बुधवार, 4 जनवरी 2017

हिन्दी - विश्व में भाषा भाषियों की दृष्टि से प्रथम एवं सबसे लोकप्रिय भाषा- डॉ. जयन्ती प्रसाद नौटियाल

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डॉ. जयन्ती प्रसाद नौटियाल

 

प्रस्तावना :

विश्व स्तर पर हिन्दी की स्थिति के बारे में यह शोध 1981 में शुरु हुआ था और सन् 1997 में इसकी शोध रिपोर्ट भारत सरकार राजभाषा विभाग की पत्रिका "राजभाषा भारती" में " हिन्दी एक अन्तर्राष्ट्रीय भाषा है " नामक शीर्षक से प्रकाशित हुई । इस प्रकाशन के उपरान्त सन् 2005 में इसकी विस्तृत रिपोर्ट विश्व भर में अनेक समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई, जिसका सम्पूर्ण विश्व में स्वागत हुआ व साथ ही सराहना हुई एवं इस शोध को मान्यता प्राप्त हुई। विश्व के अधिकांश विद्वानों व भाषाविदों ने इस तथ्य को स्वीकार कर लिया कि विश्व में हिन्दी जानने वाले सर्वाधिक हैं तथा मंदारिन दूसरे स्थान पर है । यह शोधकार्य भारत सरकार के प्रतिलिप्याधिकार पंजीयक (Registrar of copyright, Govt. of India) के पास पंजीयन क्रमांक L-26910/2006 पर मेरे नाम से पंजीकृत है ।

मेरे शोध के संबंध में कुछ प्रतिक्रियाएँ :

विश्व में इन्टरनैट जैसे माध्यमों से इस शोध के प्रकाशित होने पर विश्व समुदाय के अनेक विद्वानों ने इसे सराहा तथा इसकी प्रामाणिकता एवं सत्यता को स्वीकारा , लेकिन चीन के एक पोर्टल पर इस शोध पर विश्व समुदाय से अभिमत माँगे गए । इस पोर्टल पर मैंने निरंतर निगरानी रखी ताकि कोई प्रतिकूल टिप्पणी या कोई स्पष्टीकरण माँगा जाए तो मैं उसका उत्तर दे सकूँ, लेकिन इस पोर्टल पर किसी भी विद्वान ने इस तथ्य को नकारा नहीं बल्कि आश्चर्य व्यक्त किया कि हिन्दी इतनी व्यापक व लोक प्रिय है यह उन्हें पहली बार इस शोध से मालूम हुआ ।

भारत और लंदन के कुछ विद्वानों ने हिन्दी और उर्दू को समान भाषा मानने से इंकार किया लेकिन मैंने उन्हें बताया कि शब्दावली एवं वाक्य रचना तथा व्याकरण इन दोनों ही भाषाओं का समान है, यह अलग भाषा नहीं बल्कि हिन्दी का हिन्दुस्तानी स्वरूप है। अतः इसे एक ही भाषा के अंतर्गत माना जाएगा । भाषा वैज्ञानिक नियमों के अनुसार भी विश्व भर में यही भाषाओं के वर्गीकरण का सिद्धांत है ।

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अब तक प्रस्तुत शोध रिपोर्टों का सार :

हिन्दी विश्व में सबसे अधिक बोली व समझी जाती है तथा यह विश्व की सबसे लोक प्रिय भाषा है, यह मैंने अपनी शोध में सिद्ध किया है । इस शोध को समय-समय पर अद्यतन किया जाता रहा है ताकि हर दो तीन साल के कालखण्ड में भाषा गत परिदृश्य में आए परिवर्तनों को रेखांकित किया जा सके । अब तक प्रकाशित हुई शोध रिपोर्टों का सार निम्नवत् है :

(आँकड़े मिलियन में)

शोध रिपोर्ट का वर्ष

विश्‍व में

हिन्दी

जानने वाले

विश्‍व में चीनी

जानने वाले

अंतर

शोध रिपोर्ट 1997

800

730

+70

शोध रिपोर्ट 2005

1022

900

+122

शोध रिपोर्ट 2007

1023

920

+103

शोध रिपोर्ट 2009

1100

967

+133

शोध रिपोर्ट 2012

1200

1050

+150

शोध रिपोर्ट 2015

1300

1100

+200

स्रोत: डॉ. जयन्ती प्रसाद नौटियाल द्वारा किया गया शोध अध्ययन सन् 2015 (अनुमानित)

यह शोध रिपोर्टें इस बात का प्रमाण हैं कि हिन्दी जानने वालों की संख्या विश्व में सबसे अधिक हैं तथा यह निरंतर बढ़ती जा रही है । इससे यह सिद्ध होता है कि हिन्दी विश्व की सबसे लोक प्रिय भाषा है ।

हिन्दी विश्व में सबसे लोकप्रिय भाषा :

' हिन्दी विश्व में सबसे लोकप्रिय भाषा है ' - यह तथ्य भी निर्विवाद रूप से सिद्ध हो चुका है । इस तथ्य को अब अधिकांश विद्वान स्वीकार करने लगे हैं । इसका एक प्रमाण यह भी है कि भारत के प्रधान मंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी जी ने संयुक्त राष्ट्र संघ सहित विश्व के अनेक देशों में अपना व्याख्यान हिन्दी में ही दिया, यह व्याख्यान सम्पूर्ण विश्व में लोगों ने बड़े चाव से सुना व समझा । आदरणीय मोदी जी के सम्मान में इन कार्यक्रमों को भी हिन्दी में ही प्रसारित किया गया था । हिन्दी भाषा की लोकप्रियता और उसका प्रभा मंडल केवल भारत या भारत के पड़ोसी देशों तक ही सीमित नहीं है बल्कि सुदूर कैरेबियाई राष्ट्रों तक फैला है, मारीशस, फीजी, गुयाना, सूरीनाम, ट्रिनिडाड और टोबेगो जैसे देशों में यह राजभाषा के रूप में प्रतिष्ठित है । इतना ही नहीं बल्कि इंडोनेशिया, अमेरिका, ब्रिटेन, आस्ट्रेलिया, अफ्रीका और खाड़ी के देशों में हिन्दी बहुत लोकप्रिय है । विश्व की 18% जनता हिन्दी जानती है। इसलिए अनेक देश अपने प्रिंट मीडिया और इलैक्ट्रानिक मीडिया में हिन्दी को स्थान दे रहे हैं । इतना ही नहीं भारतीय फिल्में और टी.वी चैनलों के कार्यक्रम भी विश्व के कई देशों में चाव से देखे जाते हैं ।

सार्वभौमीकरण और हिन्दी :

नब्बे के दशक के उपरान्त जब उदारीकरण व सार्वभौमीकरण अर्थात लिबरलाइज़ेशन एवं ग्लोबेलाइज़ेशन का दौर भारत में चला तब ज्यादातर विचारकों का मत था कि ग्लोबेलाइज़ेशन से भारत के आर्थिक एवं सांस्कृतिक परिदृश्य में आमूचूल परिवर्तन हो जाएगा । आर्थिक दृष्टि से विदेशी पूँजीवाद फिर से शुरु हो जाएगा तथा हमारा सांस्कृतिक ताना-बाना ध्वस्त होकार पूरी तरह विदेशी संस्कृति हम पर हावी हो जाएगी व हमारी भारतीय भाषाएँ तथा विशेषतः हिन्दी विलुप्त प्रायः हो जाएगी । हिन्दी व भारतीय भाषाओं का स्थान अंग्रेजी ले लेगी । परन्तु यह हर्ष का विषय है कि ऐसा कुछ नहीं हुआ जैसा कि पूर्वानुमान लगाया जा रहा था । यह सत्य सिद्ध नहीं हुआ.......!

ऐसा ही चिंतन उस दौर में भी आया था जब भारत में कम्प्यूटरों का आगमन हुआ था । अर्थात् 1980 के दशक से यह चिंतन चलने लगा था और लोगों को यही भय सता रहा था । परन्तु भारत में भाषा प्रौद्योगिकी ने काफी विकास किया है तथा आज हम; सब काम हिन्दी में व क्षेत्रीय भाषाओं में करने में सक्षम हैं। सोशियल मीड़िया में भी हिन्दी काफी तेज़ी से आगे बढ़ रही है ।

अंग्रेजी परस्त मानसिकता व यथार्थ :

आधुनिकता के इस दौर में भारतीय जन मानस को कुछ नफासत पसंद और अंग्रेजी मानसिकता के लोग यह कह कर भ्रमित कर रहे थे कि अब बिना अंग्रेजी जाने भारतीयों का कोई भविष्य नहीं है । यह नितांत हास्यास्पद है तथा यथार्थ इसके विपरीत है। इस दौर में हिन्दी भाषा का इतना विकास हुआ कि स्टार चैनल के रूर्पट मार्डोक को अपने स्टार कार्यक्रमों की पी आर पी बढ़ाने के लिए हिन्दी में लाना पड़ा क्योंकि अंग्रेजी कार्यक्रमों के दर्शक भारत में तो बहुत कम हैं तथा विश्व में भी अंग्रेजी चैनल देखने वालों की संख्या निरंतर गिरती जा रही है । हिन्दी का वर्चस्व निरंतर बढ़ता ही जा रहा है तथा आज वह उस मुकाम पर पहुँच गई है जहाँ उसकी लोक प्रियता और ग्राह्यता को कोई अन्य भाषा चुनौती नहीं दे सकती है । हिन्दी आज विश्व में मनोरंजन की दुनिया में सबसे आगे है। यही कारण है कि सोनी , जी टी वी, डिस्कवरी चैनल, विदेशी "कार्टून कार्यक्रम" भी भारत में व हमारे पड़ोसी देशों में हिन्दी में प्रसारित होने लगे हैं ।

भारत की सांस्कृतिक विरासत और हिन्दी :

भारत की सांस्कृतिक विरासत इतनी व्यापक है कि विश्व में इसकी तुलना किसी अन्य सभ्यता और संस्कृति से नहीं की जा सकती है । आपको मालूम ही होगा कि भारतीय वेद अर्थात ऋग्वेद को अंतर्राष्ट्रीय थाती(धरोहर) का दर्जा तो पहले ही मिल चुका था । अब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर 175 देशों के समर्थन से संयुक्त राष्ट्र संघ ने 21 जून को "अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस" के रूप में मान्यता दी है । "10 जनवरी " संसार के कई देशों में "विश्व हिन्दी दिवस" के रूप में मनाया जाता है। भारत और हिन्दी दोनों का वर्चस्व विश्व स्तर पर दिनों दिन बढ़ता ही जा रहा है। यह हमारे लिए गर्व का विषय है ।

हिन्दी की लोकप्रियता और आर्थिक एवं राजनैतिक प्रभाव :

हिन्दी संख्या बल से विश्व में सबसे अधिक है परन्तु संयुक्त राष्ट्र संघ की अधिकृत भाषाओं में इसको स्थान नहीं मिल पाया है । इसका प्रमुख कारण यह है कि आर्थिक शक्ति और राजनैतिक शक्ति हिन्दी से प्रत्यक्षतः नहीं जुड़ी थी, जब कि भारत में ही परोक्ष रूप में हिन्दी ही राजनैतिक शक्ति व आर्थिक शक्ति का आधार पहले से ही रही है। आज स्थितियाँ बेहतर हो गई हैं। हिन्दी के पास प्रत्यक्षतः राजनैतिक शक्ति भी है और आर्थिक शक्ति भी ......!! अतः इस परिदृश्य में हिन्दी की लोकप्रियता में उत्तरोत्तर वृद्धि हो रही है ।

विश्व में हिन्दी शिक्षण एवं प्रशिक्षण का प्रभाव :

विश्व में हिन्दी की लोकप्रियता को देखते हुए विश्व के 150 से अधिक देशों में हिन्दी शिक्षण एवं प्रशिक्षण के अनेक शिक्षण माध्यम शुरु हो गए हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि विश्व में हिन्दी के प्रति अधिक झुकाव है । हिन्दी अध्यापन; अनेक हिन्दी समितियों, हिन्दी संस्थाओं द्वारा चलाया जा रहा है। केन्द्र सरकार द्वारा भी हिन्दी अध्ययन हेतु हिन्दी शिक्षण योजना चलाई जा रही है। विश्व के अनेक विद्यालयों, महाविद्यालयों तथा विश्व विद्यालयों में हिन्दी का अध्ययन-अध्यापन तेज़ी से चल रहा है। भारत में केन्द्र सरकार के प्रयासों व स्वयं सेवी संस्थाओं के प्रयासों से हिन्दी सीखने वालों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है। इसे निम्न लिखित तालिका से समझा जा सकता है ।

क्षेत्र

कुल जन संख्या

हिन्दी जानने वाले

प्रतिशत

क – क्षेत्र

(हिन्दी भाषी राज्य)

60,72,26,843

60,72,26,843

100 %

क्षेत्र

(हिन्दी और प्रांतीय भाषा का समान स्तर)

20,82,78,328

18,74,50,495

90.00 %

ग - क्षेत्र
(हिन्दीतर भाषी राज्य)

44,86,85,821

20,74,54,095

46.00 %

कुल संपूर्ण भारत

1,26,41,90,992

1,00,21,31,433

79.27 %

भारत को छोड़कर अन्य देश

5,95,64,09,008

29,64,86,562

4.97 %

विश्व की कुल जन संख्या

7,22,06,00,000

1,29,86,17,995

17.98 %

( पूर्णांकित )

7,22,06,00,000

1,30,00,00,000

18.00 %

स्रोत: डॉ. जयन्ती प्रसाद नौटियाल द्वारा किया गया शोध अध्ययन सन् 2015(अनुमानित)

विस्तृत जानकारी के लिए अनुबंध- 1 एवं 2 देखें ।

मंदारिन बनाम हिन्दी :

सम्पूर्ण विश्व में यह प्रचारित किया जाता है कि मंदारिन सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है जब कि सत्य यह है कि सम्पूर्ण विश्व में मंदारिन जानने वाले 2015 के आँकड़ों के अनुसार सिर्फ 1100 मिलियन हैं । चीन की सरकारी भाषा मंदारिन है तथा चीन में कुल जन संख्या का 70 % भाग ही मंदारिन जानता है । चीन की वर्तमान जन संख्या 1360 मिलियन है । इसका अर्थ यह है कि चीन में मंदारिन जानने वाले केवल 950 मिलियन हैं व 150 मिलियन अन्य देशों में हैं । यह ध्यातव्य कि यह संख्या सन् 2012 में 1050 मिलियन थी । अतः इसमें 50 मिलियन की वृद्धि हुई है । हिन्दी की लोकप्रियता व इसके अग्रणी होने की स्थिति इससे भी आँकी जा सकती है कि वर्ष 2012 में इसे जानने वालों की संख्या 1200 मिलियन थी । यह 2015 में प्रचुर बढ़ोत्तरी से यह 1300 मिलियन हो गई है अर्थात मंदारिन से 200 मिलियन ज्यादा । अंग्रेजी को तो सभी स्त्रोतों से सभी बोलियों को जोड़ने पर भी यह आँकड़ा अधिकतम 1000 मिलियन तक बडी मुश्किल से पहुँचता है ।

हिन्दी के संबंध में एक साधारण सी गणना नीचे दी जा रही है। :

1.

भारत में हिन्दी जानने वाले

1023 मिलियन

2.

पाकिस्तान में हिन्दी जानने वाले

165 मिलियन

3.

बंगलादेश में हिन्दी जानने वाले

59 मिलियन

4.

नेपाल में हिन्दी जानने वाले

25 मिलियन

 

4 राष्ट्रों में हिन्दी जानने वालों का योग

1272 मिलियन

5.

विश्व के अन्य राष्ट्रों में हिन्दी जानने वाले

28 मिलियन

 

संपूर्ण विश्व में हिन्दी जानने वाले

1300 मिलियन

स्रोत: डॉ. जयन्ती प्रसाद नौटियाल द्वारा किया गया शोध अध्ययन सन् 2015(अनुमानित)

युवा भारत की आत्मा और पहचान है हिन्दी :

