शुक्रवार, 3 फ़रवरी 2017

मोबाइल रिचार्ज और महिला सुरक्षा / डॉ. आशुतोष शुक्ल

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क्या कभी ये भी सोचा जा सकता है कि महिलाओं और लड़कियों को अपने आसपास की दुकानों के मोबाइल टॉपअप रिचार्ज करने वाले भैया लोगों की तरफ से भी किसी अनजान तरह का खतरा भी हो सकता है यदि आपके पास इस प्रश्न का उत्तर नहीं है तो यूपी में १०९० महिला हेल्पलाइन के आंकड़े आपके लिए अवश्य ही चौंकाने वाले हो सकते हैं क्योंकि लड़कियों और महिलाओं के फ़ोन पर अनजान नंबरों से लगातार कॉल और अभद्र सन्देश मिलने की शिकायतों का जब गहन परीक्षण किया गया तो यह बात सामने आयी कि गली मोहल्ले में बैठे हुए ये रिचार्ज सेंटर वाले किस तरह से रिचार्ज कराने आयी लड़कियों के नंबरों को पैसों के लालच में उन लोगों को बेच दिया करते थे जो महिलाओं और लड़कियों से बात करने के लिए उनके नम्बरों की तलाश में रहा करते थे.

यूपी में महिला हेल्पलाइन पर १५ नवंबर २०१२ से ३१ दिसंबर २०१६ के बीच कुल ६६११२९ शिकायतें दर्ज कराई गईं इनमें से ५८२८५४ शिकायतें टेलीफ़ोन पर परेशान करने को लेकर थीं. जब इस पूरी समस्या पर पुलिस ने ध्यान दिया तो कुछ ऐसा सामने आया जिसके बारे में कभी सोचा भी नहीं जा सकता था क्योंकि वहीं से यह मामला खुलना शुरू हुआ कि ये रिचार्ज वाले भैया लोग किस तरह से विश्वासघात करके नम्बरों का खेल कर रहे थे. इस क्षेत्र में जिस तरह से कुछ जानकारी सामने आयी वह समाज की स्थिति को दिखाता है क्योंकि ये नंबर सुंदरता के पैमाने पर ५० से ५०० रूपये तक बेचे जा रहे थे.


इस पूरे प्रकरण में सबसे अधिक चिंताजनक बात यह भी है कि आईटी एक्ट और भारतीय दंड संहिता में इस तरह से परेशान करने वालों के खिलाफ कार्यवाही करने के लिए कोई कानूनी कवच भी पुलिस के पास नहीं है जिससे वह चाहकर भी इन्हें गंभीर धाराओं में नामित नहीं कर सकती है जिससे उनके आसानी से छूट जाने की संभावनाएं भी रहती हैं. देश में जिस तरह से आटीई एक्ट है उसके स्वरुप में इस तरह के मामलों को केवल विश्वासघात की धाराओं में ही लिया जा सकता है पर इससे किसी महिला या लड़की को किस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है यह कोई और समझ भी नहीं सकता है.

इसलिए यह आवश्यक है कि महिलाएं और लड़कियां अपनी पहचान को सुरक्षित रखने के लिए केवल विश्वसनीय केंद्र से ही रिचार्ज कराने आदत बनाएं और यदि अपने मोबाइल में कोई मोबाइल वालेट उपयोग में ला रही हैं तो मोबाइल में रिचार्ज /टॉपअप करने के लिए सदैव ही उसका प्रयोग करने की दिशा में कदम बढ़ाएं. यह आंकड़े केवल यूपी की महिला हेल्पलाइन द्वारा सामने लाये गए हैं तो यह भी संभव है कि पूरे देश में इस तरह से लाखों महिलाओं और लड़कियों की निजता संकट में है और कोई भी कभी भी इस सूचना का दुरूपयोग कर सकता है. एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि शिकायतें न करने से ऐसे तत्वों के हौसले भी बढ़ते हैं इसलिए किसी भी अवांक्षित कॉल के आने और परेशान करने की स्थिति में तुरंत पुलिस को सूचित करना चाहिए.


इस समस्या से निपटने के लिए क्या दूरसंचार कंपनियां सुरक्षा को और मजबूत कर सकती हैं और क्या इस तरह से रिचार्ज करने वालों को सिम देने से पहले उनकी पृष्ठभूमि की जाँच करने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए ? आतंकी घटनाओं से निपटने के लिए जिस तरह से फ़र्ज़ी सिम बेचने से रोकने के लिए एक समय अभियान चलाया गया था क्या आज भी उसकी आवश्यकता नहीं है कि हर मोबाइल सिम धारक को उसकी निजता बचाये रखने के लिए पूरी आज़ादी और सुरक्षित व्यवस्था भी दी जाये ?

निश्चित तौर पर इस मामले में केवल केंद्र सरकार ही कुछ कड़े कदम उठा सकती है पर महिलाओं की इस समस्या से निपटने के लिए अब राज्यों और केंद्रों में एक विमर्श आवश्यक भी है क्योंकि जब तक इस स्तर के मानसिक बीमार लोगों को कानून के दायरे में लाने के लिए पूरी कोशिश नहीं की जाएगी तब तक देश में महिलाएं और लड़कियां अपने को सुरक्षित नहीं महसूस कर पाएंगीं. ऐसा भी नहीं है कि देश में ऐसी घटनाएं नहीं होती होंगीं पर यूपी में २०१२ से शुरू हुई केंद्रीयकृत व्यवस्था में जब इनकी इतनी संख्या दिखाई दी उसके बाद ही इस तरह से जाँच किये जाने पर पूरे मामले का खुलासा हुआ है. केंद्र सरकार और आईटी मंत्रालय को अब इस दिशा में ठोस कार्यवाही करते हुए कानून मंत्रालय के माध्यम से कुछ प्रभावी कानूनी पहल की तरफ बढ़ना चाहिये जिससे पूरी व्यवस्था में इस समस्या को सही ढंग से निपटाया जा सके.
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

डॉ. आशुतोष शुक्ल

(ब्लॉग - सीधी खरी बात https://seedhikharibaat.blogspot.in/2017/02/blog-post.html से साभार )

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