आलेख || कविता ||  कहानी ||  हास्य-व्यंग्य ||  लघुकथा || संस्मरण ||   बाल कथा || उपन्यास || 10,000+ उत्कृष्ट रचनाएँ. 1,000+ लेखक. प्रकाशनार्थ रचनाओं का  rachanakar@gmail.com पर स्वागत है

गयी ब्याज में गाय || लम्बी तेवरी-तेवर पच्चीसी || -रमेशराज

 

गयी ब्याज में गाय
|| लम्बी तेवरी-तेवर पच्चीसी  ||
-रमेशराज
..............................................
चीनी है पैंतीस तौ दो सौ तक है दाल
अब है महँगाई कौ दौर, करैगौ कैसे लाँगुरिया । 1

और बढ़ै सिर पर चढ़ै बड़ी निगौडी भूख
जाकौ सुरसा जैसौ पेट भरैगौ कैसे लाँगुरिया । 2

तेरे खेतन में बढ़ौ भारी खरपतवार
बता तू बिन खुर्पी के खेत नरैगौ कैसे लाँगुरिया । 3

बंजर पै बिल्डिंग बनीं दगरे दीखें मैंड़
बछरा अब जंगल में घास चरैगौ कैसे लाँगुरिया ।4

पुलिस-सुरक्षा में रहें, बत्ती जिनके पास
सोच अब उन गुण्डन के गाल छरैगौ कैसे लाँगुरिया । 5

बना मरखनौ जब लियौ तैनें सूधौ सांड़
अब ये देगौ सबकूँ उच्चि, डरैगौ कैसे लाँगुरिया । 6

धीरे-धीरे हो गया आदमखोर निजाम
जाकी चढि़ छाति पै दाल दरैगौ कैसे लाँगुरिया । 7

पीकर अमृत हो गया महिषासुर बलवान
पूछ तू दुर्गा माँ से दुष्ट मरैगौ कैसे लाँगुरिया । 8

कोई दैत्य निशुम्भ-सा, कोई शुम्भ समान
बता तू इन असुरों का अंत करैगौ कैसे लाँगुरिया । 9

अब तो सच की राह पर दिखे आग ही आग
धधकते अँगारों पै पाँव धरैगौ कैसे लाँगुरिया ।10

घेरि रहे इस देश को अमेरिका के चोर
उदारीकरण-दंश की पीर हरैगौ कैसे लाँगुरिया । 11

कामासुर अब घूमते गली-गली के बीच
बता तू इन छिनरन के मान छरैगौ कैसे लाँगुरिया । 12

हर सिर ऊपर घूमतौ भस्मासुर कौ हाथ
सोच ये जालिम अब की बार बरैगौ कैसे लाँगुरिया । 13

महादेव कौ तीसरौ नेत्र खुलै ना आज
जगत कौ भारी पापाचार जरैगौ कैसे लाँगुरिया । 14

बना कपट-छल आजकल सदाबहारी वृक्ष
जाकौ हरौ-हरौ हर पात छरैगौ कैसे लाँगुरिया । 15

नारी का सुख चाहता, धन से मोह अपार
भव सागर से ऐसौ भक्त तरैगौ कैसे लाँगुरिया | 16

सब इससे भयभीत हैं, कौन मरोड़ै बाँह
अत्याचारी के गल-फंद परैगौ कैसे लाँगुरिया। 17

साँस-साँस पर बोझ है, मन में भरी कराह
हमारे दुःख कौ बनौ पहाड़ गरैगौ कैसे लाँगुरिया । 18

गयी ब्याज में गाय तब, अब लै जावै बैल
घर पै आयौ साहूकार टरैगौ कैसे लाँगुरिया । 19

नये विधेयक ने दिये कतर न्याय के पंख
मुंसिफ न्यायालय में न्याय करैगौ कैसे लाँगुरिया । 20

शीलभंग जब कर रहे नेता मंत्री संत
सोच अब करते कोई ‘रेप’ डरैगौ कैसे लाँगुरिया । 21

ऊँची कुर्सी पा गये सभी कोयला चोर
बता तू इन चोरन को अंत करैगौ कैसे लाँगुरिया । 22

हर नेता खारिज करे लोकपाल की माँग
तानाशाही का ये रूप मरैगौ कैसे लाँगुरिया । 23

भ्रष्टाचारी के जुड़े जब मंत्री से तार
बता ऐसे में रिश्वतखोर डरैगौ कैसे लाँगुरिया । 24

जनता अब लेकर जिये भारी आह-कराह
संकट जो जन-जन के बीच, टरैगौ कैसे लाँगुरिया । 25
------------------------------------------------------------------
+रमेशराज,15/109, ईसानगर, अलीगढ़-202001
Mo.-9634551630  

टिप्पणियाँ

----------

10,000+ रचनाएँ. संपूर्ण सूची देखें.

अधिक दिखाएं

ऑनलाइन हिन्दी वर्ग पहेली खेलें

---

तकनीक व हास्य -व्यंग्य का संगम – पढ़ें : छींटे और बौछारें

Google+ Followers

फ़ेसबुक में पसंद/अनुसरण करें

परिचय

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही रचनाकार से जुड़ें.

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है. अपनी रचनाएं इस पते पर ईमेल करें :

rachanakar@gmail.com

अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

डाक का पता:

रचनाकार

रवि रतलामी

101, आदित्य एवेन्यू, भास्कर कॉलोनी, एयरपोर्ट रोड, भोपाल मप्र 462030 (भारत)

कॉपीराइट@लेखकाधीन. सर्वाधिकार सुरक्षित. बिना अनुमति किसी भी सामग्री का अन्यत्र किसी भी रूप में उपयोग व पुनर्प्रकाशन वर्जित है.

उद्धरण स्वरूप संक्षेप या शुरूआती पैरा देकर मूल रचनाकार में प्रकाशित रचना का साभार लिंक दिया जा सकता है.


इस साइट का उपयोग कर आप इस साइट की गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं.