विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका - रचनाकार में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है. अपनी रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com

शयनासन / व्यंग्य / राजशेखर चौबे

भावना राय की कलाकृति

शयन-आसन

कबीरदास जी ने कहा था - 'कल करे सो आज कर, आज करे सो अब, पल में परलय होएगी बहुरि करेगा कब ।

सचमुच हमारे पूर्वज (बंदर नहीं) सीधे सादे थे । यदि कबीर आज के जमाने में फेसबुक या व्हाट्सएप में लिखते तो पता नहीं इनकी कितनी खिंचाई होती । लोग कहते कि जब प्रलय ही होना है तो कोई काम क्यों करें । उन्होंने हिंदु एवं मुस्लिम दोनों धर्मों के पोंगापंथियों पर जमकर प्रहार किए । आज के जमाने में वैसा लिख पाना संभव नहीं है । उनसे बहुत कम लिखने पर भी कई लेखकों साहित्यकारों ब्लागरों को मौत के घाट उतार दिया गया है, मंहगाई बढ़ गई है, अच्छे दिन नहीं आए हैं । यह सब लिखना भी हिम्मत का काम हो गया है । लोग हाथ ही नहीं अपना सब कुछ धोकर आपके पीछे पड़ जाएंगे ।

हमारे देश के लोग खासकर युवा अपने आइकन (वह नेता, अभिनेता, खिलाड़ी कोई भी हो सकता है ) की नकल करता है । आज लोग विराट कोहली जैसी हेयर स्टाइल पसंद करते हैं । पुरानी अभिनेत्री 'साधना' के माथे पर फुंसी हो गई थी । फुंसी को छुपाने के लिए साधना कट का फैशन आया । इसी तरह राजेश खन्ना के 'हाइड्रोसील' को छिपाने के लिए गुरूकुर्ता का फैशन आया । नसीरूद्दीन शाह मेरी बात से अवश्य ही सहमत होंगे । हमारे युवा नेता किस तरह लोगों पर और सोने के भाव पर प्रभाव डाल सकते है, इस विचारणीय प्रश्न पर गौर करें ।

शेयर मार्केट में तेजी जी.एस.टी. बिल के राज्यसभा में पारित होने पर आई है परन्तु सोने में तेजी इससे पहले ही आ गई थी । कई चिंतकों का मानना है कि सोने में तेजी हमारे युवा (पता नहीं कितने लोग उन्हें युवा मानते हैं) नेता के संसद में सोने के बाद ही आई है उनके समर्थक इन चिंतकों से सहमत नहीं हैं उनका मानना है कि युवराज सो नहीं रहे थे, वे चिंतन कर रहे थे । अतः सोने में तेजी से उनका कोई संबंध नहीं है । हमारे मीडिया के महारथियों को इस पर वोटिंग अवश्य ही करवाना चाहिए । इस काल्पनिक वोटिंग का परिणाम इस तरह बताया जाएगा । (अ) 90 प्रतिशत लोग सोचते हैं कि युवराज सो रहे थे । (ब) 5 प्रतिशत लोग सोचते हैं कि युवराज चिंतन कर रहे थे । (स) 5 प्रतिशत लोग सोचते हैं कि वे सोकर चिंतन कर रहे थे ।

दुर्ग, छत्तीसगढ़ से लोकसभा चुनाव (1977) जीतने वाले जनता पार्टी के सांसद मोहन भैय्या (मोहनलाल जैन) हमारे घर आते जाते थे । उनका कहना था कि संसद भवन में ए.सी. इतनी ठंडक देता है कि वहाँ बैठे-बैठे ही नींद आने लगती है । वे पक्के जनसंघी नेता थे और उनमें सच को स्वीकार करने की हिम्मत थी। यदि आप बिस्तर में जाते हैं और पांच मिनट के अंदर सो जाते हैं तो आप सुखी व्यक्ति है । यदि आप बैठे-बैठे सो सकते हैं तो आप उससे भी सुखी व्यक्ति हैं । यदि आप खड़े-खड़े सो सकते हैं तो आप घोड़े नहीं गधे हैं । उम्मीद है कि घोड़े और गधे बुरा नहीं मानेंगे ।

पहले कहा जाता था - 'जागा सो पाया सोया सो खोया' । अब ऐसा नहीं हैं, यदि आप अच्छी नींद के मालिक हैं तभी आप सुखी और सफल हो सकते हैं । इसीलिए आधुनिक कबीर ने कहा है :-

आज करे सो कल कर, कल करे सो परसों,

इतनी जल्दी क्या है चुनाव को हैं बरसों ।

आराम बड़ी चीज हैं, सिर ढंक के सोइए

अभी तो जीना है बरसों ।

राजशेखर चौबे

रायपुर

एक टिप्पणी भेजें

अच्छी रचना के लिए मेरी बधाई ।

बहुत अच्छा व्यंग किया है हमारी मानसिकता पर. बधाई हो. मजा आ गया.

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु बेनामी टिप्पणियाँ बंद की गई हैं (आपको पंजीकृत उपयोगकर्ता होना आवश्यक है) तथा साथ ही टिप्पणियों का मॉडरेशन भी न चाहते हुए लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

[facebook][blogger]

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget