मंगलवार, 20 दिसंबर 2016

शब्द संधान / हाल क्या है जनाब का / डॉ. सुरेन्द्र वर्मा

 

जब हम किसी से कहते हैं, कहिए,क्या हाल है ? तो वस्तुत: हम उसकी मौजूदा अवस्था के बारे में कोई प्रश्न नहीं कर रहे होते हैं | हम उसका सिर्फ अभिवादन कर रहे होते हैं - ठीक उसी तरह जैसे अंगेरजी में अभिवादन के लिए, ‘हाउ डू यू डू’ या ‘हाऊ आर यू’ कहा जाता है |

लेकिन शब्द, हाल, के बुरे हाल हैं | इसका अर्थ हर भाषा में बदल गया है | हिन्दी में जहां हाल का अर्थ मूलत: हिलने-डुलने, संचालित होने, से लगाया जाता है (नथनियां हाले-डोले) ; वहीं अरबी भाषा में इसका अर्थ दशा या अवस्था से है | फारसी में यही ‘हाल’ सुख या चैन के लिए इस्तेमाल होता है | अंग्रजी में ‘हाल’ (एच ए एल एल) एक खूब बड़े से कमरे को कहते हैं | और मजेदार बात यह है कि इन सभी अर्थों को हिन्दी में बड़े प्यार से अपना लिया गया है |

कहते हैं समुद्र-मंथन से प्राप्त जो वस्तुएं पाई गईं थीं, उनमें से एक “हलाहल” भी था | संस्कृत में मदिरा को हालाहली भी कहते हैं | इसी का संक्षिप रूप “हाला” है | हरिवंश राय बच्चन ने तो हिन्दी कविता में एक पूरा ‘वाद’ ही ‘हालावाद’ के नाम से आरम्भ कर दिया था -

घनश्यामल अंगूर लता से खिंच खिंच यह आती हाला अरुण कमल कोमल कलियों की प्याली फूलों का प्याला लाल हिलोरें साखी बन बन माणिक मधु से भर जाती हंस मस्त होते पी पी कर, मानसरोवर मधुशाला

किसान का “हल” संस्कृत में ‘हाल’ कहलाता है | इसी से ‘हालिक’, हल संबंधी; ‘हलवाहा’ कृषक या वह बैल जो हल में जोता जाता है, आदि, शब्द भी बने हैं | बलराम का एक नाम ‘हाल’ भी था |

हिन्दी में वर्त्तमान दशा या अवस्था या उसके वर्णन के लिए जो “हाल” शब्द इस्तेमाल होता है | यह अरबी-फारसी से हिन्दी में आया है | लोग एक दूसरे का हाल लेते हैं, हाल मिल जाता है तो तसल्ली महसूस करते हैं | देश-दुनिया का हाल जानने के लिए अखबार पढ़ते हैं , उससे ‘ज़मानए हाल’ मिल जाता है | हाल पूछ कर अभिवादन करते हैं | पर हाल कभी गैर हो जाता है ,कभी बिगड़ भी जाता है | हाल बुरे ही नहीं होते तबाह भी हो सकते हैं | पैसे के अभाव में हाल अक्सर पतला हो जाता है | हाल से कितने ही मुहावरे बने हैं !

हाल का बहुवचन हालात है | लेकिन कभी कभी हम संभवत: गलती से हाल के बहुवचन के रूप में ‘हालातें’/’हालातों ’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल भी कर बैठते हैं | समाचार पुराने हो सकते हैं, लेकिन ताज़ा, नया समाचार, ‘हाल का’, या हालिया समाचार है | एक विरहनी मुकम्मिल तौर पर ‘हालाते इंतजार’ में रहती है | बस अपने प्रेमी की राह ही देखती रहती है | खबरें पढ़ने वाले ‘हालाते हाज़रा’ सुनाते हैं | ‘हालाते मौजूदा’ पर तब्सिरा करते हैं | इत्यादि |

“हाल” के लिए हिन्दी मे अक्सर, विशेषकर कविता में ‘हवाल’ शब्द का प्रयोग भी हुआ है | ‘हवाल’ हाल का ही हिन्दी में बिगड़ा हुआ रूप है | कबीर कहते हैं, “बकरी पाती खात है, ताकी खींची खाल / जो नर बकरी खात है ताको कौन हवाल”! यहाँ हवाल का अर्थ दशा से तो है ही, परिणाम या फल से भी है | “अब आगे का सुनों हवाल”, शायद यहाँ भी हवाल न सिर्फ स्थिति या दशा है बल्कि पिछली दशा का परिणाम भी है | अमीर खुसरो ने अनेकानेक पहेलियाँ / मुकरियाँ लिखी हैं | उनमें से एक इस प्रकार है –

वन में रहे ये तिरछी खड़ी – देख सको मेरे पीछे पडी उन बिन मेरा कौन हवाल – ए सखि साजन,ना सखि बाल

अरबी भाषा में ‘हवाल’ कोई शब्द नहीं है | लेकिन ‘हवाला’ है | हवाला दो अर्थों में प्रयुक्त होता है | एक तो सुपुर्दगी के अर्थ में – अब यह आपके हवाले है – और दूसरे, कारोबार के एक अर्थ में –हवाला कारोबार | हवाला का एक प्रयोग नजीर या संदर्भ के लिेए भी होता है | फलां के हवाले से अमुख बात कही गई है |

और हाँ, तंगहाल, बदहाल,फिलहाल, बहरहाल, सूरतेहाल जैसे भी शब्द हैं जिनमें हाल पूंछ की तरह जुड़ा हुआ है | ऐसा ही एक शब्द है, ननिहाल | लेकिन ननिहाल में हाल नाना के ‘घर’ का द्योतक है न कि किसी अवस्था का |

डा. सुरेन्द्र वर्मा ( मो. - ९६२१२२२७७८ )

१० एच आई जी / १, सर्कुलर रोड

इलाहाबाद -२११०९०१

-------------------------------------------

अपने मनपसंद विषय की और भी ढेरों रचनाएँ पढ़ें -
आलेख / ई-बुक / उपन्यास / कला जगत / कविता  / कहानी / ग़ज़लें / चुटकुले-हास-परिहास / जीवंत प्रसारण / तकनीक / नाटक / पाक कला / पाठकीय / बाल कथा / बाल कलम / लघुकथा  / ललित निबंध / व्यंग्य / संस्मरण / समीक्षा  / साहित्यिक गतिविधियाँ

--

हिंदी में ऑनलाइन वर्ग पहेली यहाँ (लिंक) हल करें. हिंदी में ताज़ा समाचारों के लिए यहाँ (लिंक) जाएँ. हिंदी में तकनीकी जानकारी के लिए यह कड़ी देखें.

-------------------------------------------

0 blogger-facebook

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------