आनेवाले समय में हमारा " युवा भारत " विश्व की महाशक्ति बनने जा रहा है। इसलिए हिन्दी के प्रति विश्व स्तर पर लोकप्रियता में निरंतर बढ़ोत्तरी हो रही है । इस प्रवृत्ति से सहज ही यह अनुमान लगाया जा सकता है कि निकट भविष्य में हिन्दी को संयुक्त संघ की अधिकृत भाषा के रूप में भी महत्व मिलेगा व यह "विश्व भाषा" के पद पर भी आसीन होगी । भारत में तो हर भारतीयों के दिल और आत्मा में इसको स्वीकार्यता मिल चुकी है । ' हिन्दी विरोध ' बीते कल की बात हो चुकी है । समस्त दक्षिण भारत में हिन्दी धीरे-धीरे सम्पर्क भाषा का ध्वज धारण किए आगे बढ़ती जा रही है । यह आनेवाले समय का संकेत है। धार्मिक स्थलों, पर्यटन स्थलों पर तो हिन्दी पहले से ही लोक प्रिय थी । अब हिन्दी, द्योग, व्यापार, शिक्षा एवं मनोरंजन के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण स्थान ले चुकी है। भारत की युवा पीढ़ी की पसंदीदा भाषा हिन्दी ही है । आज भारत की युवा पीढ़ी भाषा के मामले में व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाती है। अतः यह हिन्दी की लोकप्रियता बढ़ाने में और भी अधिक सहायक होगी ।

संयुक्त राष्ट्र संघ की अधिकृत भाषाएँ :

संयुक्त राष्ट्र संघ के गठन के समय चीनी, अंग्रेजी, फ्रेंच, रूसी एवं स्पेनिश ही अधिकृत भाषाएँ थी। 18 दिसम्बर 1973 से इसमें अरबी भाषा भी जोड़ दी गई इस प्रकार संयुक्त राष्ट्र संघ में 6 अधिकृत भाषाएँ हो गई ।

यह सबसे बड़े दुख की बात है कि विश्व के सबसे बड़े गणतंत्र की भाषा हिन्दी को संयुक्त राष्ट्र संघ में स्थान नहीं दिया गया । संयुक्त राष्ट्र संघ की अधिकृत भाषाओं पर एक नज़र डालें :

(संख्या मिलियन में)

क्रम सं.

भाषा

मातृ भाषा

अर्जित भाषा

कुल भाषा भाषी

1.

अरबी

235

225

460

2.

चीनी

950

150

1100

3.

अंग्रेजी

350

650

1000

4.

फ्रेंच

70

60

130

5.

रूसी

148

112

260

6.

स्पेनिश

332

63

395

 

कुल

2035

1260

3345

उक्त तालिकानुसार हिन्दी की स्थिति

 

हिन्दी

619

681

1300

स्रोत : डॉ. जयन्ती प्रसाद नौटियाल द्वारा किया गया शोध अध्ययन सन् 2015( आँकड़े अनुमानित)

संयुक्त राष्ट्र संघ की अधिकृत भाषाओं का औचित्य :

इन भाषाओं को अधिकृत किए जाने के पीछे तर्क यह है कि इनको प्रथम भाषा (मातृ भाषा) द्वितीय भाषा के रूप में बोलने वालों की संख्या 3.34 बिलियन है । यह संपूर्ण विश्व की जन संख्या का लगभग आधा हिस्सा है तथा संसार की आधे से अधिक राष्ट्रों में ये भाषाएँ प्रचलित हैं । यदि इन भाषाओं में हिन्दी भी जोड़ दी जाए तो यह संख्या 4.64 बिलियन हो जाएगी तथा यह विश्व की सम्पूर्ण आबादी के 64.26 % भाग का प्रतिनिधित्व करेगी ।

अब बारी हिन्दी की है । विश्व के सबसे बड़े गणतंत्र की भाषा को संयु्क्त राष्ट्र संघ की अधिकृत भाषा का दर्जा मिलना ही चाहिए ।

अनुबंध -1

भारत में हिन्दी जानने वालों की संख्या

संशोधित राजभाषा नियम के अनुसार "" क्षेत्र

क्र.स.

राज्य/संघ शासित क्षेत्र

कुल जन संख्या

हिन्दी जानने वाले

हिन्दी जाने वालों का %

1

अंडमान एवं निकोबार

3,82,783

3,82,783

100

2

बिहार

10,97,42,591

10,97,42,591

100

3

छत्तीसगढ़

2,65,08,463

2,65,08,463

100

4

दिल्ली

1,67,50,767

1,67,50,767

100

5

हरियाणा

2,64,44,965

2,64,44,965

100

6

हिमाचल प्रदेश

70,35,401

70,35,401

100

7

झारखंड

3,33,13,459

3,33,13,459

100

8

मध्य प्रदेश

7,60,70,288

7,60,70,288

100

9

राजस्थान

7,20,55,927

7,20,55,927

100

10

उत्तराखंड

1,00,53,951

1,00,53,951

100

11

उत्तर प्रदेश

22,88,68,248

22,88,68,248

100

 

कुल : ' ' क्षेत्र

60,72,26,843

60,72,26,843

100%

संशोधित राजभाषा नियम के अनुसार "" क्षेत्र

12

चंडीगढ़

10,95,994

9,86,394

90

13

दादर एवं नगर हवेली

3,77,138

3,39,424

90

14

दमण एवं दीव

2,69,631

2,42,668

90

15

गुजरात

6,30,89,998

5,67,80,998

90

16

महाराष्ट्र

11,66,33,162

10,49,69,846

90

17

पंजाब

2,68,12,405

2,41,31,165

90

 

कुल : ' ' क्षेत्र

20,82,78,328

18,74,50,495

90 %

संशोधित राजभाषा नियम के अनुसार "" क्षेत्र

18

आन्ध्र प्रदेश

8,80,98,809

4,40,49,405

50

19

अरुणाचल प्रदेश

14,44,741

5,05,659

35

20

असम

2,98,27,735

1,19,31,094

40

21

गोवा

15,20,609

11,40,457

75

22

जम्मू एवं कश्मीर

1,30,76,372

1,11,14,916

85

23

कर्नाटक

6,08,37,239

3,04,18,620

50

24

केरल

3,48,57,060

1,56,85,677

45

25

लक्षद्वीप

66,006

19,802

30

26

मणिपुर

28,30,843

12,73,879

45

27

मेघालय

30,82,207

9,24,662

30

28

मिजोरम

11,40,564

3,42,169

30

29

नागालैंड

20,01,214

4,00,243

20

30

उड़ीसा

3,99,34,980

2,19,64,239

55

31

पांडिचेरी

12,44,242,

2,48,848

20

32

सिक्किम

6,33,072

3,79,843

60

33

तमिलनाडु

6,98,45,516

1,39,69,103

20

34

त्रिपुरा

037,96,228

11,38,868

30

35

पश्चिम बंगाल

9,44,48,384

5,19,46,611

55

 

कुल : ' ' क्षेत्र

44,86,85,821

20,74,54,095

46.24

 

कुल : + +

1,26,41,90,992

1,00,21,31,433

79.27

स्रोत : डॉ. जयन्ती प्रसाद नौटियाल द्वारा किया गया शोध अध्ययन सन् 2015( आँकड़े अनुमानित)

अनुबंध 2

विश्व में हिन्दी जानने वालों की संख्या

क्रम सं

देश

हिंदी जाननेवाले

क्रम सं

देश

हिंदी जाननेवाले

क्रम सं

देश

हिंदी जाननेवाले

1

भारत

1023541490

 

36

न्यूजीलैंड

92234

 

71

अंगोला

7299

2

पाकिस्तान

165112311

 

37

मैक्सिको

90012

 

72

घाना

6567

3

बांग्लादेश

59523421

 

38

तंज़ानिया

90137

 

73

निकारागुआ

6052

4

नेपाल

25234117

 

39

जमैका

83100

 

74

विएतनाम

6660

5

म्यांमार

3221134

 

40

इस्राइल

75016

 

75

वैनेज़ुएला

5976

6

मलेशिया

2711212

 

41

फ्रांस

70180

 

76

सूडान

5832

7

यूनाईटेड किंगडम

2532113

 

42

पुर्तगाल

62077

 

77

सेंट लूसिया

5759

8

अमेरिका

2212415

 

43

हांगकांग

48069

 

78

प्युरटो रिको

5788

9

दक्षिण अफ्रीका

1512111

 

44

अफगानिस्तान

47170

 

79

जॉर्डन

5582

10

सऊदी अरब

1503216

 

45

स्पेन

43103

 

80

पनामा

5472

11

संयुक्त अरब अमीरात

1431212

 

46

मोज़ांबीक

42210

 

81

इजिप्ट

5399

12

कनाडा

1254123

 

47

रूस

37310

 

82

साइप्रस

5087

13

मॉरिशस

887634

 

