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गुरू सक्सेना (साँड नरसिंहपुरी) की कविताएँ



गजल


कितना सारा वक्त बिताया भूल गये

कदम-कदम पर साथ निभाया भूल गये


दाना डाला फसा लिया मजबूरी में

खुद तुमने ही जाल बिछाया भूल गये


मैंने किस मर्यादा की सीमा लांघी

तुमने बातों में फुसलाया भूल गये


तुमने जिनको माना, मैंने भी माना

सर आँखों पर सदा बिठाया भूल गये


एक धरोहर है जिसको लौटाना है

बार-बार यह भाव बताया भूल गये


हर क्षण मैंने जिया तुम्हारी मर्जी से

कब अपना उल्लेख कराया भूल गये


सिर्फ जरा सी बात मोड़ देते यूं ही

क्यों अपनों में शोर मचाया भूल गये।।



गजल


हम कबसे उनका मंच सजाने में लगे हैं

वे भूख के मारे हैं जो खाने में लगे हैं


या तो वजीर जाये या कि मात मान लो

वे इस तरह शतरंज बिछाने में लगे हैं


जिनको न अपना बोझ संभाले न संभलता

वे दूसरों का बोझ उठाने में लगे हैं


जिस बस्ती को बसाने में सदियां गुजर गईं

ये सिरफिरे उसी को जलाने में लगे हैं


मालूम है वे बहरे हैं कुछ भी न सुनेंगे

हम दिल का दर्द उनको सुनाने में लगे हैं


बैठे हैं कबसे हाथ में नमक लिये हुए

हम फिर भी उन्हें जख्म दिखाने में लगे हैं


दुनियां को हंसाने में ही कटी तमाम उम्र

कुछ लोग साँड को भी रूलाने में लगे हैं।।



गजल


हमको नहीं नसीब मिठाई घर में घर के बाहर भी

है अपनी हर तरफ कटाई घर में घर के बाहर भी


अटकल के विपरीत अभी तक काम किया है बूढ़े ने

क्यों ना उसको मिले बधाई घर में घर के बाहर भी


बड़ी मुश्किलों से तो आयी स्वाद न आई का लाई

उसके कारण मची लड़ाई घर में घर के बाहर भी


बंटवारा कर बारूदों पर बैठे बाबा के बेटे

सबके हाथों दिया सलाई घर में घर के बाहर भी


वर्षों से चल रही साधना यात्रा हो चाहे ना हो

ओढ़ रहे हैं फटी रजाई घर में घर के बाहर भी


रक्षक हैं पर तक्षक बनकर बारी बारी डसते हैं

प्रबल शत्रु जैसे हैं भाई घर में घर के बाहर भी


गुजरी बहुत बची है थोड़ी थोड़ी कृपा आप कर दें

हो ना आखिरी समय हंसाई घर में घर के बाहर भी


हुए प्रसिद्ध अहम् से मरते, मरे ना क्योंकि रक्षक हैं

गुरू के सियाराम रघुराई घर में घर के बाहर भी
—---



जन्म: 07 सितंबर 1950

ग्राम-डांगीढाना, जिला-नरसिंहपुर (म.प्र.)


पिता: स्व. श्री लक्ष्मीप्रसाद सक्सेना


माँ: स्व.श्रीमती बइयोबाई सक्सेना


शिक्षा: एम.ए. हिंदी


प्रकाशन 

 

हास्य-व्यंग्य

1. फैशन का भूत, 2. आदर्श की फजीहत, 3. हाय अकोला चली गई, 4. नेता गिरगिट भाई भाई, 5. न ढोल न नगाड़ा


राष्ट्रीय

1. यशगान, 2. गुरू सक्सेना की चुनौती


अध्यात्मिक 

1. तुम चंदन हम पानी, 2. सूर्पनखा (खण्डकाव्य)


सम्मान एवं उपलब्धियाँ:
1 वर्ष 2004 के सर्वश्रेष्ठ हास्य-व्यंग्य कवि के रूप में ‘काका  हाथरसी हास्य रत्न सम्मान’ से सम्मानित।

2 1998-गुंजन कला सदन जबलपुर द्वारा कविवर पं. श्रीबाल  पाण्डे व्यंग्य अलंकरण

3 रिमझिम संस्था इंदौर द्वारा स्व.सज्जन भोपाली पुरस्कार

4 तुलसी माखन सम्मान (खण्डवा)

5 स्व.बाबू पद््दुम लाल पुन्नालाल बख्शी स्मृति साहित्य शिरोमणि  अलंकरण (कटनी)

6 माणिक वर्मा व्यंग्य सम्मान (भोपाल), 

7 पैगाम पुरूष सम्मान (वरोरा),

8 रसोकि रमाकु (किशोर कुमार) सम्मान (इटारसी), क्र काव्य  महारथी (हैदराबाद), क्र जीजा बुंदेलखण्डी सम्मान (दमोह), क्र पं. बंशीधर शुक्ल साहित्य सम्मान (लखीमपुर खीरी-उ.प्र.), क्र नरसिंह गौरव सम्मान गीत गंगात्री (नरसिंहपुर) सहित अनेक  संस्थाओं से सम्मानित। 


विशेष: 1970 से हिंदी कवि सम्मेलनों में ‘साँड नरसिंहपुरी’ उपनाम से हास्य-व्यंग्य कवि के रूप में काव्य पाठ। 

संपर्क: स्टेशन गंज, नरसिंहपुर (म.प्र.) 487001

मो. 94251-69798

ई-मेल:kaviguru2gmail.com

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