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आलेख || कविता ||  कहानी ||  हास्य-व्यंग्य ||  लघुकथा || संस्मरण ||   बाल कथा || उपन्यास || 10,000+ उत्कृष्ट रचनाएँ. 1,000+ लेखक. प्रकाशनार्थ रचनाओं का  rachanakar@gmail.com पर स्वागत है

जरूरी है स्वाध्याय / हरदेव कृष्ण

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हिन्दी साहित्य के संदर्भ में इस बात का रोना रोया जाता है कि पाठक नहीं है। खासकर बालकों के संदर्भ में। लेकिन यह धारणा पूरी तरह सत्य नहीं है। अध्ययन की वृति कम अवश्य हो रही है, लेकिन हालात ऐसे नहीं है कि यह बिल्कुल मर चुकी है। अच्छा लिखा जाए और उसे विद्यालयों, पुस्तकालयों की मदद से सर्वसुलभ करवाया जाए तो परिणाम बहुत अच्छे आ सकते हैं। ईमानदार और योग्य प्रकाशक उचित दामों में इसे जनता व छात्रों तक पहुंचा सकते हैं। सब के सहयोग से एक जमीन तैयार करने की आवश्यकता है। उदाहरण के लिए व्यवसाय करने वालों को देखिए। वे जनता की आवश्यकताओं और रुचियों को पहचानते हैं। फिर उन के अनुकूल उत्पाद तैयार करके बाजार में उतारते हैं। यह सब एक संगठित तरीके से करते हैं। पाठ्यप्रेमी एकजुट हो जाएं तो इस दिशा में अच्छा काम हो सकता है। हमारे किसी सुदूर गाँव में एकाध शराब की (वैध-अवैध) दुकान अवश्य मिल जाएगी, पान-बीड़ी और कोल्ड ड्रिंक्स की दुकानें मिल जाएगी पर पुस्तक-पत्रिका तो क्या किसी अच्छे अखबार की झलक पाने के लिए भी तरस जाएंगें। क्योंकि हमने पठन-पाठन का वातावरण तैयार करने की तरफ ध्यान ही नहीं दिया है। न सरकार ने न सा…

आइडियल डैड वि. अड़ियल डैड / व्यंग्य / गणेश सिंह

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देखिये, ये जो हमारा इण्डिया है न इसमें मुख्यतः दो तरह के डैड पाये जाते हैं। एक आइडियल डैड जो बड़े - बड़े शहरों में होते हैं और दूसरा अड़ियल डैड जो गाँव देहात में होते हैं। आइडियल डैड काफी फ्रेंडली होते हैं अगर उनका बच्चा कुछ गलती करे तो सॉफ्टली "सॉरी" बोलने को बोलते हैं। मार्क्स कम आये तो प्यार से "कॉन्फिडेंस बूस्टअप" करते हैं। बच्चा कोई प्राइज जीते तो कहीं घूमने का प्रॉमिस" करते हैं वहीँ इसके विपरीत अड़ियल डैड काफी खूंखार और हिंसक प्रवृति के होते हैं अगर गलती से बच्चे से कुछ शरारत हो जाये तो जमके कुटइया करते हैं। आइडियल डैड से बच्चे "डिस्कशन" और "डिबेट" करते हैं वहीं अड़ियल डैड से आप भर मुंह खुलके बात भी नहीं कर सकते वरना बत्तीसी ऑड या इवन कोई भी नम्बर में बाहर आ सकती है केजरीवाल जी के कार पर्यावरण नियम का उल्लंघन करते हुए। आइडियल डैड अपने बच्चों के साथ "जोक्स शेयर" करते हैं साथ में हँसते है "फन" करते हैं वहीँ अड़ियल डैड इनसब चीजों को भारतीय संस्कृति के विरुद्ध मानते हैं।
आइडियल डैड से बच्चे टीवी रिमोट के लिए लड़ बैठते हैं वही…

