शुक्रवार, 9 दिसंबर 2016

प्राची - नवंबर 2016 / लघुकथा / दरोगा देवेन्द्र कुमार मिश्रा

दरोगा

देवेन्द्र कुमार मिश्रा

ये दरोगा ने पूरे शहर में हड़कंप मचा दिया. दो नंबर का धंधा करने वालों का जीना मुश्किल कर दिया. अवैध शराब, गांजा, सट्टा, जुआ खिलाने वालों का जीना हराम कर दिया. जनता ने दरोगा की जय-जयकार की और दो नंबर के धंधा करने वालों ने अपना एक प्रतिनिधि दरोगा के पास भेजा.’’ साहब, आप चाहते क्या हैं? जय-जयकार तो कर रही है जनता.’’

‘‘मैं जय-जयकार कराने के लिए पुलिस में भर्ती नहीं हुआ.’’

‘‘तो फिर हम लोगों के पेट पर क्यों लात मार रहे हैं.’’

‘‘ताकि लोग हमारे पेट का ध्यान रखें.’’

‘‘जो पिछले दरोगा को मिलता था. आप तक पहुंचता रहेगा.’’

‘‘दो नंबर के धंधे करते हो और अक्ल रत्ती भर नहीं. मैं महीने भर से परेशान कर रहा हूं फिर भी बात समझ नहीं आई.’’

‘‘आप ही समझाइये.’’

‘‘हफ्ता बढ़ाना पड़ेगा महंगाई बढ़ रही हैं और जरूरतें भी’’

‘‘अरे, हम तो डर गये थे कि कहीं आप पर ईमानदारी का नशा तो नहीं चढ़ा है.’’

‘‘नशा वो भी ईमानदारी का. पागल समझा है क्या?’’ दरोगा हंसा. साथ में गैरकानूनी काम करने वाले ने भी हंसी में कानून का साथ दिया.

संपर्कः पाटनी कॉलोनी, भरत नगर,

चंदनगांव, छिंदवाड़ा, (म.प्र.) 480001

मो. 9425405022

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