शनिवार, 30 जुलाई 2016

गरीबी पर चिंतन / व्यंग्य / यशवंत कोठारी

बिल गेट्स ने कहा है कि गरीब राष्ट्र कम हो रहे हैं, लेकिन गरीबी बढ़ रही है. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बुश ने कहा है कि हम ने गरीबी के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ा और गरीबी जीत गयी. भारत में बहस गरीबी पर नहीं गरीबी रेखा पर हो रही है . योजना आयोग का नया रूप नीति आयोग इस बात पर ही दो साल से चर्चा कर रहा है , नए आयोग अध्यक्ष भारत की गरीबी को अमरीकी चश्मे से देख रहे हैं. उन को नहीं मालूम कि भारत में गरीबी के मापदंड वे नहीं हो सकते जो अमेरिका में हैं. गरीबी नहीं हटा सको तो गरीब को हटा दो, उसे फुटपाथ से हटाओ, उसे झोपडी से हटाओ , उसे कच्ची बस्ती से हटाओ , उसे शहरों से हटाओ , उसे जनपथ व् संसद मार्ग से हटा दो.

नीति आयोग गरीब और गरीबी पर रोज़ नई परिभाषा बनाता है , जो सत्ता के तो अनुकूल होती है ,मगर गरीब के अनुकूल नहीं होती. गरीब को सोचने समझने का कोई अधिकार नहीं सरकार कहे सो सही . रोटी तक नसीब नहीं . एक वक्त की रोटी के भी लाले हैं लेकिन सरकार माने तो. शहर में रहने वाला अलग, गाँव में रहने वाला अलग तरह का गरीब, दोनों मिल कर अमीर. होना तो यह चाहिए कि सरकार अमीरी रेखा तय करे, उसके नीचे के सब गरीब. सब को मदद मिले, सब को रोटी कपडा मकान मिले . लेकिन बुद्धिजीवी गरीबी पर बहस करते हैं ,सेमिनार करते हैं ससुरी गरीबी बढ़ती जाती है और अमीरों की अट्टालिकाएं भी बढ़ती जाती हैं . खुद जिओ गरीब को जीने मत दो. चलो भागो यहाँ से, तुम गरीब भिखारी तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई यहां तक आने की ?

हुजूर मैंने तो आपको वोट दिया था. तो कौन सा अहसान कर दिया , किसी न किसी को तो वोट देने ही थे. नाग नाथ को नहीं देते तो सांप नाथ को देते. गरीब के ख़िलाफ़ सभी सत्ताएं एक ही होती हैं प्यारे . इतिहास में केवल राजा , महाराजा, नवाब , बेगमों का जिक्र होता हैं आम आदमी , गरीब भिखारी को इतिहासकार नहीं पहचानते .

गरीबी रेखा की जाँच करने वाले जानते हैं यह रेखा कभी भी बड़ी हो सकती है , कभी भी छोटी हो सकती है , कभी भी मिटाई जा सकती है कभी भी बनाई जा सकती है .

अमीरी व गरीबी के बीच में एक दीवार है, एक समुद्र है जिसे लांघा नहीं जा सकता . नीति आयोग रोज़ नए नए प्रस्ताव बनता है ये प्रस्ताव सरकार में चक्करगिन्नी होते रहते हैं . उनके लिए गरीबी एक लतीफा , जोक है , जिसे सचिवालय में सुनाया जाता हैं , गाया जाता है और गरीब व् गरीबी वहीँ रहती हैं जहाँ वे थे .

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यशवंत कोठारी, ८६, लक्ष्मी नगर , ब्रह्मपुरी

जयपुर

मो-०९४१४४६१२०७

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