बुधवार, 17 अगस्त 2016

प्रेरक गीत - विचार / अखिलेश कुमार भारती

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जीवन प्रबलता की नयी सोच

अपने इरादों को कुछ इस तरह बुलंद कर,

नयी जोश, नयी सोच, नयी राह, नयी चाह लेकर

कुछ नया कर गुजरने की हिम्मत लाया.

 

अब ना था परवाह किसी का, ना ही किसी का साथ,

अपने स्वाभिमान से अपने आत्मविश्वास में नया जोश भरने आया.

दुनिया को अब कुछ नया करके दिखाने आया.

 

करते रहेंगे अपने इरादों को बुलंद, अपने जोश और होश से,

इरादा है अटल, अब उम्मीदों के किरणों में नयी सोच लेकर,

दुनिया के अन्धकार में खुशियों के दीप जलाने आया.

जीवन पथ के संघर्ष में नया इतिहास बनाने आया.

कठिनता के डगर से जीवन संघर्ष को नया आयाम देने आया.

अपरिपक्वता से परिपूर्णता का ज्ञान लेने आया.

 

अपने इरादों को कुछ इस तरह बुलंद कर,

नयी जोश, नयी सोच, नयी राह, नयी चाह लेकर

दुनिया को कुछ नया करके दिखाने आया.

 

घिरे प्रलय की घोर घटा से, कदम मिलाकर बाधाओं से लड़कर,

उम्मीदों के किरणों में नयी सोच, नयी राह दिखाने आया.

खुशियों के दीप में मानवता का सन्देश लाया

बढ़ते हुए कदम से एक नया सवेरा लाया.

 

अंधकार से प्रकाश के विभोर में, जीवन रहस्य का मोल बताया.

नयी जोश, नयी सोच, नयी राह, नयी चाह लेकर

दुनिया को कुछ नया करके दिखाने आया.

 

अपने इरादों को कुछ इस तरह बुलंद कर

दुनिया को सम्पूर्णता में जोड़ने का संकल्प लाया.

कदम से कदम मिलाकर जीवन मोल का बोध कराया.

नयी जोश, नयी सोच, नयी राह, नयी चाह लेकर,

कुछ नया कर गुजरने की हिम्मत लाया.

--

प्रेरणात्मक- विचार

(१) आध्यात्मिक शक्तियों के लहरो से आतंरिक भावचेतना के जीवन साधना में नया संस्कार पैदा होता है |

(२) जिस किसी मानव /जीव ने प्रमाणिकता की कसौटी से खरे, उतरे है, वही अंतरात्मा की अनुभूति को छू सकता है |

(३) हमारे समाज में आने वाले नश्ल/वंशज का प्रेरणास्रोत, सामाजिक, सांस्कृतिक जनचेतना एवम आतंरिक शुद्धिकरण का वीज बोना है |

(४) समाज में विराजमान निःस्पृय, निस्वार्थ, निच्छल, समाज- सेवियों, चिंतकों से हमेशा हमें नयी चेतना एवम् प्रेरणा मिलती है |

(५) सदैव सकारात्मक पहलू विद्धवता का परिचायक है |

(६) बड़ा आदमी बनना आसान हो सकता है, अपितु बड़प्पन एवम् अपनत्व अपने अंदर लाना उतना ही कठिन है |

(७) इंसान की खोज में समय व्यर्थ न करो, अपितु इंसानियत की महत्व को अपने अंदर खोजे, स्वयं सच्चा इंसान आपको मिल जायेगा |

(८) हम अक्सर बाहरी सुंदरता देखकर अचंभित एवम् आशंकित हो जाते है,बगैर जाने -समझे की असली सुंदरता, आत्मकोमलता एवम पवित्र ह्रदय से होता है |

(९) किसी की बुराई से न डरो, अपितु अपने अच्छाई से उसकी बुराई को ख़त्म करें, बड़प्पन एवं मर्यादा यही है |

(१०) अच्छे बनने की होड़ में अपने अच्छाई को कतई पीछे न छोड़ना, नहीं तो बुराई आगे आकर आपकी अच्छाई को नष्ट कर देगी, जो आपके जीवन मूल्यों को ख़त्म कर देती है |

AKHILESH KUMAR BHARTI(Akhilesh.bharti59@gmail.com)

JUNIOR ENGINEER-ELECTRICAL (MPPKVVCL, JABALPUR)

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