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लघु कथा /आख़िर क्यों / गिरधारी राम

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शादी के मौके पर छप्पन भोग पकवान बना हुआ था। एक तरफ स्टाल पर नाश्ते के लिए करीने से फुचका, आलू की टिकिया, चाट, दोसे, चाऊमिन और फ्रेंच फ्राई रखा हुआ था। दूसरी तरफ डिनर के लिए चार तरह की रोटियां मिस्सी रोटी, रुमाली रोटी, नान तथा तन्दूरी रोटी स्टाल पर रखा हुआ था। तीसरी तरफ सलाद के स्टाल थे जिसमें फ्रूट सलाद, खीरे का सलाद, बड़ी-बड़ी प्लेटो में सजे हुए थे तथा साथ में अचार की बहुत सारी किस्में भी। एक दूसरी तरफ एक लम्बे से स्टाल पर स्पीरिट लैंप जल रहे थे, उन पर सोने जैसे मध्यम आकार की हँडिया रखी हुई थी। उन बरतनों में बासमती चावल, राजमा, दही बड़े, दाल फ्राई, फूल गोभी कोरमा, मिक्स सब्जी, पनीर और मशरूम की सब्जी तथा बड़े से तवे पर भरवाँ बैंगन, परवल, शिमला मिर्च, भिण्ड़ी, करेला, रखा हुआ था।

एक दूसरी तरफ मिठाईयों के स्टाल लगे हुए थे। जैसे रबड़ी-मलाई, इमरती, गाजर के हलवे, रसगुल्ले और गुलाब जामुन। और एक तरफ आईसक्रिम, कुल्फी-मलाई रखे हुए थे। कोने में क्राकरी तथा मिनरल वाटर रखे हुए थे।बड़े से लान में निली मध्दिम रोशनी में सारे स्टाल मनोरम लग रहे थे।

शाम को नौ बजे द्वार पूजा का कार्यक्रम हुआ। बारातियों का स्वागत फूल माला के साथ हुआ। सभी बाराती बड़े से हाल में प्रवेश किये। वहाँ पहले से ही जयमाला का प्रबंध किया गया था। करीब शाम के नौ बजकर तीस मिनट होने के थे। इधर जयमाला का कार्यक्रम आरंम्भ हुआ और उधर खाने का भी प्रोगाम एक साथ चालू हुआ। बाराती, घराती, तथा आमंत्रित मेहमान सभी कोई बड़े से लान की ओर दौड़े।

राहुल बाराती की तरफ से निमंत्रित था। कुछ लोगों ने कहा कि आप खाना खा लीजिए। राहुल भी खाना खाने के लिए लान की तरफ गया। राहुल ने देखा कि अधिकतर लोग खाने की प्लेट लेकर खाना लेने के प्रयास में धक्का-मुक्की कर रहे थे। कुछ लोग खाने का छक-कर आनंद ले रहे थे। अनेक लोग प्लेट में अधिक खाना लेकर कम खा रहे थे और बर्बाद ज्यादा कर रहे थे। कुछ अच्छे भी थे जो खाने को बर्बाद बिल्कुल नहीं कर रहे थे। अधिकतर बच्चों की प्लेटों में लजीज व्यंजन छूट गये थे। राहुल ने भी खाने का आनंद लिया। राहुल के दिल में एक टीस हो रही थी बर्बाद खाने को देखकर।

राहुल सोच रहा था कि कितना मेहनत से किसान अनाज पैदा करता है, चाहे जो मौसम हो दिन-रात खेतों में लगा रहता है बस यही अनाज के लिए, लगता था कि जो लोग खाना बर्बाद कर रहे थे उनको किसान का मेहनत का अंदाजा भी न होगा और ये भी जेहन में न होगा कि मौसम की मार से कितने किसान आत्म हत्या कर लेते है। किसान की बदौलत हमारा पेट भर रहा है। आपके पास कितने भी पैसे हो पर उससे पेट तो नहीं भर सकते, अनाज के प्रति सम्मान होना चाहिए।

