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रमेशराज की ‘ सर्पकुण्डली राज छंद ‘ में 14 तेवरियाँ



रमेशराज की ‘ सर्पकुण्डली राज छंद ‘ में 14 तेवरियाँ

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‘ सर्पकुण्डली राज छंद ‘ में तेवरी....1.

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हर पल असुर करेंगे बस वन्दना खलों की

बस वन्दना खलों की , नित अर्चना खलों की |

नित अर्चना खलों की , शब्दों में इनके बोले

शब्दों में इनके बोले मधुव्यंजना खलों की |

मधुव्यंजना खलों की , सज्जन के ये हैं निंदक

सज्जन के ये हैं निंदक दुर्भावना खलों की |

दुर्भावना खलों की , हर भाव में सियासत

हर भाव में सियासत , मत चौंकना खलों की |

मत चौंकना खलों की जन-जन पे आज भारी

जन-जन पे आज भारी अधिसूचना खलों की |

+ रमेशराज





‘ सर्पकुण्डली राज छंद ‘ में तेवरी....2.

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वो हो गया है जादू , गर्दन छुरी को चाहे

गर्दन छुरी को चाहे , अबला बली को चाहे |

अबला बली को चाहे , बलवान ' रेप ' करता

बलवान ' रेप ' करता , मन उस खुशी को चाहे

मन उस खुशी को चाहे , जिसमें भरी है हिंसा

जिसमें भरी है हिंसा , उस गुदगुदी को चाहे

उस गुदगुदी को चाहे , जो जन्म दे रुदन को

जो जन्म दे रुदन को , उस विप्लवी को चाहे |

उस विप्लवी को चाहे , जो क्रांति का विरोधी

जो क्रांति का विरोधी , उस आदमी को चाहे |

+ रमेशराज


‘ सर्पकुण्डली राज छंद ‘ में तेवरी....3.

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माँ मांगती दुआएँ बच्चों का पेट भर दे

बच्चों का पेट भर दे , कुछ रोटियाँ इधर दे |

कुछ रोटियाँ इधर दे ' इतना करम हो मौला

इतना करम हो मौला , छोटा-सा एक घर दे |

छोटा-सा एक घर दे , कब तक जियें सड़क पर

कब तक जियें सड़क पर , खुशियों-भरा सफर दे |

खुशियों-भरा सफर दे , हम परकटे-से पंछी

हम परकटे-से पंछी , हमको हसीन पर दे |

हमको हसीन पर दे , माँ कह रही खुदा से

माँ कह रही खुदा से बच्चों को शाद कर दे |

+ रमेशराज


‘ सर्पकुण्डली राज छंद ‘ में तेवरी....4.

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अब दे रहे दिखाई सूखा के घाव जल में

सूखा के घाव जल में , जल के कटाव जल में |

जल के कटाव जल में , मछली तड़प रही हैं

मछली तड़प रही हैं , मरु का घिराव जल में |

मरु का घिराव जल में , जनता है जल सरीखी

जनता है जल सरीखी , थल का जमाव जल में |

थल का जमाव जल में , थल कर रहा सियासत

थल कर रहा सियासत , छल का रचाव जल में |

छल का रचाव जल में , जल नैन बीच सूखा

जल नैन बीच सूखा , दुःख का है भाव जल में |

+ रमेशराज







‘ सर्पकुण्डली राज छंद ‘ में तेवरी....5.

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बस दास-भाव वाला हम में है रक्त जय हो

हम में है रक्त जय हो, हम उनके भक्त जय हो |

हम उनके भक्त जय हो , जो हैं दबंग-गुंडे

जो हैं दबंग-गुंडे , जो सच से त्यक्त जय हो |

जो सच से त्यक्त जय हो , जयचंद-मीरजाफर

जयचंद-मीरजाफर में निष्ठा व्यक्त जय हो |

जय हो विभीषणों की , कलियुग के कौरवों को

कलियुग के कौरवों को करते सशक्त जय हो |

करते सशक्त जय हो , भायें हमें विदेशी

भायें हमें विदेशी , हम देश-भक्त जय हो |

+रमेशराज





‘ सर्पकुण्डली राज छंद ‘ में तेवरी....6.

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कुछ भी न होगा प्यारे, सत्ता बदल-बदल के

सत्ता बदल-बदल के, इस रास्ते पे चल के |

इस रास्ते पे चल के , तुझको छलेंगे  रहबर

तुझको छलेंगे  रहबर , गर्दन गहें उछल के |

गर्दन गहें उछल के , फिर जेब तेरी काटें

फिर जेब तेरी काटें , इस राह के धुंधलके |

इस राह के धुंधलके , तुझको न जीने देंगे

तुझको न जीने देंगे, होना न कुछ उबल के |

होना न कुछ उबल के , सिस्टम बदलना होगा

सिस्टम बदलना होगा, तब नूर जग में झलके |

+ रमेशराज






‘ सर्पकुण्डली राज छंद ‘ में तेवरी....7.

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पड़नी है और तुझ पे , टेक्सों की मार प्यारे

टेक्सों की मार प्यारे , नित झेल वार प्यारे |

नित झेल वार प्यारे, मिलना न न्याय तुझको

मिलना न न्याय तुझको , चुभनी कटार प्यारे |

चुभनी कटार प्यारे , बाबू की अफसरों की

बाबू की अफसरों की , आरति उतार प्यारे |

आरति उतार प्यारे , महंगाई झेल हर दिन

हर दिन  बजट पे तेरे, डाके हज़ार प्यारे |

डाके हज़ार प्यारे , शासन बना लुटेरा

शासन बना लुटेरा , अब तो विचार प्यारे |

+ रमेशराज




‘ सर्पकुण्डली राज छंद ‘ में तेवरी....8.

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कुछ देश-भक्त बन के , अब खा रहे वतन को

अब खा रहे वतन को , हर भोर की किरन को |

हर भोर की किरन को तम में बदल रहे हैं

तम में बदल रहे हैं , सुख से भरे चलन को |

सुख से भरे चलन को दुःख-दर्द दे रहे हैं

दुःख-दर्द दे रहे हैं , हर एक भोले मन को |

हर एक भोले मन को , अंगार भेंट करते

अंगार भेंट करते , तैयार हैं हवन को |

तैयार हैं हवन को , ये देश-भक्त बन कर

ये देश-भक्त बन कर , नित लूटते चमन को |

+ रमेशराज



‘ सर्पकुण्डली राज छंद ‘ में तेवरी....9.

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सब सूदखोर घेरे , अब क्या करेगा 'होरी '

अब क्या करेगा 'होरी ', भूखा मरेगा 'होरी '|

भूखा मरेगा 'होरी ', घर में न एक दाना

घर में न एक दाना , गिरवी धरेगा 'होरी '|

गिरवी धरेगा 'होरी ', धनिया के कंगनों को

धनिया के कंगनों को , फिर भी डरेगा 'होरी '|

फिर भी डरेगा 'होरी ', कर्जा है अब भी बाक़ी

कर्जा है अब भी बाक़ी, ये भी करेगा होरी |

ये भी करेगा होरी , बैलों को बेच देगा

बैलों को बेच देगा , कर्जा भरेगा 'होरी '|

+ रमेशराज


‘ सर्पकुण्डली राज छंद ‘ में तेवरी....10.

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जनता की जेब सत्ता , बस आजकल टटोले

बस आजकल टटोले , ' करना विकास ' बोले |

' करना विकास ' बोले , ऐसे नियम बनाए

ऐसे नियम बनाए , दागे नियम के गोले |

दागे नियम के गोले , कर-जोड़ खड़ी जनता

कर-जोड़ खड़ी जनता , अपनी जुबां न खोले |

अपनी जुबां न खोले , बस कांपती है थर-थर

बस कांपती है थर-थर , सत्ता के देख ओले |

+ रमेशराज



‘ सर्पकुण्डली राज छंद ‘ में तेवरी....11.

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दिन देश-भर में अच्छे लायेंगे अब विदेशी

लायेंगे अब विदेशी , आयेंगे अब विदेशी |

आयेंगे अब विदेशी दौलत यहाँ लुटाने

दौलत यहाँ लुटाने,  भाएंगे अब विदेशी |

भाएंगे अब विदेशी , सेना में  रेलवे में

सेना में  रेलवे में , गायेंगे अब विदेशी |

गायेंगे अब विदेशी , "अब है हमारा भारत"

भारत  के काजू -पिश्ता खायेंगे अब विदेशी |

खायेंगे अब विदेशी , करके हलाल मुर्गा

मुर्गा-सरीखा हमको पाएंगे अब विदेशी |

+ रमेशराज


‘ सर्पकुण्डली राज छंद ‘ में तेवरी....12.

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तम के हैं आज जारी हर रोशनी पे हमले

हर रोशनी पे हमले , अब ज़िन्दगी पे हमले |

अब ज़िन्दगी पे हमले , नित मौत कर रही है

नित मौत कर रही है मन की खुशी पे हमले |

मन की खुशी पे हमले , दुःख-दर्द कर रहे हैं

दुःख-दर्द कर रहे हैं सुख की नदी पे हमले |

सुख की नदी पे हमले सूखा के हो रहे हैं

सूखा के हो रहे हैं हर सू नमी पे हमले |

हर सू नमी पे हमले , मरुथल-सी ज़िन्दगी है

मरुथल ने कर दिए हैं खिलती कली पे हमले |

+ रमेशराज



‘ सर्पकुण्डली राज छंद ‘ में तेवरी....13.

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मातों-भरा है जीवन , जनता की जय कहाँ है

जनता की जय कहाँ है , आनन्द-लय कहाँ है |

आनन्द-लय कहाँ है , दुःख-दर्द हैं घनेरे

दुःख-दर्द हैं घनेरे , सुख का विषय कहाँ है |

सुख का विषय कहाँ है, संघर्षमय है जीवन

संघर्षमय है जीवन , रोटी भी तय कहाँ है |

रोटी भी तय कहाँ है , बस भुखमरी का आलम

बस भुखमरी का आलम , दुःख पर विजय कहाँ है |

दुःख पर विजय कहाँ है , केवल बुढ़ापा घेरे

केवल बुढ़ापा घेरे , उन्मुक्त वय कहाँ है |

--रमेशराज


‘ सर्पकुण्डली राज छंद ‘ में तेवरी....14.

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हम पे कुनीतियों के कोड़ों की मार क्यों है ?

कोड़ों की मार क्यों है ? शासन कटार क्यों है ?

शासन कटार क्यों है ? सोचेगा बोल कब तू

सोचेगा बोल कब तू , हर बार हार क्यों है ?

हर बार हार क्यों है ? गुंडों को चुन न प्यारे

गुंडों को चुन न प्यारे , गुंडों से प्यार क्यों है ?

गुंडों से प्यार क्यों है ? सुधरे न ऐसे सिस्टम

सुधरे न ऐसे सिस्टम , ऐसा विचार क्यों है ?

ऐसा विचार क्यों है ? सत्ता बदलना हितकर

सत्ता बदल दी अब भी तुझको बुखार क्यों है ?

+ रमेशराज

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-रमेशराज, 15/109, ईसानगर, अलीगढ़-202001

Mo.-9634551630
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