रचनाकार

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका

शब्द संधान / अन्दर की बात / डॉ. सुरेन्द्र वर्मा

हिन्दी-संस्कृत में ‘अंतर’ विशेषण / क्रिया-विशेषण की तरह प्रयुक्त होता है | इसका अर्थ है, भीतर का | जो बाहर का न हो | यही ‘अन्तर’ फारसी में ‘अन्दर’ हो गया | और यह ‘अन्दर’ भी हिन्दी में सहज ही आया | अर्थ वही है, भीतर | हम किसी इंसान के आचरण को देख सकते हैं, लेकिन उसके अन्दर क्या है, कोई नहीं जानता |

‘अन्दर’ और ‘अंतर’ में कोई अंतर नहीं है | बात समझ में आती है | लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है | यदि हम कहें ‘अंतर’ और ‘अन्दर’ में कोई अंदर नहीं है, तो यह समझ से परे है | वस्तुत: ‘अंतर’ का एक अर्थ फर्क करना भी है | लेकिन ‘अंदर’ फर्क करने के अर्थ में इस्तेमाल नहीं होता | यह केवल भीतर के अर्थ में ही प्रयुक्त होता है |

हम ऐसा मानते हैं कि की इंसान के अन्दर उसकी आत्मा होती है | अन्दर की आत्मा और बाहर की आत्मा अलग अलग नहीं होती | आत्मा हमेशा अंतरात्मा ही है | संत महात्माओं का कहना है, हमें अंतरात्मा की आवाज़ (अंतर्ध्वनि) सुननी चाहिए | पर वह अक्सर अनसुनी ही रह जाती है | ‘अंत:करण’, भले बुरे का विवेक करने वाली,भीतरी इन्द्रिय है | भारतीय मनोविज्ञान के अनुसार मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार – इन चार वृत्तियों से मिलकर अंत:करण बना है |

ह्रदय को भी अंतर कहा गया है | वह भी अन्दर ही होता है न | यहाँ मतलब शरीर के अन्दर धड़कते भौतिक ह्रदय से नहीं है | इंसान का “अंतर” उसका वह ह्रदय है जिसमे उसका विवेक और उसकी सद्भावनाएं बसती हैं | कभी कभी हमारे व्यवहार को हमारा “अंतर” स्वीकार नहीं कर पाता | तब हम मुश्किल में पड़ जाते हैं | और एक आतंरिक संघर्ष में,“अंतर्द्वंद्व” में, घिर जाते है | |ह्रदय को तो अंतर कहते ही हैं, लेकिन बात अधिक स्पष्ट करने के लिए इसे “अंतर्घट” भी कहा जाता है | अंतर इस प्रकार हमारा मन है, आत्मा है, ह्रदय है, | अंतस है, दिल है |

हम खिड़कियों में,दरवाजों में, परदे डाल देते हैं ताकि कोई बाहर से अन्दर न देख सके | यही कारण है कि परदों को “अंतरपट” कहा गया है | हिन्दी में अंग्रेज़ी शब्द underwear के लिए प्रचलन में कोई अच्छा शब्द नहीं है | इसे अन्तरीय या अंतर्परिधान या अंतर्वस्त्र कहा गया है | लेकिन इनमें से कोई भी प्रचलन में अभी तक नहीं आसका है | पर अन्डर्वेयर को भी हिन्दी स्वीकार नहीं कर सकी है |

अंग्रेज़ी में एक शब्द है “इंटर” (आई-एन –टी -ई-आर)| यह दो चीजों के मध्य की स्थिति का द्योतक है | स्कूल और कालेज की शिक्षा के बीच एक ‘इंटरमीडियट’ मध्यवर्ती शिक्षा भी है | ‘इंटर’ वह है जो दो के मध्य सम्बन्ध स्थापित कर सके | अंग्रेज़ी का ‘इंटर’ हिन्दी के “अंतर” के बहुत नज़दीक है –अर्थ में भी और उच्चारण में भी | दोनों में एक तरह का पारिवारिक साम्य है | भारत में विवाह-सम्बन्ध अधिकतर एक जाति के ‘अंतर्गत’ (मध्य) ही होते हैं | लेकिन अब काफी छूट मिलने लगी है | पर आज भी इन ‘अंतरजातीय’ विवाहों को बहुत अच्छी दृष्टि से नहीं देखा जाता | ज़ाहिर है अन्तर्जातीय को अंग्रेज़ी में inter-caste ही कहेंगे | ‘मध्यवर्तीय’ के अर्थ में इस ‘इंटर’ या हिन्दी में,‘अंतर’, को लेकर अंग्रेज़ी और हिन्दी दोनों में हीं अनेकानेक शब्द बन गए हैं | “अन्तर्विद्यालयीन” “अंतर्राष्ट्र्वाद” “अंतरप्रांतीय” “अंतरसंबंध” “अन्तर्क्षेत्रीय” , इत्यादि |

अंग्रेज़ी में एक शब्द है, intuition. हिन्दी में इसके लिए कोई उपयुक्त शब्द ढूँढ़ पाना मुश्किल ही है | इसे अंत:प्रज्ञा कहा गया है | अंतर्बोध और अन्तर्ज्ञान भी कहा गया है | (इसी तरह जो आपके मन की बात जान ले उसे अन्तरज्ञ कहते हैं | )

आज इंटरनेट का ज़माना है | इन्टरनेट का अनुवाद हिन्दी में “अंतरजाल” किया जाया है | लेकिन अन्तेर्जाल पुराने ज़माने में कसरत करने की एक लकड़ी हुआ करती थी | मुझे लगता है कि अनुवाद के इस मकडजाल में हिन्दी को फंसना नहीं चाहिए | कम्प्यूटर के इस युग में इन्टरनेट, इण्टरकॉम, जैसे, शब्दों से कौन कम्प्यूटर-साक्षर व्यक्ति परिचित नहीं है ? इन शब्दों को हम, हिन्दी में ज्यों का त्यों रहने देकर, ज़बरदस्ती अनुवाद की तवालत से बच सकते हैं |

डा. सुरेन्द्र वर्मा (मो. ९६२१२२२७७८)

१०, एच आई जी / १, सर्कुलर रोड इलाहाबाद -२११००१

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

[blogger][facebook]

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget