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प्राची - सितम्बर 2016 / विश्व में भी अपनी पहचान बना रही है हिन्दी / डॉ. प्रभु चौधरी

आलेख

विश्व में भी अपनी पहचान बना रही है हिन्दी

डॉ. प्रभु चौधरी

ूमंडलीकरण एवं सूचना क्रान्ति के दौर में जहां एक ओर ‘सभ्यताओं का संघर्ष’ बढ़ा है वहीं बहुराष्ट्रीय कम्पनियों की नीतियों ने भी विकासशील व अविकसित राष्ट्रों की संस्कृतियों पर प्रहार करने की कोशिश की है. सूचना क्रान्ति व उदारीकरण द्वारा सारे विश्व के सिमटकर एक वैश्विक गांव में तब्दील होने की अवधारणा में अपनी संस्कृति, भाषा, मान्यताओं, विविधताओं व संस्कारों को बचाकर रखना सबसे बड़ी जरूरत है. एक तरफ बहुराष्ट्रीय कम्पनियां जहां हमारी प्राचीन सम्पदाओं का पेटेंट कराने में जुटी हैं वही इनके ब्राण्ड-विज्ञापनों ने बच्चों और युवाओं की मनोस्थिति पर भी काफी प्रभाव डाला है, निश्चिततः इन सबसे बचने हेतु हमें अपनी भाषा की तरफ उन्मुख होना होगा. यदि भारतीय फिल्में विदेशों में अच्छा व्यवसाय कर रही हैं तो विदेशों में बसे भारतीयों का इसमें प्रमुख योदान है. यह वर्ग ऐसा है जो रोजगार की खोज में विदेशों में भले ही जा बसा, पर उनका मातृभूमि से लगाव जस का तस है. उनकी रोजी-रोटी की भाषा भले ही दूसरी हो, पर उनका मन हिन्दी में ही रमता है. इस तथ्य को नकार नहीं सकते हैं कि हाल में प्रकाशित ऑक्सफोर्ड अंग्रेजी शब्दकोष में हिन्दी के तमाम प्रचलित शब्दों, मसलन- आलू, अच्छा, अरे, देसी, फिल्मी, गोरा, चड्डी, यार, जंगली, धरना, गुण्डा, बदमाश, बिंदास, लहंगा, मसाला आदि को स्थान दिया गया है.

तत्कालीन अमरीकी राष्ट्रपति जार्ज बुश ने राष्ट्रीय सुरक्षा भाषा कार्यक्रम के तहत अपने देशवासियों से हिन्दी, फारसी, अरबी, चीनी व रूसी भाषाएं सीखने को कहा था. अमेरिका जो कि अपनी भाषा और पहचान के अलावा किसी को श्रेष्ठ नहीं मानता, हिन्दी सीखने में उसकी रुचि का प्रदर्शन निश्चित ही भारत के लिए गौरव की बात है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्पष्टतया घोषणा की कि ‘हिन्दी ऐसी विदेशी भाषा है, जिसे 21वीं सदी में राष्ट्रीय सुरक्षा और समृद्धि के लिए अमेरिका के नागरिकों को सीखनी चाहिए.’ इसी क्रम में वर्तमान अमेरिकी राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा ने अपने चुनावी घोषणा-पत्र की प्रतियां अंग्रेजी के साथ-साथ हिन्दी और मलयालम में भी छपवाकर वितरित कीं. ओबामा के राष्ट्रपति चुनने के बाद सरकार की कार्यकारी शाखा में राजनैतिक पदों को भरने के लिए जो आवेदन-पत्र तैयार किया गया उसमें 101 भाषाओं में भारत की 20 क्षेत्रीय भाषाओं को भी जगह दी गई. उनमें अवधी, भोजपुरी, छत्तीसगढ़ी, हरियाणवी, माघी व मराठी जैसी भाषाएं भी शामिल हैं, जिन्हें अभी तक भारतीय

संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान तक नहीं मिल पाया है. ओबामा ने रमजान की मुबारकवाद उर्दू के साथ-साथ हिन्दी में भी दी. इसी प्रकार जब दुनिया भर में अंग्रेजी का डंका बज रहा हो, तब अंग्रेजी के गढ़ लंदन में बर्मिंघम स्थित मिडलैंड्स वर्ल्ड ट्रेड हाउस के अध्यक्ष पीटर मैथ्यूज ने ब्रिटिश उद्यमियों, कर्मचारियों और छात्रों को हिन्दी समेत कई अन्य भाषा सीखने की नसीहत दी है. यहीं नहीं अन्तर्राष्ट्रीय इंदु शर्मा कथा सम्मान हिन्दी का अकेला ऐसा सम्मान है जो किसी देश की संसद, ब्रिटेन के हाऊस ऑफ लॉर्ड्स में प्रदान किया जाता है. आज अंग्रेजी के दबदबे वाले ब्रिटेन से हिन्दी लेखकों का सबसे बड़ा दल विश्व हिन्दी सम्मेलन में अपने खर्च पर पहुंचता है. स्पष्ट है कि हिन्दी आज दूसरे देशों में भी अपनी कीर्ति-पताका फहरा रही है. विदेश मंत्रालय ने इसी रणनीति के तहत प्रति वर्ष 10 जनवरी को ‘विश्व हिन्दी दिवस’ मनाने का निर्णय लिया है, जिसमें विदेशों में स्थित भारतीय दूतावासों में इस दिन हिन्दी दिवस समारोह का आयोजन किया जाता है.

हाल में विश्व बैंक में अपनी छवि को अधिक लोकतांत्रिक बनाने की नीति के तहत ‘ओपन डाटा’ नामक एक कार्यक्रम की शुरुआत की है. इसके जरिये विश्व बैंक दुनिया भर में अपनी वित्तीय पोषित परियोजनाओं की नवीन जानकारी एन्ड्रॉयड फोन, आई फोन, आईपैड आदि पर मुक्त में मुहैया कराएगा. खास बात यह है कि विश्व बैंक से जुड़ी वित्तीय जानकारियां सब हिन्दी में भी उपलब्ध कराई जा रही है. अभी तक यह होता रहा है कि विश्व बैंक से जुड़े आंकड़े अंग्रेजी भाषा की समाचार एजेन्सियों में आने या उनके अनुवाद के बाद ही हिन्दी की पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो पाते थे. निश्चिततः इससे हिन्दी पत्रकारिता की दुनिया में एक बड़ा परिवर्तन आयेगा और हिन्दी में जानकारी उपलब्ध कराये जाने में अंग्रेजी पर निर्भरता भी कम होगी.

निश्चित ही भूमंडलीकरण के दौर में दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र, सर्वाधिक जनसंख्या वाले राष्ट्र और सबसे बड़े उपभोक्ता बाजार की भाषा हिन्दी को नजरअंदाज करना अब संभव नहीं रहा. प्रतिष्ठित अंग्रेजी प्रशासन समूहों ने हिन्दी में अपने प्रकाशन आरंभ किए हैं तो बी.बी.सी., स्टार प्लस, सोनी, जी.टी., डिस्कवरी आदि चैनलों ने हिन्दी में अपने प्रसारण आरंभ कर दिये थे. हिन्दी फिल्म संगीत तथा विज्ञापनों की ओर नजर डालने पर एक नई प्रकार की हिन्दी के दर्शन होते हैं. यहां तक कि बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के विज्ञापनों में अब क्षेत्रीय बोलियां भोजपुरी इत्यादि का प्रयोग भी होने लगा है और विज्ञापनों के किरदार भी क्षेत्रीय वेश-भूषा व रंग-ढंग में नजर आते हैं. निश्चित ही मनोरंजन और समाचार उद्योग पर हिन्दी की मजबूत पकड़ ने इस भाषा में सम्प्रेषणीयता की नई शक्ति पैदा की है.

आज की हिन्दी वो नहीं रही. बदलती परिस्थितियों ने उसमें परिवर्तन किया है. विज्ञान-प्रौद्योगिकी से लेकर तमाम विषयों पर हिन्दी की किताबें अब उपलब्ध है. क्षेत्रीय अखबारों का प्रचलन बढ़ा है. इंटरनेट पर हिन्दी की वेबसाइटों में बढ़ोत्तरों हो रही है. सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की कई कम्पनियों ने हिन्दी भाषा में परियोजनाएं आरंभ की है. सूचना क्रांति के दौर में कम्प्यूटर पर हिन्दी में कार्य संस्कृति को बढ़ावा देने हेतु सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के प्रतिष्ठान सीडेक ने निःशुल्क हिन्दी साफ्टवेयर जारी किया है, जिसमें अनेक सुविधाएं उपलब्ध हैं. माइक्रोसाफ्ट ने ऑफिस हिन्दी के द्वारा भारतीयों के लिए कम्प्यूटर का प्रयोग आसान कर दिया है. आई.पी.एम. द्वारा विकसित साफ्टवेयर में हिन्दी भाषा के 65,000 शब्दों को पहचानने की क्षमता एवं हिन्दी और हिन्दुस्तानी अंग्रेजी के लिए आवाज पहचानने की प्रणाली का भी विकास किया गया है जो कि शब्दों को पहचान कर कम्प्यूटर लिपिबद्ध कर देती है. एच.पी. कम्प्यूटर्स एक ऐसी तकनीक विकसित करने में जुटी हुई है जो हाथ से लिखी हिन्दी लिखावट को पहचानकर कम्प्यूटर में आगे की कार्यवाही कर सके. चूंकि इंटरनेट पर ज्यादातर सामग्री अंग्रेजी में है और अपने देश में 13 फीसदी लोगों को ही अंग्रेजी पर ठीक-ठाक पकड़ है. ऐसे में गूगल द्वारा कई भाषाओं में अनुवाद में सुविधा प्रदान करने से अंग्रेजी जानने वाले भी इंटरनेट के माध्यम से अपना काम आसानी से कर सकते हैं. आज पूरी दुनिया में ब्लॉगिंग और सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट का क्रेज छाया हुआ है. आज 50,000 से भी ज्यादा हिन्दी ब्लॉग हैं. इंटरनेट पर हिन्दी का विकास तेजी से हो रहा है. गूगल से हिन्दी में जानकारियां धड़ल्ले से खोजी जा रही हैं. पहले जहां तमाम फॉण्ट के चलते हिन्दी का स्वरूप एक जैसा नहीं दिखता था, वहीं वर्ष 2003 में यूनीकोड हिन्दी में आया और इसके माध्यम से हिन्दी को अपने विस्तार में काफी सुलभता हासिल हुई. इसने जहां वर्णमाला के जटिल शब्दों को अपने में समेट लिया है, वहीं भारत सरकार भी वेदों, उपनिषदों, पुराणों इत्यादि में प्रयुक्त होने वाले शब्दों को इसमें जोड़ने की कोशिश कर रही है. 14 सितम्बर 2011 को सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट ट्विटर ने हिन्दी में भी सीधे लिखने सुविधा कर दी है.

इंटरनेट के इस दौर में महत्त्वपूर्ण हिन्दी किताबें, हिन्दी पत्र-पत्रिकाएं भी अपने ई-संस्करण के माध्यम से व्यापार, साहित्य, ज्योतिषी, सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी तमाम जानकारियां सुलभ करा रही हैं. इंटरनेट पर उपलब्ध प्रमुख हिन्दी पत्रिकाएं हैं. हिन्दी का पहला पोर्टल वेब दुनिया, अनुभूति, अभिव्यक्ति, सृजनगाथा, हिंदयुग्म, रचनाकार, साहित्य कुंज, साहित्य शिल्पी, लघुकथा डॉटकाम, स्वर्गविभा, हिन्दी नेस्ट, हिन्दी चेतना, हिन्दी लोक, कथाचक्र, काव्यांजलि, कवि मंच, कृत्या, कलायन आर्यावर्त, नारायण कुंज, हंस, अक्षरापर्व, अन्यथा, आखर (उमर उजाला), उदन्ती, उद्गम, कथाक्रम, कादम्बिनी, कलादेश, गर्भनाल, जागरण, तथा, तद्भव, तहलका, ताप्तिलोक, दोआबा, नया ज्ञानोदय, नया पथ, परिकथा, पाखी, दि संडे संवेद, प्रतिलिपि, प्रेरणा, बहुवचन, भारत दर्शन, भारतीय पक्ष, मधुमती, रचना समय, लमही, लेखनी, लोकरंग, वागर्थ, शोध दिशा, संवेद, संस्कृति, समकालीन, जनमत, समकालीन साहित्य, समयांतर, प्रवक्ता, अरगला, तरकश,

अनुरोध, एक कदम आगे, पुरवाई, प्रवासी टुडे, अन्यथा, भारत दर्शन, सरस्वती पत्र, पांडुलिपि, हिन्दी भाषी, हिन्दी संसार, हिन्दी समय, हिमाचल मित्र इत्यादि. इसी कड़ी में ‘कविता कोश’ और ‘गद्य कोश’ ने भी हिन्दी साहित्य के लिए मुक्ताकाश दिया है. यहां तमाम पुराने और प्रतिष्ठित साहित्यकारों की विभिन्न विधाओं में रचनाओं के संचयन के साथ-साथ नवोदित रचनाकारों की रचनाएं भी पढ़ी जा सकती है. निश्चिततः इससे हिन्दी भाषा को वैश्विक स्तर पर एक नवीन प्रतिष्ठा मिली है. यह अनायास ही नहीं है कि 51 करोड़ लोगों तक पहुंच के साथ अंग्रेजी यदि दुनिया की सबसे बड़ी सम्पर्क भाषा है तो 49 करोड़ के साथ हिन्दी दूसरी सम्पर्क भाषा है. कभी ब्रिटेन ने हम पर राज किया था पर जब वहीं के एक प्रोफेसर रूपर्ट स्नेह हिन्दी के पक्ष में बोलते हैं, तो गर्व होना लाजिमी भी है- ‘हिन्दी जिन्दगी का हिस्सा है. हिन्दी जिन्दा है. हिन्दी किसी एक वर्ण या जाति या धर्म या मजहब या मार्ग या देश या संस्कृति की नहीं है. हिन्दी भारत की है, मारीशस की है, इंग्लैण्ड की है, सारी दुनिया की है. हिन्दी आपकी है, हिन्दी मेरी है.’

सम्पर्कः 15, स्टेशन मार्ग, महिदपुर रोड, जिला उज्जैन (म.प्र.)

मो. 9893072718

dev.pc62@gmail com

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