शनिवार, 14 जनवरी 2017

प्राची- दिसंबर 2016 - वक्तव्य विश्व शांति दिवस पर वक्तव्य / डॉ. गीता सिंह

वक्तव्य

विश्व शांति दिवस पर

डॉ. गीता सिंह

ज विश्व शांति दिवस है. इस दिन विश्वग्राम ने ‘‘शांति, शिक्षा और आतंक मुक्त विश्व’’ जैसे विषय को चुना है. आज हमारा मंच ऐसे प्रबुद्ध और विद्वान लोगों का है जिसमें परम आदरणीय महामहिम गवर्नर श्री कप्तान सिंह सोलंकी हरियाणा जो आज यहां मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद हैं, उनकी उपस्तिथि जो अपने आप में एक सौभाग्य का विषय है, मैं उनका स्वागत करती हूं विश्वग्राम की तरफ से और यहां मौजूद सभी लोगों का स्वागत करती हूं. विश्व ग्राम के संरक्षक और विश्व को शांति का मार्ग दिखाने वाले, समाज के राष्ट्र के विश्व के एक ऐसे चिन्तक माननीय इन्द्रेश कुमार जी हमारे बीच में मौजूद हैं, जिनका यहां होना ही अपने आप में इस विषय को एक आयाम प्रदान कर देता है. हमारे बीच में सौभाग्य का विषय है कि लक्ष्य दीप के एडमिनिस्ट्रेटर फारुख खान साहब जो आई.जी. कश्मीर भी रहे जिन्होंने इस विषय से सम्बंधित किन-किन आयामों को देखा होगा, वो इस विषय पर कितने सार्थक तरीके से प्रकाश डाल सकते हैं उनका भी में स्वागत करती हूं. ‘‘सर्वे भवंतु सुखिना सर्वे संतु निरामया सर्वे भद्राणि पश्यंतु मा कश्चित् दुखभाग भवेत्’’ इस परिपाटी को निर्वाह करता है हिन्दुस्तान सदियों से. इन्हीं पंक्तियों को सार्थक रूप प्रदान करने का प्रयास रहा है इस देश का इस भारत का अथार्त संसार में व्यक्ति, परिवार, समाज और राष्ट्र अंतरराष्ट्र संपूर्ण विश्व इसकी परिधि में आ जाता है. यह एक वैयक्तिक मूल्य भी है, सामाजिक मूल्य भी है राष्ट्रीय मूल्य भी है और अंतर्राष्ट्रीय मूल्य भी है.

