मंगलवार, 30 अगस्त 2016

आइडियल डैड वि. अड़ियल डैड / व्यंग्य / गणेश सिंह

देखिये, ये जो हमारा इण्डिया है न इसमें मुख्यतः दो तरह के डैड पाये जाते हैं। एक आइडियल डैड जो बड़े - बड़े शहरों में होते हैं और दूसरा अड़ियल डैड जो गाँव देहात में होते हैं।

आइडियल डैड काफी फ्रेंडली होते हैं अगर उनका बच्चा कुछ गलती करे तो सॉफ्टली "सॉरी" बोलने को बोलते हैं। मार्क्स कम आये तो प्यार से "कॉन्फिडेंस बूस्टअप" करते हैं। बच्चा कोई प्राइज जीते तो कहीं घूमने का प्रॉमिस" करते हैं वहीँ इसके विपरीत अड़ियल डैड काफी खूंखार और हिंसक प्रवृति के होते हैं अगर गलती से बच्चे से कुछ शरारत हो जाये तो जमके कुटइया करते हैं।

आइडियल डैड से बच्चे "डिस्कशन" और "डिबेट" करते हैं वहीं अड़ियल डैड से आप भर मुंह खुलके बात भी नहीं कर सकते वरना बत्तीसी ऑड या इवन कोई भी नम्बर में बाहर आ सकती है केजरीवाल जी के कार पर्यावरण नियम का उल्लंघन करते हुए।

आइडियल डैड अपने बच्चों के साथ "जोक्स शेयर" करते हैं साथ में हँसते है "फन" करते हैं वहीँ अड़ियल डैड इनसब चीजों को भारतीय संस्कृति के विरुद्ध मानते हैं।
आइडियल डैड से बच्चे टीवी रिमोट के लिए लड़ बैठते हैं वहीँ इसके उलट किसी का क्या मजाल की कोई अड़ियल डैड से आँख भी मिला ले लड़ना तो दूर की बात है, भूतो न भविष्यति।

आइडियल डैड जब कभी गुस्सा होते हैं तो अंग्रेजी में "व्हाट द हेल इज दिस!! शीट!! शीट!!! इडियट " आदि बोलकर रुक जाते हैं वहीं अड़ियल डैड गुस्सा होने पर धुयाँधार भोजपुरी में राम-भजन सुनाते हुए कुछ शारीरिक श्रम लपड़म-थपड़म आदि कर जाते हैं।

आइडियल डैड अपने बच्चों को सोसाइटी पार्क में साईकिल सिखाते हैं। सिखने के दरम्यान अगर थोड़ी सी भी खरोच आ जाए तो फर्स्ट एड करते हैं या डॉक्टर के पास ले जाते हैं l वहीं अड़ियल डैड के डर से बच्चे चोरी-छुप्पे गाँव के किसी प्रतिबंधित क्षेत्र खलिहान,पोखर का ढलान आदि जगहों पर साईकिल सीखते हैं। इसमें भी अगर सीखने के दरम्यान कहीं कट-फट जाता है और अड़ियल डैड को पता चल जाता है तो जमकर थुरईया करते हैं "फर्स्ट एड" और "चिकत्सीय उपचार" के नाम पर ।

कोई आगंतुक मिलने पर आइडियल डैड अपने बच्चे को "हाय, अंकल! हाउ आर यू" कहने को कहते हैं वहीं अड़ियल डैड "पाँव छूकर परनाम" करने को कहते हैं।

भारत निर्माण में आइडियल डैड से कहीं ज्यादा अड़ियल डैड का योगदान रहा है। अड़ियल डैड को ये भय बना होता की कहीं उनका बच्चा बिगड़ न जाए इसलिए इतनी कठोरता व शख्ती रखते हैं ।

अब हमारा भारत इण्डिया बन रहा है। गांवों का शहरीकरण और नवीनीकरण हो रहा है। अब अड़ियल डैड न के बराबर बचें है।जो बचे भी हैं वो टीवी,अखबार,मोबाईल आदि के माध्यम से आइडियल बन रहे हैं। पता नहीं जो संस्कार,अनुशासन और भावुकता का सृजन अड़ियल डैड की अनेकों पीढ़ियों ने साधनों व विकल्पों के अभाव में खुद को जला कर - तपा कर किया है उसका क्या होगा ?

खैर, बदलते इण्डिया को आइडियल डैड मुबारक!!! :)

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