बुधवार, 16 नवंबर 2016

गरीब दास जी के नए (नोट) दोहे / विनोद कुमार दवे

गरीब दासजी के दोहे  (प्रसिद्ध दोहों पर आधारित )

नोट ढूंढन मैं चला, सौ का मिला न कोय
जो पर्स देखा आपणा, दस का नोट न होय।

काला धन जमा किया, टैक्स में मुट्ठी भिंचे 
लो अब आया ऊंट है, किसी पहाड़ के नीचे।

गरीबा खड़ा बैंक में, लिए हजार का नोट
भ्रष्टाचार के विरुद्ध होगा, तेरा मेरा वोट।

बड़ा भया तो क्या भया, जैसे नोट हजार
बजार में चले नाही, बैंक में लगी कतार।

काला धन सफ़ेद लगे, सफ़ेद लगे काला
गुलाबी धन महंगा लगे, हो गया घोटाला।

अमीर कहे सरकार से, तू क्यों रौंदे मोय
एक दिन ऐसा आएगा, मैं रौंदुंगा तोय।

उठा  बगुला  नोट  का, बोले  गरीब  दास
मेरा बैंक में जा मिला, बैंक का बैंक के पास।


नोट फेरत जुग भया, फिरा न नोट हजार
हजार का नोट डार दे, सौ का फेर बाजार।

सरकार  बैंक दोनों  खड़े, काके लागू  पाय
बलिहारी बैंक आपणी, सरकार दियो मिलाय।

रात गंवाई टेंसन में, दिवस बैंक बुलाय
हजार नोट अमोल था, कौड़ी बदले जाय।

नोट सम्हारे राखिए, नोट के हाथ न पाँव
सौ का नोट औषधि करें, हजार का करें घाव।

गरीबा ये  धन श्वेत है, काला  धन  न  मान
शीश कटाए दो हजार मिले, तो भी सस्ता जान।

बैंक बन्द  देख के,  दिया गरीबा रोय
जेब में कौड़ी नाही, उधार न देता कोय।

टैक्स चुरा के जमा किया, वो अंदर रखिये माल
तीस  दिसम्बर  के  बाद, हो  जाए  कंगाल।

देश हित के महायज्ञ में, जन जन है साथ में
कुछ दिन धीरज राखिए, पैसा होगा हाथ में।


  • परिचय -
    साहित्य जगत में नव प्रवेश।  पत्र पत्रिकाओं यथा, राजस्थान पत्रिका, दैनिक भास्कर, अहा! जिंदगी,  कादम्बिनी , बाल भास्कर आदि  में रचनाएं प्रकाशित।
    अध्यापन के क्षेत्र में कार्यरत।
    पता :
    विनोद कुमार दवे
    206
    बड़ी ब्रह्मपुरी
    मुकाम पोस्ट=भाटून्द
    तहसील =बाली
    जिला= पाली
    राजस्थान
    306707
    मोबाइल=9166280718
    ईमेल = davevinod14@gmail.com
     

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