रविवार, 4 दिसंबर 2016

शब्द संधान - समाचार / ख़बर / न्यूज़ - डॉ. सुरेन्द्र वर्मा

हम अखबार पढ़ने के इतने आदी हो गए हैं कि सुबह के वक्त अगर अखबार न आए तो तो लगता है सारा दिन बेकार हो गया | सुबह चाय की चुस्की लेते हुए हम अखबारों में समाचार पढ़ते हैं | भले ही टी वी और इन्टरनेट जैसी सुविधाएं हमें प्राप्त क्यों न हों, बिना अखबार पढ़े चैन नहीं आता | आखिर खबरों का खज़ाना हमें वहीं से मिलता है |

खबर को अंग्रेज़ी में न्यूज़, हिन्दी में समाचार और उर्दू में खबर कहा जाता है | इनमें न्यूज़ की कहानी बेहद दिलचस्प है | बारहवीं शताब्दी के पूर्व इंग्लैंड में एक युद्ध हुआ था- जर्मन और केल्ट लोंगे के बीच | तब हर रोज़ लड़ाई के नतीजे जानने के लिए केल्ट महिलाएं पहाड़ियों के नीचे आकर सवाल पूछ्तीं “व्हाट इस न्यू?”, नया क्या हुआ? लड़ाई के अंतिम दिनों में इतनी अधिक खबरें आने लगीं कि औरतों ने न्यू का बहुवचन “न्यूज़” बना दिया | और पूछने लगीं, व्हाट इस न्यूज़? यानी, क्या क्या हुआ? कालान्तर में यही न्यूज़ शब्द खबर के लिए रूढ़ हो गया | इसे समाचार के लिए पर्यायवाची मान लिया गया |

अत: कहा जा सकता है कि अंग्रेज़ी में जिसे न्यूज़ कहते हैं ये वे घटनाएं हैं जिनमें कुछ न कुछ नयापन होता है | सामान्य रूप से घटित होने वाली घटनाएं न्यूज़ नहीं बनातीं | ह्त्या, बलात्कार, चोरी, डकैती, युद्ध, आगजनी के क़िस्म की घटनाएं जो सामान्य जीवन धारा से हटकर हैं न्यूज़ बन जाती हैं | ऐसी घटनाएं हमें किसी भी दिशा में क्यों न मिलें अखबारों में छपने लायक मसाला जुटाती हैं | जी हाँ, किसी भी दिशा में | न्यूज़ के चारों अंग्रेज़ी अक्षर - एन, ई, डब्ल्यू एस – चारों दिशाओं की और ही तो संकेत करते हैं | नोर्थ, ईस्ट, वेस्ट और साउथ – उत्तर, पूर्व, पश्चिम और दक्षिण |

हिन्दी शब्द, समाचार, को न्यूज़ का पर्यायवाची मना गया है | पर यह भ्रामक है | ‘समाचार’ सम+आचार को जोड़ कर बनाया गया है | इस प्रकार इसका अर्थ हुआ, जैसा कि अपेक्षित है , जो सामान्य रूप से स्वीकार्य है, -वैसा आचरण | आप कभी बिहार के भोजपुरी क्षेत्र में जाकर गौर करें वहां इस शब्द का सही उपयोग सुन पाएंगे | वहां लोग यह नहीं पूछते - कहिए, क्या समाचार हैं? वे पूछते हैं – समाचार तो है न ! इस अर्थ में स्पष्ट ही सामान्य आचरण से हटकर किसी नए आचार-व्यवहार का संकेत नहीं है , जैसा की ‘न्यूज़’ में निहित है | वहां पूछा जाता है,“समाचार बा नूं !” समाचार तो है , सब कुछ सामान्य तो है ! समाचार में कुछ भी नया नहीं होता | यह सामाजिक व्यक्तियों दवारा प्रतिदिन बरतने वाला सामान्य आचरण है | लेकिन आज के समाचार पत्रों में सम + आचरण के लिए कोई स्थान नहीं है | उनमें तो बस ‘न्यूज़’ ही होती है |

न्यूज़ के लिए एक अन्य शब्द जो हिन्दी में प्रयोग में आता है, वह है, ख़बर | ख़बर वस्तुत: अरबी भाषा का शब्द है जिसे हिन्दी/उर्दू में पूरी तरह अपना लिया गया है | ख़बर का अरबी भाषा में बहुवचन ‘अख़बार’ है | अखबारों में हम “खबरें” पढ़ते हैं इसलिए उन्हें अखबार कहा गया है | लेकिन खबर का अर्थ केवल सूचना या समाचार ही नहीं होता | खबर – होश या चेतना के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है | होश में आ जाओ, खबरदार हो जाओ | अभी तक नहीं चेते तो अब चेत जाओ | इन अर्थों में भी खबर हिन्दी में खूब प्रयुक्त होता है |

इतना ही नहीं, डांटने, फटकारने, दंड देने के लिए भी खबर शब्द का इस्तेमाल देखा जा सकता है | हम बच्चों को अक्सर डांटते हैं कि अब दोबारा गलती की तो ख़बर ली जाएगी, अर्थात, तुम्हें सज़ा दी जाएगी | खबर शब्द हिन्दी में इन सभी अर्थों में प्रयुक्त होता है | हिन्दी ने इसे पूरी तरह अपना जो लिया है !

यह सचमुच दुर्भाग्यपूर्ण है कि समाचार पत्रों में सामान्य जीवन से सम्बंधित बातें छपती ही नहीं | उनमें सामान्य आचरण के अपवाद ही मुख्य स्थान प्राप्त कर पाते हैं | सामान्य जीवन के अपवाद ही अब समाचार (सम+आचार) बन गए हैं | समाचार पत्रों से यदि आप किसी समाज के सामान्य लोगों के सामान्य जीवन के बारे में जानना चाहें तो शायद निराशा ही हाथ लगे |

डा. सुरेन्द्र वर्मा (मो. ९६२१२२२७७८ )

१०, एच आई जी / १, सक्चुलर रोड / इलाहाबाद -२११००१

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