किस्सा - ए - रिन्द / कहानी / गणेश सिंह

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(किस्सा - ए - रिन्द ) मधेसर बाबा अपने ज़माने के मशहूर पियक्कड़ रह चुके हैं। उम्र अस्सी साल के करीब है और हालत यह की कब गांववालों को ब्रह्म-भोज का सरप्राइज दें दे ये पंडी जी का पंचांग भी परफेक्टली अनुमान नहीं लगा सकता। बिहार में शराबबंदी क्या हुई मानो पियक्कड़ों के कंठों की नसबंदी कर दी गई । गले को जो तराई शराब से मिलती थी वो किसी और दूसरी चीज से मिल सकती है भला क्या ? आज के चार माह पूर्व जैसे ही उनके तिलक में मिली तिरसठ साल पुरानी फिलिप्स के रेडियो पर शराब बंदी की आकाशवाणी हुई वैसे ही वो रेडियो समेत अपने खटिया से लोघड़ाकर गिर पड़े । गिरने का 'मंजर' इतना भयावह था की उनका समस्त 'अस्थि-पंजर' विस्थापित हो गया। उसी दुर्घटना में उनका दाहिना हाथ भी चार जगह से फ्रैक्चर हो गया और तीन-चार दांत भी जो बचे थे वो भी उदर में समाहित हो गए । मतलब अस्सी के उम्र में उनको टोटल अस्सी फ्रैक्चर हुआ । कहा गया है कि बुढ़ापे में टूटी हुई हड्डी और जवानी में टूटे हुये दिल,ये दोनों का कभी भी सही से मरम्मत नहीं होता। कोई डॉक्टर या शायर कितना भी जतन कर ले वो जुड़कर अपने पहले वाले रूप में नहीं आते और उम्र भ…

दुख का मनका / कहानी / भरत त्रिवेदी

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सूरज सर पर चढ़ आया है। चमचमाती धूप की किरणें फर्श, दीवान, बिस्तर से आगे बढ़ते बढ़ते त्यागी जी के लौकिक और पारलौकिक ज्ञान, सम्पन्नता और वैभव से दमकते चेहरे पे पड़ने लगी हैं। “उर्मिला; ज़रा गुनगुना पानी लेकर आना, पीने के लिए”। त्यागी जी ने उठते ही अपनी धर्मपत्नी को आवाज लगायी। रामेश्वर दास त्यागी, एक ऐसा नाम जिसकी पूरे शहर में एक प्रतिष्ठा है। इनके समाज परक लेख और वक्तव्य कई लोगों के लिए जीवन का फलसफ़ा बन चुके हैं। इनकी लिखी पिछली किताब “जातिवाद - राष्ट्रोन्नति में प्रधान बाधा” को तो पाठको के बीच हाथों हाथ लिया गया, आज भी देश के हर कोने से उस किताब के लिए बधाई संदेश और धन्यवाद पत्र आते हैं इनके घर। कल रात त्यागी जी अपनी नयी किताब “हम में समाज और समाज में हम” के प्रकाशक से मिलकर घर काफी देर से लौटे; इसी वजह से आज देर तक सोते रहे। वैसे त्यागी जी अमूमन सुबह 7 बजे तक तो जाग ही जाया करते हैं। श्रीमती जी के लाये हुये पानी को पीने के बाद त्यागी जी पूर्व की दीवार में बनी बड़ी सी खिड़की का ग्लास खोलकर बाहर देखने लगे हैं। बाहर वही धीरे धीरे रेंगता छोटी बड़ी गाड़ियों का मेला और उनके हॉर्न्स की न र…

---प्रेम तत्वामृत---- डा श्याम गुप्त.....

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..  ---प्रेम तत्वामृत----                भारत ही नहीं अपितु विश्वभर में प्रेम के अधीक्षक श्रीकृष्ण ----राधा  व कृष्ण माने जाते हैं , वे प्रेम के पर्याय हैं अतः राधा व कृष्ण के तत्व द्वारा यहाँ पर प्रेम के दोनों  मूल भावों की विवेचना की जायगी .....
******राधा तत्वामृत*****
    -------राधा ---व्युत्पत्ति व उदभव----
        ------राधा एक कल्पना है या वास्तविक चरित्र, यह सदियों से तर्कशील व्यक्तियों विज्ञजनों के मन में प्रश्न बनकर उठता रहा है| अधिकाँशतः जन राधा के चरित्र को काल्पनिक एवं पौराणिक काल में रचा गया मानते हैं | कुछ विद्वानों के अनुसार कृष्ण की आराधिका का ही रुप राधा हैं। आराधिका शब्द में से अ हटा देने से राधिका बनता है। राधाजी का जन्म यमुना के निकट स्थित रावल ग्राम में हुआ था। यहाँ राधा का मंदिर भी है। राधारानी का विश्व प्रसिद्ध मंदिर बरसाना ग्राम की पहाड़ी पर स्थित है।
       ------- यह आश्चर्य की बात हे कि राधा-कृष्ण की इतनी अभिन्नता होते हुए भी महाभारत या भागवत पुराण में राधा का नामोल्लेख नहीं मिलता, यद्यपि कृष्ण की एक प्रिय सखी का संकेत अवश्य है। राध…

