शनिवार, 31 दिसंबर 2016

लघुकथा / बोनसाई / ललिता भाटिया

बोनसाई
निशु के जाते मानो घर में भूचाल आ गया. माता जी यानि के मेरी सास , तिया की दादी ने घर में शोर मचा दिया ॰ असल में निशु टिया के लिए मेडिकल का फ़ार्म ले कर आई थी ॰ मेडिकल का फ़ार्म भरने का अर्थ है टिया की शादी ५ साल के लिए टल जाना, जो माता जी हरगिज़ नहीं चाहती थी. वो तो बस यही चाहती थी कि टिया किसी लोकल कालेज़ से बी ए कर ले. और इसी टाइम में उस की शादी निबटा दे. मुझे तो पति और सास का ग़ुस्सा सहने की आदत है, पर टिया तो कमरा बंद कर के मानो कोप भवन में बैठ गई । रात का खाना भी नहीं खाया । इतिहास स्वयं को दोहरा रहा था । + २ के बाद मैं फैशन डिजाइनिंग करना चाहती थी । हम ने अपनी बेटी को दरजी नहीं बनाना कह कर मेरे अरमानों पर पानी फेर दिया गया था । और बी ए पूरी होने से पहले ही मेरी डोली भेज दी । अगले दिन रविवार होने के कारण सभी घर पर थे । मेरे पति बहार माली से काम करवा रहे थे । मैं चाय लेकर बाहर ही आ गई । ये माली से एक पेड़ बनते पौधे की शाखायें कटवा कर बोनसाई बनवाना चाहते थे । नहीं इसे प्राकृतिक रूप में बढ़ने दो हमें बोनसाई नहीं चाहिए । मेरे तेवर देख ये हैरान रह गए । माली के हाथ की कैंची रुक गई।

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मैं अपनी बेटी को बोनसाई नहीं बनने दूँगी। मैं बड़बड़ाने लगी मेरे मुख पर आई दृढ़ता से सब हैरान थे ।
अब तक टिया और उसकी दादी भी बाहर आ गए ।
टिया अपना फार्म लेकर आओ अभी पाप के साथ बैठ कर भरो । तुम्हें कोई नहीं रोकेगा । मैं तुम्हें बोनसाई नहीं बनने दूँगी ।

Lalita bhatia

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