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झुनिया की खोज / बाल कविताएँ / अमरपाल सिंह ‘ आयुष्कर ’

हाथी लोक कला में चित्रण
 
           बाल कविताएँ 
1-  दादी
 
चौराहे पर रखे दीपक की बाती है दादी
गुजरने वालों के दुःख दर्द
खुशियों से छलके आंसुओं को समेट
टिमटिमाती
घायल गौरैया , दादी के सर्द हाथों में प्यार की गर्माहट पा फिर से उड़ान भर जाती
हर जख्म का मरहम दादी
सूखते बिरवे को झुकी कमर से
रोज नहलाती
प्यार दे दुलराती
हरा-भरा करती उसकी सूखती काया
झूमती पत्तियां लहराती
फूलों संग मुस्काती दादी
सबके जीवन में रंग भर जाती |
 
2-  झुनिया की खोज ...
 
चिंटू ,मिंटू, मुनिया ,झुनिया ,पप्पू ,गप्पू ,बांकेलाल
क्रिकेट टीम की दशा देखकर ,फन्नेलाल हुए बेहाल
दिनभर ऊधम मचाते रहते, रोते जाते समय स्कूल
कोई कहता कलम चाहिए , कोई कहता है पतलून
और सुनो इक मजेदार ,जब बात हुई उस रोज
मजे -मजे में शोर -शोर में शुरू हुई इक खोज
चढ़े पलंग सब ,एक साथ ही सोने को तैयार
गिरे किनारे मिंटू ,झुनिया, छिड़ी करारी मार
रूठ के झुनिया चली गयी
घबराये फन्नेलाल
पुलिस को टेलीफ़ोन घुमाया
करने को पड़ताल
पूरा शहर छान मारा था
सभी ने आंखें मीचे
हुआ गजब जब सोई झुनिया
मिली पलंग के नीचे |
 
3- आओ मिलकर पेड़ लगायें
 
आओ मिलकर पेड़ लगायें
हरा भरा परिवेश बनायें
चारों ओर स्वच्छता होगी
महकेंगी फिर सभी दिशाएं
आओ राधा ,आओ जॉन
ये लो नींबू ,ये लो आम
इन्हें रोप दो ,पानी दे दो
मुरझाये ना रखना ध्यान
खट्टे –मीठे फल देता है
और हवा मतवाली
सब मिलकर करते रहना
इन बागों की रखवाली
सबको हम ये आज बताएं
इनसे हैं कितनी सुविधाएं
आओ मिलकर पेड़ लगायें |
 
4- मुन्नी
 
बजते ही छुट्टी का घंटा ,मुन्नी सरपट भागी
ना दायें ना बाएं देखा, ना आगे ना पीछे
सोचा जल्दी घर जा पहुंचे ,दूध मलाई खींचे
इसी सोच में भाग रही थी ,वह गीले मैदान से
गया फिसल जब पैर
गिरी फिर मुन्नी वहीँ धड़ाम से |
 
 
 
 
5- मेरी प्यारी साईकिल
 
मेरी प्यारी –प्यारी साईकिल
बिना तेल के ये चलती है
ना लेती भोजन ,पानी ये
जाने कैसे पलती है
सुबह शाम है सैर कराती
नयी –नयी ये डगर दिखाती
नहीं उगलती धुएं ये गंदे
ना करती आवाज़ ये भारी
इसके आगे पीछे बत्ती
ये जगमग –जगमग जलती है |

 
अमरपाल सिंह ‘ आयुष्कर ’ 
 
जन्म :    1  मार्च  
ग्राम- खेमीपुर, अशोकपुर , नवाबगंज जिला गोंडा , उत्तर - प्रदेश            
दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान ,कादम्बिनी, वागर्थ ,बया ,इरावती प्रतिलिपि डॉट कॉम , सिताबदियारा ,पुरवाई ,हमरंग आदि में  रचनाएँ प्रकाशित 
2001  में  बालकन जी बारी संस्था  द्वारा राष्ट्रीय  युवा कवि पुरस्कार  
2003   में  बालकन जी बारी -युवा प्रतिभा सम्मान 
आकाशवाणी इलाहाबाद  से कविता , कहानी  प्रसारित
‘ परिनिर्णय ’  कविता शलभ  संस्था इलाहाबाद  द्वारा चयनित
मोबाईल न. 8826957462     mail-  singh.amarpal101@gmail.com

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