'अकाल में उत्सव ' पंकज सुबीर के उपन्यास की समीक्षा

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समीक्षा'अकाल में उत्सव 'उपन्यासउपन्यासकार - पंकज सुबीरसमीक्षक – सरस दरबारी
पंकज सुबीर जी की अब तक की सारी कृतियाँ पढ़ चुकी हूँ . हर कृति को एक ही सिटिंग में ख़त्म किया. उनकी गठी हुई शैली और मारक बिंब उनके लेखन को इतना रोचक बना देते हैं कि किताब के पन्ने खुद ब खुद पलटते जाते हैं .
अकाल में उत्सव पढ़ते वक़्त शुरुआत में दिमाग कई बार भटका, और उसे बार बार बाँधकर फिर पात्रों के बीच घसीट कर लाना पड़ा , पर जब कहानी ने गति पकड़ी, तो फिर किताब हाथ से नहीं छूटी. कहानी ख़त्म होते होते नौकरशाहों की पूरी कौम से नफरत हो गयी. नीचता की हर पराकाष्ठा लाँघकर भी यह कैसे सर उठाकर समाज में सम्माननीय व्यक्तियों की तरह जीते हैं, देखकर, पूरे सिस्टम से आस्था उठ गयी.
एक पूरी बिसात बिछी हुई है, सबके खाने तय हैं और सत्ता करती है सुनिश्चित किसे हाथी बनाना है, किसे घोडा , किसे ऊँट - और एक आम आदमी, एक गरीब किसान, उनकी चालों में फँसकर, अपनी जान से हाथ धोकर , उनकी शह और मात का बायस बनता रहता है. न जाने कितने किसान इस सियासी खेल में, काल का ग्रास बन गए , बनते जा रहे हैं .
इस किताब की विशेषता है, इसके मारक वाक्य, जो लेखक बी…

चिकित्सा का चक्कर / हास्य - व्यंग्य / बेढब बनारसी

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मैं बिलकुल हट्टा-कट्टा हूं । देखने में मुझे कोई भला 'आदमी रोगी नहीं कह सकता । पर मेरी कहानी किसी भारतीय विधवा से कम करुण नहीं है, यद्यपि मैं विधुर नहीं हूं । मेरी आप लगभग पैंतीस साल की है । आज तक कभी बीमार नहीं पड़ा था । लोगों का बीमार देखता था तो मुझे बड़ी इच्छा होती थी कि किसी दिन में भी बीमार पड़ता तो अच्छा होता । यह तो न था कि मेरे बीमार होने पर भी दिन में दो बार बुलेटिन निकलते । पर इतना अवश्य था कि मेरे लिए बीमार पड़ने पर हंटले पामर के बिसकुट- जिन्हेँ साधारण अवस्था में घरवाले खाने नहीं देते - दवा की बात और है - खाने को मिलते । यूडी. कलोन' की शीशियां सिर पर कोमल-करों से बीवी उंड़ेल कर मलती और सबसे बड़ी इच्छा तो यह थी कि दोस्त लोग आकर मेरे सामने बैठते और गंभीर मुद्रा धारण करके पूछते, कहिए किस की दवा हो रही है? कुछ फायदा है? जब कोई इस प्रकार से रोनी सूरत बनाकर ऐसे प्रश्न करता है तब मुझे बड़ा मजा आता है और उस समय में आनंद की सीमा के उस पार पहुंच जाता हूं जब दर्शक लोग उठकर जाना चाहते हैं पर संकोच के मारे जल्दी उठते नहीं । यदि उनके मन की तसवीर कोई चित्रकार खींच दे तो मनोविज्ञान के &#…

