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शब्दसंधान / अंक / डॉ. सुरेन्द्र वर्मा

सामान्यत: ‘अंक’ से हमारा अर्थ संख्या से होता है | १,२,३,४—ये संख्याएं हैं, या यों कहें, संख्या के चिह्न हैं | संख्या के यही चिह्न अंक’ कहलाते हैं | इनकी गिनती हो सकती है | ये एक क्रम में गिने जाते हैं | भारत में कितनी जन-संख्या है ? हम गणना करके संख्या का सही ‘अंक’ बता सकते हैं |

अंक नीचे से ऊपर की ओर जाते हैं | १ के बाद २, और २ के बाद ३ आता है | अंकों के इसी ‘अनुक्रम’ के कारण हम मात्रिक भेद कर पाते हैं |अधिक या कम का तुलनात्मक अंतर कर पाते हैं | २,एक से ज्यादह होता है और ३ से कम होता है | अंक इस प्रकार मात्रिक भेद करने के साधन हैं | पत्र-पत्रिकाओं के क्रमानुसार अंक निकलते हैं | नाटक के क्रमानुसार सर्ग, अंक कहलाते हैं |

फारसी का ‘अदद’ अंक के काफी नज़दीक है ; लेनिन अंग्रेज़ी में इसे ‘नंबर’ कहा गया है | भाषा की दृष्टि से नंबर और अंक, ये दोनों शब्द बिलकुल अलग अलग हैं | लेकिन कुछ अंक या नंबर ऐसे भी हैं जो भाषा की दृष्टि से बहुत नज़दीक हैं | संस्कृत में २ को ‘द्वै’ कहते हैं | हिन्दी में निःसंदेह “द्वै’ का ही “दो” हुआ है | अब अंग्रेज़ी में टू के हिज्जे कीजिए, t-w-o, - अब इसे ‘टू’ न कहकर हिज्जों के अनुसार उच्चारित कीजिए | क्या इसे ‘द्वऔ’ नहीं कहा जा सकता? यह ‘द्वै’ के उच्चारण के कितना निकट है! इसी तरह जो हिन्दी में तीन है, वह संस्कृत में “त्रि” से आया है ; और यह “त्रि” अंग्रेज़ी के ‘थ्री’ से कितना मिलता-जुलता है ! यही हाल ७, ८, ९और १० का है | ये चारों अंक हिन्दी, संस्कृत, और अंगेजी में बहुत कुछ समानता लिए हुए है | हिन्दी का ‘सात’ संस्कृत में ‘सप्त’ है और अंग्रेज़ी में ‘सैप्ट’ | ‘सैप्ट’ लैटिन शब्द ‘सेप्टेम’ से बना है | यही संस्कृत में ‘सप्तम’ है –अंग्रेज़ी में ‘सेवन’ और हिन्दी में ‘सात’ है | इसी प्रकार, संस्कृत में ‘अष्ट’ है और हिन्दी में ‘आठ’ ; अंग्रेज़ी में इसे ‘एट’ –eight कहा गया है | जिसे हिन्दी में ‘नौ’ कहते हैं, वही संस्कृत में ‘नव’ है और अंग्रेज़ी में ‘नाइन’ – n-i-n-e. हिन्दी में दस, ज़ाहिर है, संस्कृत के ‘दश’ से आया है | लैटिन में दस को ‘डेसम’ कहते हैं और जर्मन भाषा में ; ‘दजेन | यही अंग्रेज़ी में ‘टेन’ हो गया | लगता है सभी के मूल में संस्कृत ही अवस्थित है |

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अंक केवल अदद ही नहीं है, यह शब्द ‘चिह्न’ या ‘छाप’ के लिए भी इस्तेमाल होता है | ‘अंक-करण’ चिह्न लगाने की क्रिया है; ‘अंक-धारण’ शंख,चक्रादि, चिह्नों को धारण करना है | ‘अंकित करना’ निशान लगाना है | जो चित्रित है, लिखित है, जो गिना हुआ है, ‘अंकित’ है | दाग लगाने को भी अंकित करना कहते हैं | दागा हुआ सांड जानबूझ कर अंकित किया जाता है | टैटू बनाने वालों को ‘अंक-कार’ कहा जा सकता है | वे शरीर पर टैटू ‘अंकित’ ही तो करते हैं | चित्रों का अंकन ‘चित्रांकन’ है | रेखाओं का अंकन रेखांकन है | शब्दों का अंकन शब्दांकन है | नज़र न लगे इसलिए डिठौना लगाना भी दाग अंकित करना ही है |

हम अंकित ही नहीं करते “आंकते” भी है | परीक्षक परीक्षार्थियों के उत्तर “आंक-कर” उन्हें तदनुसार ‘अंक’ देता है | आंके जाने की क्रिया को ‘अंकाई’ कहते हैं | हम जिससे लिखते हैं, जिससे अंकित करते हैं, उस कलम को ‘अंकनी’ भी कहा गया है |

ऐसा भला कौन बच्चा होगा जो कभी न कभी गोद में न बैठा हो? अंक गोद भी हैं | ‘अंक पालिका’ या ‘अंक-पाली’ वह दाई है जो अपनी क्रोड में लेकर बच्चे को पालती है | बगल में सोने वाली (पत्नी) ‘अंकशाइनी’ है | जो बगल में सोता है,’अंकशाई’ है | अंक इस प्रकार गोद-स्थल ही नहीं बगल की निकटता भी है | ‘अंक-लगना’ आलिंगन करना/ लेना है | इसे ‘अंग-लगना’ भी कहते हैं | अंक और अंग इन दोनों का अक्सर समान अर्थों में प्रयोग किया जाता है | वैसे सामान्य रूप से अंग देह और उसके अवयवों से है | अंग इस प्रकार किसी का भी एक भाग या अंश है | अंश, अंक और अंग –ये तीनों ही अर्थ और उच्चारण, दोनों ही दृष्टियों से काफी समानता लिए हुए हैं | ‘अंक-पालिका’ कहें या ‘अंग–पालिका’,‘अंग-रक्षक’ कहें या ‘अंक-रक्षक’ बात एक ही है | ‘अंग-अंगी’ कहें या ‘अंश-अंशी’ कोई अंतर नहीं है |

डा. सुरेन्द्र वर्मा (मो. ९६२१२२२७७८)

१०, एच आई जी / १, सर्कुलर रोड इलाहाबाद -२११००१

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