शनिवार, 31 दिसंबर 2016

मृत्यु पत्र (A Death Note)

मृत्यु पत्र (A Death Note) 

( मरने से पहले इंसान सोच पाता अपनी जिन्दगी में वह क्या करना चाहता है, क्या बनना चाहता है, उनके लिए जो सीखना चाहते हैं )

दिल की आवाज, परमात्मा की आवाज है, जिसमें भावों का संचार परमात्मा से आत्मा की ओर प्रसारित होता है, दिमाग की आवाज आत्मा की आवाज है, जिसमें भावों का संचार आत्मा से परमात्मा की ओर होता है, जब हम दिल की बात मानना चाहते हैं,  तो दिमाग उस पर हावी हो जाता है, जब आप दिमाग की बात सुनना चाहोगे, तो दिल उसे रोक लेता है, इसीलिए इंसान को दिल और दिमाग में सामंजस्य कर विश्वनीय विकास की अग्रसर हो जीवन के शिखर तक पहुंचना चाहिए ।

सुख और संतोष 

( दिल और दिमाग की कुछ बातें) 

मेरा दिमाग मुझे तथ्यात्मक सत्य करवाना चाहता है, जिससे समाज में नाम, पैसा और इज्जत मिले, इसे पाने के लिए कड़ी मेहनत चाहिए और इस पर अनेक आ चुके हैं, मुझे लगता है उन रास्तों पर चलकर मैं भी वह पा लूँगा, जो वो पा चुके हैं,कर्म करने के पश्चात् कुछ नहीं पाने का इसमें डर नहीं लगता, चूंकि इसमें एक बने बनाए रास्ता दिखाई दे रहा होता है, पर मेरा दिल उस राह पर चलने के लिए राजी नहीं होता है, कहता है वह रास्ता तू स्वयं बना, जिसमें कोई न चला हो, जिसकी सारी मुश्किलों की सामना करने वाला पहला इंसान तू स्वयं हो, 

चमकना तो उस दीपक की तरह मत चमकना, जो एक कमरे का अँधकार हरता है, फिर कुछ क्षण पश्चात् तेल के खत्म होने के पश्चात् बुझ जाता है, 

मैं बनना चाहता हूं  उस सूर्य की तरह जो दिन रात स्वयं प्रज्जवलित होकर अपना प्रकाश दुनिया को प्रदान करता रहता है।

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पर दिमाग की  बातें सुनना होता है आसान, दूसरों के चले हुए रास्तों का अाँख मूंदकर करना होता है अनुसरण, दिल की बात सुनकर बनाना चाहो नया रास्ता तो दुनियाभर से मिलने वाले सवालों और अपमान का डर, गिरने का डर, आने वाली मुश्किलों का डर, आगे बढ़ने से रोकता है, उन रास्तों पर आने वाली सारी मुश्किल, सारी बाधा नई होगी, जहाँ आगे चलकर हमें सुख की प्राप्ति होगी, दिमाग के रास्तों पर चलने से हमें सिर्फ संतोष की प्राप्ति होगी।

जिसे चाहत हो सुख की, उसे त्यागने होते हैं मान अपमान का डर, उसे अपने कर्मों को ही ईश्वर बनाकर बढ़ना चाहिए, दिल की आवाज सुनकर आगे बढ़ने पर रिस्क बढ़ जाता है, परिवार  की जिम्मेदारी, नाम, पैसा,  सामाजिक सम्मान दिल की बात सुनने को रोक देती है, एक डर सा लगने लगता है वह रास्ता है या नहीं, मृगमरीचिका सा हमें यह कहीं न भटका देगा, या यह मेरा सपना है जो सुबह होने पर समाप्त हो जाएगा। 

दिमाग हर बार हमें वह रास्ता  दिखाता  है, जिसमें कम मेहनत लगते हैं, जिसमें कम खतरे होते हैं, जो आत्मा  को कुछ पल को संतोष देता है, दिल के रास्तों में, जिन्दगी के राहों में आने वाली  दिक्कतों का कर्म ही अकेला अस्त्र होता है।

(आत्मा की बातें परमात्मा के साथ)

