शुक्रवार, 27 जनवरी 2017

मानवरत्न, ना बाबा ना ! / कहानी / रजनीश कांत

रेखा श्रीवास्तव की कलाकृति

"नहीं, नहीं, उसका नाम मानवरत्न मत करो, उसका नाम जंगलरत्न ही रहने दो, मुझे जगलरत्न कहने पर अब कोई आपत्ति नहीं है।" जीवन वन में भरी सभा में रामू भेड़िये ने अली शेर से ये अपील की। दरअसल, जीवन वन में अच्छे कामों के लिए दिये जाने वाले सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार का नाम बदले जाने पर विचार-विमर्श चल रहा था। सबसे अच्छे काम करने वाले जानवर को हर साल जंगलरत्न से नवाजा जाता है। जीवन वन में सदियों से यह परंपरा चली आ रही है। यह पुरस्कार जंगल का राजा देता है। इस समय जंगल का राजा अली शेर है।

अली शेर, ' यार, रामू तुम ही तो लंबे समय से जंगलरत्न का नाम बदलकर मानवरत्न करने की मांग कर रहे हो, लेकिन अब जब नाम बदलकर मानवरत्न की जा रही है, तो तुम उसका विरोध भी कर रहे हो। बात क्या है। सच-सच बताओ।'

रामू, अली शेर से ' बॉस, अभी मैं शहर से होकर आ रहा हूं। मैं पहली बार शहर गया था। इससे पहले मैं इंसान और उनकी बस्तियों से अंजान था। वे क्या काम करते हैं, कैसे रहते हैं, उनकी दिनचर्या क्या होती है, उनका खान-पान, रहना-घूमना, हाव-भाव, उनके आपसी रिश्ते वगैरह कैसे रहते हैं, ये सब मैंने कभी जाना ही नहीं था।'

अली शेर ने रामू से पूछा, शहर में तुमने ऐसा क्या देख लिया कि तुम्हें जंगलरत्न का नाम बदलकर मानवरत्न किए जाने पर आपत्ति होने लगी। रामू ने कहा, दादा, ये मत पूछो। अगर इंसानों की हरकत की बात आपको बताने लगूंगा ना, तो आप भी उनसे नफरत करने लगोगे। इंसान सिर्फ कहने के लिए इंसान है, सभ्य हैं, आधुनिक हैं, अच्छा खाते हैं, अच्छा पहनते हैं, अच्छी जगहों में रहते हैं, कार-जहाज-ट्रेन-गाड़ी वगैरह से आते-जाते हैं लेकिन उनकी असली सूरत आप जान जाओगे ना, तो आप भी कहोगे, यार, हमलोगों के पुरस्कार का नाम जंगलरत्न ही सही है।

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रामू, खुलकर बोल यार, बुझव्वल मत बुझाओ, अली शेर ने रामू भेड़िया से कहा। सभा में बाकी सारे जानवर अली शेर और रामू भेड़िया की बातचीत गौर से सुन रहे हैं। अली शेर की हां में हां मिलाते हुए सभी जानवरों ने रामू भेड़िया से इंसानों के बारे में विस्तार से बताने को कहा। रामू शहर से वापस आते समय अखबारों का पूरा बंडल साथ में लाया था। अखबारों की चुनिंदा खबरों को रामू ने एक-एक कर पढ़ना शुरू किया।

'43200 बार रेप की शिकार हुई एक लड़की की खौफनाक दास्तान'

'जूस में नशा मिलाकर मंगेतर के साथ गैंगरेप'

'दरोगा पर लगा अगवा लड़की को बंधक बनाकर रेप करने का आरोप'

'55 साल के रंगरेज ने बेटी की सहेली से किया रेप'

'एक दगाबाज दोस्त ने अपनी पत्नी की मदद से साजिश रचकर अपने ही दोस्त की पत्नी से बलात्कार किया'

'महिला को ट्रेन में अकेला देख दो दरिंदों ने खेला घिनौना खेल'

'ऑपरेशन थिएटर में महिला से डॉक्टर ने किया रेप'

'कक्षा 9 की छात्रा के साथ हुआ सामूहिक दुष्कर्म'

'कक्षा 11वीं की छात्रा के साथ दो युवकों ने किया सामूहिक दुष्कर्म'

'नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म, बनाया वीडियो'

'चलती बोलेरो में नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म'

'माता-पिता के सामने दो बेटियों का सामूहिक बलात्कार'