एक अदने की, तनिक साहित्यिक किस्म की बात ... सुशील कुमार शर्मा

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सुशील कुमार की कविताएँ एक अदने की बातहे महान साहित्य सम्राटो । मत रौंदो अपने अहंकार के तले। नन्हे पौधों की कोपलों को। तुम्हारे ताज में अकादमी ,पद्मश्री,नोबल सजे हैं। सम्मानों से लदा है तुम्हारा अहंकार। साहित्य तुम से शुरू होकर तुम पर ही ख़त्म हो रहा है। तुम्हारी सैकड़ों पुरुस्कृत किताबों के नीचे। मेरे दबे शब्द निकलने की कोशिश करते हैं। लेकिन तुम्हारी बरगद सी शाखाएं। फुंफकार कर सहमा देती हैं मेरे अस्तित्व को। एक फुनगे की तरह निकलने की मेरी कोशिश को। कुचल देती है तुम्हारी हाथी पदचाप। तुम नहीं सुनना चाहते एक छोटे फूल की बात। क्योंकि तुम्हारे अहंकार के बगीचे में। फैली नागफनी लहूलुहान कर देती हैं स्वयं तुम्हें भी। अपने कृतित्व के पिंजरे में कैद ,वंचित हो तुम। बाहर खुली फ़िज़ाओं की भीनी खुश्बुओं से। पथ प्रदर्शन करने वाला तुम्हारा व्यक्तित्व। आज पहाड़ की तरह खड़ा है रास्ते में। (यह भाव किसी के लिए व्यक्तिगत नहीं है वर्तमान व्यवस्थाओं पर एक व्यंग है।  )---.भूख(रामेन्द्र कुमार की कहानी END and MEANS के हिस्से का काव्य रूपांतरण ) बिरजू। एक चोर। सिद्ध स्वामी अरवसु। प्रवचन का पड़ा प्रभाव। बन गया स्वामी…

सुराख वाले छप्पर / लघुकथा / आशीष कुमार त्रिवेदी

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बस्ती आज सुबह सुबह चंदा के विलाप से दहल गई. उसका पति सांप के डसने के कारण मर गया था. यह मजदूरों की बस्ती थी जो छोटे मोटे काम कर जैसे तैसे पेट पालते थे. अभाव तथा दुःख से भरे जीवन में मर्दों के लिए दारू का नशा ही वह आसरा था जहाँ वह गम के साथ साथ खुद को भी भूल जाते थे. औरतें बच्चों का मुख देख कर दर्द के साथ साथ अपने मर्दों के जुल्म भी सह लेती थीं.  चंदा का ब्याह अभी कुछ महीनों पहले ही हुआ था. उसके पति को भी दारु पीने की आदत थी. वह रोज़ दारू पीकर उसे पीटता था. कल रात भी नशे की हालत में घर आया. उसने चंदा से खाना मांगा. चंदा ने थाली लाकर रख दी. एक कौर खाते ही वह चिल्लाने लगा "यह कैसा खाना है. इसमें नमक बहुत है." इतना कह कर वह उसे पीटने लगा. लेकिन कल हमेशा की तरह पिटने के बजाय चंदा ने प्रतिरोध किया. नशे में धुत् अपने पति को घर के बाहर कर वह दरवाज़ा बंद कर सो गई. कुछ देर दरवाज़ा पीटने के बाद उसका पति बाहर फर्श पर ही सो गया.  सुबह जब चंदा उसे मनाकर भीतर ले जाने आई तो उसने उसे मृत पाया. उसके मुंह से झाग निकल रहा था और शरीर पर सांप के डसने का निशान था. चंदा के घर के सामने बस्ती वाले जम…

पौराणिक बाल कहानी - सात दिनों का पहरा

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युग युग की कहानियाँसंकलन - शांता रगाचारीचित्रांकन - पी खेमराजअनुवाद - मोहिनी रावप्रकाशक - नेशनल बुक ट्रस्ट इंडियाप्राचीन काल में राजा लोग केवल शौक के लिए ही शिकार नहीं करते थे । बनैले पशुओं को खत्म करना भी उनका उद्देश्य था ताकि वे वानप्रस्थियों को परेशान न करें । जब कभी कोई राजा शिकार पर जाता तो दरबारियों, सैनिकों और सेवकों का बड़ा दल भी उसके साथ होता । महाभारत के वीर नायक अभिमन्यू के पुत्र राजा परीक्षित एक दिन एक हिरन का पीछा कर रहे थे । निशाना बांधकर तीर जो उन्होंने चलाया तो हिरन घायल हो गया, लेकिन मरा नहीं । शिकार का नियम है कि जानवर की जान ले लो, मगर उसे पंगु बना कर मत छोड़ दो । किसी जानवर को घायल और पीड़ा से छटपटाता छोड़ देना अधर्म माना जाता था और अब भी माना जाता है । जब हिरन घायल हो गया तो राजा उसको मारकर कष्ट से छुटकारा दिलाने के उद्देश्य से उसका पीछा करते-करते जंगल के बिल्कुल भीतर पहुंच गये । उनके साथी .कहीं पीछे छूट गये थे । राजा थक गये थे । उनको बड़े जोरों से भूख और प्यास लग रही थी । लेकिन उन्होंने संकल्प कर रखा था कि जब तक हिरन को पीड़ा से छुटकारा नहीं दिला देंगे, वापस नहीं लौटें…

