मंगलवार, 16 अगस्त 2016

परसाई हास्य-व्यंग्य पखवाड़ा : गाय के बच्चे और आदमी के / व्यंग्य / शशिकांत सिंह 'शशि'

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(परसाई हास्य-व्यंग्य पखवाड़ा - 10 - 21 अगस्त के दौरान विशेष रूप से हास्य-व्यंग्य रचनाओं का प्रकाशन किया जा रहा है. आपकी  सक्रिय भागीदारी अपेक्षित है.  )

गाय के बच्चे और आदमी के

व्यंग्य

शशिकांत सिंह 'शशि'

गाय का बच्चा आदमी के बच्चे का मजाक उड़ा रहा था-'' अबे, तू कीचड़ में खेलता है। झोपड़े में रहता है। फटे पुराने कपड़े पहनता है। आधा पेट खाता है। भीख मांगता है। तेरी रक्षा करने कोई नहीं आता। जबकि तेरे पास तो वोट भी है जिसकी जरूरत हर नेता को है। राजनीति में फिर भी तेरी औकात दो पैसे की नहीं है। तू लावारिस-सा रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड या बदनाम बस्तियों में घूमता रहता है और किसी लॉरी के नीचे आकर मर जाता है। हमें देख भारत की सारी राजनीति हमारे चारों ओर घूम रही है। प्रधानमंत्री मेरे बारे में बोले। बुद्धिजीवी मुझ पर जान देते हैं। कांगेस सेवादल मेरे नाम पर सड़क पर आया। साधु-संत मेरे नाम पर धरने पर बैठे। तू इतना बेचारा क्यों है बे ?''

आदमी का बच्चा ताव खा गया। अकड़ के बोला-

-'' तू रहेगा जानवर का जानवर ही। अबे, तू भी सड़क पर मैं भी सड़क पर। इस नाते तो सचमुच हम भाई हैं। तेरी मां तो वाकई मेरी माता है क्योंकि कभी-कभी मैं उनकी दूध निकाल कर पी लेता था। तू जिन बयानबाजियों पर अकड़ रहा है वह अखबारों की सुर्खियों के लिए हैं। यूपी और पंजाब के चुनाव हो जाने दे फिर तेरी कोई बात भी नहीं करेगा। हमारी राजनीति में भगवान तक को इस्तेमाल किया गया है। तेरे जन्म से पहले की बात है। यूपी में मंदिर बनाने का आंदोलन चलाया गया था। हो सकता है कि चुनाव नजदीक आने पर मंदिर पर बयान भी आने लगें। मंदिर बनेगा नहीं। मस्जिद गिरा कर मुद्दा पहले ही खो चुके हैं। तो मेरे भाई बछड़े अधिक मत कूद और यह अखबार पढ़ने की आदत से बाज आ जा। न्यूज कम जानेगा तो अधिक सुखी रहेगा। नहीं तो अपना पड़ोसी भी दुश्मन नज़र आने लगेगा। भूसे में ज़हर की आशंका होने लगेगी। फिर मत कहना कि आदमी के बच्चे ने बताया नहीं।''

गाय के बच्चे हंसने लगे। उन्हें आदमी के बच्चे पर दया आ रही थी। उन्होंने उसे फिर छेड़ा-'' तू जल रहा है। हमारी उन्नति से तुझे जलन हो रही है। भारतीय राजनीति के हम केंद्र में आ गये। तू पहले नारों में आया तो करता था। अब तो एकदम से गायब हो गया। इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के जमाने में कम से कम नारे और योजनाओं में तेरी शक्ल दिख जाती थी अब तो वह भी गायब हो गई। बेटा तू तो गया। तू अब हमारी गोबर उठा। हमें साबुन लगाकर नहला। हमारे सामने पालक घास रख। उसके बाद हम तो पंखे के नीचे सो जायेंगे और तू बाहर रखे बेंच पर सोना। रात भर मच्छर तेरे खून की जांच करेंगे। हा हा हा। ''

आदमी का बच्चा मायूस हो गया। उसने अंतिम जोर लगाया।

-'' तू उड़ ले जितना उड़ना है। बूढ़ी गायों की क्या कद्र होती है। कसाई के हाथों बेचा जायेगा। कसाई क्या तेरी पूजा करेगा ? उस समय तेरे रक्षक आगे नहीं आयेंगे। कोई यह नहीं कहेगा कि यह बूढ़ी गाय मैं गोद ले रहा हूं। सड़क पर भटक कर पॉलिथीन खाकर मरने वाले अपने भाइयों से पूछ उनकी क्या दशा है ?

शशिकांत सिंह 'शशि'

मोबाइल-7387311701

इमेल- skantsingh28@gmail.com

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