रामू भेड़िया आगे बढ़ता, इससे पहले सभा में बैठे श्याम चीता चिल्लाया, अबे...रामू...ये तुम क्या बक रहे हो? रामू, ये है इंसानों की नियत। बहन, बेटियों, मासूम की कोई इज्जत ही नहीं है। भले ही हम भेड़िया हैं, लेकिन हम भी अपनी मां, बहन, बेटियों के प्रति इस तरह का नजरिया नहीं रखते हैं। आप ही बताओ श्याम चीता तुमने जंगल में कभी किसी का बलात्कार किया है या फिर तुम अपने कई दोस्तों के साथ किसी का गैंगरेप किया है? तुम तो कर सकते हो, ताकतवर हो, जिसको चाहो उसके साथ तुम रेप कर सकते हो, लेकिन तुमने कभी किया है, क्या ? श्याम भी राम के सवालों पर खामोश हो गया। श्याम ने बस इतना ही कहा, अरे यार, हम जानवर भले ही हैं, लेकिन इंसानों से ज्यादा इंसानियत तो हममें है। ईश्वर ने चूंकि हमें जानवर बनाया है और उस पर हम सिर्फ मांस पर ही जिंदा रह सकते हैं। इसलिए, जब भूख लगती है तभी किसी जानवर का शिकार करते हैं। रामू ने श्याम से पूछा, अब तुम्हारी बातें पूरी हो गई ना। श्याम ने हां में सिर हिलाया।

राम फिर अगली खबर की तरफ बढ़ा। बलात्कार से जुड़ी खबर के बाद अब वो दंगे, आपसी रंजिश में हत्या, नरसंहार, नक्सली हिंसा, आतंकवादी हमले के संबंध में खबर पढ़ने लगा।

'सन 1946 में कलकत्ता में हुए इन दंगों में 4,000 लोगों ने अपनी जानें गंवाई थी, और 10,000 से भी ज़्यादा लोग घायल हुए थे'

'31 अक्टूबर, 1984 को इंदिरा गांधी की मौत के बाद भड़के दंगे में 800 से ज़्यादा सिखों की हत्या हुई थी'

'1986 में हुए कश्मीर दंगे में 1000 से भी ज़्यादा लोगों की जानें गयी थीं'

'वाराणसी में 1989, 1990 और 1992 में हुए भयंकर दंगे में कई लोगों की जानें गईं और कई लोग बेघर हुए'

'अक्टूबर 1989 के भागलपुर दंगे में करीब 1000 से ज़्यादा निर्दोषों को अपनी जानें गंवानी पड़ी'

'1992 के मुंबई दंगे में करीब सैकड़ों लोगों की जानें गईं'

'2002 के गुजरात दंगे में करीब 2000 लोगों की जानें गईं और लाखों लोग बेघर हुए'

'2006 के अलीगढ़ दंगे में 6-7 लोगों की जानें गईं'

'2012 के असम दंगा में करीब 80 लोगों की मौत हुई और लाखों लोग बेघर हुए'

'2013 के मुजफ्फरपुर दंगे में करीब 48 लोगों की जानें गईं और 93 लोग घायल हुए'

रामू भेड़िया अब जाति के नाम पर हुए हत्या को लेकर खबर पढ़ने ही वाला था कि अली शेर की जोरदार आवाज से वो चौंक गया। क्या हुआ दादा, रामू ने अली से कहा। अरे, पगले अब बस कर। इंसानों की हैवानियत के बारे में सुनकर अब मेरे आंखों से आंसू निकलने लगे हैं। इंसान ऐसा कर सकते हैं, इसका मुझे जरा भी इल्म नहीं था, अली ने रामू से कहा।

रामू ने अली से कहा, दादा, आप जीवन वन के राजा हैं। आप जब भी चाहें हममें से किसी को भी मार सकते हैं, लेकिन आप ऐसा नहीं करते। आपको जब भूख लगती है तभी हममें से कोई आपका शिकार बनता है। और इंसान को देखिये, वो इंसान को ही मारने के लिए ना जाने क्या-क्या कर रहा है। परमाणु बम बना रहा है, आधुनिक से आधुनिकतम हथियार बना रहा है और ना जाने क्या -क्या।

अली शेर, सही कहा रे, तू रामू। हम जानवर ही ठीक हैं। हमें ना तो इंसान बनने की जरूरत है और ना ही अपने सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार जंगलरत्न का नाम बदलकर मानवरत्न करने की जरूरत है। सभा में मौजूद सभी जानवरों ने अली शेर की हां में हां मिलाई और सब अपने-अपने ठिकानों की तरफ चल दिए।

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रजनीश कांत, मुंबई , 09819481785

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