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व्यंग्य - चमत्कार को नमस्कार - राजशेखर चौबे

चमत्कार को नमस्कार

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आजकल कई कलियुगी शब्दों का ईज़ाद किया जा चुका है । जैसे गांधीगिरी, डेटागिरी आदि आदि । युवाओं के पास भले ही चड्डी या रोटी न हो परन्तु डाटा पैक अवश्य ही चाहिए । उनके पास चड्डी या रोटी न हो तो किसी को पता नहीं चलेगा परन्तु डाटा पैक न हो तो सबको तुरन्त ही पता चल जाएगा । इस अपरिहार्य वस्तु का महत्व भांप कर मुकेश जी ने जियो की लान्चिग कर दी है । इस जियो से कौन जिएगा और कौन मरेगा यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा । पुरानी फिल्म, का एक माना है 'दादागिरी नहीं चलने की यहाँ .......'। इस गाने को लालू जी इस तरह गाएगें ' डेटागिरी नहीं चलने की यहाँ, ये है बिहार मेरी जान । डेटागिरी पहले लाँच हो जाती तो अवश्य ही हमारी बेटियों सिंधु और साक्षी को मेडल लेते मोबाइल पर ही हम दर्शन कर पाते । खैर अभी लोगों ने मदर टेरेसा की संत की उपाधि प्रदान किये जाने का समारोह मोबाइल पर लाईव देखा ।

मैंने पढ़ा कि कम से कम दो चमत्कार होने पर ही वेटिकन द्वारा संत की उपाधि दी जा सकती है । आखिर ऐसा क्यों ? मदर टेरेसा ने लाखों लोगों की सेवा की थी । दो चमत्कारों का महत्व क्या इस सेवा से अधिक है । मैं सोचता था कि हम हिंदु ही पुरातन पंथी हैं परन्तु यह जान कर प्रसन्नता हुई कि दूसरे धर्म भी हमारी बराबरी पर खड़े हैं । अच्छा है कि दो चमत्कारों का नियम हमारे यहाँ नहीं है । हमारे देश में प्रत्येक गली में कम से कम एक चमत्कारी पुरूष अवश्य ही होगा, इन गलियों में 3 इडियट वाले कई चमत्कारी पुरूष मिल जाएगें । ये चमत्कारी पुरूष बाबा के नाम से जाने जाते हैं । बाबा हवा में भभूत, घड़ी, अंगूठी आदि यानी कुछ भी पैदा कर सकते हैं । सरकार को इन बाबाओं से कांट्रेक्ट कर सोना व अमेरिकन डॉलर पैदा करवाना चाहिए ताकि देश की गरीबी दूर हो सके । एक बाबा गोलगप्पे और समोसा खिलाकर चमत्कार का दावा करते हैं । उन्हें अपने भक्तों को हाजमोले की गोलियां भी प्रदान करनी चाहिए ।

सभी देशों व धर्मो के लोग चमत्कारों की आशा रखते हैं । मुझे लगता है कि हमारे देश में चमत्कार को मानने वाले और इसकी आशा रखने वाले सबसे अधिक है । हम जंगल में यदि भटक जांए तो यह नहीं सोंचेगे कि खाना व पानी कहाँ से मिलेगा बल्कि यह सोचेंगे काश कैटरीना या अनुष्का मिल जाए । हमें लगता है कोई चमत्कारी नेता आएगा और जादू का डंडा घुमाकर देश की गरीबी, भुखमरी, बेरोजगारी, दूर कर देगा परन्तु ऐसा कुछ होने वाला नहीं है ।

हमें यह सोचना है कि भगवान ने हमें जो मनुष्य का अवतार दिया दो हाथ, दो पैर दिमाग और पूरा शरीर दिया है यह किसी चमत्कार से कम नहीं । हम क्यों चमत्कार की ओर भागते हैं ? यह हमारी कमजोरी और पलायनवाद है । हमारे शरीर में इतनी ताकत है कि हम बिना किसी चमत्कार के भी जो चाहे वह कर सकते हैं । देश सेवा, मानव-मात्र की सेवा कर सकते हैं और अकिंचनों का दुख-दर्द दूर कर सकते हैं । जैसा कि मदर टेरेसा एवं अन्य महापुरूषों जैसे महात्मा गांधी, गौतम बुद्ध, महावीर, गुरूनानक देव आदि ने किया । अन्य क्षेत्रों में भी चमत्कार कर सकते हैं जैसे अंबानी ने दादागिरी से डेटागिरी प्रारंभ कर दी है । अतः चमत्कार को नमस्कार करने की जरूरत नहीं है जरूरत है अपनी ताकत व शक्ति को पहचानने की इससे ही देश का भला होगा अन्यथा नहीं ।

राजशेखर चौबे

रायपुर

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