रचनाकार

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका

(कहानी) प्यार तो प्यार है ! - महेश हीवेट


‘क्षमा करियेगा माँ जी ! आपके पोते को स्कूल से निकाला जा रहा है I वह अपनी क्लास में लगातार दूसरी बार फेल हुआ है I उसकी शरारतों से हम लोग तंग आ चुके हैं I’ तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले कबीर की दादी से स्कूल की प्रिंसिपल मैडम ने शिकायत करते हुए कहा I ‘मैडम प्लीज ! आप ऐसा मत कीजिये I बिन माँ-बाप का बच्चा है I बस एक चांस और दे दीजिये I वह अबकी बार फेल नहीं होगा I’ दादी माँ ने प्रिंसिपल से रिक्वेस्ट करते हुए कहा I
‘ठीक है, देखते हैं ! मेरी सलाह मानिए तो कबीर को ट्यूशन लगवा दीजिये I इससे उसके पढ़ाई में काफी मदद मिल सकती है I स्कूल गेट के सामने वाली गली में मनोहर शुक्ला जी ट्यूशन पढ़ातें हैं I बहुत ही अच्छे टीचर हैं I अभी तक उन्होंने इसके जैसी न जाने कितने ऊंटों की कूबड़ सीधे किये हैं I’ प्रिंसिपल मैडम ने एक बार फिर उसी क्लास में एडमिशन लेते हुए सलाह दिया I
‘ठीक है ! मैं अभी जाकर उनसे बात करती हूँ I’ अपनी जवाब में दादी ने कहाI

‘क्या नाम है बेटा ?’ दादी माँ से बात करने के बाद शुक्ला जी ने प्यार से पूछा I
‘कबीर शर्मा !’ दादी के काफी दबाव देने पर बच्चे ने थोड़े देर बाद अपना नाम बताया I
‘वेरी गुड ! चलो आठ का टेबल सुनाओ I शुक्ला जी ने काफी उत्सुकता से पूछा I जैसा कि वो अपने हर नये स्टूडेंट से पूछतें थे I

‘याद नहीं है !’ कुछ देर तक चुप रहने के बाद कबीर बोला I उसने शुक्ला जी को अपने पहले ही जवाब में निराश किया I
‘अच्छा ! कोई बात नहीं ! तो चलो पांच फलों के अंग्रेजी नाम बताओ I’
‘याद नहीं है !’ हिचकिचाते हुए उसने अपने जवाब को फिर से दोहराया I

‘अरे ? तो चलो फिर ये बताओ कि आठ में से तीन घटाने पर कितना बचेगा ?’ शुक्ला जी ने अपनी ओर सरलतम प्रश्न किया I

‘चार !’ इस बार कबीर का जवाब पहले जैसा तो नहीं था I परन्तु जवाब गलत था I शुक्ला जी की हैरानी उनके चेहरे पर साफ़ झलकनें लगी I
अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए वह दादी माँ से बोले, ‘माफ़ करियेगा I मैं इस बच्चे को नहीं पढ़ा पाऊंगा I मैं पिछले दस सालों से ट्यूशन पढ़ा रहा हूँ I लेकिन इतना कमजोर बच्चा कभी नहीं देखा I ये मेरा नाम डुबो देगा I प्लीज, इसके लिये कोई और ट्यूशन देख लीजिये I’

‘देखिये भाई साहब, मैं आपके पास बड़ी उम्मीद लेकर आई हूँ I मैं मानती हूँ कि कबीर पढ़ने में कमजोर है I लेकिन आप इसे बस दस दिन पढ़ाकर देखिये, बड़ी जल्दी सीख जाता है I” दादी माँ ने शुक्ला जी से रिक्वेस्ट किया I
‘ठीक है, देखतें हैं ! कल से शाम को पांच बजे पढ़ने के लिये भेजिये I” शुक्ला जी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा I
अब पिछले पांच दिनों से कबीर, ट्यूशन पढ़ने आ रहा था I अभी तक वह एक भी दिन, टाइम पर नहीं आ पाया था I आज भी वह आधे घंटे देर से आया, और बच्चों की सबसे पीछे की लाइन में जाकर चुपचाप बैठा रहा I

‘कबीर ! ये कोई टाइम है तुम्हारे ट्यूशन आने का ? तुम्हारा होमवर्क कहाँ है ? चलो दिखाओ I’ शुक्ला जी अपनी आँखे चढ़ाते हुये चिल्लाये I
‘ये क्या ? बस दो ही सवाल पूरे किये I वो भी गलत !’ जब कबीर अपनी कॉपी लेकर उनके पास पहुंचा तो कॉपी देखते ही शुक्ला जी भड़क उठे I ‘तुमको फाइव तक का टेबल याद करने के लिये बोला था न ? चलो सुनाओ I’ शुक्ला जी ने काफी मुश्किल से अपने गुस्से को कंट्रोल करते हुए बोले I उनका मन कर रहा था कि छड़ी से उसके हाथ लाल कर दें I फिर भी उन्हें अपने नये स्टूडेंट की मासूमियत पर थोड़ा सा रहम आ रहा था I
‘फाइव वन जा फाइव, फाइव टू जा ट्वेल्व’ उसने बड़े ही लय से टेबल सुनाना शुरू ही किया था कि ‘फाइव टू जा ट्वेल्व’ सुनते ही शुक्ला जी ने एक जोर का तमाचा उसकी गाल पर रसीद दिया I
वह दूसरे बच्चों की तरह जोर से चिल्लाया तो नहीं I लेकिन उसकी आँखों से गिरने वाली बूंदों व उसकी लाल चेहरे को स्पष्ट देखा जा सकता था I
‘दुष्ट कहीं का ! दिनभर क्या करता रहता है ? खेलने से कभी पेट भरता है कि नहीं ? आज सुबह से उठकर क्या-क्या किया ? चल जल्दी बता, नहीं तो तेरा मुंह तोड़ दूंगा I” अब शुक्ला जी उसके चेहरे की ओर गुस्से से हाथ बढ़ाते हुए बोले I

कबीर सिसकते हुये बोलना शुरू किया, ‘सुबह उठकर ब्रश किया I फिर स्कूल गया I फिर .......’ ‘फिर क्लास में क्या किया ? वहां क्या पढ़ाया गया ?’ शुक्ला जी, बीच में ही टोकते हुये चिल्ला पड़े I ‘एनिमल्स नेम !’ कबीर ने अपने गाल पर पड़ने वाले एक और थप्पड़ की डर से तुरंत जवाब दिया I ‘अच्छा ! तो जानवरों के नाम सिखाया गया I वेरी गुड, चल अब तू दो एनिमल्स के नाम बता, वरना.....” शुक्ला जी अपनी छड़ी की ओर इशारा करते हुये बोले I ‘मुझे याद नहीं है I’ कबीर अपने आंसूओं को पोछते हुये, धीरे से बोला I

‘क्या ? आज ही क्लास में सिखाया गया और तुम्हें दो जानवरों के नाम तक नहीं पता I सच-सच बता, जब क्लास में पढ़ाया जा रहा था तो तू क्या कर रहा था ?” शुक्ला जी अपनी छड़ी को उठाते हुये गरजे I
‘बोलते क्यों नहीं, क्लास में क्या कर रहे थे तुम ?’ शुक्ला जी उसके सिर को झकझोरते हुए चिल्लाये I ‘निम्मी को देख रहा था, सर जी I’ उसने सहमीं हुई आवाज में जवाब दिया I शुक्ला जी के थप्पड़ के भयं से उसको लगा कि सच बोलने में ही गनिमत है I उसकी आँखों के झरने अभी भी रुकने का नाम नहीं ले रही थी I
'क्या ? ये निम्मी कौन है ? भला तूं उसको क्यों देख रहा था ?’ शुक्ला जी अचरज भरी निगाहों से उसकी ओर देखते हुये बोले I सच में, शुक्ला जी अपने लाइफ में यह प्रश्न तो बहुतों से पूछे थे I लेकिन इतना यूनिक-सा जवाब अभी तक किसी ने नहीं दिया था I ‘मेरे क्लास में पढ़ती है I मैं उससे प्यार करता हूँ I वह मुझसे बात नहीं कर रही थी I’
‘अच्छा ! तो तुम प्यार करते हो ?’ शुक्ला जी चौंकते हुए बोले I ‘अगर वह तुमसे बात नहीं करेगी तो तुम क्या करोगे ?’
‘तो मैं उसके पास जाकर उसे मनाऊंगा I’ ‘और अगर उसने फिर भी बात नहीं किया तो तुम क्या करोगे ?’
‘तो मैं खाना नहीं खाऊंगा I’ उसने सीधा-सा जवाब दिया I
‘अगर उसने फिर भी बात नहीं किया, तो क्या करोगे ?’ शुक्ला जी का अगला सवाल था I वह जानबूझकर ‘तो क्या करोगे ?’ जैसे सवाल बार-बार किये जा रहे थे I वह सोच लिए थे कि जैसे ही वह जवाब देनें से चुका I उसको उसकी इस उदंडता की सजा जरुर दिया जाएगा I
‘दादी से से बता दूंगा कि निम्मी मुझसे बात नहीं कर रही है I’ ‘बहुत खूब ! और अगर उसने फिर भी बात नहीं किया तो......?’ ‘तो मैं खूब रोऊंगा I पढ़ने भी नहीं जाऊंगा I’
‘अच्छा ! और अगर उसने फिर भी बात नहीं किया तो........?’ ‘नहीं करेगी तो मत करे ! फिर मैं क्या करूँगा ? कुछ भी नहीं ! बस उसे देखता रहूँगा I आखिर प्यार तो प्यार है I’ कबीर का लाचारी भरा जवाब था I मानों अब वह शुक्ला जी के सामने सरेंडर कर दिया हो I इस समय वह खुद को अगले थप्पड़ के लिए तैयार कर किया था I
शुक्ला जी के पास अब पूछने के लिए कोई सवाल नहीं था I जैसे कि उनके पास शब्दों की कमीं पड़ गयी हो I उनका गुस्सा काफूर हो चुका था I वो समझ ही नहीं पा रहे थे, कि इतने छोटे से बच्चे को ऐसा अद्भुत जवाब कहाँ से सूझा ? जहाँ एक ओर उस बच्चे के जवाब में सच्चाई तो छिपी ही थी I वहीँ दूसरी ओर उसका जवाब, उसके परिवेश को भी प्रतिविम्बित कर रहा था I
‘बच्चों की प्रारम्भिक शिक्षा तो घर से ही शुरू होती है I कहीं ये कबीर पर उसके पारिवारिक माहौल का असर तो नहीं ? या फिर उस पर इस आधुनिक युग की आधुनिकता का प्रभाव है ?’ शुक्ला जी के अन्दर से सवाल आया I कल से समय पर आने की धमकी देते हुए शुक्ला जी ने उसे घर जाने के लिए बोल दिया I


Mahesh Hewett
(महेश हीवेट)
ग्राम – धनैता, पोस्ट – डोमनपुर,
तहसील – चुनार, जिला – मीरजापुर,
उत्तर प्रदेश – 231 306
मोबाइल नं. - +91-9651764863
ई-मेल – author4949@gmail.com
विषय:
रचना कैसी लगी:

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

[blogger][facebook]

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget