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रमेशराज के 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' में 5 बालगीत

क्या है 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' ?

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मित्रो !

'नव कुंडलिया 'राज' छंद' , छंद शास्त्र और साहित्य-क्षेत्र में मेरा एक अभिनव प्रयोग है | इस छंद की रचना करते हुए मैंने इसे १६-१६ मात्राओं के ६ चरणों में बाँधा है, जिसके हर चरण में ८ मात्राओं के उपरांत सामान्यतः (कुछ अपवादों को छोडकर ) आयी 'यति' इसे गति प्रदान करती है | पूरे छंद के ६ चरणों में ९६ मात्राओं का समावेश किया गया है |

'नव कुंडलिया 'राज' छंद' की एक विशेषता यह भी है कि इसके प्रथम चरण के प्रारम्भिक 'कुछ शब्द' इसी छंद के अंतिम चरण के अंत में पुनः प्रकट होते हैं | या इसका प्रथम चरण पलटी खाकर छंद का अंतिम चरण भी बन सकता है |

छंद की दूसरी विशेषता यह है कि इस छंद के प्रत्येक चरण के 'कुछ अंतिम शब्द ' उससे आगे आने वाले चरण के प्रारम्भ में शोभायमान होकर चरण के कथ्य को ओजस बनाते हैं | शब्दों के इस प्रकार के दुहराव का यह क्रम सम्पूर्ण छंद के हर चरण में परिलक्षित होता है | इस प्रकार यह छंद 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' बन जाता है |

'नव कुंडलिया 'राज' छंद' में मेरा उपनाम 'राज ' हो सकता है बहुत से पाठकों के लिये एतराज का विषय बन जाए या किसी को इसमें मेरा अहंकार नज़र आये | इसके लिये विचार-विमर्श के सारे रास्ते खुले हैं |

'नव कुंडलिया 'राज' छंद' पर आपकी प्रतिक्रियाओं का मकरंद इसे ओजस बनाने में सहायक सिद्ध होगा | ------रमेशराज

रमेशराज के 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' में 5 बालगीत

'नव कुंडलिया 'राज' छंद' में बालगीत-1

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" जल-संकट हो, अगर कटे वन

अगर कटे वन, सूखे सावन

सूखे सावन, सूखे भादों

सूखे भादों, खिले न सरसों

खिले न सरसों, रेत प्रकट हो

रेत प्रकट हो, जल-संकट हो | "

(रमेशराज )

'नव कुंडलिया 'राज' छंद' में बालगीत-2

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मत मरुथल को और बढ़ा तू

और बढ़ा तू मत गर्मी-लू,

मत गर्मी-लू, पेड़ बचा रे

पेड़ बचा रे, वृक्ष लगा रे,

वृक्ष लगा रे, तब ही जन्नत

तब ही जन्नत, तरु काटे मत |

(रमेशराज )

'नव कुंडलिया 'राज' छंद' में बालगीत-3

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नटखट बन्दर छत के ऊपर

छत के ऊपर , झांके घर - घर

झांके घर - घर , कहाँ माल है ?

कहाँ माल है ? कहाँ दाल है ?

कहाँ दाल है ? मैं खाऊँ झट

मैं खाऊँ झट , सोचे नटखट | "

(रमेशराज )

'नव कुंडलिया 'राज' छंद' में बालगीत-4

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" बबलू जी जब कुछ तुतलाकर

तुतलाकर बल खा इठलाकर ,

इठलाकर थोड़ा मुस्काते

मुस्काते या बात बनाते ,

बात बनाते तो हंसते सब

सब संग होते बबलू जी जब |

(रमेशराज )

'नव कुंडलिया 'राज' छंद' में बालगीत-5

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" फूल - फूल पर तितली रानी

तितली रानी लगे सुहानी ,

लगे सुहानी इसे न पकड़ो

इसे न पकड़ो, ये जाती रो ,

ये जाती रो खेत - कूल पर

खेत - कूल पर फूल - फूल पर |

(रमेशराज )

'नव कुंडलिया 'राज' छंद' में बालगीत-6

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" बढ़ा प्रदूषण , खूब कटें वन

खूब कटें वन , धुंआ - धुँआ घन

धुंआ - धुँआ घन , जाल सड़क के

जाल सड़क के , मरुथल पसरे

मरुथल पसरे , तपता कण - कण

तपता कण - कण , बढ़ा प्रदूषण | "

(रमेशराज )

'नव कुंडलिया 'राज' छंद' में बालगीत-7

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" बस्ता भारी लेकर बच्चा

लेकर बच्चा , सन्ग नाश्ता

सन्ग नाश्ता , पढ़ने जाये

पढ़ने जाये , पढ़ ना पाये

पढ़ ना पाये पुस्तक सारी

पुस्तक सारी , बस्ता भारी | "

(रमेशराज )

रमेशराज के 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' में प्रणय गीत

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'नव कुंडलिया 'राज' छंद' में प्रणय गीत-1

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जब वो बोले मिसरी घोले

मिसरी घोले हौले-हौले

हौले-हौले प्रिय मुसकाये

प्रिय मुसकाये मन को भाये

मन को भाये, मादक चितवन

मादक चितवन, अति चंचल मन

अति चंचल मन प्यार टटोले

प्यार टटोले जब वो बोले |

+रमेशराज

'नव कुंडलिया 'राज' छंद' में प्रणय गीत -2

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वे मुसकाते तम में आये

तम में आये, भाव जगाये

भाव जगाये मिलन-प्रीति का

मिलन-प्रीति का, रति-सुनीति का

रति-सुनीति का, दीप जलाये

दीप जलाये हम मुसकाये |

+रमेशराज

'नव कुंडलिया 'राज' छंद' में प्रणय गीत -3

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" पल-पल उसकी चंचल आँखें

चंचल आँखें, बादल आँखें

आँखें हरिणी जैसी सुंदर

सुंदर-सुंदर संकेतों पर

संकेतों पर मन हो चंचल

मन हो चंचल, यारो पल-पल | "

(रमेशराज )

'नव कुंडलिया 'राज' छंद' में प्रणय गीत-4

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" पल-पल उससे मिलने को मन

मिलने को मन, पागल-सा बन

पागल-सा बन, उसे पुकारे

उसे पुकारे, प्रियतम आ रे !

प्रियतम आ रे, तब आये कल

तब आये कल, जब हों रति-पल | "

(रमेशराज )

'नव कुंडलिया 'राज' छंद'-3

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मैना बेटी , बेटी कोयल

बेटी कोयल , बेटी सत्फल ,

बेटी सत्फल , क्रोध न जाने

क्रोध न जाने , बातें माने ,

बातें माने मात-पिता की

मात-पिता की मैना बेटी |

+रमेशराज

'नव कुंडलिया 'राज' छंद'-4

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दिन अच्छे सुन बच्चे आये

आये लेकर बढ़े किराये ,

बढ़े किराए , डीजल मंहगा

डीजल मंहगा , हर फल मंहगा ,

हर फल मंहगा समझे बच्चे

बच्चे मान इन्हें दिन अच्छे |

--रमेशराज --

'नव कुंडलिया 'राज' छंद'-5

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दिन अच्छे आये हैं कैसे

कैसे जियें बताओ ऐसे ,

ऐसे ही यदि बढ़ीं कीमतें

बढ़ीं कीमतें , बढ़ीं आफ़तें,

बढ़ीं आफ़तें , बनकर डाइन

आये हैं कैसे अच्छे दिन !!

--रमेशराज --

'नव कुंडलिया 'राज' छंद'-6

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खेले नेता कैसी होली

कैसी होली , दाग़े गोली

दाग़े गोली वोटों वाली

वोटों वाली , नोटों वाली

नोटों वाली रँग की वर्षा

कैसी होली खेले नेता ?

--रमेशराज --

'नव कुंडलिया 'राज' छंद'-7

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कवि की कविता में खल बोले

खल बोले , विष जैसा घोले

घोले सहमति में कड़वाहट

कड़वाहट से आये संकट

संकट में साँसें जन-जन की

जन की पीड़ा रही न कवि की |

+रमेशराज

'नव कुंडलिया 'राज' छंद'-8

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आम आदमी जाग रहा है

जाग रहा है , भाग रहा है

भाग रहा है खल के पीछे

खल के पीछे , मुट्ठी भींचे

मुट्ठी भींचे, बन चिगारी

बन चिंगारी , आम आदमी |

--रमेशराज --

'नव कुंडलिया 'राज' छंद'-9

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नेता के हाथों में कट्टा

कट्टा , घर डालर का चट्टा

चट्टा लगा बने जनसेवक

जनसेवक पर चील बाज वक

चील बाज वक सा ही कुनबा

कुनबा के संग हंसता नेता |

--रमेशराज --

'नव कुंडलिया 'राज' छंद'-10

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गन्ना खट्टा राजनीति का

राजनीति का , छद्म प्रीति का

छद्म प्रीति का खेल-तमाशा

खेल-तमाशा करता नेता

नेता धमकाता ले कट्टा

राजनीति का गन्ना खट्टा |

--रमेशराज --

'नव कुंडलिया 'राज' छंद'-11

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आँखें पुरनम, बहुत दुखी हम

बहुत दुखी हम , कहीं खड़े यम

कहीं खड़े यम , कहीं फटें बम

कहीं फटें बम , चीखें-मातम

चीखें-मातम , अब ग़म ही ग़म

अब ग़म ही ग़म , चीखें-मातम |

--रमेशराज --

'नव कुंडलिया 'राज' छंद'-12

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हम रावण-से , कौरव-दल से

कौरव-दल से , दिखते खल से

दिखते खल से , लूटें सीता

लूटें सीता , लिये पलीता

लिये पलीता , फूंकें हर दम

हर दम दुश्मन नारी के हम |

--रमेशराज --

'नव कुंडलिया 'राज' छंद'-13

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खल ललकारे , पल-पल मारे

पल-पल मारे , जो हत्यारे

जो हत्यारे , चुन-चुन बीने

चुन-चुन बीने, जो दुःख दीने

जो दुःख दीने, उन्हें सँहारे

वीर वही जो खल ललकारे |

--रमेशराज --

'नव कुंडलिया 'राज' छंद'-14

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कवि की कविता में खल बोले

खल बोले, विष जैसा घोले

घोले सहमति में कड़वाहट

कड़वाहट से आये संकट

संकट में साँसें जन-जन की

जन की पीड़ा रही न कवि की |

--रमेशराज --

'नव कुंडलिया 'राज' छंद'-15

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" पीड़ा भारी, जन-जन के मन

मन के भीतर, सिसकन-सुबकन

सिसकन-सुबकन, दे ये सिस्टम

सिस्टम के यम, लूटें हरदम

हरदम खल दें, मात करारी

मात करारी, पीड़ा भारी || "

(रमेशराज )

'नव कुंडलिया 'राज' छंद'-16

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" बस्ती-बस्ती, अब दबंग रे

अब दबंग रे, करें तंग रे

करें तंग रे, तानें चाकू

तानें चाकू, दिखें हलाकू

दिखें हलाकू, जानें सस्ती

जानें सस्ती, बस्ती-बस्ती | "

(रमेशराज )

'नव कुंडलिया 'राज' छंद'-17

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" शासन का ये कैसा बादल ?

बादल बढ़ा रहा है मरुथल,

मरुथल निगल गया खुशहाली

खुशहाली से जन-जन खाली,

खाली झोली मिले न राशन

राशन लूट ले गया शासन | "

(रमेशराज )

'नव कुंडलिया 'राज' छंद'-18

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" अजब व्यवस्था, हालत खस्ता

हालत खस्ता, दिखे न रस्ता,

दिखे न रस्ता, लुटता जन-जन

जन-जन का दुःख लखे शासन,

शासन मूक-वधिर हलमस्ता

हलमस्ता की अजब व्यवस्था ! "

(रमेशराज )

'नव कुंडलिया 'राज' छंद'-19

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" नेता बोले, वोट हमें दो

वोट हमें दो, नोट हमें दो

नोट हमें दो, तर जाओगे

तर जाओगे, सब पाओगे

सब पाओगे, रम-रसगोले

रम-रसगोले, नेता बोले | "

(रमेशराज )

'नव कुंडलिया 'राज' छंद'-22

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" लूटें जन की खुशियाँ सब दल

दल-दल में हैं, अब खल ही खल,

अब खल ही खल, अति उत्पाती

अति उत्पाती, अति आघाती,

अति आघाती जन को कूटें

जन को कूटें, खुशियाँ लूटें | "

(रमेशराज )

'नव कुंडलिया 'राज' छंद'-23

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"छल के माला, सच को ठोकर

ठोकर मारे पल-पल जोकर,

जोकर जिसकी कायम सत्ता

सत्ता जो शकुनी का पत्ता,

पत्ता चल करता सब काला

काला डाले छल के माला | "

(रमेशराज )