राहुल को कुछ व्यकिगत काम था इसलिए वह विदा लेकर रात में ही लखनऊ स्टेशन की ओर रवाना हो गया। लखनऊ स्टेशन पहुँचा तो रात के एक बजने को थे। स्टेशन पर बहुत ही भीड़-भाड़ था। राहुल को लखनऊ से इलाहाबाद जाना था। सोचा पैसेंजर ट्रेन पकड़ लूँगा तो सुबह तक इलाहाबाद पहुँच ही जाऊँगा।

बरेली-इलाहाबाद पैसेंजर को आने में आधे घण्टे की देरी थी। राहुल एक खाली बैंच पर बैठ गया। बगल में खाने के स्टाल, चाय के स्टाल तथा कुछ खिलौने के स्टाल थे।

अभी कुछ मिनट बीते होंगे, राहुल ने देखा एक बूढ़ी महिला पास पड़े डस्टबिन में कुछ ढ़ूँढ रही है। वह महिला प्रसन्न मुद्रा में डस्टबिन से हाथ निकाली जैसे कोई सोना मिल गया हो। उसके हाथ में बासी ब्रेड़ के कुछ टुकड़े थे। जो स्टाल वाले बासी हो जाने पर डस्टबिन में फेंक दिये हो। वह महिला ब्रेड़ के टुकड़े निकालकर खाने लगी। शायद बड़ी भूखी रही होगी।

राहुल, उस महिला को खाते देख पसीज गया। सोचा देश में अनाज का इतना पैदावार है कि रखने के लिए गोदाम भी कम पड़ जाता है। हजारों टन अनाज खुले में सड़ जाता है। सैकड़ों प्लेट खाना शादी में बर्बाद हो जाता है और देश की जनता का ये हाल है, जानवरों से भी बद्तर। गरीब खाना डस्टबिन में खोज रहा है।

स्टेशन पर माईक बज उठा। बरेली से इलाहाबाद जाने वाली पैसेंजर प्लेटफार्म नम्बर पाँच पर आ रही है। राहुल प्लेटफार्म नम्बर पाँच की तरफ चल दिया। ट्रेन खचाखच भरी हुई थी। बड़ी मुश्किल से ट्रेन में बैठने की जगह मिली। कुछ देर बाद ट्रेन लखनऊ छोड़ दिया। ट्रेन अपनी पूरी रफ्तार से चल रही थी। हर स्टेशन रुकते जाती। रात के करीब तीन बज रहे होंगे राहुल के आस-पास के यात्री नींद ले रहे थे लेकिन राहुल के आँखों की निंद गायब थी। वह बस एक ही बात सोच रहा था कि इस देश में इतनी अव्यवस्था क्यों। देश के कुलीन की शादी में या किसी भोज के अवसर पर अनेकों प्लेट खाना बर्बाद हो जाता है, और निर्धन खाना डस्टबिन में ढूँढता रह जाता है आखिर क्यों?......आखिर क्यों?..............।

राहुल की आँखें खिड़की के बाहर आसमान में शून्य आकाश को निहार रही थी।

समाप्त

 

दिनांकः 28.02.2015, सिलीगुड़ी

लेखक के विचार निजी है, लेखक का उद्देश्य शिक्षा देना है किसी की भावनाओ को ठेस पहुँचाना नहीं है।

लेखक परिचय

नामः गिरधारी राम

पिताः श्री मिश्री राम

जन्मः 25.07.1974, जसदेवपुर, गाजीपुर, उत्तर प्रदेश-233231

शिक्षाः स्नातक

पताः 3/E, D.S.कालोनी, न्युजलपाईगुड़ी, भक्तिनगर,

जलपाईगुड़ी, प.बं, पिनः734007

फोनः 9434630244, 8515077444

ईमेलः giri.locoin@gmail.com

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