हे प्रभु!  मुझे  ऐसा मनुष्य मत बनाना, जो सिर्फ अपने  लिए जीता है, उसके बदले  मुझे एक सूकर बनाना,जो जीवित रहने पर संसार का  गंदगी  साफ करता है, मरने पर मानव का भूख शांत करता है।

हे प्रभु!  मुझे  एक पेड़ बनाना, जो जीवनभर परहित का कार्य करता है, मानव को प्राणवायु देता है, फल और फूल देता है, औषधि देता है, लकड़ी देता है।

हे प्रभु! मुझे  वह पत्थर मत बनाना,  जो मंदिर में विराजमान हो, जिसे दूध से नहलाया जाए, पुष्पों से ढका जाए, मुझे  वह पत्थर बनाना, जो घर की नींव बने, जो मानवों को धूप और बारिश से बचाए।

हे प्रभु!  मुझे वो विद्यार्थी मत बनाना, जो प्रतिस्पर्धा के दौड़ में परस्पर ढकेलते हुए बढ़ते हैं, मुझे वह विद्यार्थी बनाना, जो ज्ञान को ग्रहण करता है, अज्ञान को मिटाता है ।

हे प्रभु! मुझे वैसा शिक्षक भी मत बनाना, जो सिर्फ पैसा के लिए ही पढ़ाते हैं, मुझे वह शिक्षक बनाना, जो मिट्टी को आकार देता है, उसमें ज्ञान का बीज डालकर नवनिर्माण करता है। 

हे प्रभु! मुझे वो इंसान मत बनाना, जो तुम्हें अपने स्वार्थ के लिए अनेक धर्मो में विभाजन करता है, मुझे वो इंसान बनाना, जो संसार के अच्छाइयों में तेरा रूप पाता है, परहित में सुख पाता है।

हे प्रभु ! मुझे वो नेता मत बनाना, अपनी भूख मिटाने के लिए आम आदमी  से झूठे वायदे करते हैं, उनको लूटते हैं, मुझे वो नेता बनाना, जो अपने जीवन का बलिदान कर लोगों को सही राह लाता है।

हे प्रभु! वह व्यवसायी भी मत बनाना, जो लोगों का खून चूसते हैं, मुझे वह व्यवसायी बनाना, जो गरीबों को काम देकर उनका भूख मिटाता है ।

हे प्रभु! मुझे वो मत देना, जिनकी मेरी ही जरूरत हो, पर मुझे इतना जरूर देना, जिससे मैं दूसरों की मदद कर सकूँ।

हे प्रभु! मुझे  वो शक्ति देना, दुनिया में अकेला भूखा सो सकूँ, पर दूसरों का भूख दूर कर सकूँ, मुझे  वो शक्ति देना, जिससे सबको सुख दे सकूँ।

हे प्रभु! मुझे दुनियाभर का दर्द दे दे, दुनिया  को सारा सुख दे दे।

हे प्रभु! मुझे  रक्त पिपासु मच्छर मानव मत बनाना, जो सिर्फ दूसरों का खून पीकर जीता है, मुझे दधीचि की तरह बनाना, जो अपनी शरीर का दान कर सकूँ, हड्डियाें को बज्र बना दुनिया का काम आऊँ।

हे प्रभु!  मुझे वो इंसान मत बनाना, जो नारियों को मात्र योनि समझ क्षणिक सुख का मनोरंजन उठाता है, जो आत्म तृप्ति के लिए दूसरों को तड़फाता है, सिर्फ कामवासना में फँसकर अपनी जीवन का नाश करता है, मुझे श्रीराम की तरह बनाना जो नवनिर्माण में अपना योगदान  देता है।

हे प्रभु!  मुझे वह ज्ञान  दे, जो संसार के अज्ञान के बंथनों को तोड़ सकूँ, असंभव को संभव कर सकूँ, असाध्य को साध्य कर सकूँ, हे प्रभु! मैं अपना तन और आत्मा आपको  समर्पित करता हूँ।

 

सोमपिनाकी पटेल

गाँव - पत्रघर -रेड़ा

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