रचनाकार.ऑर्ग की विशाल लाइब्रेरी में खोजें -
 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें.

प्राची - जुलाई 2016 / 'आज के अतीत' की वस्तुपरकता / डॉ. सुचिंता कुमारी

साझा करें:

शोध आलेख 'आज के अतीत' की वस्तुपरकता डॉ . सुचिंता कुमारी भी ष्म साहनी की आत्मकथा ''आज के अतीत'' की कथावस्तु बहु...

शोध आलेख

'आज के अतीत' की वस्तुपरकता

image

डॉ. सुचिंता कुमारी

भीष्म साहनी की आत्मकथा ''आज के अतीत'' की कथावस्तु बहुत ही रोचक, प्रभावपूर्ण एवं सारगर्भित है. इनकी आत्मकथा की बनावट बहुत ही सरल एवं बोधगम्य है. इसमें न कोई क्लिष्टता है और न ही उलझाव भरी शिल्प योजना ही. बल्कि यह तत्व पंजाबी के प्रयोग से लेखक ने कथावस्तु के भावनात्मक बहाव को सुरक्षा प्रदान की है. भीष्म स्वयं कहते हैं- मैं जहां घरेलू बोलचाल की हिंदी में अपनी बात नहीं कर सकता, वहां मैं पंजाबी भाषा का प्रयोग करता रहा हूं . पंजाबी शब्दों, वाक्यों आदि का प्रयोग करना मेरी समझ में सही रहा है क्योंकि इससे भावनात्मक बहाव बना रहता है.1

कथा का आरम्भ, मध्य एवं अंत तीनों के सम्मिश्रण को यथावत अनुभव किया जा सकता है. कहीं भी ऐसा प्रतीत नहीं होता है कि कथा में कोई घटना संदर्भ जबरदस्ती डाले गए, बल्कि वे कथावस्तु की निरंतरता एवं प्रभावोत्पादकता के लिए सहज प्रतीत होते हैं.

कथा का आरम्भ भीष्म जी ने अपने बालपन के दिनों से कुछ इस तरह करते हैं- ''कहां से शुरू करूं? उन दिनों से, जब मैं छोटा-सा अबोध बालक, गली-गली, सड़क, आवारा घूमता-फिरता था. एक गली से दूसरी गली, निरुद्देश्य...

''वह मेरा सर अपने घुटनों में दबोचकर, मेरे मुंह में लाल मिर्च की चुटकी डालने के लिए मानो पहले से तैयार बैठी होती."

भीष्म चार भाई-बहनों में सबसे छोटे, नटखट घुमक्कड़ी स्वभाव के थे. इन्हें घूमने का लत ऐसा था कि वे स्वयं इधर-

उधर भटक जाते और घरवाले उन्हें ढूंढ़-ढूंढ़ कर वापस लाते. इस स्वभाव की वजह से उनके पिता ने उनके गले में ''बिल्ला" टांग देते थे. लेखक बताते हैं- आखिर मेरे पिताजी ने पीतल का गोल-सा बिल्ला मेरे गले में लटका दिया, जिस पर इस आशय के शब्द खुदे थे कि यह लड़का बाबू हरवंशलाल साहनी, छाछी मोहल्ला का बेटा है, जहां कहीं किसी को भटकता मिले, इसे घर पहुंचा दें.3

भीष्म जी का परिवार पेशावर का रहने वाला था, किन्तु वहां लूटपाट होने के कारण लगभग 20 वर्ष वहां रहने के बाद वे लोग रावलपिंडी में आ बसते हैं. जहां 5 बहनों के बाद उनके भाई बलराज साहनी तथा भीष्म का जन्म होता है. इनके पिता पुरुषार्थी, आशावादी एवं सादापन में विश्वास करने वाले व्यक्ति थे जिसका सीधा प्रभाव भीष्म जी पर पड़ता है. घर पर चार भाई-बहनों में भीष्म काफी दुबले, कमजोर एवं शैतानियों में आगे रहने वाले हैं. इन्हें बचपन से गुरुकुल में पढ़ने का बहुत शौक रहता है अतः इनके पिता दोनों भाई का दाखिला वहां करा देते हैं क्योंकि ''मेरे मन में बड़ा चाव था कि पीली धोती पहनूंगा...सपने देखता रहा था.''4

गुरुकुल की शिक्षा ज्यादा दिनों तक दोनों भाइयों को नहीं मिल पायी, क्योंकि वह घर से बहुत दूर था; अतः आर्य स्कूल में बलराज का चौथी तथा भीष्म का पहली कक्षा में दाखिला हो जाता है.

भीष्म के पिता आर्यसमाज के मंत्री थे, अतः आर्य समाज के वार्षिकोत्सव पर दोनों भाइयों को साथ लेकर जाया करते थे. वहीं पुस्तकों से सजे मेज लगे रहते थे और इन्हीं पुस्तकों के सम्पर्क में आकर भीष्म, प्रेम पच्चीसी, प्रेम द्वादसी, प्रेम प्रसून जैसी साहित्यिक पुस्तकों को पढ़ते हैं तथा सुदर्शन के लिखे प्रहसन ''आनरेरी मजिस्ट्रेट'' को पढ़कर तो उनके मन में साहित्य तथा साहित्यकार के प्रति श्रद्धा का भाव जग जाता है. उसी वार्षिकोत्सव के दौरान लेखन सुदर्शन का व्याख्यान होता है. जहां भीष्म की आंखें सुदर्शन के दर्शन के अभिलाषी बन जाते है. वे स्वयं कहते हैं- ''मैं सचमुच उन्हें हीरो की तरह देख रहा था...जो व्याख्यान उन्होंने दिया उसका तो एक शब्द भी मेरे पल्ले नही पड़ा, मैं दूर ही दूर से एक भक्त की तरह उन्हें निहारता रहा था.''5

इस प्रकार भीष्म को साहित्य ने एक ओर प्रेरित किया तो दूसरी ओर उनके चरित्र में आर्यसमाज के संस्कार ने भी अपना स्थान बनाया.

साहित्य के साथ-साथ भीष्म स्कूलों में होने वाले नाटको में भी हिस्सा लेने लगते हैं. इन संपर्कों व छोटी-छोटी घटनाओं से इनका मानसिक विकास भी होने लगता है. परिणामस्वरूप लापरवाह, मस्तमौला भीष्म धीरे-धीरे भीरु स्वभाव के बन जाते हैं. एक ओर निरंतर बलराज से भीष्म की तुलना करने से इनके अन्दर हीनभावना भर जाती है. इस बात को पुष्ट करते हुए वे कहते हैंः

''अब सोचता हूं, इससे मेरे शुभचिंतकों का भी अच्छा-खासा योगदान रहा था, जो बात-बात पर मेरी तुलना बलराज से करते रहते...न जाने कब से और क्यों एक प्रकार की हीनभावना मेरे अन्दर जड़ जमाने लगी.''6

किन्तु यही हीनभावना धीरे-धीरे कुछ सीखने की और लगातार प्रेरित कर रहा था. और भाई बलराज के प्रति श्रद्धाभाव भी मन में भर रहा था क्योंकि भीष्म जी का मानना था कि मैं उसका अनुसरण करने लगा था और चूंकि वह मुझसे प्यार करता था, बड़े भाई का सारा वात्सल्य मुझ पर लुटाता था...इस नए रिश्ते को मेरे प्रति उसके स्नेह ने ओर भी मजबूत किया.7

अर्थात भीष्म की मानसिकता दूसरों की विशिष्टता को स्वीकारते हुए अपने को नगण्य मानने वालों जैसी होती जा रही थी. कथा में आगे इस बात की जानकारी दी गई है कि भीष्म जी को साहित्य लेखन उनके वंशजों से विरासत में मिली है. क्योंकि उनकी फुफेरी बहन जो कश्मीर में रहती थी, अक्सर छुट्टियों में रावलपिंडी आती थीं, जहां साहित्य का समां बंध जाता था तथा 18 वर्ष की अवस्था में भाई बलराज भी शेरो-शायरी करने लगे थे. अतः घर के साहित्यिक माहौल के कारण ही भीष्म का रुझान और अधिक साहित्य की ओर हुआ. इसके पश्चात् गवर्मेंट कॉलेज लाहौर में ही भीष्म दाखिला लेते हैं, जहां निरंतर नाटक आदि में हिस्सा लेते हैं जो उनके जीवन को काफी प्रभावित करता है. कुछ दिनों बाद भीष्म को अपने बहनोई श्री चन्द्रगुप्त विद्यालंकार के साथ लाहौर में रहने का मौका मिला. जहां उनका सम्पर्क अज्ञेय, देवेन्द्र सत्यार्थी, अश्क तथा प्रेमचंद जैसे लेखकों से होता है. इस प्रकार साहित्य के प्रति रुचि और जग जाती है. वहां रहते हुए प्रेमचंद की मृत्यु की खबर मिलती है, जिससे भीष्म काफी आहत होते हैं. इसके बाद एम.ए. की पढ़ाई खत्म कर वे रावलपिंडी लौट आते हैं. जहां पिता तथा भाई बलराज के साथ व्यापार में हाथ बंटाने लगते हैं. इस क्रम में गुलाम भारत जिस प्रकार गुलामी का दंश झेल रहा था और गहरे असंतोष से घिरा था. इसी प्रकार भाई बलराज साहनी अपने जीवन से काफी असंतुष्ट थे. भीष्म का मानना था कि ''यह असंतोष उस कालखंड की देन था. दिल में उठने वाली बलवती अभिव्यक्ति के लिए आतुर थे. साथ ही साथ किसी बड़े ध्येय के साथ जुड़ने की छटपटाहट थी. वह व्यक्तिगत जीवन के तंग घेरे में नहीं बने रहना चाहते थे. यह असंतोष किसी बड़े क्षेत्र में...अभिव्यक्ति के लिए छटपटा रहा था.''8

अतः बलराज व्यापार छोड़कर अपनी पत्नी के साथ लाहौर चले जाते हैं. अंततः भीष्म को न चाहते हुए भी व्यापार संभालना पड़ता है किन्तु निरंतर उनके मन में कुछ बातें घर करने लगती हैं कि इतना पढ़ने के बाद जीवन में बदलाव लाना चाहिए. कुछ करना चाहिए. वे स्वयं महसूस करते हैं. उस समय मुझे मालूम नहीं था कि मेरा जिन्दगी का कांटा बदल रहा है. घंटे-दो-घंटे का सौजन्य अध्यापन बाद में मेरा व्यवसाय बन जाएगा और कॉलेज में खेला गया पहला नाटक एक श्रृंखला की पहली कड़ी साबित होगा और मुझे देशव्यापी सांस्कृतिक आन्दोलन की और खींच ले जायेगा.9

इसके पश्चात ही वे निरंतर दिल्ली में रहने वाली फुफेरी बहन सत्यवती से सम्पर्क बनाकर साहित्यिक गतिविधियों की जानकारी प्राप्त करते हैं. तथा जैनेन्द्र, विष्णु प्रभाकर, बनारसीदास चतुर्वेदी, वात्स्यायन आदि से सम्पर्क भी स्थपित करते हैं. सन् 1944 में भीष्म जी के जीवन में बहुत बदलाव आता है. पहले तो उनका विवाह शीला से होता है और दूसरा भारत-पाकिस्तान विभाजन की बात सामने आती है. इस बंटवारे वाली बात को लेकर सारा परिदृश्य बदलता नजर आता है, क्योंकि ''सामान्य जीवन बाहर से ज्यों का त्यों चल रहा था पर अन्दर ही अन्दर से दूरियां बढ़ने लगी थीं. जगह-जगह छोटे साम्प्रदायिक विस्फोट होने लग गये.''10

यह तनाव 6 जून को पाकिस्तान अलग बनाए जाने के एलान से दंगे में बदल जाता है. लोग अपना घर छोड़कर पलायन कर रहे होते हैं. इस विभाजन से फैले दंगों का मर्मस्पर्शी चित्रण भीष्म ने किया है. भीष्म जी का परिवार जो इसका भुक्तभोगी था, काफी मुश्किलों का सामना करने के बाद इनका व्यापार कार्य बंद हो जाता है. भीष्म जी बिल्कुल खाली महसूस करने लगते हैं. अर्थव्यवस्था की जुगत नहीं लग पा रही होती है. अतः देश की आजादी तथा पुनः विभाजन से इन्हें ऐसा महसूस होता है, जैसे ''आजादी मिलने पर मैं भी एक तरह से आजाद हो गया था. व्यापार से आजाद, कॉलेज के अध्यापन से आजाद, कांग्रेस की सरगर्मियों से आजाद, रावलपिंडी की सभी व्यवस्थाओं से आजाद.''11 इसी बीच बड़े भाई बलराज बम्बई चले जाते हैं. जहां वे इप्टा जैसी संस्था से तो जुड़ते ही हैं तथा फिल्मों में भी काम करने लगते हैं. भीष्म जी भी अपने को खाली देखकर परिवार के साथ वहीं चले जाते हैं जहां वे तथा उनकी पत्नी इप्टा से जुड़ती है. वहां रहते हुए उन्हें एक तार मिलता है, जिसमें अम्बाला कॉलेज में अंग्रेजी अध्यापक के रूप में कार्य करने का आग्रह रहता है. भीष्म यह स्वीकारते हुए परिवार समेत वहां चले जाते हैं. यहां इनके पहल पर यूनियन बनाये जाते हैं. पूरे पंजाब में यूनियनों का कार्य सक्रिय हो जाता है. जिसका खामियाजा भीष्म को नौकरी छोड़ने के लिए बाध्य होकर भुगतना पड़ता है. वे वापस दिल्ली पिता के पास आ जाते हैं. जहां पूर्वी पटेल नगर में (करोलबाग के निकट) एक मकान खरीदा था जो विभाजन की त्रासदी झेलता शरणार्थियों के लिये बनाया गया था. यहां साहित्य पर खुल कर बात होती है. यहां आकर भीष्म जी के रहते हुए रविवार को होने वाली कल्चरल फार्म में हिस्सा लेने लगते हैं. जहां साहित्य के प्रति रुचि बढ़ती है. और रामकुमार वर्मा, निर्मल वर्मा, कृष्ण बलदेव वैद जैसे साहित्यकारों से परिचय होता है. परिणामतः 1953 में इनका पहला कहानी संग्रह ''भाग्यरेखा'' छपता है. फिर दूसरा 1956 में ''पहला पाठ''. साहित्य अकादमी की स्थापना के बाद ही कहानी विधा को लेकर अनेक आन्दोलन जैसे चलते हैं जिसकी चर्चा आगे की कथा में भीष्म ने की है. इसके कुछ समय बाद वे बनारस जाते हैं. जहां ''डॉ. इन्द्रनाथ मदन के संरक्षण में हिंदी उपन्यास में नायक की अवधारणा" विषय पर पीएचडी की उपाधि प्राप्त करते हैं. वहां रहते हुए हजारी प्रसाद द्विवेदी, नामवर सिंह, विश्वनाथ त्रिपाठी के सम्पर्क में आते है. पुनः वहां से लौटकर दिल्ली लौटने के बाद उनके बेटे वरुण का जन्म होता है. कथावस्तु में आगे लेखक के मास्को प्रवास की कथा है. 1957 की क्रांति के बाद सांस्कृतिक क्षेत्र में सोवियत संघ ने जो नीति अपनाई थी, उसके अंतर्गत बड़े व्यापक स्तर पर अनुवाद कार्य किया जा रहा था. और उसी कार्य के लिए लेखक परिवार के साथ वहां प्रवास करते हैं. वहां रहते हुए लगभग 7 वर्षों में भीष्म का लेखन कार्य पीछे छूट जाता है तथा उपलब्धि के तौर पर ''हानूश'' नामक नाटक का मसौदा ही तैयार हो पाता है. पत्नी शीला काफी असंतुष्ट भाव से कहती हैं- यहां तुम क्या कर रहे हो? छः साल यहां रहते हो गए. तुमने केवल एक कहानी लिखी, वह भी मरियल सी. तुम्हें यहां क्या मिल रहा है?...बराबर बना रहा.12

''मास्को में रहते हुए भीष्म जी ने उपभोक्ता वस्तुओं की कमियों जैसी त्रुटि को तथा सोवियत संघ द्वारा पहला स्पुन्तिक छोड़े जाने जैसे उपलब्धि का चित्रण किया है. 1963 में भीष्म जी भारत लौट आते हैं. भारत आकर पुनः भीष्म लेखन से जुड़ना चाहते हैं, ऐसे समय में जब नई कहानी, सचेतन कहानी, अकहानी का दौर चल रहा था, जिसका विभाजन भीष्म के लिए दुरूह था. उसी समय नई कहानियों की पत्रिका का संपादन का कार्य इन्हें मिला किन्तु वह भी सही रास्ते नहीं चल सका. अतः पत्रिका अमृतराय के हाथ सौंप दी गई.

कथावस्तु में आगे भीष्म ने अपनी उत्कृष्ट कृतियों जैसे ''तमस'', ''हानूश'', ''कबीरा खड़ा बाजार में'', ''माधवी'', ''मश्यादास की माड़ी'' आदि का वर्णन किया है. साथ ही साथ अफ्रो-एशियाई लेखक संघ एवं प्रगतिशील लेखक संघ के सन्दर्भ में लेख लिखकर महत्वपूर्ण तथ्यों की जानकारी दी है. तथा अंत में लेखक ने अपने जीवन के अपने शुरुआती क्षणों के यादगार पलों को याद करते हुए अंतिम पड़ाव के महत्वपूर्ण पलों का जिक्र सारांश रूप में किया है. तथा वे अंत में निष्कर्षतः कहते हैं- ''क्या खोया, क्या पाया, इसका लेखा-जोखा करता रहूंगा.'' अपने भाग्य को सराहता कोसता भी रहूंगा, साथियों-सहकर्मियों के साथ उलझता भी रहूंगा, ताकि किसी न किसी तरह जिन्दगी के अखाड़े में बना रहूं. ऐसा ही मन करता है. पर इस सबके रहते भी कभी कभी यह भी आवाज कानों में पड़ जाती है."

रात सारी तो हंगामा गुस्तरी में कटी,

सेहर करीब है, अल्लाह का नाम ले साकी.13

संदर्भ ग्रन्थ-

1. भीष्म साहनी ''आज के अतीत.'' पृष्ठ संख्या 244

2. भीष्म साहनी ''आज के अतीत.'' पृष्ठ संख्या 7

3. भीष्म साहनी ''आज के अतीत.'' पृष्ठ संख्या 7

4. भीष्म साहनी ''आज के अतीत.'' पृष्ठ संख्या 23

5. भीष्म साहनी ''आज के अतीत.'' पृष्ठ संख्या 36

6. भीष्म साहनी ''आज के अतीत.'' पृष्ठ संख्या 46

7. भीष्म साहनी ''आज के अतीत.'' पृष्ठ संख्या 47

8. भीष्म साहनी ''आज के अतीत.'' पृष्ठ संख्या 92

9. भीष्म साहनी ''आज के अतीत.'' पृष्ठ संख्या 98

10. भीष्म साहनी ''आज के अतीत.'' पृष्ठ संख्या 128

11. भीष्म साहनी ''आज के अतीत.'' पृष्ठ संख्या 139

12. भीष्म साहनी ''आज के अतीत.'' पृष्ठ संख्या 199

13. भीष्म साहनी ''आज के अतीत.'' पृष्ठ संख्या 311

 

सपर्कः पटेल नगर रोड नम्बर 8

निफ्ट के सामने, हटिया रांची-(झारखण्ड) पिन 834003

ईमेल- suchinta1608@gmail.com

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर

-----****-----

-----****-----

---***---

-----****-----

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधाएँ ~

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---


|नई रचनाएँ_$type=complex$count=8$page=1$va=0$au=0

|आपके लिए कुछ चुनिंदा रचनाएँ_$type=blogging$count=8$src=random$page=1$va=0$au=0

|हास्य-व्यंग्य_$type=complex$count=8$src=random$page=1$va=1$au=0

|कथा-कहानी_$type=blogging$count=8$page=1$va=1$au=0$com=0$src=random

|लघुकथा_$type=complex$count=8$page=1$va=1$au=0$com=0$src=random

|संस्मरण_$type=blogging$au=0$count=7$page=1$va=1$com=0$s=200$src=random

|लोककथा_$type=blogging$au=0$count=5$page=1$com=0$va=1$src=random

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,3822,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,335,ईबुक,191,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,257,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,105,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2762,कहानी,2094,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,485,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,30,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,90,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,22,पाठकीय,61,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,329,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,327,बाल कलम,23,बाल दिवस,3,बालकथा,49,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,8,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,16,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,234,लघुकथा,816,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,307,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,62,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,1905,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,642,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,685,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,14,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,54,साहित्यिक गतिविधियाँ,183,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,58,हास्य-व्यंग्य,66,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: प्राची - जुलाई 2016 / 'आज के अतीत' की वस्तुपरकता / डॉ. सुचिंता कुमारी
प्राची - जुलाई 2016 / 'आज के अतीत' की वस्तुपरकता / डॉ. सुचिंता कुमारी
https://lh3.googleusercontent.com/-LChaC5vLCwM/V523Y44UE7I/AAAAAAAAvLU/Wj5XGSnn1ig/image_thumb%25255B1%25255D.png?imgmax=800
https://lh3.googleusercontent.com/-LChaC5vLCwM/V523Y44UE7I/AAAAAAAAvLU/Wj5XGSnn1ig/s72-c/image_thumb%25255B1%25255D.png?imgmax=800
रचनाकार
http://www.rachanakar.org/2016/08/2016_1.html
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/2016/08/2016_1.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय खोजें सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है चरण 1: साझा करें. चरण 2: ताला खोलने के लिए साझा किए लिंक पर क्लिक करें सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