370010869858007

---प्रायोजक---

---***---

नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -
 नाका संपर्क : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी यहाँ [लिंक] देखें.

****

Loading...

इन्द्र देव -प्रणाम / यशवंत कोठारी

बारिश हो रही है , बादल गरज रहे हैं . मौसम मस्त मस्त है . ऐसे में इंद्र को याद करना मानव स्वभाव है . वर्षा का राजा इंद्र है . हम लोग सम वृष्टि चाहते हैं , अनावृष्टि या अति वृष्टि से सब बचना चाहते हैं . इंद्र ही इस बात को तय करते हैं. भारतीय पौराणिक साहित्य में इंद्र का वर्णन बार बार आता हैं . इंद्र का लोक इंद्र लोक कहलाता हैं , इस का स्थान अमरावती मन गया है , इंद्र के आवास का नाम वैजयंत माना गया है , इंद्र के बाग का नाम नंदन माना गया है , नंदन में कल्प वृक्ष हैं जो सभी कामनाओं को पूरा करता है . इंद्र के हाथी का नाम ऐरावत है. इंद्र के घोड़े को उच्छेश्र्वा कहा गया है . इंद्र की रानी का नाम शची है तथा पुत्र का नाम जयंत बताया गया है .

इंद्र वर्षा के देवता हैं लेकिन अन्य देवताओं की तरह उनकी पूजा –अर्चना नहीं की जाती हैं . इंद्र शूरवीर नहीं थे. उनको रावण पुत्र मेघनाद ने हराकर कैद कर लिया था. बाद में देवताओं ने छुड़ाया. इसी प्रकार द्वापर में कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को ऊँगली पर उठा कर इंद्र का मान मर्दन कर दिया था .

एक कथा के अनुसार, अर्जुन इंद्र के पुत्र थे. इसी प्रकार अह्ल्या की कथा में भी इंद्र खलनायक बन कर आते हैं और शीलहरण करते हैं. बलि को भी इंद्र का ही पुत्र बताया गया है .

दुश्चरित्र होने के कारण ही इंद्र की पूजा नहीं की जाती है . शतपथ ब्राह्मण के अनुसार इंद्र के पिता प्रजापति व् माता निष्टिग्री हैं .

इंद्र देवताओं के राजा थे, मगर घमंडी थे. युद्ध में लड़ने के लिए उन्होंने दधिची की हड्डियों से वज्र बनवाया था .

इंद्रपुरी में इंद्र ने कई यज्ञ किये थे.

पृथ्वी पर कोई तपस्या करता तो इंद्र का आसन डोलने लग जाता था . वे अपने सिंहासन की रक्षा में जुट जाते थे . अपना राज बचाने के लिए इंद्र पृथ्वी पर तपस्या करने वाले का तप भंग करने के लिए अप्सराओं को भेजते थे , ये अप्सराएँ तप भंग कर आती थीं.

उर्वशी, मेनका ,तिलोत्तमा आदि इंद्र की खास अप्सराएँ थी जो तप भंग करने पृथ्वी लोक में भेजी जाती थीं . इंद्र खुद भी जा कर कुछ गड़बड़ कर देते थे . एक बार राजा सगर के यज्ञ के घोड़े को कपिल मुनि के आश्रम में बांध दिया , सगर के ६० हज़ार पुत्र मर गए, जिनको स्वर्ग दिलाने के लिए भागीरथ गंगा को पृथ्वी पर लाये .

अहल्या प्रकरण में चंद्रमा ने इंद्र का साथ दिया था , ऋषि गौतम ने इंद्र व् चंद्रमा दोनों को श्राप दिया . तब से ही चन्द्रमा पर कलंक लग गया .

शाप मुक्ति के लिये अहल्या को राम का इंतजार करना पड़ा. तथा इंद्र ने राम विवाह को हज़ार आँखों से देखा.

इंद्र ने एक बार देवताओं के गुरु ब्रहस्पति का भी अपमान कर दिया था.

तो वर्षा के देवता इंद्र ऐसे थे .

फिर भी इंद्र वर्षा को सही समय पर सही मात्रा में बरसावें इस की प्रार्थना हम सब करते हैं .

०००००००००००००००००००००००००००००००००००००००

यशवंत कोठारी ८६, लक्ष्मी नगर ,ब्रह्मपुरी

जयपुर =३०२००२

मो -०९४१४४६१२०७

यशवंत कोठारी 8728757590043904807

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

emo-but-icon

मुख्यपृष्ठ item

रचनाकार में छपें. लाखों पाठकों तक पहुँचें, तुरंत!

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं.

   प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 14,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही रचनाकार से जुड़ें.

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है. किसी भी फ़ॉन्ट में रचनाएं इस पते पर ईमेल करें :

rachanakar@gmail.com
कॉपीराइट@लेखकाधीन. सर्वाधिकार सुरक्षित. बिना अनुमति किसी भी सामग्री का अन्यत्र किसी भी रूप में उपयोग व पुनर्प्रकाशन वर्जित है.
उद्धरण स्वरूप संक्षेप या शुरूआती पैरा देकर मूल रचनाकार में प्रकाशित रचना का साभार लिंक दिया जा सकता है.

इस साइट का उपयोग कर आप इस साइट की गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं.

नाका में प्रकाशनार्थ रचनाएँ भेजने संबंधी अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

आवश्यक सूचना : कृपया ध्यान दें -

कविता / ग़ज़ल स्तम्भ के लिए, कृपया न्यूनतम 10 रचनाएँ एक साथ भेजें, छिट-पुट एकल कविताएँ कृपया न भेजें, बल्कि उन्हें एकत्र कर व संकलित कर भेजें. एकल व छिट-पुट कविताओं को अलग से प्रकाशित किया जाना संभव नहीं हो पाता है. अतः उन्हें समय समय पर संकलित कर प्रकाशित किया जाएगा. आपके सहयोग के लिए धन्यवाद.

*******


कुछ और दिलचस्प रचनाएँ

---प्रायोजक---

---***---

फ़ेसबुक में पसंद करें

---प्रायोजक---

---***---

ब्लॉग आर्काइव