सोमवार, 6 मार्च 2017

प्राची - जनवरी 2017 : अखबार वाला / प्रभात दुबे

प्रभात दुबे

अखबार वाला

प्रातः किसी छोटे से रेलवे स्टेशन पर ट्रेन आकर रुकी ही थी कि तभी एक बारह तेरह वर्षीय, सुन्दर, मासूम चेहरा लिये हुए एक अत्यन्त निर्धन किशोर कुछ अखबारों को हाथों में लेकर अखबार-अखबार कहता हुआ मेरे पास आकर बोला- ‘सर जी अखबार चाहिये क्या?’

मुझे उसकी आवाज में एक अजीब सी अनकही खुशी का अहसास हुआ. मैंने उसकी ओर पांच का सिक्का बढाते हुए कहा -‘एक राष्ट्रवाद दे दो.’

उसने अखबारों के ऊपर रखी राष्ट्रवाद की प्रथम एकलौती प्रति को अखबारों के सबसे नीचे रखते हुए चेहरे पर मुस्कान लिये अनुरोध किया- ‘सर जी,़ मेरे पास सात राष्ट्रीय अखबार हैं. इनमें से आप राष्ट्रवाद छोड़ कोई भी अन्य अखबार ले लीजिये, लेकिन राष्ट्रवाद न मांगिये, क्योंकि राष्ट्रवाद की एक ही प्रति बची है, जिसे मैं बेचना नहीं चाहता हूं.’

‘क्यों?’ मैंने अचरज से पूछा.

‘क्योंकि उसमें आज मेरी फोटो छपी है.’ उसने उत्साहित होकर कहा.

‘फोटो! क्यों क्या कोई विशेष काम किया है तुमने?’ मैंने जिज्ञासावश पूछा.

विनम्रता से सकुचाते हुए उसने कहा- ‘जी हां, लेकिन केवल राष्ट्रवाद अखबार में फोटो के साथ समाचार है जबकि दूसरे अखबारो में समाचार तो है लेकिन मेरी फोटो प्रकाशित नहीं हुई है.’

अब मेरी जिज्ञासा अपनी चरम सीमा पर थी. मैं अखबार में इस किशोर की तत्काल फोटो देखना और

संबंधित समाचार पढ़ना चाहता था. लेकिन अचानक ट्रेन सरकने लगी और वह भी बिना देर किये हुए जल्दी से प्लेटफार्म पर उतर गया. रास्ते भर उस अखबार वाले लड़के का चेहरा मेरी आंखों के सामने घूमता रहा और मैं यही सोचता रहा कि इस बालक ने ऐसा कौन सा काम किया होगा कि उसकी फोटो राष्ट्रवाद जैसे लोकप्रिय राष्ट्रीय अखबार में प्रकाशित हुई है.

लगभग दो घण्टे बाद जब मैं अपने गृह नगर के प्लेटफार्म पर उतरा, तब मैंने तत्परता से सर्वप्रथम बुक स्टाल से राष्ट्रवाद अखबार खरीद कर जैसे ही उसका प्रथम पृष्ठ देखा तो मैं अचभित हो उठा; क्योंकि प्रथम पृष्ठ पर विस्तृत समाचार के रूप में अखबार बेचते हुए इसी बच्चे का छायाचित्र प्रकाशित हुआ था. चित्र के नीचे बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा हुआ था- ‘प्रदेश की आठवीं बोर्ड परीक्षा में अव्वल आया अखबार बेचने वाला.’

सम्पर्कः 111 शक्तिनगर,

जबलपुर (म.प्र.)

मो. 9424310984

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