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शब्द संधान - बाबा - डा. सुरेन्द्र वर्मा


सामान्यत: जब हम बाबा, शब्द कहते हैं तो हमारे दिमाग में एक बुज़ुर्ग आदमी की शक्ल आती है | लेकिन ज़रूरी नहीं है कि बाबा बूढ़ा ही हो | बहुतेरे भरी जवानी में बाबा बन जाते हैं | घर-बार त्याग कर, दाढी बढ़ाकर, हाथ में चिमटा धारण कर बाबा रूप धारण कर लेते हैं | अब उनके मन में संन्यास-भाव कितना होता है, यह तो नहीं कहा जा सकता लेकिन अपनी धज तो वे बाबा सरीखी बना ही लेते हैं | पर बाबा, इसमें संदेह नहीं, बुजुर्गों के लिए ही नहीं,साधु-संन्यासियों के लिए प्रयुक्त एक आदर सूचक संबोधन भी है |

जब हम अपने बाबा-परबाबा की बात करते हैं, तो स्पष्ट: हम अपने पुरुखों को सम्मान दे रहे होते हैं | बाबा के साथ जब परबाबा भी लग जाता है तो हम बाबा या परबाबा तक ही सीमित नहीं रहते | इसमें हमारे परिवार के सभी बुज़ुर्ग आ जाते हैं | पिता को अरबी भाषा में “अब्बा” और फारसी में बाबा कहते हैं | कई परिवारों में पिता के पिता को भी ‘बाबा” कहा जाता है | “आदम” तक, जिसकी हम सब औलाद माने गए हैं, ‘बाबा आदम’ ही कहलाते हैं |

मजेदार बात यह है कि बाबा सिर्फ पिता या किसी बुज़ुर्ग या पुरुखों के लिेए ही प्रयुक्त होने वाला शब्द नहीं है, यह बच्चों के लिेए भी प्यार से बुलाने का शब्द है | अँगरेज़ जब इस मुल्क में आए तो उनके बच्चे बाबा-लोग कहलाते थे | हिन्दुस्तानी आयाएँ इन बाबा-लोगों की परवरिश करती थीं | हिन्दी भाषा का करिश्मा देखिए की यहाँ बेबी का पुल्लिग ‘बाबा’ हो गया | यदि बच्ची प्यार से बेबी कहलाती है तो बच्चा ‘बाबा’ ही होना चाहिए | वैसे आजकल तो प्रेमिका को भी ‘बेबी’ ही पुकारते हैं | गनीमत है कि प्रेमी-जन बाबा नहीं कहलाते | बाबा यदि पुल्लिंग है तो हिन्दी में इसका स्त्रीलिंग ‘बाबी’ हो सकता था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ | हाँ, ‘बॉबी’ लड़कियों का नाम ज़रूर रखा जाता है | हो सकता है बेबी को ही लाढ में बॉबी कहा जाने लगा हो |

हमारी भाषा में ‘बाबा’ प्यार सूचक ही नहीं, डर उत्पन्न करने वाला शब्द भी बन गया है | बच्चों को चुप कराने के लिए अक्सर माँए यह कहती देखी गईं हैं, चुप कर वरना बाबा आ जाएगा ! किसी डरावनी चीज़ को देखकर प्राय: हम अपने उद्गार , ‘बाबा रे बाबा’ कहकर प्रकट करते हैं | इस उद्गार में बाबा शायद एक ऐसा बुज़ुर्ग है जो हमारे डर का निवारण भी कर सकता है |

सामान्यत: बाबा, बच्चा हो या बूढा, दुनिया से विमुख होता है | लेकिन सत्ता के इर्द-गिर्द घूमब्ने वाले बाबाओं की एक लम्बी फैरिस्त बनाई जा सकती है अनेक बाबाओं के पास अरबों खरबों की संपत्ति है | न जाने कितने बाबा ऐसे हैं जो बाबा के वेष में घोर अनैतिक जीवन जीते हैं | सामान्य समझदार जनता ऐसे ही बाबाओं से डरती, सहमती है और भोले लोग अक्सर इनके चंगुल में फंस जाते हैं | इलाहाबाद में जब कुंभ या अर्धकुम्भ का मेला लगता है तो मेला क्षेत्र में बाबाओं की बहार आ जाती है | लगता है बाबाओं का ही मेला लगा हो | भाँती भाँती के बाबा बूढ़े बाबा, जवान बाबा, यहाँ तक कि बाल-बाबा तक शिरकत करने आते हैं | देशी बाबा, विदेशी बावा, जटाधारी बाबा, घुटमुंड बाबा, ढके बाबा, नागा बाबा, आदि, आदि | ज़ाहिर है इनमें से कुछ बाबा तो ज़रूर ही बाबा नाम को सार्थक भी करते होंगे किन्तु अधिकतर तो बाबा शब्द को बदनाम करने वाले ही होते हैं |

पीर, संन्यासी, साधु –सभी बाबा हैं | लेकिन बाबा भोलेनाथ की बात ही अलग है | कुछ लोग बाबा की उपाधि स्वयं अर्जित कर लेते हैं | वे अपने कार्यों और व्यवहार से बाबा कहे जाते हैं | जैसे बाबा आम्बेडकर, बाबा रामदेव | कुछ लोगों को प्रकृति ही उन्हें बाबा बना देती है, जैसे, पोता हुआ नहीं कि आप बाबा बन गए | लेकिन कुछ ऐसे भी हैं जो बाबा की उपाधि अपने ऊपर आरोपित कर लेते हैं और ‘बाबागीरी” करने लगते हैं |
बाबा से ही एक शब्द ‘बाबुल’ बना है | बिदाई के समय लड़की का पिता उसके लिए (बाबा की बजाय) बाबुल हो जाता है | सहगल का गाया हुआ एक प्रसिद्ध गीत – बाबुल मोरा नैहर छूटो री जाए – आज भी संगीत प्रेमियों के मन में बसा हुआ है | बिदाई-गीत बाबुल-गीत कहलाते हैं |

केशवदास बड़े दुखी हैं | सुन्दर सुन्दर कमसिन कन्याएं आती हैं | लपक कर उनसे बात करने की इच्छा कवि के ह्रदय में अंगडाई लेती है; लेकिन वे हैं की बाबा कहि कहि वे दूर भाग जाती हैं | ऐसे में कवि मन मसोस कर बेचारा रह जाता है |

न जाने कितने ऐसे शिशु गीत और कवितायेँ हैं जिनमें बाबा बच्चों का मनोरंजन करते हैं | कभी वे बच्चों को दही खिलाने के लिए कटोरियाँ लाते हैं तो कभी बच्चे उनसे आम की मांग कर बैठते हैं | बाबा बाबा आम दो ! अंग्रेज़ी का एक प्रसिद्द शिशु-गीत है – बा बा, बा बा ब्लेक शीप | लेकिन इस गीत में बा-बा से अर्थ किसी बुज़ुर्ग से न होकर काली-भेंड़ की आवाज़ है !
डा. सुरेन्द्र वर्मा (मो. ९६२१२२२७७८) १०, एच आई जी / १. सर्कुलर रोड / इलाहाबाद -२११००१
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