बुधवार, 28 दिसंबर 2016

श्रीरामकथा के अल्पज्ञात प्रसंग दशरथजी के मंत्रिपरिषद से वर्तमान को शिक्षा / डॉ. नरेन्द्र कुमार मेहता 'मानस शिरोमणि'

श्रीराम

श्रीरामकथा के अल्पज्ञात प्रसंग

दशरथजी के मंत्रिपरिषद से वर्तमान को शिक्षा

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डॉ. नरेन्द्र कुमार मेहता 'मानस शिरोमणि'

किसी भी देश की उन्नति एवं विकास की सफलता उस देश के प्रधानमंत्री , राजा अथवा राष्ट्रपति के मंत्रिपरिषद पर निर्भर रहती है । मंत्रिपरिषद में मंत्रियों का योग्य, कुशल, विश्वसयनीय ,चरित्रवान एवं देश भक्त होना अत्यंन्त आवश्यक होता है ।

अयोध्या नरेश दशरथ जी का मंत्रीपरिषद उस समय उदाहरणीय था उनके मंत्रीपरिषद में 8 एैसे ही गुणवान मंत्री थे -

तस्यामात्या गणैुरासन्निक्ष्वाकोंः सुमहात्मनः ।

मन्त्रज्ञाश्चेङितज्ञाश्च नित्यं प्रियहिते रताः ।।

अष्टौ बभुवुर्वीरस्य तस्यामात्या यश्स्विनः ।।

शुचयश्चानुस्क्ताश्च राजकृत्येषु नित्यशः ।।

श्री वा.रा. बाल. सर्ग -7-1-2

इक्ष्वाकुवंशी वीर महाराज दशरथ जी के आठ मंत्री थे वे सब मंत्रि-जनित गुणों से अर्थात मंत्रियों के लिए निर्धारित गुणों से सम्पन्न थे । वे महाराज के हित में सलंग्न रहते थे तथा राज्य के यश को फैलाने वाले थे । उन मंत्रियों का आचार विचार शुद्ध आचरणों से भरपूर था । उन मंत्रियों के नाम तथा गुण थे ।

द्यृष्टिर्जयन्तों विजयः सुराष्ट्रो राष्ट्रवर्धनः

अकोपो घर्मपालश्च सुमन्त्रश्चाष्टमोऽर्थवित् ।।

श्री वा.रा. बाल सर्ग 7-3

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इन मंत्रियों के अत्यन्त सुन्दर नाम थे । वे नाम इस प्रकार हैं -

धृष्टि, जयन्त ,विजय सुराष्ट्र, राष्ट्रवर्धन , अकोप , घर्मपाल , और आठवे सुमंत्र जो कि अर्थशास्त्र के ज्ञाता थे । अत्यन्त विचारणीय बात है कि जिस राजा के ऐसे सुन्दर नाम वाले एवं नाम के अनुरूप गुणवान , कुशल विश्वसनीय मंत्रिगण हों उस देश की कीर्ति देश की ही नही सम्पूर्ण विश्व में क्यों न फैले ? इसे अतिरिक्त दशरथ जी के यहां जावालि , काश्यप, गौतम ,दीर्धायु मार्कण्डेय तथा विप्रवर कात्यायन भी महाराज के अन्य मंत्रियों में थे । ब्रह्नर्षि ,वसिष्ठ और वामदेव उनके पुरोहित अथवा ऋत्विज थे ।

ये सब ऋत्विज और मंत्रिगण विद्वान तो थे ही किन्तु सद्गुणों के भण्डार जैसे विनयशील, सलज्ज कार्यकुशल , जितेन्द्रिय , श्रीसम्पन्न , महात्मा , शस्त्रविद्या के ज्ञाता , सुदृढ ,पराक्रमी , यशस्वी , समस्त कार्यो में सजग , राजा की आज्ञा के अनुसार कार्य करने वाले , तेजस्वी , क्षमाशील , कीर्तिमान तथा प्रसन्नतापूर्वक हँसकर वार्तालाप करने वाले थे वे स्वप्न में भी कभी काम या क्रोध या स्वार्थ के वशीभूत होकर असत्य नही बोलते थे । राजा दशरथ जी समय-समय पर उनके चरित्र व कार्यकलापों की परीक्षा लेते थे । मंत्रिगण इतने चरित्रवान होते थे कि अवसर आने पर अपने पुत्र को भी उचित दण्ड देते थे यथा ----

