संदेश

December, 2016 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं
आलेख || कविता ||  कहानी ||  हास्य-व्यंग्य ||  लघुकथा || संस्मरण ||   बाल कथा || उपन्यास || 10,000+ उत्कृष्ट रचनाएँ. 1,000+ लेखक. प्रकाशनार्थ रचनाओं का  rachanakar@gmail.com पर स्वागत है

-------------------

नववर्ष काव्य गोष्ठी : नव-वर्ष-मंगल-गान

चित्र
नव वर्ष तुम्हारा मंगलमय, सुखप्रद, सार्थक हो शुभ आनाप्रो. सी.बी. श्रीवास्तव ‘विदग्ध‘प्रो. सी.बी. श्रीवास्तव ‘विदग्ध‘
ओ.बी. 11, एमपीईबी कालोनी
रामपुर, जबलपुर
मो. 9425484452
नव वर्ष तुम्हारा कालचक्र  तो निर्धारित करता आना
पर आकर के जग के ऑगन को तुम खुशियों से भर जाना।
पीडित हैं सब आतंकवाद से दुख से भारी सबके मन
बीते वर्षो सी विपदायें तुम आकर फिर मत दोहराना।देखे हैं जग ने कई दुर्दिन, सब देश दुखी हैं पीडा से
मुसका सकने के अवसर दे नई सुविधायें दे हर्षाना।
देना सुबुद्धि का वह प्रकाश  जो मिटा सके सब अॅंधियारा
नासमझों को देकर सुबुद्धि ममता का मतलब समझाना।है स्वार्थ जाल में जकडे सब, अकडे फिरते करने मन का
अपने मत के हैं हठी अधिक, पसरा पागलपन मनमाना।
कुछ की अनुचित नादानी से, बहुतों के घर वीरान हुये
दिगभ्रमित मूढमति लोगों को हिलमिल कर रहना सिखलाना।आये और गये तो साल कई, पर पा न सके सब जन उमंग
गति रही सदा इस जीवन की खाना पीना औं मर जाना।
देकर विचार शुभ उन्नति के, नव मौसम लाकर के अनुपम
भाईचारे का मंत्र सिखा, हर मन को पुलकित कर जाना।[ads-post]मिटती आई है लड़ भिड़कर यह दुनियॉ ओछी चालों से
सुख शांति की पावन प्रीति बढा …

ईश पूजन के प्रमुख उपादानों का महत्‍व / डॉ. नरेन्‍द्र कुमार मेहता ‘मानस शिरोमणि’

चित्र
ईश पूजन के प्रमुख उपादानों का महत्‍वडॉ. नरेन्‍द्र कुमार मेहतामानस शिरोमणि’पूजा का सीधा-सादा अर्थ होता है आराधना या साधना। पूजा की परम्‍परा वैदिक काल में यज्ञ से उत्‍पन्‍न मानी गई है। यज्ञ करने की परम्‍परा का ह्रास होने पर लोग मूर्ति निर्माण करने लगे। मूर्ति निर्माण कला ने पूजा करने की परम्‍परा का श्रीगणेश किया। ईश्‍वर की पूजा करने वाला पुजारी कहा जाता है। जहाँ पूजा की जाती है वह स्‍थल घर या मंदिर हो सकता है। निराकार ईश्‍वर की प्रार्थना के प्रचलन के कम होने से साकार ईश्‍वर की पूजा की जाने लगी। भारतीय संस्‍कृति में पूजन करने से मन शांति तथा सकारात्‍मकता का प्रादुर्भाव होता है। पूजा करने से मनोवांछित फल प्राप्‍त होता है तथा पूजा करने वाले व्‍यक्‍ति में आत्‍मविश्‍वास तथा क्रियाशीलता उत्‍पन्‍न होने लगती है। पूजा में अनेकानेक वस्‍तुओं या सामग्रियों का प्रयोग किया जाता है। पूजा के कई प्रतीक हैं, उनमें से कतिपय प्रतीय है- 1. शिवलिंग - शिवलिंग अर्थात्‌ शिव की ज्‍योति। शिवलिंग एक प्रकार की मूर्ति जो प्रायः पत्‍थर, स्‍फटिक अथवा पारद से निर्मित की जाती है। शिवलिंग के गोलाकार स्‍वरूप में जनेऊ क…

मृत्यु पत्र (A Death Note)

मृत्यु पत्र (A Death Note)  ( मरने से पहले इंसान सोच पाता अपनी जिन्दगी में वह क्या करना चाहता है, क्या बनना चाहता है, उनके लिए जो सीखना चाहते हैं ) दिल की आवाज, परमात्मा की आवाज है, जिसमें भावों का संचार परमात्मा से आत्मा की ओर प्रसारित होता है, दिमाग की आवाज आत्मा की आवाज है, जिसमें भावों का संचार आत्मा से परमात्मा की ओर होता है, जब हम दिल की बात मानना चाहते हैं,  तो दिमाग उस पर हावी हो जाता है, जब आप दिमाग की बात सुनना चाहोगे, तो दिल उसे रोक लेता है, इसीलिए इंसान को दिल और दिमाग में सामंजस्य कर विश्वनीय विकास की अग्रसर हो जीवन के शिखर तक पहुंचना चाहिए । सुख और संतोष  ( दिल और दिमाग की कुछ बातें)  मेरा दिमाग मुझे तथ्यात्मक सत्य करवाना चाहता है, जिससे समाज में नाम, पैसा और इज्जत मिले, इसे पाने के लिए कड़ी मेहनत चाहिए और इस पर अनेक आ चुके हैं, मुझे लगता है उन रास्तों पर चलकर मैं भी वह पा लूँगा, जो वो पा चुके हैं,कर्म करने के पश्चात् कुछ नहीं पाने का इसमें डर नहीं लगता, चूंकि इसमें एक बने बनाए रास्ता दिखाई दे रहा होता है, पर मेरा दिल उस राह पर चलने के लिए राजी नहीं होता है, कहता है वह र…

हैप्पी न्यू ईयर या नववर्ष, तय कीजिए - लोकेन्द्र सिंह

चित्र
दृश्य एक। सुबह के पांच बजे का समय है। चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रथम तिथि यानी वर्ष प्रतिपदा का मौका है। ग्वालियर शहर के लोग शुभ्रवेश में जल विहार की ओर बढ़े जा रहे हैं। जल विहार के द्वार पर धवल वस्त्र पहने युवक-युवती खड़े हैं। उनके हाथ में एक कटोरी है। कटोरी में चंदन का लेप है। वे आगंतुकों के माथे पर चंदन लगा रहे हैं। भारतीय संगीत की स्वर लहरियां गूंज रही हैं। सुर-ताल के बेजोड़ मेल से हजारों मन आल्हादित हो रहे हैं। बहुत से लोगों ने तांबे के लोटे उठाए और जल कुण्ड के किनारे पूर्व की ओर मुंह करके खड़े हो गए। सब अघ्र्य देकर नए वर्ष के नए सूर्य का स्वागत करने को तत्पर हैं। तभी सूर्यदेव ने अंगडाई ली। बादलों की चादर को होले से हटाया। अपने स्वागत से शायद सूर्यदेव बहुत खुश हैं। तभी उनके चेहरे पर विशेष लालिमा चमक रही है। सूर्यदेव के आते ही जोरदार संघोष हुआ। सबने आत्मीय भाव से, सकारात्मक ऊर्जा से भरे माहौल में एक-दूसरे को नववर्ष की शुभकामनाएं दीं।             दृश्य दो। दिसम्बर की आखिरी रात। पुलिस परेशान है कि 'हैप्पी न्यू ईयर वालों' को कैसे संभाला जाएगा? शराब पीकर बाइक-कार को हवाईजहा…

