मंगलवार, 27 सितंबर 2016

हिन्दी व्यंग्य में अनोखा प्रयोग : व्यंग्य की जुगलबंदी

हिंदी साहित्य में व्यंग्य को लेकर बहुत ज्यादा प्रयोग देखने को नहीं  मिलते है और  जो  अभी तक हुए है उनका भी सही से मूल्याकन नहीं हो पाया है ...

सोमवार, 26 सितंबर 2016

कहानी - तेज़ाब - विनीता शुक्ला

-- अदालत की कार्यवाई शुरू होने वाली थी. मयंक पाल की आँखें भर आईं. रह रहकर उन्हें वो दृश्य याद आ रहा था- जब उनके कलेजे का टुकड़ा, उनकी बिट...

कहानी - फिर एक बार - विनीता शुक्ला

फैक्ट्री का सालाना जलसा होना था. तीन ही सप्ताह बच रहे थे. कायापलट जरूरी हो गया; बाउंड्री और फर्श की मरम्मत और कहीं कहीं रंग- रोगन भी. आखिर ...

कहानी - अनुत्तरित प्रश्न - विनीता शुक्ला

वह तथाकथित जिम सीलन से भरा था. जमीन पर बिछा, टाट के बोरे जैसा कारपेट, हवाओं में रेडियो मिर्ची के सुरों की धमक और यहाँ वहां उड़ने वाले पसीने ...

बाल कहानी - सूजी-पोपो और जन्मदिन की पार्टी - उपासना बेहार

  घूंधराले वालों वाली सूजी एक प्यारी सी बच्ची थी. वह कक्षा 4 में पढ़ती थी. एक दिन सूजी अपने दोस्त अकबर के घर गई तो देखा कि उसके हाथ में सफे...

हास्य कविता - एक तरफ़ा प्यार - सूर्यकुमार पांडेय

सूर्यकुमार पांडेय की हास्य कविता -"एकतरफ़ा प्यार"   इक चाँदनी-सी लड़की, स्मार्ट दिख रही है  वह दूर देश से ख़त 'इन्बॉक्स'...

शनिवार, 24 सितंबर 2016

सुशील शर्मा के हाइकु

हाइकू -24 गौरैया सुशील शर्मा चोंच में दाना उठा उड़ी गोरैया चुगाती चूजे। कब आओगी गौरैया मेरे द्वार दाना चुगने। पेड़ पर है तिनकों का घोंसला ...

लघु कथाः वफादारी / गिरधारी राम

एक कूड़ा बिनने वाला लड़का कोई चौदह-पंद्रह साल का होगा मैले-कुचले, फटे कपड़े पहन रखा था। शाम के समय कूड़ेदान के आस-पास कूड़ा बिन रहा था। उसक...

सूर्यकुमार पांडेय की हास्य बाल कविताएँ

1 बछड़ा बोला गाय से- दूध नहीं पीना मुझको काम चलेगा चाय से। 2 बिल्ली बोली शेर से- सही समय पर आओ स्कूल क्यों आते हो देर से? 3 बंदर बोला भेड़ ...

सफ़ेद दाग़ / कहानी / क़ैस जौनपुरी

क़ैस जौनपुरी qaisjaunpuri@gmail.com +91 9004781786 09:05am, 17 June 2016 कहानी सफ़ेद दाग़ इला बड़ी देर से बस के आने का इन्तज़ार कर रही थी. काफ़...

गुरुत्व (व्यंग्य-कविता)-प्रदीप कुमार साह

गुरुत्व (व्यंग्य-कविता)-प्रदीप कुमार साह (psah2698@gmail.com) जब निष्कपट निज कर्म करो तब बनो स्वभिमानी. मत बनो इतना अभिमानी, शर्म करो कि...

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