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उमेश चरपे की कविताएँ

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बूँद चाहती है
बादल से गिरती बूंदें
उछल कूद करती बूंदें
मिटती कुछ बचती बूंदें
चाहती है -
डबरों से उभर कर
नाले से बहकर
नदी के रास्तों
से लड़कर
महानदी के थपेडों को सहकर
पहुँचना चाहती है
एक बूँद समंदर तक।

मौन वीणा
मौन पड़ी
मेरे मन की वीणा
न जाने कितने दिन बीत गये
इन जल्लादों की दुनिया ने
हर साज छीन लिया
और थमा दिये
बेसुरे डुगडूगे
कर्कश और कान फेाडू
पेट में बच्चे दम तोड़ देते हैं
जिन्हें सुनकर
या फिर विकलांग होते हैं
अंधी आधुनिकता की तरह।

गरीबी
मैं, गरीब इतना भी नहीं
कि कोई आसानी से
डरा दें
डराती हैं भूख
बेबसी, लाचारी
और भूखे बच्चे
एक टक देखते रोटियों को।

भूख सिखाती है
भूख के चेहरे
बड़े अजीब हैं
किसी को खाने की भूख है
किसी को सम्मान की
एक से पेट भरता हैं
दूसरे से आत्मा
पर जब चोट लगती है
भूख सिखा देती है जीना।

दुःख आईना है
तुम दुःखी हो, खुश होने की कोशिश मत करो
तुम्हारे चेहरे पर
दुःख ज्यादा और साफ दिखता है
तुम्हें वैसा ही दिखाता है
जैसे तुम वाकई हो !

कभी न खत्म होने वाला .....
सदियों से चला आ रहा
क्रम
अब भी कोई
चुपके से प्रेम करता है
अब भी कोई
किसी के लिए मरता है
अब भी कोई
कंगन में राम का रूप निहारता है
अब भी कोई
इस दुनिया में सूली चढ़ता है
अब भी कोई
प्रेम गीत गाता है
अब भी कोई
मीरा की तरह घुँघरू बाँध लेता है
अब भी कोई
कृष्ण के लिए राधा बन जाता है
अब भी कोई मजनूं
लैला के लिए बावला सा हो जाता है
सदियों से चला आ रहा
कभी न खत्म होने वाला
क्रम
प्रेम का ।

इक स्त्री की पीड़ा
मैं जिन्दा रही
इक बेटी बनकर

मैं जिन्दा रही
आग में तपकर बनकर
मैं जिन्दा रही
जल कर भी
मैं जिन्दा रही
पिघलकर कर भी

मैं जिन्दा रही
दीवालों पर
खूँटी की तरह
जिस पर
तू टाँगता आया
सदियों से अपना बोझ !

आज का बहेलिया
पत्ता-पत्ता बेचैन है
डाली डाली बेचैन है
पकड़ते है कसकर
डालियों को
जैसे कोई छोटा बच्चा
पकड़ता हो माँ को
सुन रखी हो कहानियाँ
राक्षसों की
चिड़ियों की आहट
पर सहम जाते हैं
कब लेना पड़े विदा
कब काट दे नसों को
उखाड़ फेंके
आज का बहेलिया
हत्यारा है
मगर सभ्य है
संस्कारी है।

हमारे ख़्वाब
हमारे ख़्वाब
भी इन्हीं
तितलियों की तरह होते हैं
जो बैठते हैं
कुछ पल
फूल पर
और
छोड़ जाते हैं
अपना रंग

 

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बायोडाटा
            नाम     - उमेश चरपे
            पिता     - श्री रामलाल चरपे
            माता     - श्रीमती रंजना चरपे
               जन्म    -15 अगस्त 1985
            योग्यता    -     एम0ए0 हिन्दी
                     एम0ए0 संस्कृत
Ø    नेट हिन्दी , जे.आर.एफ (जुनियर रिसर्च फेलोशिप) 2011
Ø    एम.ए. हिन्दी  बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल  प्रावीण्य
सूची में द्वितीय स्थान

        साहित्यिक          -     कविता, कहानी,

प्रमुख पत्रिकाएंँ जिनमें कविताएंँ प्रकाशित हुई -
·    देनिक 'खबर वाणी'
·    हलचल
·    मधेपुरा टाईम्स
·    साहित्य गुंजन
·    युद्धरत आम आदमी
·    वागर्थ

सम्प्रति-        शोधार्थी (बरकतउल्ला विश्व विद्यालय, भोपाल )

        स्थाई पता        - मु0पो0 - भरकावाड़ी, त0+जि0 - बैतूल , मध्यप्रदेश
                      पिन0 - 460001 मो0 - 8962805866
E-mail- charpe.umesh@gmail.com

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