रु. 25,000+ के  नाका लघुकथा पुरस्कार हेतु रचनाएँ आमंत्रित.

अधिक जानकारी के लिए यहाँ http://www.rachanakar.org/2018/10/2019.html देखें.

नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -
 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें.

व्यंग्य की जुगल बंदी - स्वच्छता अभियान

साझा करें:

9 अक्तूबर 2016 की व्यंग्य की जुगलबंदी का विषय था -स्वच्छता अभियान। निर्मल गुप्त साफ सफाई और बदला हुआ समय वक्त बदल गया है। चारों ओर साफ़ सफ...

9 अक्तूबर 2016 की व्यंग्य की जुगलबंदी का विषय था -स्वच्छता अभियान।

निर्मल गुप्त

clip_image001

साफ सफाई और बदला हुआ समय

वक्त बदल गया है। चारों ओर साफ़ सफाई की मारक होड़ मची है। मौसम भी बदला है। ऋतुएं जल्दी-जल्दी अपने पन्ने पलट रही हैं। जब से नई सरकार आई है रातों -रात बहुत कुछ बदल गया है। अमनपसंद कबूतर खूंखार हो गये हैं। गुटरगूं गुटरगूं की जगह गुर्राते हुए लगने लगे हैं। गौरेया के बारे में उड़ती हुए बेपर की खबर यह आ रही है कि वह पड़ोसी मुल्क में आतंकवाद के प्रशिक्षण के लिए गयी है। आपसी राम राम में स्वार्थी तत्वों को साम्प्रदायिकता की धमक सुनाई देने लगी है। लोग एक दूसरे की खिल्ली उड़ाने के लिए चौबीसों घंटे नये से नये मुहावरे रच रहे है। यहाँ तक कि मेरे घर के बाहर लगे गुलमोहर के पेड़ पर लाल फूल फुनगी पर लगने लगे है। इसकी छोटी-छोटी पत्त्तियाँ धरती पर बिखर कर सिर्फ मासूम पत्ती नहीं, गंदगी लगने लगी हैं। स्वच्छता अभियान वालों का टोला इस गंदगी के बावत मुझे और गुलमोहर को सख्त शब्दों में चेता चुका है। इसका परिणाम यह हुआ कि पेड़ ने फूलों को पत्तों की ओट में छुपा लिया ,पर पत्तियों को फैलाना बदस्तूर कायम रखा है। दरख्त कमोबेश आदतन जिद्दी होते हैं। हालाँकि मैं सहमा हुआ हूँ।


सब कह रहे है तो ठीक ही कह रहे हैं कि अब समय पहले जैसा नहीं रहा। लोकतंत्र में जब बहुमत कुछ कहता है तो उसे बाय डिफॉल्ट सत्य मान लिया जाता है। अब टाइम पहले की तरह दीवार पर टंग कर पेंडुलम की तरह चुपचाप दोलन नहीं करता। और न ही कलाई में बंधी घड़ी की तरह दबी आवाज़ में टिक-टिक करता है। वह गुपचुप अंदाज़ में मोबाइल के भीतर चलता है। उसी मोबाइल में जहाँ सहिष्णुता जैसे किसी मुद्दे के साइड बाय साइड घुइयाँ की सब्जी की रेसिपी डिस्कस होती है। जहाँ टमाटर के महंगेपन के साथ मूली के सस्तेपन पर गहन विमर्श होता है। जहाँ ब्रोकली के भाव तीनसौ पचास रूपये प्रति किलो से बढ़ कर तीनसौ साठ होने पर चिंता जाहिर की जाती है। जहाँ बेबी कॉर्न के दाम घटने पर बधाईयाँ गाई जाती हैं। हर जरूरी बहस का बीज वक्तव्य सब्जी मंडी से फ्री में मिलने वाले धनिये पुदीने के साथ चला आता है।


यह ऐसा देशज कालखंड है। जब सरसों के तेल के बाज़ार भाव में उछाल की शिकायत सयुंक्त राष्ट्र संघ के पटल पर अवलोकनार्थ और आवश्यक कार्यवाही हेतु रखी जाती है। गन्दगी को सफाई की भावना से ढेरों शिकायत है। देसी टालरेंस के मुद्दे को लेकर देशी-विदेशी लेखकों के दस्ते घुटनों पर झुक कर इंग्लेंड की महारानी से कातर शब्दों में गुहार करते देखे गये हैं। उनकी अभिव्यक्ति ग्लोबल है। उनकी ख्याति इंटरनेशनल। सरोकार युनिवर्सल। उन्हें याद नहीं कि अब इण्डिया इंग्लिश्स्तान का उपनिवेश नहीं, आज़ाद मुल्क है। वास्तव में बहुआयामी वैचारिकता बड़ी भुलक्कड़ होती है। नादानी को ऐतिहासिक भूल कहना उनकी मनभावन अदा है।


मुल्क की हांडी में महागठबंधन ब्रांड की उम्मीदों से भरी लज़ीज़ बिरियानी पक रही है। बीरबल की मिथकीय खिचड़ी मुल्क की स्मृति से नदारद है क्योंकि अब मुर्गी दाल से सस्ती हो चली है। टमाटर के दाम टिंडे के स्तर तक पहुँच गये है। लहसुन के दाम अनार की बराबरी कर रहे हैं। मटर और कीवी की औकात एक जैसी हो गयी है। गंवार की फली सेब के भाव बिक रही है। सुबह सवेरे नीबू पानी ग्रहण करने वाले संतरे को सस्ता पा ऑरेंज जूस पी रहे हैं। बढ़ते दामों के बीच सस्ते विकल्प मौजूद हैं। एक तरह से देखा जाये तो थोड़े-बहुत अच्छे दिन इधर -उधर आ गये हैं। मज़े से कदमताल कर रहे हैं। जनता की सहभागिता का आह्वान कर रहे हैं।


मानना होगा कि यह अर्धसत्यों से भरा बेहद कन्फ्यूजन से भरा किंतु नयनाभिराम समय है।

 

-------------------.

अनूप शुक्ल

clip_image002

स्वच्छता अभियान के बाद
---------------------------------
इतवार को विक्रम की छुट्टी होती है। वह आराम से खर्राटे लेते हुये सो रहा था कि उसके मोबाइल की घंटी बजी। फ़ोन बेताल का था। झुंझलाते हुये विक्रम ने फ़ोन उठाया। बेताल बोला –’तू अभी तक सो रहा है। मैं यहां कब से नगर निगम के दफ़्तर के पास तेरा इंतजार कर रहा हूं कि तू लादकर ले चलेगा। सवाल-जबाब करने होंगे। जल्दी आ जा यार। ड्यूटी पूरी करके फ़िर ऐश करें। ’

विक्रम ने अनमने मन से मुंह धोया और निकल लिया। बेताल को लादा और चल दिया। आज फ़िर उसको बेताल के बढे हुये वजन का अंदाज हुआ। उसने कहा-“ बेताल भाई, तुम्हारा वजन तो नेताओं के वेतन भत्ते की तरह बढ़ता जा रहा है। कुछ मेरे पर भी रहम कर भाई। वजन कम कर। “

बेताल ने पहले तो सोचा इस विक्रम को हड़का दें। लेकिन यह सोचकर कि इसके बाद किसकी पीठ पर फ़्री फ़ंड में लदेगा वह चुप रह गया। उसने विक्रम को ’सर्जिकल स्ट्राइक’ के किस्से सुनाये। सरकार और सेना की बहादुरी का बखान किया और फ़िर विक्रम को किसी को न बताने की कसम खिलाते हुये बताया कि सरकार ने ’पहली सर्जिकल स्ट्राइक’ कूड़े के खिलाफ़ की थी। उस अभियान का नाम रखा था ’स्वच्छता अभियान। ’ मैं अपना आज का सवाल पूछने के पहले इस अभियान के बारे में बताता हूं।

विक्रम को हंसी आने को हुई। उसका मन किया कि वह बेताल को बता दे कि जिस बात को देश का बच्चा-बच्चा जानता है उसको यह बेताल किसी को न बताने की कसम दिला रहा है। पिछले दिनों स्वच्छता अभियान की फ़ाइलें इतनी दौड़ीं कि बाकी के लिये ट्रैफ़िक जाम हो गया था। जो भी गन्दगी हुई खर्च-वर्च में उस सबको ’स्वच्छता अभियान’ के नाम पर निपटा दिया गया। और भी तमाम बातें उसको पता थीं लेकिन वह चुप रहा। उसको पता था कि आजकल सच बोलना बड़ा बवाल का काम है। क्या पता कौन देशद्रोही, गद्दार बताकर गरियाने लगे।

बेताल ने कहा- आजकल सब जगह काम करने का तरीका बदला जा रहा है। जगहों के नाम बदले जा रहे हैं। कुछ हो भले ने लेकिन बदलाव का एहसास हो यह ध्यान रखा जा रहा है। इसलिये मैं भी आज से ही कहानी कम सुनाऊंगा लेकिन सवाल ज्यादा। सवाल भी ऐसे पूछुंगा जिनके बारे में कहानी में हमने बताया ही नहीं होगा। तुमको खुद अपने मन से जबाब देने होंगे।