लघुकथा / बोनसाई / ललिता भाटिया

चित्र
बोनसाई
निशु के जाते मानो घर में भूचाल आ गया. माता जी यानि के मेरी सास , तिया की दादी ने घर में शोर मचा दिया ॰ असल में निशु टिया के लिए मेडिकल का फ़ार्म ले कर आई थी ॰ मेडिकल का फ़ार्म भरने का अर्थ है टिया की शादी ५ साल के लिए टल जाना, जो माता जी हरगिज़ नहीं चाहती थी. वो तो बस यही चाहती थी कि टिया किसी लोकल कालेज़ से बी ए कर ले. और इसी टाइम में उस की शादी निबटा दे. मुझे तो पति और सास का ग़ुस्सा सहने की आदत है, पर टिया तो कमरा बंद कर के मानो कोप भवन में बैठ गई । रात का खाना भी नहीं खाया । इतिहास स्वयं को दोहरा रहा था । + २ के बाद मैं फैशन डिजाइनिंग करना चाहती थी । हम ने अपनी बेटी को दरजी नहीं बनाना कह कर मेरे अरमानों पर पानी फेर दिया गया था । और बी ए पूरी होने से पहले ही मेरी डोली भेज दी । अगले दिन रविवार होने के कारण सभी घर पर थे । मेरे पति बहार माली से काम करवा रहे थे । मैं चाय लेकर बाहर ही आ गई । ये माली से एक पेड़ बनते पौधे की शाखायें कटवा कर बोनसाई बनवाना चाहते थे । नहीं इसे प्राकृतिक रूप में बढ़ने दो हमें बोनसाई नहीं चाहिए । मेरे तेवर देख ये हैरान रह गए । माली के हाथ की कैंची रुक गई। …

याद कीजिए ! आप अद्वितीय हैं / शालिनी तिवारी

चित्र
अद्वितीय यानी जिसके जैसा दूसरा न हो. इसे ही अंग्रेजी में यूनिक ( Unique ) भी कहा जाता है. खैर यह बिल्कुल सच भी है  कि दुनियाँ का प्रत्येक प्राणी अद्वितीय है. यकीन मानिए आप जैसा न कोई इस दुनियाँ में हुआ है और आने वाले वक्त में न होगा ही. जरा गौर कीजिए, क्या इस दुनियाँ के सम्पूर्ण जड़ चेतन में कभी भी दो चीजें पूर्णतः एक जैसी दिखाई दी हैं ...?? शायद नहीं. परमात्मा ने प्रत्येक को एक अद्वितीय सामर्थ देकर अलग अलग कार्य के लिए भेजा है. कुल मिलाकर जीवन के मर्मों को समझने के लिए हमें अपनी अन्तःचेतना को केन्द्रित करना ही होगा. शायद यही वजह है कि सदियों से आज तक योग साधना में ध्यान को विशेष महत्वता दी गई है. अर्थात जब हम स्वयं से रूबरू हो जाएगें तो हमें जीवन में भौतिक लझ्य तलाशने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी. हम स्वतः जीवन के मूल उद्देश्य को समझकर सन्मार्ग की ओर अग्रसर हो जाएगें.गौरतलब है कि आज अत्याधुनिकता के दौर में हम सारी दुनियाँ को जानने समझने की बात करते हैं और उसके लिए हर सम्भव प्रयास भी करते हैं. इतना ही नहीं, सच यह भी है कि समूची दुनियाँ गूगल-मय हो गयी है. मानो गूगल नाम के परिन्दें ने समूचे …

नव वर्ष की चुनौतियाँ एवम रचनाकारों का दायित्व / सुशील कुमार शर्मा

चित्र
आज जब इस विषय पर लिखने बैठा तो पूरा साल स्मृतियों में किसी बच्चे की चीख चिल्लाहट उसकी मृदुल हँसी की भाँति झिलमिला गया कुछ खट्टी यादें कुछ मीठी यादें हालाँकि मैंने इन यादों को अपने मन में संजों कर रख लिया है जैसे काला बाजारियों ने नोटों को तिजोरी में रखा हुआ था लेकिन आपसे वादा है आप जब भी इनका हिसाब मांगेंगे मैं पूरा हिसाब दूँगा ,आज में सिर्फ साहित्य एवम मानवीय रिश्तों के सन्दर्भ में बात करूँगा। यदि वर्तमान में हमने कुछ खोया है तो वह है - रिश्तों की बुनियाद। दरकते रिश्ते, कम होती स्निग्धता, प्रेम और आत्मीयता, इतिहास की वस्तु बनते जा रहे हैं।आज नव वर्ष के उपलक्ष्य में कुछ संकल्पों की मानव और मानवीयता को अभीष्ट आवश्यकता है। जब ह्रदय अहं की भावना का परित्याग करके विशुद्ध अनुभूति मात्र रह जाता है, तब वह मुक्त हृदय हो जाता है। हृदय की इस मुक्ति की साधना के लिए मनुष्य की वाणी जो शब्द विधान करती आई है यही बात उसे संकल्पित करती है। यही संकल्प मनुष्य को स्वार्थ सम्बन्धों के संकुचित घेरे से ऊपर उठाते है और शेष सृष्टि से रागात्मक संबंध जोड़ने में सहायक होते है। हर साल के शुरुवात होने से पहले हम स…

मुबारक साल नया / राम कृष्ण खुराना

चित्र
मुबारक साल नया ! भगवान करे इस नये साल में आपका सारा ‘कालाधन’ “गुलाबी” हो जाय ! खुदा करे आपके गुप्त ठिकानो को ई डी वाले खोज न पायें ! आपके बाथरूम में छिपी तिजोरी को कोई भी थपकी देकर खोल न सके ! ईश्वर करे नये साल में आप पर इनकम टैक्स की रेड ना पडे ! अल्लाह करे आपके बैंक का ऐ टी एम कैशलेस न हो और वोह अपना पूरा जबडा खोल कर आपकी जेब भर दे ! इस सर्दी के मौसम में आपकी सारी जेबें गर्म रहें जिससे आपको वार्मर पहनते की जहमत न उठानी पडे ! तैंतीस करोड देवी देवताओं से प्रार्थना है कि जिन गृहणियों ने पत्नी धर्म को निबाहते हुए अपने पतियों की जेब का भार हल्का करके चुराये हुए गुलाबी नोटों को जिस जिस सुरक्षित स्थान पर छुपाया है उस पर किसी मुए की बुरी नज़र न पडे ! देवी माता कृपा करें ऐ टी एम लक्श्मी का रूप बन कर आए और आपको लम्बी-लम्बी लाईनो में खडे रहकर अपनी सास-ननद या पडोसन की चुगली ना करनी पडे ! गुरु जी की कृपा से आपको दो हज़ार के नोट की चेंज़ जल्दी मिल जाय ! [ads-post] सभी पीर पैगम्बरों को साष्टांग प्रणाम करते हुए अरदास है कि जिस पाजामे के नाडे में आपने अपने काले धन को छिपाया है उस पाजामे को उतरवाने की …