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कुशला व्यवहारेषु सौहृदेषु परीक्षिताः ।

प्राप्तकालं यथा दण्डं धारेयेयु : सुतेष्वापि ।।

श्री वा.रा. बाल. सर्ग 7-10

मंत्री सदैव राजा के कोष को न्याय पूर्वक भरने तथा चतुरंगिणी सेना के संग्रह में जुटे रहते थे । शत्रु के भी निरपराध होने पर हिंसा का मार्ग नहीं अपनाते थे मंत्रिगणों में सदा शौर्य एवं उत्साह भरा रहता था । वे राजनीति के अनुसार कार्य करते हुए राज्य में निवास करने वाले सत््पुरूषो की सदा रक्षा में तत्पर रहते थे अपराधी पुरूष को तथा अपराध को दृष्टिगत रखकर कठोर या मृदु दण्ड देते थे । इस तरह दशरथ जी मंत्रिपरिषद सम्पूर्ण राष्ट्र और अयोध्यापुरी में शांति बनाए रखते थे ।

मंत्रिगणों के वस्त्र और वेष स्वच्छ एवं सुन्दर होते थे । मंत्रियों के सम्मान , पराक्रम एवं ख्याति का बड़ा ही सुन्दर वर्णन महर्षि वाल्मीकि ने इस प्रकार किया है ।

गुरोर्गुणगृहीताश्च प्रख्याताश्च पराक्रमैंः

विदेशेष्वपि विज्ञाताः सर्वतो बुद्धिनिश्चयाः

श्री वा.रा.बाल. सर्ग 7-17

अपने गुणों के कारण यह सभी मंत्री गुरूतुल्य समादरणीय होकर राजा दशरथ जी के अनुग्रह पात्र थे । अपने पराक्रमों के कारण उनकी सर्वत्र ख्याति थी विदेशों में भी सब लोग उन्हे जानते थे । वे सभी बातों में बुद्धि एवं विवेक द्वारा ठीक प्रकार से विचार मन्थन करके किसी निश्चय पर पहॅुचते थे ।

इतना ही नही समस्त देशो में एवं कालों में वे गुणवान माने जाने थे । मंत्रियों को संधि और विग्रह के उपयोग और अवसर का पूर्ण ज्ञान रहता था । मंत्रिगण मंत्रणा गुप्त रखते थे । मंत्रीगण नीतिशास्त्र में पारंगत होते थे तथा सदा प्रिय मीठी वाणी का प्रयोग करते थे ।

राज्य में गुप्तचर विभाग होता था , जिसमें गुप्तचरों द्वारा अपने राज्य एवं शत्रु पक्ष के राज्य के वृतान्तों पर कड़ी दृष्टि रखते थे । दशरथ जी का व्यवहार इतना उत्तम थी शत्रुओं की अपेक्षा मित्रों की संख्या बहुत था जिस प्रकार सूर्य अपनी तेजोमयी किरणों के साथ उदित होकर प्रकाशित होते है , उसी प्रकार राजा दशरथ जी उन तेजस्वी मंत्रियों के मध्य रहकर बडी शोभा पाते थे ।

वर्तमान में भारत ही नही अपितु सम्पूर्ण विश्व में दशरथ जी के मंत्रिपरिषद के गुणों में से गुणों की संख्या अत्यन्त ही न्यून दिखाई देती है । दशरथ जी के मंत्रिपरिषद के इन गुणों को आज ही मार्ग दर्शक के रूप में स्वीकार कर लिया जाए तो निश्चित ही सम्पूर्ण विश्व में भ्रष्टाचार , अन्याय , अघर्म , अत्याचार , स्वार्थलोलुपता, परिवार के प्रति अंधा प्रेम , अवसरवादिता, तथा ऐसे अनेक अवगुणों को समाप्त कर सकते है । दशरथ जी की मंत्रिपरिषद की आचार संहिता निश्चित रूप से देश विदेश में राष्ट्रों के विकास एवं सुखशांति प्रदान करने में मार्ग दर्शन करेंगी ।

डॉ. नरेन्द्रकुमार मेहता 'मानस शिरोमणि'

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