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धार्मिक मूल्य और प्रगतिशील मूल्य भी है. इसको यदि हम एक शब्द में कहना चाहें तो ये कहा जाएगा कि ये मानवीय मूल्य हैं जिसको हम सबके हृदय में धड़कना चाहिए. आज का विषय है कि हम सब आतंकवाद से जूझ रहे हैं. हम सब आहत हैं. आज अंतर्राष्ट्रीय विश्व शांति दिवस के दिन यह विषय चुना गया. क्या है आतंकवाद ये हम सब जानते हैं. उरी में घटित घटना सम्पूर्ण राष्ट्र और विश्व को हिलाने के लिए काफी है आतंकवाद अनेक रूपों में होता है जैसे धार्मिक आतंकवाद, राज्य का आतंकवाद, किसी व्यक्ति का आतंकवाद कहना चाहिए, किन्हीं समूहों का आतंकवाद. तीर्थ स्थानों पर जो आतंकवादी घटनाये घटती हैं उनका प्रभाव समूचे विश्व पर पड़ता है. यह सोच लेना कि वह उस देश को और उन व्यक्तियों को प्रभावित कर रहा है, यह सोच लेना बहुत ही छोटी सोच होगी कि सम्पूर्ण विश्व को एक घटना प्रभावित करती है. पिछले वर्ष पेशावर की वह घटना आपको याद होगी जिसमें 132 स्कूली बच्चे एवं 9 शिक्षक को जघन्य नरसंहार के बाद कितने वीभत्स रूप में आतंकवाद हम सबके सामने उपस्थित हुआ था और हम सब आहत हुए थे. भले ही वो पकिस्तान में घटित घटना हो. पेरिस में ‘‘चार्ली हेबदो’’ पत्रिका के 12 पत्रकारों की हत्या विश्व को हिला देने वाली घटना थी. 2002 में मास्को में चेचेई मित्रोयों ने एक थियेटर पर लाइव शो के दौरान हमला किया था जिससे निपटने की कार्यवाही में 130 बंधकों और 40 हमलावरों की मौत हो गई थी. 11 सितम्बर 2001 को अमेरिका में हुई ट्विन टावर की घटना हम सभी जानते हैं. क्या उसका रूप था? उसके बाद अमेरिका को झंझोर दिया था. चकित घटना के बाद 13 दिसंबर 2001 को भारत की संसद पर हुआ हमला जो आज तक हम सबके दिलो में एक आग की तरह जलता रहेगा या यूं कहिये 26 नबम्बर 2008 को ताज होटल मुंबई में हुआ हमला, 7 सितम्बर 2011 को दिल्ली में भीषण विस्फोट...ये सब उदाहरण इस बात का संकेत देते है कि आतंकवाद उस घटना को परिभाषित कर रहा है वो कहीं भी कभी भी किसी भी रूप में हम सब को प्रभावित कर सकता है. खासकर 11 सितम्बर 2001 की घटना ने विकसित देशों के इस भ्रम को तोड़ दिया था कि वो आतंकवाद से सुरक्षित हैं. यह वास्तव में सम्पूर्ण विश्व के लिए चुनौती है. हर धर्म शांति एवं सदभाव को महत्व देता है लेकिन हर धर्म में हिंसा के औचित्य को ठहराने के लिए कुछ तत्व भी मौजूद रहते हैं जो उसे सही साबित करने का प्रयास भी करते हैं. बहुत कुछ इस बात पर भी निर्भर करता है कि किसी

धार्मिक सिद्धांत की व्याख्या कौन किस उदेश्य से कर रहा है. आज विश्व के सभी देश आतंकवाद को समाप्त करने के लिए प्रयासरत हैं और इसके लिए एक दूसरे को सहयोग भी करना चाहते हैं लेकिन इस सहयोग का उपयोग कितने सही तरीके से हो रहा है यह देखना आवश्क है. यही उम्मीद करते हैं कि आतंकवाद का असली कारण कुछ और नहीं. हम सबको जागने की आवश्कता है. आज सुबह अखबार में पढ़ी एक खबर. ये जो उरी में आतंकवादी घटना हुई उसमें जिस परिवार में आतंकवादी पनाह लेने के लिए घुसे थे और वहां से गोलीबारी कर रहे थे उस पारिवार के दम्पति ने लगातार सेना को फोन करके सूचित किया कि आतंकवादी घुस आये हैं कितने हौसले के साथ उन्होंने इस घटना को और बुरे तरीके से घटित होने से रोका, वह वाकई सलाम के काबिल है. अगर वही जज्बात हर व्यक्ति के अंदर पैदा हो जायें तो कश्मीर के अंदर या विश्व में कहीं भी इस तरह की घटनाये नहीं होंगी.किसी राष्ट्र का बल उसकी सेना या शास्त्रों में नहीं होता, बल्कि उसकी जनता यदि जन संतुष्ट है, संयुक्त है, ढृढ़ संकल्प है अथवा राष्ट्र निर्माण में बलिदान तथा कष्ट सहने को तत्पर है तो विश्व की कोई भी शक्ति ऐसे राष्ट्र को नष्ट नहीं कर सकती.

सम्पर्कः डायरेक्टर (सी.पी.डी.एच.ई),

संयोजकः विश्वग्राम

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