डोंगरगढ़ की वादियों में...चित्र - प्रमोद यादव

चित्र
प्रमोद यादव

विज्ञान कथा / अन्तरिक्षचारिणी / डॉ. राजीव रंजन उपाध्याय

चित्र
अक्तूबर १०, प्रीन आम किमजी, शाम ५ बजे :हर दिन की तरह आज भी किमजी की पहाडियों पर उष्मा का नतर्न हो रहा था। चारों ओर प्रकृति का सौंदर्य टूरिस्टों पर अपना सम्मोहक प्रभाव दिखा रहा था। सिटी सेन्टर पर भीड थी। गोयथे-इंस्टीट्यूट में जरमन भाषा सीखने वालों की भीड़ जो अपलक नेत्रों से किमल्ली झील की सुन्दरता उसमें पैडिल बोटों पर घूमते हुए लोगों को निरख रही थी। उस झील के मध्य में निर्मित सुन्दर किले पर प्रकाश की छटा उसे परीलोक का दुर्ग होने का भ्रम उत्पन्न कर रही थी। ऐसे वातावरण में रहते हुए वृद्ध क्लूगे का मन अवसाद से भारी था। उन्हें प्रकृति का सौंदर्य बोझिल लग रहा था और उन्हें लोगों की. उन्मुक्तता भयभीत कर रही थी। वे अपने अस्सी वर्ष के पूर्ण हो जाने के प्रभाव से घबरा रहे थे। इसी कारण वे अपने छोटे से मकान के गेट पर खड्डे रहते हुए भी कहां दूर खोये हुए थे। जीवन के बीते हुए दिनों को वे याद कर रहे थे। उस समय वह सारा वातावरण, किमजी झील में तेजी से घूमती हुयी रंग बिरंगी .प्रालों वाली नौकाएं, पहाडों पर गिरती बर्फ, साथ में पास के पब से उडती मशहूर बायरिशे बियर की सुगंधि और सुन्दर बाबेरियन स्वियाँ, उसे ज…

विज्ञान कथा / शिव के सानिध्य में / डॉ. राजीव रंजन उपाध्याय

चित्र
यान-त्रिशंकुअजितेय और केन विस्मित नेत्रों के सबसे ऊँची डेक पर खड़े गरुढ को अन्तरिक्ष में बढ़ते हुए देख रहे थे। यह अन्तरिक्ष स्थित पूर्ण रूपेण सज्जित वेधशाला उस विशाल अन्तरिक्ष यान के उद्यान में स्थित थी और उसमें चारों ओर क्यारियों में खिले सुन्दर गुलाब के पुष्प नेत्रों को एव् तोषदायक शान्ति प्रदान कर रहे थे। प्रोब क्रमश: गति बढाते हुए अदृष्य सा होता जा रहा था। अजितेय ने केन को ध्यान से देखा। वह प्रोब को अब भी देखने का असफल प्रयास किये जा रही थी। त्रिशंकु पृथ्वी से एक हजार प्रकाश वर्षों को दूरी पर अंतरिक्ष में स्थित था। उसके चारों ओर अंतरिक्ष गैसों और उनसे निर्मित बादलों का लीला नर्तन नैनाभिराम था, मोहक था और त्रासद भी। त्रासद इस कारण, क्योंकि अजितेय के मानस में अपने अस्तित्व का प्रश्न भी यदाकदा इन्हीं अन्तरिक्षचारी अभ्रों की गति की भांति, बरबस कौंध जाता था, तथा समय के, काल के परिपेक्ष्य में एक प्रश्न चिन्ह खड़ा कर देता था। अति सघन श्याम-विवर जो वृश्चिक राशि में स्थित था, वह अतीव तीव्रता से तप्त गैसों को उदस्थ कर रहा था। उससे पश्चिम में एक त्रिकोणीय चक्री प्लाज्मा, तप्त गैसों का पुंज…

----------

10,000+ रचनाएँ. संपूर्ण सूची देखें.

अधिक दिखाएं

ऑनलाइन हिन्दी वर्ग पहेली खेलें

---

तकनीक व हास्य -व्यंग्य का संगम – पढ़ें : छींटे और बौछारें

Google+ Followers

फ़ेसबुक में पसंद/अनुसरण करें

परिचय

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही रचनाकार से जुड़ें.

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है. अपनी रचनाएं इस पते पर ईमेल करें :

rachanakar@gmail.com

अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

डाक का पता:

रचनाकार

रवि रतलामी

101, आदित्य एवेन्यू, भास्कर कॉलोनी, एयरपोर्ट रोड, भोपाल मप्र 462030 (भारत)

कॉपीराइट@लेखकाधीन. सर्वाधिकार सुरक्षित. बिना अनुमति किसी भी सामग्री का अन्यत्र किसी भी रूप में उपयोग व पुनर्प्रकाशन वर्जित है.

उद्धरण स्वरूप संक्षेप या शुरूआती पैरा देकर मूल रचनाकार में प्रकाशित रचना का साभार लिंक दिया जा सकता है.


इस साइट का उपयोग कर आप इस साइट की गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं.