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परसाई हास्य-व्यंग्य पखवाड़ा / बायोमेट्रिक प्रवेश पद्धति पर चिंतन / व्यंग्य / राजशेखर चौबे

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(परसाई हास्य-व्यंग्य पखवाड़ा - 10 - 21 अगस्त के दौरान विशेष रूप से हास्य-व्यंग्य रचनाओं का प्रकाशन किया जा रहा है. आपकी  सक्रिय भागीदारी अपेक्षित है.  )

 

बायोमेट्रिक प्रवेश पद्धति पर चिंतन

राजशेखर चौबे

    प्रयोगों का दौर चल रहा है।  वर्षा के लिए यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। बाबाओं और गुरू-घंटालों के पास प्रत्येक समस्या का समाधान मौजूद है। उनके ताबीज पहनने से कैटरीना से लेकर आलिया तक सभी आपके कदमों पर होंगी। प्रत्येक दिन अलग-अलग रंग के कपडे पहनने होंगे। सबसे अधिक बाबा हमारे देश में ही हैं और सबसे अधिक गरीबी, भ्रष्टाचार, अनाचार, कदाचार आदि भी हमारे देश में ही है। अच्छे प्रयोग भी किए जा रहे हैं। जैसे आनलाईन-एफ.आई.आर., टिकट बुकिंग, रिटर्न फाईलिंग आदि-आदि। इन्हीं प्रयोगों में से एक है-बायोमेट्रिक पहचान द्वारा कार्यालयों में प्रवेश। क्या-क्या होगा इससे। इसके द्वारा आप अंगूठा लगाकर कार्यालय में प्रवेश करेंगे और बाहर आ सकेंगे। आपके प्रत्येक बार आने-जाने और बाहर रहने का समय दर्ज होगा।


    राजनीति हमारा धर्म नहीं है परन्तु हरेक काम में राजनीति करना हमारा धर्म अवश्य ही है। इसी तरह इस पर भी राजनीति प्रारंभ हो गई है। कर्मचारियों का इस पर ऐतराज होना स्वाभाविक है । विपक्षी दल ने भी इस पर आपत्ति दर्ज की है। उनका कहना है कि जो काम हम दस वर्ष में नहीं कर सके हैं उस काम को दो वर्षं में करना, हमें नीचा दिखाने की साजिश है। सत्ता पक्ष व विपक्ष के सांसद इस बात पर एकमत हैं कि इसे किसी भी हालत में संसद में लागू न किया जाए।  बड़े अधिकारी चाहते हैं कि उन्हें इससे छूट दी जाए। प्रत्येक व्यक्ति इसे अच्छा मानता है परन्तु दूसरों के लिए ।


    ऊल-जलूल बयान देने में हमारे नेताओं का कोई सानी नहीं है। इन नेताओं की फिर से बन आई है। ऐसे ही एक नेता ने कहा -


    ‘‘कार्यालय में अंगूठा लगाकर प्रवेश। यह जनता को फिर से अनपढ़ बनाने की साजिश है। मैं अंगूठा लगाकर इस पर विरोध दर्ज कर रहा हूँ। आप भी ऐसा ही कीजिए।’’
    सरकार के अथक प्रयास से यदि इसे लागू कर दिया गया तो क्या होगा। आइए इस पर विचार करें:-


1.    अंगूठे पर कई मुहावरे हैं जैसे अंगूठा दिखाना, अंगूठे पर रखना आदि। इनके स्थान पर अंगूठा दिखाकर घुस जाना, अंगूठे के साथ सबका विकास, आदि का प्रयोग होने लगेगा ।
2.    कुछ होशियार लोग अपना डुप्लीकेट अंगूठा तैयार कर मजे में रहेंगे।
3.    कई लोग एकलव्य बन जाएंगे और अपना अंगूठा अपने चपरासी को सौंप देंगे।
4.    कुछ लोग मांग करेंगे कि इस मशीन को मूत्रालय व शौचालय के बाहर भी लगाया जाना चाहिए ताकि पता लगे कि इन जरूरी कार्यों के लिए कौन कितना समय लेता है।


पंचिंग कार्ड होने पर लोग कहते थे कि घर में भूल गया था। अब कोई यह नहीं कह सकता कि अंगूठा घर में भूल गया था।


एक नौजवान अफसर बनने के बाद गाँव लौटकर अपनी अफसरी के किस्से सुना रहा था तभी दादी ने पूछा -
    ‘‘बेटा आफिस में अंदर कैसे जाते हो?
    अफसर-‘‘अंगूठा लगाकर।’’


दादी - ‘‘मैंने तेरे बाप से पहले ही कह दिया था इसे पढ़ाने-लिखाने से कोई फायदा नहीं। रहेगा- अनपढ़ का अनपढ़ ही।  मेरी बात आज सही साबित हुई।’’


उपरोक्त वर्णित कारणों से सरकार ने निर्णय लिया है कि विजय माल्या के प्रत्यर्पण के बाद ही इसे लागू किया जाएगा ।

राजशेखर चौबे
रायपुर

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