रचनाकार

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका

गधों का प्रतिकार पत्र / व्यंग्य / शशिकांत सिंह ’शशि’

image

कार्टून - साभार काजल कुमार

 

गधों का प्रतिकार पत्र

माननीय नेताजी

विश्‍व गर्दभ मंडल आपके उस बयान की कड़ी निंदा करता हैं जिसमें आपने अभिनेता जी से हमारा प्रचार न करने की अपील की थी। गधों को भी प्रचार पाने का उतना ही हक है जितना आदमियों को। विशेषकर गुजराती गधों को प्रचाारित होने, प्रचारित करने, प्रचार भुनाने और प्रचार चुराने की आदत भी है और अधिकार भी। वे लोटें तो ’डंकी-डंकी’, वे रेंकें तो ’डंकी-डंकी’। वे जब जंगल में, कच्‍छ के रण में, दोनों टांगे हवा में लहराते हैं तो वह विश्‍वस्‍तरीय घटना मानी जाती है।

[ads-post]

वे यदि कह दें ’ढेंचूं’ तो वह राष्‍ट्रीय बयान माना जाता है और आप उनके प्रचार को पचा नहीं पा रहे हैं !! सनद रहे महोदय कि यदि हमारे अधिकारों को कोई हमसे छीनने की कोशिश करेगा तो ’खर सेवक संघ’ उससे निपटने में सक्षम है। ’खर सेवक संघ’ का मूल काम खर-विरोधियों से दो-दो लात करना है। इसे हमलोग राष्‍ट्रधर्म कहते हैं। हमारे गर्दभ पुराण के अनुसार संसार में ’ गधे’ सर्वश्रेष्‍ठ जीव होते है। खरवेद में खरजाति की उत्‍पति और विकास की पूरी कथा कही गई है। महोदय प्रकारांतर में आपने हमारी संस्‍कृति पर ही प्रहार किया है जिस पर ’खरपरिवार’ गंभीरता से विचार कर रहा है।

महोदय, आप हमारे छोट कद और लंबी कान पर मत जाइये । हमारा मानना है कि भारतीय गधे सर्वश्रेष्‍ठ दुलत्‍ती मारक होते हैं। वहां ’खर सम्‍प्रदाय’ का उदय हुआ है। खर सम्‍प्रदाय में दीक्षित किशोर गधे अत्‍यंत तत्‍परता से लात मारते हैं। उन्‍हें लात के साथ-साथ दंत-प्रहार की भी ट्रेनिंग दी जाती है ताकि वे किसी को भी और कहीं भी ज़रा-ज़रा सी बात पर लात मार सकें। खर सम्‍प्रदाय का एक ही राग है ’डंकी डंकी’। रेंकना और फेंकना दो प्रमुख कर्त्‍तव्‍य माने जाते हैं। यदि किसी ने गधेश का अपमान किया तो युवा-वाहिनी पद-प्रहार से उसे क्षत-विक्षत कर सकती है। खर-वाहिनी की एक टुकड़ी तो सदैव संस्‍कृति की रक्षा हेतु आतुर रहती है। आपसे निवेदन है कि गर्दभ जाति की रेंक की रक्षा करते हुये, एक बार गर्दभ पुराण का आद्योपांत अध्‍ययन करें। आप स्‍वयं समझ जायेंगे कि संसार में जहां भी और जो भी महान हो रहा है गधे ही कर रहे हैं। यदि कहीं महान घटित नहीं हो सकता तो इसका कारण यह है कि वहां कोई सचमुच का गधा नहीं पहुंच पाया।

सादर संज्ञान हेतु

प्रवक्‍ता

विश्‍व गर्दभ मंडल ( विगम )

------------

 

शशिकांत सिंह ’शशि’

जवाहर नवोदय विद्यालय

शंकरनगर नांदेड़ महाराष्‍ट्र

7387311701

विषय:

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

रचनाकार में ढूंढें...

आपकी रूचि की और रचनाएँ -

randompost

कहानियाँ

[कहानी][column1]

हास्य-व्यंग्य

[व्यंग्य][column1]

लघुकथाएँ

[लघुकथा][column1]

कविताएँ

[कविता][column1]

बाल कथाएँ

[बाल कथा][column1]

उपन्यास

[उपन्यास][column1]

तकनीकी

[तकनीकी][column1][http://raviratlami.blogspot.com]

वर्ग पहेलियाँ

[आसान][column1][http://vargapaheli.blogspot.com]
[blogger][facebook]

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget