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ललिता भाटिया की कहानियाँ

इन्डोर प्लांट 

माँ जी कल सुबह १० बजे आप तैयार हो जाना श्रेया के स्कूल जाना हे खाने के टेबल पर बहु  ने कहा तो उमा जी हैरान हो गई । बहू, तुम और उमंग चले जाना । 

नहीं माँ कल हम नहीं जा सकते स्कूल में ग्रैंड पैरेंट डे वहाँ आप और श्रेया के नाना नानी जा सकते हे उमंग ने कहा । \

लेकिन में वाकर लेकर , अरे माँ कुछ नहीं होता आप जाओ तो सही आप को अच्छा लगेगा और फिर श्रेया के नाना नानी भी साथ होंगे उमा जी चुप रह गई  बहु खाने के बाद एक बार मेरे कमरे में आना 
खाने के बाद वो अपने कमरे में आ गई । कुछ देर बाद बहु आई तो उस उन की पसंद का हिना कलर का सूट निकल और प्रेस कर दिया । 

सुबह १० बजे वो अच्छे से तैयार हुई उन का मन पहली बार स्कूल जाने वाले बच्चे की तरह उत्साहित था । कुछ ही देर में वो स्कूल के सामने खड़े थे बहु बेटा उन्हें छोड़ कर चले गए । 

श्रेय की नानी कम उम्र की आधुनिक महिला थी । वो उमा जी का हाथ पकड़ कर अंदर ले गई । स्कूल को दुल्हन की तरह सजाया गया था । बच्चे तिलक लगा कर फूल बरसा  कर अपने ग्रैंड पेरेंट्स का स्वागत कर रहे थे । गेट पर फूलों की टोकरी लिए पीले लहंगे में श्रेया परी  लग रही थी । दादी और नाना नानी को देख वो चहक उठी । 

अंदर हॉल में आरामदेह सोफे पड़े थे । सभी टीचर्स सब का परिचय ले रही थी । साथ २ कोल्ड ड्रिंक्स और स्नैक्स भी सर्व कर रही थी ।  लगभग आधे घंटे में ही सारा हॉल भर गया । उमा जी ने देखा सिर्फ वो ही नहीं और भी लोग वाकर या स्टिक के सहारे आये थे २-३ तो वील चेयर पर भी थे । 

स्टेज पर सरस्वती वंदना गई गई । फिर बुजुर्गों के सम्मान में एक गीत गया । इस के बाद कविता 'लघु नाटिका डांस की प्रस्तुति हुई सभी का थीम बुजुर्ग ही थे । 

इस के बाद कई प्रतियोगिताएँ कराई जिस में बुजुर्गों ने बाद चढ़ कर भाग लिया । श्रेया की नानी ने तो कई इनाम भी जीते । तभी स्टेज पर गाने प्रतियोगिता की घोषणा हुई । अब तक शांत बैठी उमा जी के अंदर भी गाने का कीड़ा कुलबुलाने लगा उन्होंने अपना नाम लिखवा दिया । स्टेज पर चढ़ते समय वो कुछ घबराई । पर सामने श्रेया को देख उस का हौसला बड़ा । उन्होंने अपने ज़माने की फिल्म काजल का भजन गाया -

तोरा मन दर्पण कहलाय 

भले बुरे सारे कर्मों को देखे और दिखाई 

उनके भजन के बाद सारा पंडाल तालियों से गूँज उठा। उन के बाद ५ लोगों ने और गाने गाए । प्रतियोगिता का निर्णय लांच के बाद होना था । 

खाने का खूब शानदार इंतज़ाम था । बुज़ुर्गों के हिसाब का कण तीखा कहना ,साथ में टेबल चेयर का इंतज़ाम । सब बहुत  अच्छा था । खाने के बाद वो फिर से हाल में आ गए । उस के बाद रैंप पर बुज़ुर्गों का कैट वाक देख कर सब खूब हंसे । 

फिर भजन प्रतियोगिता का निर्णय सुनाया गया । उमा जी को  दूसरा इनाम मिला । एक छोटी सी ट्राफी और एक गिफ्ट पैक जब उन्हें दिया गया तो सब ज्यादा जोर से ताली उन की पोती बजा रही थी । उन के शरीर की फुर्ती से लग रहा था मानो वो २० साल छोटी हो गई है । वापिस आते समय उन की आँखों के सामने अपनी सास की ज़िन्दगी घूम गई जो कूल्हे की हड्डी टूटने के बाद ऐसी बिस्तर से लगी की ४ कंधों पर ही छड़ी । लाभ ३ साल वो इनडोर प्लांट की तरह ही रही । जिन्हें बहार की हवा या  धूप नहीं मिली । काश उस समय हम में भी इतनी समझ होती । ५० साल के बाद जीवन ख़त्म नहीं होता बच्चों का साथ उनमें नई स्फूर्ति भर देता है । 

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करवा चौथ की सरगी 

निशा इस बार करवा चौथ पर काफी उत्साहित थी । वो इस के लिए काफी समय से पैसे भी बचा रही थी । अपनी सभी सहेलियों की तरह इस बार वो भी नई साड़ी खरीदना चाहती थी ब्यूटी पार्लर जाना चाहती थी । पति और बच्चों को भेज कर निशा ने अपने बचे पैसे गिने १४५५ थे । वो जल्दी से तैयार हो कर बाजार गई । लाल रंग की एक सस्ती रेशमी साड़ी और थोड़ा श्रृंगार का सामान खरीदा लगभग ९०० रुपय खर्च हो गए । अब वो फेसिअल के लिए ब्यूटी पार्लर गई । लेकिन जहाँ गई वहां लम्बी २ लाइन थी । आखिर एक पार्लर में लगा की जल्दी नंबर आ जायेगा । लेकिन वहां के रेट सुन उस के पेरो के नीचे से ज़मीन खिसक गई १०० रुपय थ्रेडिंग के ५०० फेशियल के । उस के पास सिफ ५०० रूपए थे और अभी पूजा का सामान  भी खरीदना था । 

तभी पतिदेव का फोन आया : अरे निशा तुम कहाँ हो ? रूबल के स्कूल से फोन आया था वो स्कूल की सीढ़ियों से गिर गया हे तुम सिविल हॉस्पिटल पहुँचो में भी वहीँ जा रहा हूं । बदहवास निशा ने जब रूबल को देखा तो जान में जान आई । उसे कुच्छ खरोंचे आई थी और माथे पर छोटा सा जख्म था । डॉक्टर ने ने उसी दिन डिस्चार्ज कर दिया । सरकारी हॉस्पिटल होने के कारन वहां तो पैसे नहीं लगे पर डॉक्टर ने दवाइयों की लम्बी लिस्ट थम दी ममेरे उन पैसों से रूबल की दवाई आई और पूजा के लिए मैंने पाव भर मठरी ले ली । में सोच रही थी अगर आज ब्यूटी पार्लर में नम्बर आ जाता तो में बेटे के लिए दवाई कैसे खरीद पाती । उसे याद आया की सासु माँ हमेशा कहती थी कि त्यौहार मनाने के लिए मन में आस्था होनी चाहिए ज्यादा दिखावा करने से त्यौहार के मायने ही बदल जाते हे आज उसे सास की तरफ से ये सरगई मिली हे 

ललिता भाटिया 

२११ सुभाष नगर 

रोहतक १२४००१ 

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Lalita Bhatia

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