गुरुवार, 21 सितंबर 2017

सूरज प्रकाश का बहुचर्चित उपन्यास - देस बिराना एमपी3 ऑडियो बुक के रूप में सुनें

उपन्यास जीवंत प्रसारण रचनाकार के पाठकों के लिए प्रस्तुत है सूरज प्रकाश का बहुचर्चित उपन्यास देस बिराना – ऑडियो बुक के रूप में. संपूर्ण उपन...

आधुनिक कविता के गुण दोष // सुशील शर्मा

आधुनिक कविता परंपरागत कविता से आगे नये भावबोधों की अभिव्यक्ति के साथ ही नये मूल्यों और नये शिल्प-विधान का अन्वेषण करने वाली कविता है ।प्रत्य...

'छबीला रंगबाज का शहर' का लोकार्पण

दिल्ली। हमारे चरित्रहीन समय में बड़े चरित्रों का बनना बंद हो गया है इसलिए परिवेश ने अब चरित्रों का स्थान ले लिया है। 'छबीला रंगबाज का शह...

बुधवार, 20 सितंबर 2017

सुपरिचित फिल्मकार गौहर रज़ा की सद्य प्रकाशित नज़्म पुस्तक 'खामोशी' का लोकार्पण

नई दिल्ली ९ सितम्बर २०१७ कवि और सुपरिचित फिल्मकार गौहर रज़ा की सद्य प्रकाशित नज़्म पुस्तक 'खामोशी' का लोकार्पण शनिवार को इंडिया इंटरने...

एकांकी // एक मनहूस दिन // डॉ. हरिश्चंद्र शाक्य

डॉ. हरिश्चंद्र शाक्य का एकांकी संग्रह - घूमती दुनिया तथा अन्य एकांकी एक उम्दा एकांकी संग्रह है, और सभी एकांकी मंचनीय हैं. भाषा सरल और एकांकी...

मंगलवार, 19 सितंबर 2017

हास्य कविताएँ : 3 – कैलेन्डर की आखिरी तारीख : महेश संतुष्ट

आदमी भीड के आवागमन में भीड का अंश हो गया-आदमी लगता है लम्बी भीड़ में भेड हो गया है'-आदमी । भयंकर रेल दुर्धटना के बाद बिखरी हुई लाश...

सोमवार, 18 सितंबर 2017

रैवन की लोककथाएँ - 2 - : 20 जब रैवन मारा गया // सुषमा गुप्ता

रैवन ने बहुत दिनों तक बहुत बार बहुत सारे आदमियों के साथ बहुत चालाकियाँ खेलीं। उसकी चालाकियों से तंग आ कर एक दिन एक गाँव के एक सरदार ने उसको...

रैवन की लोककथाएँ - 2 - : 19 एक बूढ़े पति पत्नी और जूता बनाने वाले // सुषमा गुप्ता

एक बुढ़िया अपने पति के साथ यूपिक के टैकैक गाँव में रहती थी। वे लोग अपनी रोटी कमाने के लिये खालों के जूते बनाने का काम किया करते थे। वे लोग जू...

रैवन की लोककथाएँ - 2 - : 18 जिराल्डा का रैवन // सुषमा गुप्ता

एक बार की बात है कि स्पेन देश के सेविल शहर के कैथैड्रल की मूरिश के समय में बनी घंटे वाली मीनार जिराल्डा पर एक बहुत ही अक्लमन्द रैवन रहता था...

रैवन की लोककथाएँ - 2 - : 17 जब रैवन की आँखें खो गयीं // सुषमा गुप्ता

एक बार रैवन एक नदी के किनारे बैठा था। उसने नदी के ऊपर की तरफ देखा, नीचे की तरफ देखा पर उसे कोई कहीं दिखायी नहीं दिया। उसकी आँखें थक गयी थीं...

रैवन की लोककथाएँ - 2 - : 16 शिकारी रैवन // सुषमा गुप्ता

एक बार जब रैवन छोटा था तो वह आर्कटिक समुद्र के किनारे किनारे उड़ रहा था कि उसको उस समुद्र के किनारे पर एक बड़ी उम्र वाली बतख बैठी दिखायी दी। ...

रैवन की लोककथाएँ - 2 - : 15 रैवन और उसकी दादी // सुषमा गुप्ता

एक बड़े गाँव के एक किनारे पर एक दादी माँ अपने पोते रैवन के साथ अपने पुराने घर में रहती थी। वे लोग गाँव के अन्दर न रहने की बजाय गाँव से थोड़ी ...

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