व्यंग्य - चमत्कार को नमस्कार - राजशेखर चौबे

--- विज्ञापन ---

----------- *** -----------

चमत्कार को नमस्कार

image

आजकल कई कलियुगी शब्दों का ईज़ाद किया जा चुका है । जैसे गांधीगिरी, डेटागिरी आदि आदि । युवाओं के पास भले ही चड्डी या रोटी न हो परन्तु डाटा पैक अवश्य ही चाहिए । उनके पास चड्डी या रोटी न हो तो किसी को पता नहीं चलेगा परन्तु डाटा पैक न हो तो सबको तुरन्त ही पता चल जाएगा । इस अपरिहार्य वस्तु का महत्व भांप कर मुकेश जी ने जियो की लान्चिग कर दी है । इस जियो से कौन जिएगा और कौन मरेगा यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा । पुरानी फिल्म, का एक माना है 'दादागिरी नहीं चलने की यहाँ .......'। इस गाने को लालू जी इस तरह गाएगें ' डेटागिरी नहीं चलने की यहाँ, ये है बिहार मेरी जान । डेटागिरी पहले लाँच हो जाती तो अवश्य ही हमारी बेटियों सिंधु और साक्षी को मेडल लेते मोबाइल पर ही हम दर्शन कर पाते । खैर अभी लोगों ने मदर टेरेसा की संत की उपाधि प्रदान किये जाने का समारोह मोबाइल पर लाईव देखा ।

मैंने पढ़ा कि कम से कम दो चमत्कार होने पर ही वेटिकन द्वारा संत की उपाधि दी जा सकती है । आखिर ऐसा क्यों ? मदर टेरेसा ने लाखों लोगों की सेवा की थी । दो चमत्कारों का महत्व क्या इस सेवा से अधिक है । मैं सोचता था कि हम हिंदु ही पुरातन पंथी हैं परन्तु यह जान कर प्रसन्नता हुई कि दूसरे धर्म भी हमारी बराबरी पर खड़े हैं । अच्छा है कि दो चमत्कारों का नियम हमारे यहाँ नहीं है । हमारे देश में प्रत्येक गली में कम से कम एक चमत्कारी पुरूष अवश्य ही होगा, इन गलियों में 3 इडियट वाले कई चमत्कारी पुरूष मिल जाएगें । ये चमत्कारी पुरूष बाबा के नाम से जाने जाते हैं । बाबा हवा में भभूत, घड़ी, अंगूठी आदि यानी कुछ भी पैदा कर सकते हैं । सरकार को इन बाबाओं से कांट्रेक्ट कर सोना व अमेरिकन डॉलर पैदा करवाना चाहिए ताकि देश की गरीबी दूर हो सके । एक बाबा गोलगप्पे और समोसा खिलाकर चमत्कार का दावा करते हैं । उन्हें अपने भक्तों को हाजमोले की गोलियां भी प्रदान करनी चाहिए ।

सभी देशों व धर्मो के लोग चमत्कारों की आशा रखते हैं । मुझे लगता है कि हमारे देश में चमत्कार को मानने वाले और इसकी आशा रखने वाले सबसे अधिक है । हम जंगल में यदि भटक जांए तो यह नहीं सोंचेगे कि खाना व पानी कहाँ से मिलेगा बल्कि यह सोचेंगे काश कैटरीना या अनुष्का मिल जाए । हमें लगता है कोई चमत्कारी नेता आएगा और जादू का डंडा घुमाकर देश की गरीबी, भुखमरी, बेरोजगारी, दूर कर देगा परन्तु ऐसा कुछ होने वाला नहीं है ।

हमें यह सोचना है कि भगवान ने हमें जो मनुष्य का अवतार दिया दो हाथ, दो पैर दिमाग और पूरा शरीर दिया है यह किसी चमत्कार से कम नहीं । हम क्यों चमत्कार की ओर भागते हैं ? यह हमारी कमजोरी और पलायनवाद है । हमारे शरीर में इतनी ताकत है कि हम बिना किसी चमत्कार के भी जो चाहे वह कर सकते हैं । देश सेवा, मानव-मात्र की सेवा कर सकते हैं और अकिंचनों का दुख-दर्द दूर कर सकते हैं । जैसा कि मदर टेरेसा एवं अन्य महापुरूषों जैसे महात्मा गांधी, गौतम बुद्ध, महावीर, गुरूनानक देव आदि ने किया । अन्य क्षेत्रों में भी चमत्कार कर सकते हैं जैसे अंबानी ने दादागिरी से डेटागिरी प्रारंभ कर दी है । अतः चमत्कार को नमस्कार करने की जरूरत नहीं है जरूरत है अपनी ताकत व शक्ति को पहचानने की इससे ही देश का भला होगा अन्यथा नहीं ।

राजशेखर चौबे

रायपुर

--- विज्ञापन ---

----------- *** -----------

_____________________________________

0 टिप्पणी "व्यंग्य - चमत्कार को नमस्कार - राजशेखर चौबे"

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.