रचनाकार

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका

लज़ीज़ उकरपिंडी वडनेरकरी / अजित वडनेरकर

लज़ीज़ उकरपिंडी वडनेरकरी

clip_image001

एक लज़ीज़ मराठी आहार है- उकरपिंडी। इसे अनेक लोग उकड़पेंडी भी कहते हैं। इन दो नामों का क्या चक्कर है इस पर पोस्ट के अन्त में चर्चा की जाएगी। उकरपिंडी अपन को बचपन से ही पसंद है। जहाँ तक याद आता है, उन शुरुआती चीज़ों में है जिन्हें छुटपन में पकाना सीखा था। इसे हमने अपने भैया यानी पिताजी से सीखा।

इसे बनाने की विधि जानने से पहले बता दूँ कि चित्र में नज़र आ रही उकरपिंडी हमने पारम्परिक ढंग से न बनाते हुए अपने अंदाज़ से बनाई है। उकरपिंडी नाम से चक्कर में न पड़ें, बस इतना समझ लें कि जैसे रवा से उपमा बनता है वैसे ही उकरपिंडी आटे से बना उपमा है। हमने इसे बेजड़ के आटे से बनाया है।

आमतौर पर मराठी लोग इसे गेहूँ के आटे से बनाते हैं। स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें चौथाई मात्रा से लेकर आधी मात्रा तक चने का आटा यानी बेेसन भी मिलाया जाता है। अपनी रेसिपी में हमने आधी मात्रा बेजड़ आटा (गेहूँ, ज्वार, बाजरा, मक्का) और आधी मात्रा बेसन रखी।

दो लोगों के लिए। बेजड़ आटा एक कटोरी। बेसन एक कटोरी।
समय तीस मिनट

विधि- आटे को आधी कड़छी तेल में अच्छी तरह भूना जाए। खुश्बू और रंगत से पता चल जाएगा। अलग से निकाल कर रख दें। एक बर्तन में पानी गर्म कर रख लिया जाए। एक कटोरी दही भी।

सामग्री-एक बड़ी कटोरी प्याज के लच्छे। चार कली लहसुन बारीक कटा। एक टुकड़ा अदरक बारीक कटा। कड़ुवा नीम पत्ता। किसा हुआ सूखा नारीयल। खूब सारा हरा धनिया। आधा चम्मच सफेद तिल।
तड़के के लिए- खड़ा धनिया, सौँफ और राई।

कड़ाही में एक कड़छी तेल डाले। गरम होने पर राई धना तड़काएँ। प्याज के लच्छे, लहसुन-अदरक, कढ़ी पत्ता वगैरह सब चीज़ें डाल दें। अच्छी सुगन्ध आने पर भूना हुआ आटा इसमें मिलाएँ। नमक अंदाज़ से डालें। फिर दही डालकर तेज़ी से हिलाएँ। अब चुटकी भर पिसी सरसों और आधा चम्मच सौँफ पाउडर इसमें मिलाएँ। अचारी लज़्ज़त मिलेगी।

जब सारा मसाला मिल जाए तब धीरे धीरे गरम पानी डालते हुए लगातार हिलाया जाए। उपमा जितना गाढ़ा हो जाने पर जब भाप निकलने लगे तो ढक कर रख दें। पाँच मिनट बाद देखें कि जब निचली सतह सूखने लगे तो अच्छी तरह खुरच कर उपर नीचे कर दें।

यह क्रम करीब दस मिनट तक अनेक बार दोहराएँ। अच्छी तर भूने जाने के बाद उकरपिंडी की रंगत लाल-भूरी होगी। थोड़ा ठण्डा होने पर प्लेट में निकालें। खूब सारा धनिया, खोपरा छिड़कें। तिल भी डालें। शानदार उकरपिंडी का आनंद ले।

नोट- मराठी में उकड़णे का अर्थ होता है उबलना। हिन्दी की बोलियों में जैसे मालवी में भी उबलने को उकलना कहते हैं। पिंडी या पेंडी का अर्थ गोला, ढेर या लोंदा ही है। इस तरह उकड़पिंडी का अर्थ हुआ उबला हुआ लोंदा या पिण्ड। मेरे विचार से यह अर्थ नहीं है क्योंकि इसे बनाने में गर्म पानी की भूमिका ही जब ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं है तो उबलते पानी का सवाल ही नहीं उठता।

दूसरा रूप है उकरपिंडी या उकरपेंडी। मराठी में 'उकरणे' क्रिया का अर्थ है खरोंचना, खोदना, उपर-नीचे करना आदि। भूने आटे में पानी डालते ही लोंदा बन जाता है जिसे तेज़ी से ऊपर-नीचे चलाना पड़ता है। निचली सतह पर जमी पपड़ी को हर बार खुरचते हुए ऊपर लाना होता है।

इस डिश की खासियत ये भुनी हुई पपड़ियाँ ही होती हैं जो बाद में गर्मागर्म उकरपिंडी में एकसार हो जाती हैं। ज़ाहिर है, दूसरा रूप ही इसके नामकरण में ज्यादा तार्किक लग रहा है।
#रामरसोई #चटोरीगली #ज़ायकेकासफ़र #जायके_का_सफर

clip_image002

(अजित वडनेरकर के फ़ेसबुक पोस्ट से साभार)

रचना कैसी लगी:

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

[blogger][facebook]

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget