रचनाकार

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका

ये कैसा गणित / स्वराज सेनानी

श्रीकांत आप्टे की कलाकृति

बरबस मेरा ध्यान सियालदह स्टेशन के बाहर बैठे भिखारी की ओर चला गया . जो आँख मूंदे कुछ बुद- बुदा रहा था. आने जाने वाले लोग अपनी भाग दौड़ के बीच से कुछ छण के लिए रुक कर और अपनी जेब ढीली कर के चले जाते थे. हमारे देश में ,भीख मांगना वैसे भी एक आम बात है, साधारणतया: कोई लाचार , गरीब समाज का सताया व्यक्ति ही भीख मांगने की पात्रता रखता है . किसी हट्टे_कट्टे मजबूत आदमी को तो कैसे भी कोई भीख नहीं देता बल्कि डांट ज़रूर देता है “ शर्म नहीं आती भीख माँगते हुए , कोई काम क्यूँ नहीं करते “?

हम भले ही बहुत मेकेनिकल हो गए हों लेकिन हमारा दया, सेवा-भाव अभी तक ज़िंदा है और शायद हम इसीलिए आदमी हैं और सभ्य समाज का हिस्सा हैं. आज किसी के पास भी वक्त नहीं है कि बेकार की बातों में उलझे . जो भी करना है इंस्टेंट नूडल की तरह बस कम से कम समय में करने में विश्वास रखते हैं . नेकी कभी जो करनी है तो वह भी इंस्टेंट, किया और भूल गये ; उस से चिपकना नहीं है और न उसे अपने आप से चिपकने देना है. इसी में भलाई है बहुत अधिक संवेदनशील होने से, सारे जहां के दुःख अपनी खोपड़ी पर धर लेने से अपना ही नुकसान होता है.

भिकारी को देखते ही मेरा ध्यान कुछ महीने पहले सियालदह में हुई एक हत्या की खबर की ओर चला गया जिसमें दो मवाली गुटों में झगड़ा हो गया और अंतत: एक गुट के सरदार का खून हो गया. कई मवाली मारे गये . खबर को और विस्तार से खोदने पर पता चला की दोनों गैंग शहर में भीख माँगने के कारोबार से जुडे थे. इस कारोबार में, काम करने वाले आदमियों की भर्ती ,उनकी ट्रेनिंग और फिर प्लेसमेंट पर योजनाबद्ध तरीके से काम किया जाता है तथा पोस्ट का चुनाव, भीख माँगने के तरीके का मानकीकरण और मूल्यांकन भी किया जाता होगा ताकि व्यवसाय अबाध और पूर्ण कार्य क्षमता पर चलता रहे.

[ads-post]

जैसा कि किसी भी अन्य व्यवसाय में होता है कि जब तक आप एक मात्र व्यवसाई /व्यापारी हैं तब तक आप की बल्ले बल्ले लेकिन जैसे ही कोई प्रतिद्वंदी आ जाता है उस का असर आप के व्यापार पर पड़ना लाजमी हो जाता है. ज़रूरत है कम्पीटीशन को खत्म या कम कर देनी की या अपना बिजनेस माडल ऐसा बेहतरीन बना लें की आप के लाभ पर कोई असर ही न हो. ये प्रतिस्पर्धा के नियम सभी व्यवसाय में हैं ; सो इस में भी लागू हो गए और एक गुट ने दूसरे का सफाया करने का फैसला कर लिया. रातों रात गाजर मूली की तरह काट डाला और प्रतिद्वंदिता को फलीभूत होने से पहले ही निबटा दिया .

व्यवसाय की दृष्टि से हर चौकी अति महत्व पूर्ण है और एक शहर के अंदर की सभी चौकियां एक तरह की नाली प्रणाली का हिस्सा होती हैं जो सब जा कर एक बड़े तालाब में गिरती हैं . इस लिए हर एक की अपनी महत्ता है.

सियालदह स्टेशन के बाहर बैठा भिखारी वहां क्यों बैठा है यह एक सोचा समझा और नीतिगत निर्णय है और बहुत परख करने के बाद ही वहां पर बैठाया जाता होगा. इस के लिए आवश्यक पात्रता, कार्यव्यवहार, प्रणाली और उस के प्रबंधन का भी मानकीकरण किया जाता होगा. दिन भर की कमाई को कैसे सुरक्षित रूप से कोषागार तक पहुंचाया जाए आदि आदि. मान लीजिये दिन भर में 10 लाख लोग उस स्टेशन से गुज़रते हों और हर सौ आदमी में से एक भिखारी को 1 रुपया देता हो तो एक दिन की आमदनी हो गई 10 हज़ार रुपये . इतनी तो अच्छे ऊँची से ऊँची पोस्ट वाले आई ए एस की एक दिन की सेलरी भी नहीं होती . ये बात तो तब है जब लोगों की आवक कम से कम रख कर आकलन किया गया है . यदि यह संख्या इस से बढ़ती है तो वैसी ही इस पोस्ट से होने वाली आमदनी भी बढ़ने लगेगी.

इन सब बातों के मद्देनज़र सियालदह स्टेशन की यह चौकी सचमुच में बहुत ही महत्व पूर्ण थी जिस के लिए किसी गैंग को, एक दो लोगों को रास्ते से हटाना तो मामूली बात है.

अब जहाँ कहीं भी भिखारी की चौकी कोई देखता हूँ दिमाग गणना करना शुरू कर देता है .

रचना कैसी लगी:

एक टिप्पणी भेजें

An eye opener, thought provoking!

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

[blogger][facebook]

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget