बुधवार, 5 अक्तूबर 2016

कायर मरते पीठ दिखाकर [ लम्बी तेवरी-तेवर चालीसा ] -रमेशराज

कायर मरते पीठ दिखाकर
[ लम्बी तेवरी-तेवर चालीसा ]
-रमेशराज
-------------------------------------------------------
‘मीरा’ जैसा धर्म निभाकर
तीखे विष का प्याला पाकर, मरा न कोई, अमर हुआ। 1

बन प्रहलाद देख ले प्यारे
अग्नि-कुण्ड के बीच नहाकर, मरा न कोई, अमर हुआ। 2

अमृत रख औरों की खातिर
विष पी नीलकंठ कहलाकर, मरा न कोई, अमर हुआ। 3

इसकी एक मिसाल कबीरा
नयी रौशनी को फैलाकर, मरा न कोई, अमर हुआ। 4

भगत’, ‘राज’, ‘सुखदेव’ सरीखी
जल्लादों से फाँसी पाकर, मरा न कोई, अमर हुआ। 5

कायर मरते पीठ दिखाकर
वीर वक्ष पर गोली खाकर, मरा न कोई, अमर हुआ। 6

जिसमें बैठे हों कुछ बच्चे
वही डूबती नाव बचाकर, मरा न कोई, अमर हुआ। 7

भस्मासुर बनने से अच्छा
अपने को सुकरात बनाकर, मरा न कोई, अमर हुआ। 8

कठिन कार्य था हमने माना
पर्वत से गंगाजी लाकर, मरा न कोई, अमर हुआ। 9

पुत्र-वियोग भले झेला हो
दशरथ जैसा वचन निभाकर, मरा न कोई, अमर हुआ। 10

पाँच-पाँच पति, फिर भी अबला!
उस द्रौपदि का चीर बढ़ाकर, मरा न कोई, अमर हुआ। 11

गुरु सम्मुख बन एकलव्य-सा
और अँगूठा विहँस कटाकर, मरा न कोई, अमर हुआ। 12

मरते काल बाँधने  वाले
राम-सरीखे तीर चलाकर, मरा न कोई, अमर हुआ। 13

‘अपने डर से बाहर निकलो’
कायर लोगों को समझाकर, मरा न कोई, अमर हुआ। 14

जिन्हें गुलामी ही प्यारी है
उनके भीतर आग बसाकर, मरा न कोई, अमर हुआ। 15


तन की नहीं वतन की खातिर
अपने को ‘आजाद’ बनाकर, मरा न कोई, अमर हुआ। 16

बनना सीख संत ‘फूले’ तू
जो कन्याएँ दलित, पढ़ाकर, मरा न कोई, अमर हुआ। 17

लोग मरें कर अपनी चिन्ता
बस औरों के लिये दुआ कर, मरा न कोई, अमर हुआ। 18

खल की सत्ता से टकराकर
ऐसा कोई काम नया कर, मरा न कोई, अमर हुआ। 19

मोम सरीखा पिघल और जल
अंधकार  में उजियारा कर, मरा न कोई, अमर हुआ। 20

पत्रकार ‘विद्यार्थी’ जैसा
सम्प्रदाय की आग बुझाकर, मरा न कोई, अमर हुआ। 21

हिम्मत हो अब्दुल हमीद-सी
पैटन टेंकों से टकराकर, मरा न कोई, अमर हुआ। 22

भले तीर-भाले झेले हों
पापी की लंका को ढाकर, मरा न कोई, अमर हुआ। 23

इन्द्रदेव का कोप झेलते
अँगुली पर गिर्राज उठाकर, मरा न कोई, अमर हुआ। 24

सूखे हुए खेत जो देखे
बादल ऐसे में वर्षा कर, मरा न कोई, अमर हुआ। 25

झट दे डालो अग्नि-परीक्षा
सोने-सा मन खूब तपाकर, मरा न कोई, अमर हुआ। 26

‘तिलक’ सरीखे भाषण देकर
शब्द-शब्द को अग्नि-कथा कर, मरा न कोई, अमर हुआ 27

जैसे रानी लक्ष्मीबाई
अरि के सम्मुख खून बहाकर, मरा न कोई, अमर हुआ। 28

जिससे डरे लोग सदियों से
ऐसे अंधकार  में जाकर, मरा न कोई, अमर हुआ। 29

अबला-हित ज्यों भिड़ा जटायू
खल से अपने पंख कटाकर, मरा न कोई, अमर हुआ। 30

जीना सब कपीश-सा सीखो
सुरसा के जबड़ों में जाकर, मरा न कोई, अमर हुआ। 31

मन यदि ही जैसे ‘सम्पाती’
सूरज से तन को जलवा कर, मरा न कोई, अमर हुआ। 32

‘लिकंन-सा’ संकल्प अगर हो
जाति-भेद का रूप मिटाकर, मरा न कोई, अमर हुआ। 33

लड़ो लड़ाई तुम ‘लेनिन-सी’
मजदूरों का हक दिलवा कर, मरा न कोई, अमर हुआ। 34

मिट जाओगे मीरजाफरो।
देश-प्रेम में प्राण लुटाकर, मरा न कोई, अमर हुआ। 35

मिले चुनौती लंकेशों को
अंगद जैसा पाँव अड़ाकर, मरा न कोई, अमर हुआ। 36

गुरु नानक-सा बनना अच्छा
धर्मों के पाखण्ड बताकर, मरा न कोई, अमर हुआ। 37

जिनमें धधक रही हो ज्वाला
खल को वो तेवर दिखलाकर, मरा न कोई, अमर हुआ। 38

अहंकार में एैंठ रही जो
उस गर्दन तलवार चलाकर, मरा न कोई, अमर हुआ।39

कविता को तेवरी बनाकर ,
खल सम्मुख तेवर दिखलाकर, मरा न कोई, अमर हुआ।40
................................................................................
+रमेशराज,15/109, ईसानगर, अलीगढ़-202001
Mo.-9634551630  

0 blogger-facebook

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

------------------------------------------------------------

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------