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कैलाश मंडलोंई की कविताएँ

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(1)
श्रम सीकर से लथपथ चेहरे...
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सिंची फसलें
अपना खून बना पसीना
बना रक्त
अन्न कणों में उसका पसीना
स्वाद वही मिट्टी का,
क्या तुम पहचान सकोगे?
श्रम सीकर से लथपथ चेहरे
क्या इनको तुम पहचान सकोगे?
वे डरे सहमे, कर्म करें
जब मेघ बजे दादुर चमके
हम उल्लास मनाते है
कीचड़ कालिख से सने हाथ
हम साफ पाक हो जाते है
भीषण अग्नि में तप-खप
अन्न कण उपजता
श्रम की महिमा उनकी
क्या तुम पहचान सकोगे?
श्रम सीकर से लथपथ चेहरे
क्या इनको तुम पहचान सकोगे?
आओ इनको समझे जाने
इनकी पीढ़ा को पहचाने
इनको भी सम्मान चाहिए
इनके श्रम का दाम चाहिए
आओ इनको गले लगाए,
इनके घर आँगन भी सजाए
आपदा विपदा इनकी,
क्या तुम पहचान सकोगे?
श्रम सीकर से लथपथ चेहरे
क्या इनको तुम पहचान सकोगे?
 

(2)
उम्र के पड़ाव पर...
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थकित
त्रासित मन
थुलथुल तन
छाया कोहरा
अब समझ में आया उम्र के पड़ाव पर।
यादों के
धुंधलके से झुककर
उम्र के ढलान को देखा
लेख जोखा जीवन का
व्यर्थ जिया जीवन
अब समझ में आया उम्र के पड़ाव पर।
अविलंब
होश में आया
पाया, क्या खोया
क्या सपना, क्या अपना
अर्थ हीन जीवन जिया
अब समझ में आया उम्र के पड़ाव पर।

 
(3)
व्यथित मन
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निहारती 
थकी आँखें
अपने में परायापन
जैसे अनाथ बच्चा
खड़ा व्यथित, मन के सूने आँगन।
जठराग्नि,  
प्रेम की सूखी आँतें
पिचकी विश्वास की दीवार
कभी बिलखता कभी सिसकता
खड़ा व्यथित, मन के सूने आँगन।
जलजात, 
प्रेम प्यास से सूखी बेल
तरसती सहानुभूति जल को
अपने ही अश्रु जल सिंचें
खड़ा व्यथित, मन के सूने आँगन।

 


(4)
उसका रहस्य...
-----------------  
उजाला
अँधेरे में
चला जा रहा 
सन्देह दिखाई देता,
मुस्कराता कोई
गहरी चोट कर रहा
विक्षोभ वातावरण में
समय की असुरता को दुर्बल बनाने
उस समय उसके विरुद्ध
मेरे हृदय में घृणा का फोड़ा फूट पड़ता। 
हम
दो साथी,
भिन्न प्रकृति के,
भिन्न गुण-धर्म के,
भिन्न दशाओं के,
रहस्यपूर्ण
मैं जो स्वयं था
वह स्वयं हो गया उसका रहस्य
उस समय उसके विरुद्ध
मेरे हृदय में घृणा का फोड़ा फूट पड़ता।
मैं हतप्रभ
निर्जन अरण्य-प्रदेश
कितना भिन्न,
कितना अलग सूनापन
वह मुझे बहुत ही
रहस्यपूर्ण मालूम होता
अँधेरे, चालाक रोशनी
अजीब उसका रहस्य
उस समय उसके विरुद्ध
मेरे हृदय में घृणा का फोड़ा फूट पड़ता।
किन्तु
छा गयीं
मिट्टी की तह पर तह,
परतों पर परतें,
चट्टानों पर चट्टानें
स्थिर प्रशान्त
पाषाण-मूर्ति की भाँति
अनजानी अन-पहचानी आकृति
अजीब उसका रहस्य
उस समय उसके विरुद्ध
मेरे हृदय में घृणा का फोड़ा फूट पड़ता।

 

नाम  -- कैलाश मंडलोंई                                              
पिता --    श्री नानूराम मंडलोंई
पद  :- सहायक शिक्षक
पदस्थ संस्था का नाम : कन्या. मा. वि. रायबिड़पुरा
  विकास खण्ड जिला खरगोन (मध्यप्रदेश)
जन्म दिनांक :- 16-06-1967
  शिक्षा     :- एम. ए. हिन्दी,डी.एड.
    अन्य योग्यता - 1-बेसिक स्काउट मास्टर्स कोर्स
                 2-एडवांस कोर्स
                3- संयुक्त सचिव प्रशिक्षण स्काउट
विशेष कार्य एवं रुचि- वृक्षारोपण शाला परिसर मे 1000 पौधों का वृक्षारोपण कर एक गार्डन तैयार किया।
अन्य शैक्षिक गतिविधियाँ
     इसके साथ अन्य दूसरी गतिविधियाँ भी चलती रही जैसे अतिरिक्त समय में 6,7.व 8 कक्षा के छात्र/छात्राओ को पढ़ाना तथा सुबह 6 बजे से 7.30 बजे तक योग की कक्षाऐं लगाना। योग की कक्षा में हाईस्कूल के बच्चे भी आते है ये कक्षाऐं मैं अक्टूम्बर, नवम्बर एवं दिसम्बर माह में लगता हूँ.
शैक्षिक सामग्री का निर्माण व प्रदर्शन
600 से अधिक विज्ञान एवं गणित के माडलों का निर्माण वह भी अनुपयोगी वस्तुओं से,1000 से अधिक कटाउट्स,1000 से अधिक चार्ट,अख़बार की कटिंग जिसमें खाली माचिस डिबिया,खाली खोखे,रिफिल,पेन के ढक्कन,खाली टुथपेस्ट,प्लास्टिक पन्नियाँ,सइकिल रबरट्यूब,टपरीकार्डर की मोटरे,लकड़ी के गत्ते से बने माडल आदि
अन्य शालाओं के छात्र/छात्राओं को अपनी शाला में बुलाकर विज्ञान/ गणित माडलों का प्रदर्शन करना। वाद-विवाद प्रतियोगिता, निबन्ध प्रतियोगिता, सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन करना व विभिन्न राष्ट्रीय एवं सांस्कृतिक दिवसों तथा महापुरुषों के जन्म दिनों पर ग्राम के लोगों एवं अन्य संस्था के कर्मचारियों को एकत्रित कर संगोष्ठियों का आयोजन करना।
लेखन कार्य- कविता, शैक्षिक लेख, गायन में रुचि, पुस्तकें पढ़ने का शौक
(1) शैक्षिक दखल पत्रिका के जुलाई 2016 अंक में लेख प्रकाशित
(2) शैक्षिक दखल पत्रिका के जुलाई 2016 अंक की समीक्षा लेखक मंच पर प्रकाशित
(3) हस्ताक्षर वेब पत्रिका में आलेख प्रकाशित    
विशेष पुरस्कार : 1- जिला स्तर पर कलेक्टर द्वारा सम्मानित
               2-जिला स्तर पर पर्यावरण पर सम्मानित
स्थाई पता  : मु. पो.-रायबिड़पुरा तहसील व जिला- खरगोन (म.प्र.)
पिनकोड न.451439
    मोबाईल नम्बर-9575419049
ईमेल ID-kelashmandloi@gmail.com

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