शनिवार, 5 नवंबर 2016

हम न हुए आफ एयर / व्यंग्य / राकेश अचल

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हम न हुए आफ एयर 

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आजकल आफ एयर का बड़ा हल्ला है भाई,जिसे देखो सो आफ एयर के पीछे पड़ा है .हमारे फन्ने खान को भी आजकल आफ एयर की बड़ी फ़िक्र है. कल बाजार में मिले तो बिना किसी भूमिका के बोले-पंडित जी ये आफ एयर के खिलाफ कुछ लिखिए ना ?मैंने हैरानी से फन्ने की और देखा और जिज्ञासा से पूछा-"ये क्या बला है भला ?"लो कर लो बात इत्ता भी नहीं जानते और बने फिरते हैं पंडत ?हमने बिना झुंझलाये कहा -सच फन्ने अपने राम को कुछ पता नहीं इस बाबद .

फन्ने मुस्कराये और बोले-ज्यादा पता तो इस नाचीज को पता नहीं है लेकिन इत्ता जानते हैं की ये कुछ गर्मागर्म चीज है.पूरा देश इसके मारे परेशान है हमने पूछा-क्या एयरफोर्स से जुड़ा कोई मामला है ?वे बोले -"मुमकिन है और नहीं भी लेकिन सरकार का हुक्म हुआ है की किसी को आफ एयर कर दिया जाये ,और इसी फरमान के खलाफ लोग आसमान सर पर उठाये घूम रह हैं ".

अरे यार इसमें आसमाना सर पर उठाने की क्या बात है,सरकार जो चाहे सो करे वो सरकार है "हमनेबिना जाने समझे अपना ज्ञान बघार दिया .फन्ने बोले-क्याअबक्ते हो भाई,ऐसा कहीं होता है ,किसी की एयर का सवाल है और आप....?मैंने कहा -देखिये मिया सर्कार जो करती है ,हमेशा फेयर करती है,इसलिए मुझे तो आफ एयर मामले में कुछ कहना नहीं है "

फन्ने मेरी बात सुनकर हत्थे से उखड़ गए.कहने लगे -लोग कह रहे हैं की आफ एयर होना खतरनाक है,आपातकाल जैसा खतरनाक .गला घौंटने जैसा है "फन्ने के चेहरे पर विस्मय का भाव साफ़ तैर रहा था .मैंने कहा -यार खामखां दर रहे हो,दूध का जला भी छांछ फूक-फूक कर पीता है ,फिर ये सरकार तो आपातकाल की भुगतभोगी है ,ये ऐसी गलती क्यों करने लगी ?

हमारी बातचीत में एक तीसरे साहब कूद पड़े,उन्हें हम जानते भी नहीं थे,बोले-भाई साहब एयर जब आफ हो जाएगी तब उसमें बचेगा क्या ?हमने कहा -राजा हवा कोई निचोड़ी थोड़े ही जाती है,उसे तो आप और हम ही प्रदूषित कर रहे हैं ,ऐसी एयर का आफ हो जाना ही ठीक है .हमारी बात सुनकर तीसरे साहब भड़क गए.बोले-आप राष्ट्रद्रोही हैं,काफ़िर हैं ,देश द्रोहियों से मिले हुए हैं .

तीसरे के आरोप सुनकर हमें ज्यादा बुरा नहीं लगा,क्योंकि हमें तो ऐसे आरोप सुनने की आदत पड़ गयी है .हम सीधे चलें या उलटे हम पर तोहमत तो लगना ही है .यानि जाहि विधि राखे राम,ताहि विधि रहिये ".हमने फन्ने से कहा देखो यार जब सरकार है तो उसको भी करने के लिए कुछ चाहिए .कभी आफ एयर करेगी तो कभी आन एयर करने का हक उसी के पास सुरक्षित है .जिसे एयर के आफ और आन से बचना है वो इस पचड़े में पड़े ही ना ?

फन्ने बोले- पंडत जी  ! ,वैसे जो होता है सो अच्छा ही होता है एयर आफ हो या न लेकिन होती रहे .बिना हवा के केंद्र में रहे जीवन चलने वाला नहीं है .सरकार तो अच्छे -अच्छों की हवा खराब कर सकती है. हवा चला सकती है,हवा रोक सकती है .हवा खिला सकती है,हवा निकल सकती है .सर्कार तो सरकार है ,उस पर पर पाना हर किसी के बस की बात नहीं है. 

हमने भी फन्ने की हाँ में हाँ मिलाई और कहा देखो पंडित जी हमें तो अपने काम से ही फुर्सत नहीं मिलती,हवाखोरी तक के लिए नहीं जा पाते ,इसलिए परेशान होने की क्या जरूरत है?हमें अपनी सरकार पर पूरा भरोसा है .उसकी मर्जी जिस तरफ उड़ा कर ले जाये.एयर को आफ करे या आन ,सब चलेगा 

@ राकेश अचल 

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