48

लीबिया

31213

 

83

दक्षिण कोरिया

3320

14

भूटान

864317

 

49

मैडागास्कर

29121

 

84

डेन्मार्क

3046

15

फ़ीजी

532126

 

50

युगांडा

28226

 

86

ब्राज़ील

2579

16

त्रिनिडाड और टोबैगो

484311

 

51

बोट्सवाना

26670

 

87

ताइवान

2525

17

कुवैत

475166

 

52

चीन

25555

 

88

सीरिया

2430

18

ओमान

465336

 

53

पोलैंड

24666

 

89

आयरर्लैंड

2306

19

गुयाना

425125

 

54

अर्जेंटीना

23522

 

90

ज़िंबाब्वे

2223

20

सिंगापुर

313779

 

55

ज़ाम्बिया

22370

 

91

चेक गणतंत्र

2471

21

कतार

308083

 

56

जापान

21001

 

92

कज़ाकिस्तान

1728

22

सूरीनाम

267244

 

57

स्विट्ज़रलैंड

19064

 

93

सीरा लियोन

1510

23

नीदरलैंड

265343

 

58

स्वीडेन

18620

 

94

इथिओपिया

1460

24

बहरीन

264312

 

59

नॉर्वे

17030

 

95

वर्जिनिया

1482

25

थाइलैंड

174313

 

60

कोरिया

16300

 

96

उज़बेकिस्तान

1444

26

केनिया

159134

 

61

ऑस्ट्रिया

14404

 

97

ईरान

1362

27

ऑस्ट्रेलिया

121677

 

62

लेबनान

12711

 

98

चिली

1330

28

यमन

118116

 

63

सेशेल्स

12572

 

99

कोंगो

1256

29

फ़िलीपीन

109307

 

64

बेल्जियम

12639

 

100

बंगलादेशी शरणार्थी

373214

30

जर्मनी

102010

 

65

ब्रुनेई

11505

 

101

तिब्बती शरणार्थी

121690

31

इटली

101301

 

66

मालदीव

10600

 

102

म्यांमार व अफगान शरणार्थी

101000

32

इंडोनेशिया

101122

 

67

ग्रीस

10313

 

103

शेष 135 देशों में

100000

33

रीयूनियन (फ्रांस)

101110

 

68

यूक्रेन

9108

 

कुल हिन्दी जानने वाले

1298617995

(पूर्णांकित)

1300000000

34

नाइजीरिया

98411

 

69

फिनलैंड

8562

 

विश्व की जन संख्या

7220600000

35

श्रीलंका

96333

 

70

इक्वाडोर

7571

 

हिन्दी जानने वालों का %

18.05

                       

( स्रोत: डॉ. जयन्ती प्रसाद नौटियाल द्वारा दिया गया शोध अध्ययन सन् 2015(आँकड़े अनुमानित)


संक्षिप्त जीवन वृत्त (बायोडाटा)

 

नाम : डॉ जयन्ती प्रसाद नौटियाल

उप महा प्रबंधक; कार्पोरेशन बैंक

प्रधान कार्यालय, मंगलूर -575 001

कर्नाटक राज्य, भारत

वेबसाईट : www.drjpnautiyal.com

ई-मेल : dr.nautiyaljp@gmail.com

jpn@corpbank.co.in

जन्म तिथि : 03.03.1956, जन्म स्थान : देहरादून , (उत्तराखण्ड)

 

कुल योग्यताएँ

(शैक्षिक / व्यावसायिक / विविध)

60

60 डिग्री, डिप्लोमा एवं प्रमाण-पत्र प्राप्त

मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों / बोर्डों /संस्थानों से अर्जित

( कुल 252 प्रश्न पत्र उत्तीर्ण / पूर्ण किए )

शैक्षिक योग्यता

11

11 डिग्री/डिप्लोमाः इनमें एम.ए हिंदी (स्वर्णपदक), एम.ए (अंग्रेजी), पी.एच.डी(भाषा विज्ञान), डी.लिट, एल.एल.बी आदि शामिल हैं।

व्यावसायिक योग्यता

26

26 डिग्री/डिप्लोमाः इनमें एम.बी.ए (बैंकिंग एवं वित्त), सी.ए.आइ.आइ.बी, डी.बी.एम, सी.पी.डी आदि शामिल हैं।

विविध प्रशिक्षण

23

21 प्रशिक्षण प्रमाण-पत्रः इन प्रशिक्षणों में विभिन्न प्रकार के 68 विषयों पर प्रशिक्षण लिया व प्रमाण-पत्र प्राप्त।

अनुभव

28

28 विभागों/संगठनों में 33 पदों पर सेवा जिनमें पत्रकार, चित्रकार, सम्पादक, रीडर आदि शामिल है तथा कार्पोरेशन बैंक (राष्ट्रीयकृत बैंक) में राजभाषा,क्रेडिट कार्ड प्रभाग, शाखा परिचालन, विपणन, एसोशिएट फैकल्टी, चैनल माइग्रेशन, बैंकाश्यूरैन्स, सरकारी कारोबार, निक्षेपी सेवाएँ,पूँजी बाजार सेवाएँ, डिबेंचर ट्रस्टी सेवाएँ, केन्द्रीकृत पेंशन प्रसंस्करण, नई पेंशन योजना, उगाही एवं भुगतान सेवा जैसे प्रभागों में विभिन्न पदों पर कार्य शामिल हैं। संप्रति कार्पोरेशन बैंक के प्रधान कार्यालयय में उप महा प्रबंधक स्वतंत्र प्रभार पद पर सेवारत हैं।

विशिष्ट कार्य

51

51 प्रकार के विशिष्ट दायित्वों का निर्वाह जिनमें पी.एच.डी के परीक्षक, शोध निर्देशक, बोर्ड आफ स्टडीज़ के सदस्य, शिक्षा सलाहकार, बैंकिंग शब्दावली विशेषज्ञ, मुख्य परीक्षा प्रशासक, चयन बोर्ड के सदस्य ,मुख्य बीमा कार्यपालक जैसे कार्य शामिल हैं.

साहित्यिक योगदान

1530

55 पुस्तकें प्रकाशित (इनमें अनेक पुस्तकें विश्वविद्यालयों की पाठ्य पुस्तकें/संदर्भ ग्रंथ हैं) (इनमें 30 पुस्तकें स्वयं लिखी व 25 संयुक्त लेखन)

93 पुस्तकों/प्रक्रियात्मक साहित्य का अनुवाद/संयुक्त अनुवाद

13 राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर की पत्रिकाओं के अनेक अंकों का सम्पादन

76 राष्ट्रीय/राज्य स्तरीय संगोष्ठियों में शोध पत्र/आलेख प्रस्तुत (यू.जी.सी/सरकार द्वारा अनुमोदित)

73 कार्यक्रम आकाशवाणी पणजी(गोवा) तथा मंगलूर से प्रसारित

1220 लेख विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित

1530 - कुल साहित्यिक योगदान

समितियों में प्रतिनिधित्व

82

विविध विषयों पर राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय शीर्ष समितियों में विभिन्न भूमिकाओं और दायित्वों का निर्वाह,82 समितियों में प्रतिनिधित्व किया ।

सम्मान/पुरस्कार

57

हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार व साहित्यिक योगदान के लिए भारत सरकार एवं प्रतिष्ठित संस्थाओं से 3 अन्तर्राष्ट्रीय 42 राष्ट्रीय तथा 12 राज्य स्तरीय कुल 57 पुरस्कार/सम्मान प्राप्त

प्रशस्ति-पत्र

40

व्यावसायिक दक्षता एवं उत्कृष्ट योगदान के लिए 40 प्रशस्ति-पत्र (Appreciation Letters) प्राप्त

सम्प्रति

उप महाप्रबंधक, कार्पोरेशन बैंक (भारत सरकार का अग्रणी उद्यम)

कार्पोरेट कार्यालय,पांडेश्वर, मंगलूर , पिन - 575001 ((कर्नाटक राज्य)

वेबसाईट : www.drjpnautiyal.com मोबाइल : 9900068722

ई-मेल : dr.nautiyaljp@gmail.com & jpn@corpbank.co.in

दिनांक : 01.01.2015

स्थान : मंगलूर (डॉ. जयन्ती प्रसाद नौटियाल)

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  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन ’प्रकाश पर्व की शुभकामनाओं सहित ब्लॉग बुलेटिन’ में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

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