतावादी रचनाकार थे, जिन्होंने अपनी कृतियों में युगीन आकांक्षाओं को अभिव्यक्त किया है।

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महान साहित्यकार चेखव पर वीणा भाटिया जी का यह आलेख पढ़ कर बहुत प्रसन्नता हुई। इस संक्षिप्त लेख में चेखव के लेखन का मर्म सामने आ गया है। रचनाकार को इस लेख के प्रकाशन के लिए साधुवाद।

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

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