विक्रम को पता था कि उसका कुछ बोलना बेकार है। दफ़्तरों के अडियल बास की तरह करेगा यह अपने ही मन की। इसलिये उसने झल्लाते हुये कहा –’अब यार तू शुरु कर। दूसरे की गर्दन पर लदे-लदे तुझे तो कुछ फ़र्क नहीं पड़ता लेकिन मेरे हाल तो उस जनता की तरह हो रहे हैं जो नाकारा जनप्रतिनिधियों को लादे-लादे घूमती रहती है।

बेताल ने गला खखारकर अपनी बात शुरु की:

“आजकल स्वच्छता अभियान का हल्ला मचा हुआ है देश भर में। कूड़ा ठिकाने लगाया जा रहा है। कहीं-कहीं का कूड़ा हल्ला मचा रहा है। ऐसे कैसे भगा दोगे हमको? हम यहां के स्थायी रहवासी हैं। कहां जायेंगे अपना परिवार लेकर?

सफ़ाई अभियान वाले हाथ जोड़ रहे हैं कूड़े के! भाई साहब एक-दो दिन की बात है! कहीं इधर-उधर हो जाइये। हमको साफ़-सफ़ाई कर लेने दीजिये। फ़ोटो-सोटो हो जाने दीजिये। फ़िर आप रहियेगा ठाठ से। आपकी ही जगह है। कौन रोकने वाला है आपको!

कूड़ा शरीफ़ आदमियों की तरह इधर-उधर हो जाता है। कहीं दीवार के पीछे, कहीं किसी गढ्ढे में, कहीं किसी पुल की आड़ में। जहां कुछ आड़ नहीं मिली वहां फ़टा तिरपाल ओढ़ के सो गया। नदी, नहर, नाले में कूद गया। सफ़ाई की इज्जत के लिये गन्दगी कुर्बान हो गयी।

सबने सफ़ाई के करते हुये फोटो खिंचाये। सफ़ाई मुस्करा रही है। लोग खिलखिला रहे हैं। स्वच्छता अभियान पूरा हो गया है। छुट्टी बरबाद होने का दुख कम हो गया है। “

इतने के बाद बेताल ने कहा। नये पैटर्न के हिसाब से आज कहानी इतनी ही। अब नये पैटर्न के हिसाब से मैं आज तुमसे एक से ज्यादा सवाल पूछूंगा। तुम उनके जबाब दे दोगे तो ठीक वर्ना तुम जो मुझे ढोते हुये कहानी सुनते हो और सवाल के जबाब देते हो उस पर भी सर्विस टैक्स लगा दिया जायेगा जिसकी वसूली भी तुमसे ही होगी। इसके बाद बेताल ने ये सवाल पूछे:

1. सफ़ाई अभियान के लिये झाडू-पंजा मंहगी दरों पर खरीदने के लिये कौन जिम्मेदार है?

2. एक ही तरह की झाडू एक ही दिन अलग-अलग दामों पर क्यों खरीदी गयीं?

3. एक दिन के सफ़ाई अभियान के लिये झाड़ू-पंजा खरीदने के बजाय किराये पर लेने के विकल्प पर क्यों विचार नहीं किया गया?

4. जब एक आदमी को दो घंटे ही सफ़ाई करनी थी तो हर आदमी के लिये एक झाड़ू खरीदने की बजाय एक ही झाड़ू से चार लोगों से सफ़ाई कराने विकल्प पर क्यों विचार नहीं किया गया?

5. सारे लोग एक ही जगह सफ़ाई करते पाये गये इससे कम क्षेत्र की सफ़ाई हुई। अलग-अलग जगह सफ़ाई करने के विकल्प पर क्यों विचार नहीं किया गया?

6. साल भर सफ़ाई का ठेका चलने के बावजूद इतना कूड़ा इकट्ठा कैसे हुआ? क्या सफ़ाई के ठेके में धांधली हुई है?

सवालों से विक्रम को पता चल गया कि ये ससुरा बेताल किसी बाबू से पैसा लेकर उसकी आपत्तियों के जबाब बनाने में सहायता करने का ठेका लिया है। उसने बेताल को बड़ी तेज से हड़काया और कहा कि बेताल यह आदमियों की तरह की हरकतें तुमको शोभा नहीं देती। इस तरह दलाली करना शुरु मत करो। हम लोगों की कहानियां आम जनता अभी मन लगाकर सुनती है। लेकिन जब उसको पता लगेगा कि हम इस तरह पैसा लेकर बाबुओं की आपत्तियां निपटाने में सहायता करते हैं तो वह हमको भी उन नेताओं सरीखा ही समझेगी जो पैसा लेकर संसद में सवाल पूछते हैं।

बेताल ने शर्मिंदा होने का नाटक किया और कहा इस बार बता दो क्योंकि मैं एडवांस में पैसे ले चुका हूं। अब मना करूंगा तो दलाली से बाबू का विश्वास उठ जायेगा जो किसी नौकरशाही के लिये बहुत खराब चीज है। आइंदा ऐसा नहीं होगा।

विक्रम ने झल्लाते हुये बेताल से बाबू का नाम और दफ़्तर का पता पूछा। गूगल सर्च करके आडिटर का पता लगाया। स्कैनर लगाकर उसके दिमाग से सवाल के जबाब निकालकर बेताल को लिखवाये। सवालों के जबाब इस तरह थे:

1. सफ़ाई अभियान की जब घोषणा हुई तो मांग और आपूर्ति के नियम के तहत अचानक झाडू-पंजे के दाम बढ़ गये क्योंकि सभी को सफ़ाई करनी थी। बढ़े हुये दाम पर खरीद अपरिहार्य होने के चलते जायज है। और जहां तक जिम्मेदारी का सवाल है तो इसके लिये जनता जिम्मेदार है क्योंकि जो हुआ सब अंतत: आम जनता के लिये हुआ।

2. स्वच्छता अभियान में अलग-अलग पद के लोग शामिल थे। सबके ’ग्रेड पे’ अलग थे। जैसे एक ही दूरी और एक ही तरह की गाड़ी से आने वालों लोगों के लिये वाहन भत्ता ’ग्रेड पे’ के अनुसार मिलता है वैसे ही सबके ’ग्रेड पे’ के हिसाब से झाडू की व्यवस्था की गयी। इसलिये एक ही तरह की झाडू अलग-अलग दाम पर खरीदी। ऐसा न करते तो सीनियर लोग स्वच्छता अभियान में भाग न लेते। इसलिये एक जैसी सफ़ाई सामग्री अलग-अलग दामों पर खरीदना अपरिहार्य था।

3. किराये पर सफ़ाई सामग्री उपलब्ध ही नहीं थीं। अगर कहीं थी भी तो पर्याप्त नहीं थी। इसके अलावा विभाग में कभी किराये पर सामान खरीदने का काम किया नहीं गया इसलिये अनुमानित किराये की दरें उपलब्ध नहीं थीं इसलिये भी किराये पर लेने के प्रस्ताव पर विचार नहीं किया गया।

4. जो भी लोग स्वच्छता अभियान में शामिल थे उनको अभियान के बाद एक साथ कहीं न कहीं जाना था इसलिये सब लोग एकसाथ सफ़ाई के लिये बुलाये गये। स्वच्छता के बहाने सामूहिकता का भी प्रसार हो गया। इसके अलावा अगर दिन भर सफ़ाई करते लोग तो फ़ोटोग्राफ़ी, नाश्ते वगैरह का खर्च बढ जाता।

5.अलग-अलग जगह सफ़ाई करने से फ़िर लगता बहुत कम लोग सफ़ाई कर रहे हैं। एक जगह इकट्ठा सफ़ाई करने से यह लगा कि पूरा हुजूम जुट गया है सफ़ाई के लिये। जैसे अभी प्रधानमंत्री जी के अमेरिका दौरे में ’दवाई चौराहे’ पर लोग इकट्ठा हुये तो लगा न कि पूरा अमेरिका उमड़ पड़ा। अलग-अलग शहरों में रहते तो वो मजा नहीं आता न।

6. सफ़ाई व्यवस्था साल भर चकाचक चली लेकिन जब स्वच्छता अभियान चलाना था तो इधर-उधर से कूड़े का इंतजाम किया गया। अब सरकार के आदेश का अनुपालन तो जरूरी है न!

सवालों के जबाब नोट करते ही बेताल उड़ते हुये उस बाबू के पास पहुंचा। बाबू ने उससे कहा- ’तुमने आने में देर होते देखकर मैंने आडिटर से सीधे सेटिंग करने की सोच ही रहा था। अच्छा हुआ तुम आ गये। सस्ते में काम हो गया। यह कहकर उसने बेताल को बाकी के पैसे थमाये और आपत्तियों के जबाब टाइप करने लगा।

बेताल लटकने के लिये पेड़ की तरफ़ लौटते हुये सोच रहा था कि कूड़े वाली गंदगी तो साफ़ हो जायेगी लेकिन व्यवस्था की यह गंदगी कैसी साफ़ होगी जो दिखती भले नहीं हो लेकिन गंध सबसे ज्यादा मारती है। इसके लिये स्वच्छता अभियान कब चलेगा?

#व्यंग्य, #व्यंग्यकीजुगलबंदी, Nirmal Gupta, @ravishankar.shrivastava

----------.

रवि रतलामी

clip_image003

स्वच्छता अभियान के मरफ़ी के नियम


किसी भी दिए गए इलाके में, स्वच्छता अभियान के पहले और बाद में गंदगी की स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं होता है।


यदि किसी राजनीतिक व्यक्ति ने कहीं स्वच्छता अभियान में हिस्सा लिया है तो यकीनन, अभियान के बाद गंदगी की मात्रा में और बढ़ोतरी हो जाती है।


दिया गया कोई भी स्वच्छता अभियान, विरोधी दल की नजरों में सदैव असफल रहता है। बल्कि घोर असफल रहता है।


स्वच्छता अभियान अक्सर दूसरों के क्षेत्र में चलाए जाते हैं, ताकि यह बताया जा सके कि उनका गली मोहल्ला साफ सुथरा है और सफाई वफाई की जरूरत नहीं है, जबकि सफाई की ज्यादा जरूरत वहीं होती है।


स्वच्छता अभियान में तामझाम उसमें भाग ले रहे नेता अफसर के समानुपाती होती है और वास्तविक सफाई व्युत्क्रमानुपाती।


स्वच्छता अभियान में जितना ज्यादा जोर शोर होगा, उतनी ही कम साफ-सफाई होगी।


दिए गए किसी भी स्वच्छता अभियान में, इधर के कूड़े को उधर और उधर के कूड़े को इधर किया जाता है। यानी कूड़े की मात्रा में कहीं कोई कमी नहीं होती।


ऊपर दिए गए नियम का उपनियम - दिए गए किसी भी स्वच्छता अभियान में कूड़े की मात्रा में अंतिम रूप से बढोतरी ही होती है क्योंकि दिया गया कोई भी अभियान भी न्यूनतम ही सही, कूड़ा उत्पन्न करता ही है।


जहाँ कूड़ा होता है वहाँ स्वच्छता अभियान नहीं होता।


कूड़ा कूड़े को खींचता है। स्वच्छता अभियान, स्वच्छता अभियान को।


स्वच्छता अभियान में शामिल लोगों के लिए कूड़ा फैलाने का अधिकार स्वयमेव हासिल होता है।


अधिकांश स्वच्छता अभियान फोटो शूट करने के लिए आयोजित किए जाते हैं। बाकी के भी फोटो शूट करने के लिए ही आयोजित किए जाते हैं, अलबत्ता मौका हासिल नहीं होता।


और भी नियम हैं। पर, नेट पर भी स्वच्छता अभियान चलाने की जरूरत है। इसलिए कम लिखेंगे।

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर

-----****-----

-----****-----

|नई रचनाएँ_$type=list$au=0$label=1$count=5$page=1$com=0$va=0$rm=1

.... प्रायोजक ....

-----****-----

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधाएँ ~

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---


|आपके लिए कुछ चुनिंदा रचनाएँ_$type=blogging$count=8$src=random$page=1$va=0$au=0

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,3843,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,336,ईबुक,192,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,257,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,105,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2786,कहानी,2116,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,486,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,30,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,90,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,22,पाठकीय,61,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,329,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,327,बाल कलम,23,बाल दिवस,3,बालकथा,50,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,9,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,17,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,238,लघुकथा,834,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,7,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,315,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,62,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,1921,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,648,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,688,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,14,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,55,साहित्यिक गतिविधियाँ,184,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,58,हास्य-व्यंग्य,68,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: व्यंग्य की जुगल बंदी - स्वच्छता अभियान
व्यंग्य की जुगल बंदी - स्वच्छता अभियान
https://lh3.googleusercontent.com/-4ZaULxqNcKg/WAxeHXPdlXI/AAAAAAAAwpw/tuDo_0QUMpM/clip_image001_thumb.png?imgmax=800
https://lh3.googleusercontent.com/-4ZaULxqNcKg/WAxeHXPdlXI/AAAAAAAAwpw/tuDo_0QUMpM/s72-c/clip_image001_thumb.png?imgmax=800
रचनाकार
http://www.rachanakar.org/2016/10/blog-post_71.html
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/2016/10/blog-post_71.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय खोजें सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है चरण 1: साझा करें. चरण 2: ताला खोलने के लिए साझा किए लिंक पर क्लिक करें सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