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मेरी प्यारी सासू माँ / कहानी / लक्ष्मी यादव

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रिधिमा को आज ऑफिस से आते हुए देर हो गयी थी। अमूमन वो घर 7 बजे तक पहुंच जाती थी। लेकिन आज उसे ऑफिस के ज़रूरी काम के चलते 10 बज गये थे । मल्टीनेशनल कंपनी जॉब करने वाली रिधिमा का देर ऑफिस से घर आने में देर होना कोई नई बात नहीं थी 7 बजे की उसकी छुट्टी 8 कभी कभी 8:30 तक पहुंच जाती थी ...लेकिन आज ऑफिस से निकलने में ही 10 बज गये थे यानी की बहुत ज्यादा देर हो गयी थी,इतनी लेट होने की वजह से ऑफिस की कोई कैब भी उसे घर छोड़ने के लिए मौके पर नहीं मिली जिससे वो और परेशान हो गयी...काम के चक्कर में उसे वक़्त का ध्यान ही कहां रहता है ..यही सोच वो जल्दी जल्दी चलती जा रही थी । रिधिमा को याद आया की तीन दिन से मायके गयी जेठानी तो दो दिन बाद वापस आएगी। ऐसे में घर का सारा कामकाज उसको और सासू माँ को ही देखना होता है। आज देर हो जाने की वजह से पापा जी की रात की दवा,मम्मी जी के पैर की मालिश और हमेशा चाची-चाची करने वाले प्यारे मोंटी को रात का खाना ,ये सब कैसे होगा ।घर पहुँचने में रिधिमा को अभी भी 10 :30 होना ही था ।रिधिमा सोच में पड़ गयी की पति अरुण भी घर पूछने वाले होंगे, “आज तो घर की लाडली बहू को पक्का डांट पड़ने वाली है और कल से ऑफिस जाना भी बंद” रिधिमा मन में सोच रही थी । उसे पड़ोस में रहने वाली मिसेज मनचंदा याद हो आयीं जो हमेशा अपनी बहू को अपने कब्जे में रखने की बात करती हैं और रिधिमा की सास को उलटी सीधी पट्टी पढ़ाती रहती हैं। वो तो रिधिमा की प्यारी सासू माँ हैं जो मिसेज मनचंदा की सारी बातों को हंसी में उड़ा देती हैं।

अब रिधिमा को पड़ोस की मिसेज मेहता याद आयीं जो अपनी पढ़ी लिखी बहू को अपने सो कोल्ड सोशल नोम्स के नाम पर हाउस वाइफ बनाकर रखती हैं। घर की सब जरुरत की चीज़ें पति और बेटे से मंगवाती हैं। और खुद भी मंदिर और रिश्तेदारों के घरों के अलावा बाहर कही नहीं जाती और बहू तो बस घूँघट में ही ससुराल से मायके और मायके से ससुराल तक का ही आना जाना करती है वो भी सासू माँ की मर्जी के अनुसार। मिसेज श्रीवास्तव की बहू मनुश्री को बड़ी मुश्किल से स्कूल टीचर की जॉब मिली थी जिसको करने के लिए उसने ससुराल में हर एक के सामने जाने कितनी मिन्नतें की तब जाकर उस बेचारी को घर से बाहर निकलने का मौका मिला लेकिन स्कूल के किसी भी फंक्शन में देर तक रुकने की इजाज़त अभी भी तनुश्री को नहीं मिली । रिधिमा को याद आया की उसके पड़ोस में ऐसी कोई औरत नहीं थी जो इतनी देर तक घर से बाहर रहती हो । अचानक रिधिमा के भीतर एक अंजाना सा डर प्रवेश कर गया । रिधिमा जल्दी जल्दी कदम बढ़ा रही थी। नवम्बर की ठंडी हवाओं में भी रिधिमा के चेहरे पर पसीने की कुछ बुँदे उभर आई थीं ।उसने घबराहट में घर जल्दी पहुंचने के लिए बस छोड़ ऑटो से जाना उचित समझा और एक ऑटो रिक्शा वाले को रुकवाकर बिना कोई मोलभाव किये ही उसमें बैठ गयी । ऑटो चल पड़ा। ठंडी हवाओं के झोंकों से रिधिमा का पसीने से भीगा बदन सूख गया। ऑफिस के काम से थकी रिधिमा की पलकें झपक रही थी थीं लेकिन उसके जल्दी घर पहुंचने के डर ने उसे सोने न दिया।

रिधिमा को अपनी सास की सब बातें एक एक करके याद आ रही थीं । दो साल पहले जब रिधिमा शादी करके ससुराल आई थी तो उसकी सासू माँ उसे कोई काम अकेला नहीं करने देती थीं चाहे किचन का काम हो,घर की साफ़ सफाई या कपड़ों की दुलाई सासू माँ अपनी दोनों बहुओं का हाथ बराबर थीं बटाती थी। रिधिमा सब्जी काटे तो वो सब्जी छौंक देतीं,रिधिमा आटा गूथे तो वो रोटी सिकवा लें,रिधिमा या उसकी जेठानी बरतन धुले तो वो बर्तन सजा दें। दोनों बहुओं को बेटियों की तरह मानती रिधिमा की सासू माँ ।रिधिमा कभी घर में बोर हो तो उसे अपने साथ सुपरमार्किट ले जाती या शोपिंग के लिए जाती ।कभी किशोर- आशा के गानों पर सास-बहुओं की जुगलबंदी होती तो कभी किसी पुरानी फ़िल्मी हीरों –हिरोइन की डायलॉग बाज़ी की नक़ल होती । शादी के एक साल बाद जब एमबीए पास रिधिमा को एक मल्टीनेशनल कंपनी से जॉब का ऑफर आया तो घर में सभी बहुत खुश हुए और सासू माँ ने तो छोटे मोंटी को तुरंत पास के अग्रवाल स्वीट्स से 2 किलो काजू की बर्फी मंगवाकर पूरे मुहल्ले में बटवाई थी रिधिमा ये देख ख़ुशी के मारे रो पड़ी थी और सास के गले लग कसकर चिपक गयी थी । ससुर और जेठ ने तो भंगडे के पोज़ भी बना लिए थे । अरुण और मोंटी ने रिधिमा को अपने हाथ से बर्फी खिलाकर उसके ख़ुशी के आंसू पोंछकर उसको हंसाया था । जेठानी ने गर्व से छाती चौड़ीकर 1 किलो पनीर पति से मंगवाकर रिधिमा का फेवरेट चिली पनीर और खीर पूड़ी बनाया था ।

रिधिमा ऑफिस जाने लगी थी,रोज़ सुबह जब रिधिमा उठकर घर के कामों में लग जाती तो देखती सासू माँ मोंटी की स्कूल ड्रेस के साथ रिधिमा के ऑफिस के कपडे भी प्रेस कर देती ये देख रिधिमा अपनी प्यारी सासू माँ के गले लग उनके गाल पर एक प्यार भरी पप्पी चिपका देती सास बहु दोनों मुस्कुरा देती और रिधिमा पूरा दिन खिल जाता ।

ऑफिस के कामों में डूबी और घर के काम काज में मस्त रिधिमा सासू माँ ही चेहरे की बिगड़ी रंगत देखकर पार्लर की याद दिलाती और रिधिमा के मना करने पर भी उसे जबरदस्ती पार्लर चलते को कहती ये देख जेठानी भी खूब हंसती और रिधिमा से सब काम छीन उसे सास के साथ जबरदस्ती पार्लर भेजती। पार्लर में सासू माँ आई ब्रोज़ बनाती पार्लर वाली के हाथों की कारीगरी को दिशा निर्देश तक देती ताकि उसकी सुंदर बहू और सुंदर लगे। नई नई स्टाइल के हेयर कटिंग कराती। सास की तन्मयता को देख बहु मंत्र मुग्ध बस चुपचाप मुस्कुराती हुई कठपुतली बन बैठी रहती।

सास दोनों बहुओं के लिए कैल्शियम और आयरन की गोलियां लाना कभी नहीं भूलती। और अपनी दवा और मालिश के लिए तभी मानती जब बहुएं जूस और गोलियां ले लेती थी ।

ऑटो में बैठी रिधिमा को सास और ससुराल की सारी बातें याद आ रही थी वो ये सोच रही थी की कितना अच्छा ससुराल उसको मिला है । लेकिन आज उसके इतना लेट होने पर सासू माँ का क्या रिएक्शन होगा? ये सबसे बड़ा सवाल था । ऑटो से उतारकर रिधिमा ने डर से राहत पाने के लिए अपनी माँ को फ़ोन किया और और अपने लेट होने की बात बताई। माँ ने रिधिमा को लेट होने पर कोई राहत की बात तो नही की उलटे डाट ज़रूर लगा दी और आगे से टाइम पर घर आने की नसीहत दे डाली ।माँ की डांट ने रिधिमा को और डरा दिया ।अब रिधिमा को उसका लेट होना एक बड़ी गलती की तरह लग रहा था। रिधिमा खुद को दोषी मानकर मन ही मन कोसते हुए दबे क़दमों से घर के अंदर घुसी। घर का माहौल बिलकुल शान्त। ससुर जी बाहरवाले अपने कमरे में बिस्तर पर आंखें मूंदे लेते थे। टी वी बंद था। मोंटी सो चुका था। किचन में कुकर की सीटी बज रही थी और सासू माँ अपने फेवरेट किशोर –लता के गाने गुनगुनाते हुए चटनी का मसाला तैयार कर रही थीं। रिधिमा ने घर के बरामदे में अरुण की कार न देख समझ लिया की अरुण अभी नहीं आये। रिधिमा ने सास के चेहरे की ओर देखा और लेट आने के लिए माफ़ी मांगी,सास ने रिधिमा के सर पर हाथ से एक टिप मारी और कहा “पगली लेट ही हुई है कोई गुनाह थोड़े ही किया है,और फिर शादी के पहले तेरी ननद बबली को तो ऑफिस से आने में अक्सर की 10 बजते थे मैं समझती हूं ऑफिस में काम रहता है तो देर सवेर हो ही जाती है तू बेकार की चिंता छोड़ और हाथ मुंह धो ले बिरयानी बनाई थी वही गरम की है चटनी खतम हो गयी थी बनाये देती हूं” रिधिमा सास की बाते सुन हैरान थी की जिस बात को सोच वो पूरे रास्ते परेशान थी सास को तो उससे कोई परेशानी ही नहीं उसने सुकून की साँस ली। सास ने गैस पर पानी चढ़ाकर पूछा “बहू थक गयी होगी चाय पीयेगी की कॉफ़ी” ? रिधिमा सास के गले चिपक गयी और गाल पर प्यार भरी पप्पी देकर बोली “मेरी प्यारी सासू माँ”।

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