'नव कुंडलिया 'राज' छंद'-24

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"आँखें पुरनम, बहुत दुखी हम

बहुत दुखी हम, कहीं खड़े यम,

कहीं खड़े यम, कहीं फटें बम

कहीं फटें बम, चीखें-मातम,

चीखें-मातम, अब ग़म ही ग़म

अब ग़म ही ग़म, आँखें पुरनम | "

(रमेशराज )

'नव कुंडलिया 'राज' छंद'-25

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"हरजाई था नारी का प्रिय

प्रिय ने बना लिया उसको तिय

तिय के संग पिय ने धोखा कर

धोखा कर लाया कोठे पर

कोठे पर इज्जत लुटवाई

लुटवाई इज्जत हरजाई | "

(रमेशराज )

'नव कुंडलिया 'राज' छंद'-26

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"लाठी गोली कर्फ्यू दंगा

कर्फ्यू दंगा, जले तिरंगा

जले तिरंगा, काश्मीर में

काश्मीर में, नैन नीर में

नैन नीर में, पाक ठिठोली

पाक ठिठोली, लाठी गोली | "

(रमेशराज )

'नव कुंडलिया 'राज' छंद'-27

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" स्वच्छ न पानी, बिजली संकट

बिजली संकट, राम-राम रट

राम-राम रट, जीवन बीते

जीवन बीते, बड़े फजीते

बड़े फजीते, दुखद कहानी

दुखद कहानी, स्वच्छ न पानी | "

(रमेशराज )

'नव कुंडलिया 'राज' छंद'-28

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चाकू तनते, अब क्या हो हल

अब क्या हो हल, मानव पागल

मानव पागल, जाति-धर्म में

जाति-धर्म में, घृणा-कर्म में

घृणा-कर्म में, हैवाँ बनते

हैवाँ बनते, चाकू तनते | "

(रमेशराज )

'नव कुंडलिया 'राज' छंद'-34

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" आज़ादी के सपने खोये

सपने खोये , जन - जन रोये ,

जन - जन रोये , अब क्या होगा ?

अब क्या होगा , क्रूर दरोगा !

क्रूर दरोगा संग खादी के

सपने खोये आज़ादी के |

(रमेशराज )

|| 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' ||

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" बादल सुख के , कहीं न बरसें

कहीं न बरसें, क्या जन हर्षें ?

क्या जन हर्षें, बस दुःख ही दुःख

बस दुःख ही दुःख, अति मलीन मुख,

अति मलीन मुख, उलझन पल-पल

उलझन पल-पल, दुःख दें बादल |

(रमेशराज )

|| 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' ||

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" सत्ता का मद आज बोलता

आज बोलता , जहर घोलता

जहर घोलता , जन जीवन में

जन जीवन में , जल में वन में

जल में वन में , नेता के पद

नेता के पद, सत्ता का मद | "

(रमेशराज )

|| 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' ||

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" माँगे रिश्वत बाबू - अफसर

बाबू - अफसर , भारी जन पर ,

भारी जन पर , नित गुर्राए

नित गुर्राए , काम न आये

काम न आये , देखो जुर्रत

देखो जुर्रत , माँगे रिश्वत | "

(रमेशराज )

|| 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' ||

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" सत्ता का मद आज बोलता

आज बोलता , जहर घोलता

जहर घोलता , जन जीवन में

जन जीवन में , जल में वन में

जल में वन में , नेता के पद

नेता के पद, सत्ता का मद | "

(रमेशराज )

|| 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' ||

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" सत्ता का मद आज बोलता

आज बोलता , जहर घोलता

जहर घोलता , जन जीवन में

जन जीवन में , जल में वन में

जल में वन में , नेता के पद

नेता के पद, सत्ता का मद | "

(रमेशराज )

|| 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' ||

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" तोड़े छत्ता, शहद निचोड़े

शहद निचोड़े , कम्बल ओढ़े

कम्बल ओढ़े , धुंआ करे नित

धुंआ करे नित , हो आनन्दित

हो आनन्दित , जिसकी सत्ता

जिसकी सत्ता , तोड़े छत्ता | "

(रमेशराज )

|| 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' ||

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" नेताजी के रूप निराले

रूप निराले , मद को पाले

मद को पाले , तनिक न डरते

तनिक न डरते , फायर करते

फायर करते , काम न नीके

काम न नीके , नेताजी के | "

(रमेशराज )

|| 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' ||

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" ब्रह्मराक्षस कैंची छोड़ें

कैंची छोड़ें , चाकू छोड़ें ,

चाकू छोड़ें , सिलें पेट जब

सिलें पेट जब , होता यह तब -

होता यह तब , झट पड़ता पस

बने डॉक्टर , ब्रह्मराक्षस | "

(रमेशराज )

|| 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' ||

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" जन को खाएं , मौज उड़ायें

मौज उड़ायें , ईद मनाएं

ईद मनाएं नेता - अफसर

नेता - अफसर , धन - परमेश्वर

धन - परमेश्वर अति मुस्काएं

अति मुस्काएं , जन को खाएं | "

(रमेशराज )

|| 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' ||

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" रात घनी है , दीप जला तू

दीप जला तू , क्या समझा तू ?

क्या समझा तू ? साजिश गहरी

साजिश गहरी , सोये प्रहरी

सोये प्रहरी , रति लुटनी है

रति लुटनी है , रात घनी है | "

(रमेशराज )

|| 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' ||

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" मत जा प्यारे , अफवाहों पर

अफवाहों पर , इन राहों पर

इन राहों पर , वोट - सियासत

वोट - सियासत , छल का अमृत

छल का अमृत जन - संहारे

जन - संहारे , मत जा प्यारे | "

(रमेशराज )

|| 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' ||

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" जिसको हम सब , मानें सूरज

मानें सूरज , तेज रहा तज

तेज रहा तज , इसे भाय तम

इसे भाय तम , अब तो हर दम

हर दम इसके तम में सिसको

सिसको , सूरज मानो जिसको | "

(रमेशराज )

|| 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' ||

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" जेठ मास को , बोल न सावन

बोल न सावन , बता कहाँ घन ?

बता कहाँ घन ? बस लू ही लू

बस लू ही लू , कोयल - सा तू

कोयल - सा तू अधर रास को

अधर रास को , जेठ मास को | "

(रमेशराज )

|| 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' ||

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" तेज गया अब तेजपाल का

तेजपाल का , धर्म - डाल का

धर्म - डाल का फूल सुगन्धित

फूल सुगन्धित बदबू में नित

बदबू में नित बापू का सब

बापू का सब तेज गया अब | "

(रमेशराज )

|| 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' ||

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" आग सरीखे हर विचार को

हर विचार को , हर अँगार को

हर अँगार को और हवा दो

और हवा दो , क्रान्ति बना दो

क्रान्ति बना दो , बन लो तीखे

बन लो तीखे , आग सरीखे | "

(रमेशराज )

|| 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' ||

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" आज क्रान्ति का राग जरूरी

राग जरूरी , आग जरूरी ,

आग जरूरी , गमगीं मत हो

गमगीं मत हो , भर हिम्मत को ,

भर हिम्मत को , खल से टकरा

राग जरूरी आज क्रान्ति का | "

(रमेशराज )

|| 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' ||

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" नयी सभ्यता आयी ऐसी

आयी ऐसी , कैसी - कैसी ?

कैसी - कैसी चमक सुहानी !

जेठ संग भागे द्वौरानी

द्वौरानी ने त्यागी लज्जा

लज्जाहीना नयी सभ्यता | "

(रमेशराज )

|| 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' ||

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" हरदम अब तो सत्ता के यम

यम गम देते चीखें मातम ,

मातम से हम उबरें कैसे

कैसे हल निकलेंगे ऐसे ?

ऐसे में बदलो ये सिस्टम

सिस्टम लूट रहा है हरदम | "

(रमेश राज )

|| 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' ||

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" धन पशुओं को पुष्ट करें सब

पुष्ट करें सब ये नेता अब

ये नेता अब , जन को लूटें

जन को लूटें , मारें - कूटें

मारें - कूटें अति निर्बल जो

पुष्ट करें सब धन पशुओं को | "

(रमेशराज )

|| 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' ||

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" घर के ऊपर छान न छप्पर

छान न छप्पर , वर्षा का डर

वर्षा का डर , धूप जलाए

धूप जलाए , ' होरी ' अक्सर

' होरी ' अक्सर , ताने चादर

ताने चादर , घर के ऊपर | "

(रमेशराज )

|| 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' ||

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" कैसा योगी , नारी रोगी !

नारी रोगी , मिलन - वियोगी !

मिलन - वियोगी , धन को साधे !

धन को साधे , राधे - राधे !

राधे - राधे रटता भोगी

रटता भोगी , कैसा योगी ? "

(रमेशराज )

|| 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' ||

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" इतना वर दो मात शारदे !

मात शारदे , हाथ न फैले

हाथ न फैले , कभी भीख को

कभी भीख को , अब इतना दो

अब इतना दो , दूं जग - भर को

दूं जग - भर को , इतना वर दो | "

(रमेशराज )

|| 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' ||

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" हत्यारा अब मुस्काता है

मुस्काता है , तम लाता है

तम लाता है , देता मातम

देता मातम , जब हँसता यम

यम फूलों - सम लगता प्यारा

प्यारा - प्यारा अब हत्यारा | "

(रमेशराज )

|| 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' ||

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" आओ प्यारो ग़म को मारो

ग़म को मारो , तम को मारो

तम को मारो , चलो नूर तक

चलो नूर तक , दूर - दूर तक

दूर - दूर तक , रश्मि उभारो

रश्मि उभारो , आओ प्यारो | "

(रमेशराज )

|| 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' ||

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" कबिरा - सूर संत ज्यों नरसी

नरसी , मीरा , दादू , तुलसी

तुलसी जैसे अब बगुला - सम

अब बगुला - सम , मीन तकें यम

यम का धर्म सिर्फ अब ' धन ला '

' धन ला ' बोले मीरा - कबिरा | "

(रमेशराज )

|| 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' ||

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" जनता चुनती जाति - रंग को

जाति - रंग को , अति दबंग को

अति दबंग को जीत मिले जब

जीत मिले जब , मद में हो तब

मद में हो तब , नादिर बनता

नादिर बनता , कटती जनता | "

(रमेशराज )

|| 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' ||

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" सदविचार सदनीति यही अब

अब बन डाकू हम सबके सब

हम सबके सब कुण्डल छीनें

कुण्डल छीनें , मारें मीनें

मारें मीनें कर ऊंचा कद

कद को भोग - विचार बना सद | "

(रमेशराज )

|| 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' ||

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" कर परिवर्तन , बहुत जरूरी

बहुत जरूरी , दुःख से दूरी

दुःख से दूरी तब होगी हल

तब होगी हल , चुनें वही दल

चुनें वही दल, खुश हो जन - जन

खुश हो जन - जन , कर परिवर्तन | "

(रमेशराज )

|| 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' ||

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" तम का घेरा , नहीं सवेरा

नहीं सवेरा , सिर्फ अँधेरा

सिर्फ अँधेरा , चहुँ दिश दंगे

चहुँ दिश दंगे , भूखे - नंगे

भूखे - नंगे , यम का डेरा

यम का डेरा , तम का घेरा | "

(रमेशराज )

|| 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' ||

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" खूनी पंजे , फंद - शिकंजे

फंद - शिकंजे , छुरी - तमंचे

छुरी - तमंचे , लेकर कट्टा

लेकर कट्टा , दीखें नेता

दीखें नेता मति के अन्धे

अन्धे के हैं खूनी पंजे | "

(रमेशराज )

|| 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' ||

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" जन के बदले नेता को ले

नेता को ले , कवि अब बोले

कवि अब बोले , खल की भाषा

खल की भाषा में है कविता

कविता में विष ही विष अर्जन

विष अर्जन को आतुर कवि - मन | "

[रमेशराज ]

|| 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' ||

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" जन के बदले नेता को ले

नेता को ले , कवि अब बोले

कवि अब बोले , खल की भाषा

खल की भाषा में है कविता

कविता में विष ही विष अर्जन

विष अर्जन को आतुर कवि - मन | "

(रमेशराज )

|| 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' ||

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" सब कुछ मंहगा बोले नथुआ

बोले नथुआ , ये लो बथुआ

बथुआ भी अब भाव पिचासी

भाव पिचासी , चाल सियासी

चाल सियासी , चुन्नी - लहंगा

चुन्नी - लहंगा , सब कुछ मंहगा | "

(रमेशराज )

|| 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' ||

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" ओ री मैना ओ री मैना

मेरी बेटी ! मेरी बहना !

मेरी बहना ! जाल बिछाये

जाल बिछाये, खल मुस्काये

खल मुस्काये , बच के रहना

बच के रहना , ओ री मैना ! "

(रमेशराज )

|| 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' ||

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" देशभक्त की लीला न्यारी

लीला न्यारी , कर तैयारी

कर तैयारी , लूट मचाये

लूट मचाये , जन को खाये

जन को खाये , प्यास रक्त की

प्यास रक्त की , देशभक्त की | "

(रमेशराज )

|| 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' ||

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" सद विरोध पर पल - पल हमले

हमले किये असुर ने - खल ने

खल ने चाही वही व्यवस्था

वही व्यवस्था , दीन अवस्था

दीन अवस्था में हो हर स्वर

स्वर पर चोटें सद विरोध पर | "

(रमेशराज )

|| 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' ||

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" इस सिस्टम पर चोट किये जा

चोट किये जा , वीर बढ़े जा

वीर बढ़े जा , ला परिवर्तन

ला परिवर्तन , दुखी बहुत जन

दुखी बहुत जन , मातम घर - घर

चोट किये जा इस सिस्टम पर | "

(रमेशराज )

|| 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' ||

" वीर वही है लड़े दीन-हित

लड़े दीन-हित , तुरत करे चित ,

तुरत करे चित , उस दुश्मन को

उस दुश्मन को , दुःख दे जन को ,

जन को सुख हो , नीति यही है

लड़े दीन-हित , वीर वही है | "

(रमेशराज )

|| 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' ||

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"सौदागर हैं ये इज्जत के

ये इज्जत के , धन-दौलत के

धन-दौलत के , नत नारी के

नत नारी के , ' कुर्सी के

कुर्सी पर ये ज्यों अजगर हैं

ज्यों अजगर हैं , सौदागर हैं | "

(रमेशराज )

|| 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' ||

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" सपने खोये आज़ादी के

आज़ादी के , उस खादी के

उस खादी के , जंग लड़ी जो

जंग लड़ी जो , सत्य - जड़ी जो

जो थी ओजस , तम को ढोए

आज़ादी के सपने खोये | "

(रमेशराज )

|| 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' ||

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" जाति-धरम के लेकर नारे

लेकर नारे , अब हत्यारे

अब हत्यारे , जन को बाँटें

जन को बाँटें , मारें-काटें

काटें जन को वंशज यम के

लेकर नारे जाति-धरम के | "

(रमेशराज )

|| 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' ||

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" घर लूटा घर के चोरों ने

चोरों ने, आदमखोरों ने

आदमखोरों ने सज खादी

खादी सँग पायी आज़ादी

आज़ादी में गुंडे बनकर

करते ताण्डव आकर घर-घर | "

(रमेशराज )

|| 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' ||

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" अजब रंग है आज सियासी

आज सियासी , बारहमासी

बारहमासी व्यभिचारों की

व्यभिचारों की , व्यापारों की

व्यापारों की , सेक्स सन्ग है !

सेक्स सन्ग है !, अजब रन्ग है | "

(रमेशराज )

|| 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' ||

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" नेता चाहे , चकलाघर हों

चकलाघर हों , सब लोफर हों

सब लोफर हों , लोकतंत्र में

लोकतंत्र में , इसी मन्त्र में

इसी मन्त्र में , चले व्यवस्था

चले व्यवस्था , चाहे नेता | "

(रमेशराज )

|| 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' ||

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" पांच साल के बाद मदारी

बाद मदारी, कर तैयारी

कर तैयारी , करे तमाशा

करे तमाशा , बन्दर नाचे

बन्दर नाचे , कर-कर वादे

कर-कर वादे , पांच साल के | "

(रमेशराज )

|| 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' ||

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" राजा ने की यही व्यवस्था

यही व्यवस्था, यौवन सस्ता

सस्ता ब्लू फिल्मों का सौदा

सौदा ऐसा जिसमें नेता

नेता चाहे नव शहजादी

यही व्यवस्था राजा ने की | "

(रमेशराज )

|| 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' ||

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" बनता ज्ञानी , अति अज्ञानी

अज्ञानी की यही कहानी

यही कहानी, है बड़बोला

है बड़बोला, केवल तोला

केवल तोला, टन-सा तनता

टन-सा तनता , ज्ञानी बनता | "

(रमेशराज )

|| 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' ||

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" कवि की कविता में खल बोले

खल बोले विष जैसा घोले

घोले सहमति में कड़वाहट

कड़वाहट से आये संकट

संकट में साँसें जन-जन की

जन की पीड़ा रही न कवि की | "

(रमेशराज )

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रमेशराज, 15/109, ईसानगर, अलीगढ-२०२००१

मो.-९६३४५५१६३०

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