गुरुवार, 15 सितंबर 2016

लंच प्लेट : कुल 35 मिनट का खेला है साहब/साहिबा - विनीत कुमार

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Vineet Kumar

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#बैचलर्सकिचन लंच प्लेट : कुल 35 मिनट का खेला है साहब/साहिबा :

आपके पास समय बहुत कम हो या फिर हो भी तो दूसरे जरूरी काम के लिए..लेकिन हसरत है कि हवा पीकर भले ही रह जाएं लेकिन लंच में कढ़ी-चावल के अलावा कुछ और नहीं, नहीं तो नहीं.

ऐसे में आप बहुत ज्यादा तनाव न लें. मदर डेयरी की दस रूपये में पांच सौ एमएल छाछ के पैकेट आते हैं. उसका आधा हिस्सा लें. उसमे डेढ़ चम्मच बेसन मिलाएं. एक ग्लास पानी और साथ में हल्दी, नमक, धनिया पाउडर. सबको खूब अच्छे से मिला लें.

ज्यादा पकौड़े-सकौड़े के चक्कर में मत पड़िए..जैसे पूनम( Poonam Sharma) नहीं पड़ती है. उसकी बनायी कढ़ी तो कस्तूरी मेथी पर ऐसी टिकी होती है कि एक बार आपने जो खा लिया तो समझो हरियाणा-पंजाब-दिल्ली फ्लाइओवर का सुख मिल जाएगा. खैर,

पकौड़ के बदले जब कढ़ी अच्छे से पक जाए तो तकरीबन बीस ग्राम बूंदी डाल दें. पकौड़े जैसा सुख मिलेगा.

इधर दूसरे बर्नर पर चावल तब तक तैयार. हां चावल बनाते समय उसमे दो-तीन लौंग डाल दें. तैयार होने पर उसकी खुशबू बिल्कुल अलग होगी. दोनों चीजें बनने के बीच दो आलू काट लें, भुजिया के लिए और सैलेड में खीरा, प्याज, स्वीटकार्न और टमाटर. उपर से खाते वक्त अपनी पसंद की साउस डाल सकते हैं.

आलू भुजिया में कालीमिर्च की डस्ट बनाकर डालें. ये मौसम ऐसा है कि गला खराब हो जाने की शिकायत आम बात है. खाने में कालीमिर्च, दालचीनी, लौंग, तुलसी जैसी चीजें किसी न किसी रूप में जाए तो बेहतर होगा.

पापड़ जिस अंदाज में मैं पकाया करता हूं, सरजी(Vijender Masijeevi) को इस तरह की चोंचलेबाजी पसंद नहीं. लेकिन रोल करके पापड़ पकाने का जो सबसे लाभ और सुविधा है कि खाते वक्त पापड़ का एक भी टुकड़ा फर्श पर गिरता नहीं और न ही मुंह को बहुत ज्यादा खोलने की जरूरत पड़ती है. देखने में अच्छा और कम जगह तो खैर घेरता ही है.

बीच में कोई फोन कॉल-दरवाजे की घंटी न बजे तो ये सब करने में कुल पैंतीस मिनट लगेंगे और फेसबुक के लिए तस्वीर खींचने में पांच मिनट और रख लो. सारी तस्वीर अपलोड करके पहले खा लो. एक राउंड लाइक-कमेंट्स इन पर आ जाए तो फिर लिटरेचर लिख डालो..और वैसे भी पेट भर जाने के बाद लिखने का सुख अलग ही है..

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