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विषबेल व अन्य कविताएँ / अंजनी श्रीवास्तव

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*तफ्तीश *



चल रही है जोर -शोर से
हर छोटी बड़ी घटना की तफ्तीश
अंत और अनंत की खोज
तटस्थों को भी अपने
अभियान में जोड़ लेने की होड़
निकाला जा रहा है
स्वार्थ की राह में बाधक
तत्वों का तोड़
हो रहा है -अनुत्तरित
यक्ष -प्रश्नों का पुनर्विवेचन
गंगा गुपचुप ले रही है
अपने उद्धारकों की टोह
जारी है हकीकत में
"अच्छे दिन " लानेवाले
भगीरथ की अभी भी तलाश
मगर आदमियों की भीड़ में
आदमी को ढूंढना
उतना ही मुश्किल हो रहा है
जितना कि भूसे की ढेर से
सुई निकाल लाना.

-----------------.

*श्मशान *

श्मशान की खामोशी मशहूर रही है
मगर वो भी अब कमर्शियल स्पॉट
बन गया है
जो लोग कहीं और नहीं मिल पाते
यहीं आकर मिल लेते हैं
बस इसके लिये किसी एक को
अर्थी पर लेटना पड़ता है
लोगों के हाथों से चिपके
भ्रमणकारी भौंरें
बार -बार गुनगुनाते हुए
वहां चहल -पहल
ला देते हैं
मृत्यु उत्सव बन जाता है
मरे हुए आदमी से ज्यादा
महत्वपूर्ण मोबाइल पर
आया हुआ कॉल हो जाता है
उधर लाश जलने के लिये छटपटाती है
इधर ,लोग एक दूसरे का नम्बर लेने बधाईयों और वादों का
आदान -प्रदान करने में
लगे होते हैं
रोनेवाले कम ,हाजिरी लगाकर
निकल भागने वाले ज्यादा होते हैं
मृतात्मा के बारे में कोई
कुछ नहीं बोलता
जबकि वही सबको एक
मंच पर इकठ्ठा करता है
उसका तो नाम ही लाश हो जाता है
लाशों की कोई समस्या नहीं होती
सारे लफड़े तो जिंदा लोगों के
साथ होते हैं..

--------

*बात *


बात शुरू करने के कई तरीके हैं
सामनेवाले से तम्बाकू या माचिस माँग लीजिये
पता हो तब भी समय पूछ लीजिये
मौसम की खुशगवारी या बदमिजाजी पर

दो शब्द -पुष्प चढ़ा दीजिये
वार्त्ता शुरू हो जायेगी
ख़त्म करना हो तो
ज्यादा कुछ नहीं करना होगा
अपने ज्ञानकोश से पसंद का एक आपत्तिजनक शब्द उस आदमी के

नाम व्यय कर दीजिये
जादुई असर की गारंटी है
अपनी सुनाने को हर आदमी उतावला है
विचार को समर्थन मिले तो

संभ्रांत भी फटीचर के गाल चूम सकता है
बात का क्या है ?
कहीं से भी शुरू कर दीजिए
कोई भी टॉपिक ले लीजिये
कोई न कोई तो बोलेगा ही
अगर सबको सांप सूंघ जाये
तो टॉपिक ही बदल डालिए
फ़िर देखिये ,सब शुरू हो जायेंगे
हो गये तो फिर रोक कर बताईयेगा
दरियाफ्त करके देखिये -
तिल को ताड़ बनाने का पेटेंट
इन्हीं के नाम पर रजिस्टर्ड पाईयेगा
इनमें से हर कोई दोराहे ,तिराहे

चौराहे या चाय -पान की गुमटी पर
ज़माने को कोसता हुआ मिलेगा
कोई भी वर्त्तमान सरकार को

किसी काम का क्रेडिट नहीं देगा
देश की शुभचिंता मे अपना ब्लड-प्रेशर
हाई /लो होने का संकेत ज़रूर देगा
निर्धारित समय के अंदर
दिलोदिमाग का सारा कचरा
निकाल फेंकते हुए
नये कचरों के लिये जगह बनायेगा
फिर घड़ी देखते हुए तेजी से साफ -सुथरी सड़क पर खँखार -खँखार कर

थूकते हुए रंगी -पुती दीवारों पर

नक्शे बनाते हुए बहुत देर से रोक

रखी गयी धारा बहायेगा ,
तेजी से गुजरते वाहनों की
बहन -मांओं का उद्धार
करते हुए घर पहुंचेगा
पत्नी को रोजाना की तरह
जलील करेगा
बेटे को देर से उठने के लिये फटकारेगा
चाय सुड़कते हुए दिन भर की
तिकड़मबाजी की योजना बनायेगा
उसके बाद गरम पानी से

नहाने के लिये तेल मलते हुए

गुसलखाने में घुस जायेगा
थोड़ी देर बाद उधर से
एक नये अवतार में
श्लोक बुदबुदाते हुए बाहर आयेगा

--------

 

*विषबेल *

चूंकि पुलिस के पहरे में
सियासियों के साये में
और मुल्ले-महंतों की
रहनुमाई में ही
परवान चढ़ती है -
अराजकता की विषबेल
इसीलिये विरोधों के स्वर
हाई पिच पर पंहुंचने के
पहले ही फुस्स हो जाते हैं
जैसे तूफ़ानी गति से नष्ट
होते जा रहे हैं
हरे -हरे वन
और इन सबके बीच हम
नशेड़ियों की तरह
पड़े हुए हैं टुन्न
याद ही नहीं आता
किस घड़ी कर बैठे
तबाही के दस्तावेजों
पर हस्ताक्षर

-------

 

*घटनायें *


जितनी तेजी से आबादी नहीं बढ़ती
उतनी तेजी से घटनायें घटती हैं
वैसे आबादी का बढ़ना भी
एक भयंकर घटना है
सजीव हो या निर्जीव
घटनायें किसी को नहीं बख्शती
आदमी सजीव होकर भी
उतना सशक्त नहीं है
जितना कि उसकी बनाई
निर्जीव चीजें
ये निर्जीव चीजें इतनी
खतरनाक होती हैं कि
गम्भीर से गम्भीर
घटनाओं को अंजाम देकर भी
निर्जीव ही नज़र आती हैं
जैसे कुछ किया ही न हो
घटनायें इतिहास ही नहीं
जीवन भी बदल देती हैं
घटनाओं के जखीरे दिमाग के
तहखाने में ऑटोमेटिक
जमा होते रहते हैं
जिन्हें समय का कंप्यूटर
धीरे -धीरे डिलीट करता हुआ
नयों को सेव करता जाता है
जैसे हम शेविंग करते -करते
भोथर हो चुके ब्लेडों को
खिड़की के बाहर उछाल फेंकते हैं
और नयों को जगह दे देते हैं.

---

 

 

लेखक परिचय

नाम : अंजनी श्रीवास्तव

जन्म तिथि : 12 -2 -1955

स्थाई पता : गीधा , भोजपुर (बिहार )

शिक्षा : बीएससी , पीजीडीएमएम , डीटीएम

कार्य : स्वतन्त्र पत्रकारिता एवं लेखन के सभी आयामों में देश भर में समय - समय पर प्रकाशित।

"ऑडियोग्राफी की उड़ान " , " ध्वनि के बाजीगर " एवं " दोहा संग्रह" , दोहों के दंश " , पुस्तकें प्रकाशित।

" भोजपुरी सिनेमा : तब अब सब " प्रकाशनाधीन

कई हिंदी एवं भोजपुरी फिल्मों का संवाद एवं गीत लेखन

संप्रति " दी साउन्ड एसोसिएशन आफ इंडिया " का कार्यपालक सचिव

वर्तमान पता : ए - 223 , मौर्या हाऊस

वीरा इंडस्ट्रियल इस्टेट ऑफ ओशिवरा लिंक रोड

अंधेरी (पश्चिम ), मुम्बई - 400053

दूरभाष – 9819343822

email :- anjanisrivastav.kajaree@gmail.com

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भाई अंजनी श्रीवास्तव जी की सारी कवितायेँ बहुत ध्यान से कई बार पढ़ीं एक
निर्भीक... सशक्त और पूर्ण लेखक के
दर्शन हुये..सभी रचनाएँ केवल सत्य बयान करतीं है और उत्कृष्ट है

मेरी हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

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