दाना मांझी के नाम एक पत्र - शशिकांत सिंह 'शशि'

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दाना मांझी के नाम एक पत्र
भई दाना मांझी
       नमस्कार
       उम्मीद है कि अगले चुनावों तक तुम सुकशल रहोगे। रहना भी चाहिए आखिर चुनाव एक लोकपर्व है और गरीब आदमी पर्वों के बल पर ही जिंदा है। सबसे पहले तुम्हें सलाम कि तुमने कालाहांडी को एकबार फिर टी वी न्युज के लायक बना दिया। टी वी बेचारी गाय पर बहस करते-करते थक गई थी। भूख से हुई मौतों के कारण इसी कालाहांडी ने पूरी दुनिया में यश लूटा था। विदेशी लेखकों ने आकर गरीबी पर किताब लिखी थी। यही कालाहांडी है जिसके लिए कहा गया था कि वहां गरीबी नहीं है। लोग आम की गुठली खाकर आराम से जी सकते हैं। यह तुमपर भी लागू होता है। गंभीरता से विचार करने पर तुम्हारी गलतियां सामने आती हैं। अस्पताल ने तो वही किया जिसके लिए वह जानी जाती है। एक बच्ची अस्पताल के लाईन में खड़ी थी। उसने दम तोड़ दिया। अस्पताल ने उसका नाम अपने रजिस्टर में दर्ज कर लिया। उसने तुम्हारी पत्नी का नाम भी रजिस्टर में दर्ज कर लिया होगा। उन्हें नाम रजिस्टर में दर्ज करने के एवज करोड़ों रुपये मिल जाते हैं। यह न समझना कि मैं अस्पतालों की निंदा कर रहा हूं। अस्पताल का काम पोस्टामार्टम करना है। वह जिंदा आद…

प्रमोद यादव के कंप्यूटर चित्र - बरसात

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प्रमोद यादव गया नगर, दुर्ग, छत्तीसगढ़

खेल संघों में न हो नौकरशाही और राजनीति ० ठोस और पारदर्शी रणनीति की जरूरत / सूर्यकांत मिश्रा

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29 अगस्त खेल दिवस पर विशेष...
खेल संघों में न हो नौकरशाही और राजनीति
० ठोस और पारदर्शी रणनीति की जरूरत

ओलंपिक खेलों के 31वें आयोजन ने हमें इस चिंतन में डाल दिया है कि क्या वास्तव में इस लायक भी नहीं रहे कि एक स्वर्ण पदक पाकर भी गर्व का अनुभव कर सकें! इससे पूर्व सन 2012 में संपन्न ग्रेड ब्रिटेन ओलंपिक ने हमने पहली बार दो रजत और चार कांस्य पदक के साथ कुल 6 पदक पाकर आगामी ओलंपिक में अच्छा प्रदर्शन करने की कसमें खाई थी। इससे एक कदम और पूर्व 2008 में 29वें ओलंपिक आयोजन में बीजिंग में हमने निशानेबाजी में स्वर्ण जीतकर एक नई उम्मीद की जगाई थी। अभिनव बिंद्रा ने अपने निशानेबाजी का लोहा मनवाते हुए स्वर्ण पदक प्राप्त देशों की सूची में भारत वर्ष का नाम जुड़वा दिया। पिछले दो ओलंपिक की तुलना में रियो का 31वां ओलंपिक आयोजन हमारे के लिए शर्मनाक स्थिति का पर्याय रहा है। वह तो थोड़ी किस्मत अच्छी थी कि पीवी सिंधु और साक्षी मलिक ने क्रमश: बैडमिंटन और कुश्ती में रजत और कांस्य जीतकर देश की मिट्टी पलीद होने से बचा लिया। पिछले 3 आयेाजनों में हमने लगातार अपने खेलों और खिलाडिय़ों की कमर टूटते ही देखा है। अब पुन: उ…

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तकनीक व हास्य -व्यंग्य का संगम – पढ़ें : छींटे और बौछारें

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डाक का पता:

रचनाकार

रवि रतलामी

101, आदित्य एवेन्यू, भास्कर कॉलोनी, एयरपोर्ट रोड, भोपाल मप्र 462030 (भारत)

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